09 Sep सीएसआर में नया अध्याय: कोयला क्षेत्र ने थैलेसीमिया और हृदय रोगों के लिए उठाया बड़ा कदम
✎ कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कंपनियों के लिए अपने व्यावसायिक कार्यों में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को एकीकृत करने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक वैधानिक और नैतिक दायित्व है, जैसा कि भारत में कंपनी…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण
- Prelims: कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), कंपनी अधिनियम, 2013, थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY), नन्हा सा दिल पहल, बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT), जन्मजात हृदय दोष (CHD), कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA)
- Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास में कॉरपोरेट की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कंपनियों के लिए अपने व्यावसायिक कार्यों में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को एकीकृत करने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक वैधानिक और नैतिक दायित्व है, जैसा कि भारत में कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा अनिवार्य किया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री ने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) रूपरेखा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर, कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के साथ मिलकर अपनी प्रमुख CSR पहलों—थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY) और नन्हा सा दिल—के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियों का भी उत्सव मनाया। इन पहलों ने दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों और जन्मजात हृदय दोषों से पीड़ित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पृष्ठभूमि
- कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत भारत में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को वैधानिक बना दिया गया है, जिसके अनुसार कुछ निश्चित मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों को अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है।
- कोयला खनन क्षेत्र में CSR गतिविधियों का विशेष महत्व है क्योंकि खनन से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता को सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकार बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियाँ पेश करते हैं, जिनके उपचार के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) जैसे महंगे और जटिल प्रक्रियाएँ आवश्यक होती हैं।
- जन्मजात हृदय दोष (CHD) भारत में नवजात शिशुओं में एक आम समस्या है, जिसमें से अधिकांश बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है, जिससे उनके जीवन पर गंभीर खतरा मंडराता है।
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) भारत का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है और यह देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक बड़े कॉरपोरेट के रूप में, CIL की CSR प्रतिबद्धताएँ व्यापक हैं।
- भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है जो कॉरपोरेट शासन, CSR और संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है।
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) क्या है?
- कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) एक प्रबंधन अवधारणा है जिसके तहत कंपनियाँ अपने व्यावसायिक कार्यों में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को एकीकृत करती हैं तथा अपने हितधारकों और व्यापक समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं।
- भारत में, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 और अनुसूची VII के तहत CSR को वैधानिक बनाया गया है, जिससे कुछ निश्चित शुद्ध मूल्य, टर्नओवर या शुद्ध लाभ वाली कंपनियों के लिए CSR गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य हो गया है।
- CSR गतिविधियों में गरीबी उन्मूलन, शिक्षा को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण स्थिरता, लैंगिक समानता और ग्रामीण विकास परियोजनाएँ शामिल हो सकती हैं।
- कोयला क्षेत्र के लिए शुरू की गई नई CSR रूपरेखा कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पहली क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा है, जिसका उद्देश्य कोयला खनन क्षेत्रों में प्रभावशाली और परिणामोन्मुखी CSR गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
- थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY) कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की एक प्रमुख CSR पहल है जो थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित बच्चों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- नन्हा सा दिल पहल CIL की एक और महत्वपूर्ण CSR योजना है जो जन्मजात हृदय दोष (CHD) से प्रभावित बच्चों के लिए निःशुल्क नैदानिक जाँच और सुधारात्मक सर्जरी प्रदान करती है।
- इन योजनाओं का कार्यान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मार्गदर्शन में और विभिन्न कार्यान्वयन भागीदारों के समन्वय से किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार होता है।
- CSR पहलें न केवल कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा करती हैं, बल्कि समुदायों के साथ उनके संबंधों को भी मजबूत करती हैं और एक स्थायी व्यावसायिक वातावरण बनाने में मदद करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| क्षेत्रव्यापी CSR रूपरेखा का शुभारंभ | कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पहली क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा; कोयला खनन क्षेत्रों में प्रभावी और परिणामोन्मुखी CSR गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक ढाँचा। |
| थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY) | दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों (थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया) से पीड़ित बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) हेतु ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता; 21 सूचीबद्ध अस्पतालों का नेटवर्क। |
| नन्हा सा दिल पहल | जन्मजात हृदय दोष (CHD) से प्रभावित बच्चों के लिए निःशुल्क सुधारात्मक हृदय सर्जरी; आधुनिक नैदानिक उपकरणों का उपयोग कर 2 लाख से अधिक बच्चों की जाँच और 1,500 से अधिक सर्जरी। |
| CIL की भूमिका | भारत का एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) जिसने थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए इस स्तर की स्वास्थ्य सेवा पहल शुरू की है। |
| परिणामोन्मुखी CSR | यह रूपरेखा कंपनियों को सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों को अधिक प्रभावी और लक्षित तरीके से संचालित करने में मदद करेगी, जिससे वास्तविक सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय दोष जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित बच्चों को जीवनरक्षक उपचार प्रदान करना, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में सुधार, विशेषकर ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों में, जहाँ ऐसी विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं की कमी होती है।
- दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए वित्तीय बोझ को कम करना, जिससे गरीब और वंचित परिवारों को राहत मिलती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) के तहत CSR प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करना।
- क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा का विकास, जो विभिन्न उद्योगों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को संबोधित करने में मदद करता है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन में एक मानक स्थापित करना और अन्य कंपनियों को प्रेरित करना।
आर्थिक महत्व
- स्वस्थ कार्यबल और आबादी का निर्माण, जो दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित करना।
- खनन क्षेत्रों के आसपास के समुदायों में सामाजिक स्थिरता और सद्भाव को बढ़ावा देना, जिससे औद्योगिक संचालन सुचारु रूप से चलता है।
चुनौतियाँ
1. दुर्लभ बीमारियों का उपचार
- थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी।
- बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) जैसी प्रक्रियाओं की उच्च लागत और जटिलता, जो सामान्य परिवारों की पहुँच से बाहर होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य
2. जन्मजात हृदय दोष (CHD)
- भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में CHD से प्रभावित नवजात बच्चे, लेकिन समय पर उपचार तक सीमित पहुँच।
- CHD के निदान और सुधारात्मक सर्जरी के लिए आवश्यक अत्याधुनिक चिकित्सा बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य
3. CSR कार्यान्वयन की चुनौतियाँ
- CSR निधियों का प्रभावी और लक्षित उपयोग सुनिश्चित करना, ताकि वास्तविक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न हो सके।
- CSR परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन, ताकि उनकी जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे।
यूपीएससी लिंक: शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
4. पहुँच और जागरूकता
- दूरदराज के और खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक इन स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी और पहुँच सुनिश्चित करना।
- रोगों के बारे में जागरूकता की कमी, जिससे समय पर निदान और उपचार में देरी होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेषज्ञता | थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया के उपचार हेतु प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों और विशिष्ट केंद्रों की अपर्याप्त संख्या। |
| जन्मजात हृदय दोष का व्यापक प्रसार | प्रतिवर्ष लाखों बच्चों का प्रभावित होना और उनमें से अधिकांश को समय पर उपचार न मिल पाना। |
| CSR निधियों का अधिकतम उपयोग | यह सुनिश्चित करना कि आवंटित CSR निधि का उपयोग अधिकतम सामाजिक लाभ के लिए हो, न कि केवल वैधानिक अनुपालन के लिए। |
| भौगोलिक पहुँच | योजनाओं का लाभ दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक पहुँचाना, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। |
| दीर्घकालिक स्थिरता | इन स्वास्थ्य पहलों की दीर्घकालिक वित्तीय और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (Thalassemia Bal Sewa Yojana)
- नन्हा सा दिल पहल (Nanha Sa Dil Initiative)
आगे की राह
- स्वास्थ्य सेवा वितरण नेटवर्क का विस्तार करें, विशेषकर खनन प्रभावित और ग्रामीण क्षेत्रों में, ताकि दुर्लभ बीमारियों और जन्मजात हृदय दोषों के लिए विशेषज्ञ उपचार तक पहुँच बढ़ाई जा सके।
- CSR निधियों के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र विकसित करें, ताकि परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव को मापा जा सके और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
- थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय दोष जैसे रोगों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि शीघ्र निदान और समय पर उपचार को बढ़ावा मिल सके।
- केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहभागिता को मजबूत करें ताकि स्वास्थ्य सेवा पहलों को व्यापक और टिकाऊ बनाया जा सके।
- चिकित्सा पेशेवरों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निवेश करें, विशेषकर दुर्लभ बीमारियों और बाल चिकित्सा हृदय विज्ञान के क्षेत्र में, ताकि विशेषज्ञता की कमी को दूर किया जा सके।
- CSR रूपरेखा को नियमित रूप से समीक्षा और अद्यतन करें, ताकि यह उभरती सामाजिक आवश्यकताओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनी रहे।
- लाभार्थी बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं में सहयोग प्रदान करें, ताकि उन्हें उपचार के बाद सामान्य और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) · कंपनी अधिनियम, 2013 · थैलेसीमिया बाल सेवा योजना · नन्हा सा दिल पहल · जन्मजात हृदय दोष (CHD) · बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) · स्वास्थ्य सेवा पहल · सामाजिक कल्याण · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
गंभीर बीमारियाँ (थैलेसीमिया, CHD) → उपचार की उच्च लागत और सीमित पहुँच → कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का महत्व → CSR रूपरेखा और योजनाओं का शुभारंभ → बच्चों को जीवनरक्षक उपचार की उपलब्धता → सामाजिक-आर्थिक कल्याण में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY) का उद्देश्य थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित बच्चों को उपचार सहायता प्रदान करना है।
2. यह योजना केवल केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) द्वारा कार्यान्वित की जाती है और इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं है।
3. नन्हा सा दिल पहल जन्मजात हृदय दोष (CHD) से पीड़ित बच्चों के लिए निःशुल्क सुधारात्मक सर्जरी प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि थैलेसीमिया बाल सेवा योजना का प्राथमिक उद्देश्य थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित बच्चों को उपचार संबंधी सहायता प्रदान करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से कार्यान्वित की जाती है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की सहभागिता पर बल दिया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि नन्हा सा दिल पहल जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चों के लिए निःशुल्क सुधारात्मक सर्जरी प्रदान करती है, जिसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।
Q2. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कंपनी अधिनियम, 2013 भारत में CSR को अनिवार्य बनाने वाला पहला कानून है।
2. भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक CSR रूपरेखा भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा तैयार की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है क्योंकि कंपनी अधिनियम, 2013 भारत में CSR को वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाने वाला पहला कानून है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक CSR रूपरेखा भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा तैयार की गई है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) क्या है? भारत में CSR के विनियामक ढांचे पर चर्चा करते हुए, कोयला क्षेत्र की हालिया CSR पहलों का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को परिभाषित करें, जिसमें कंपनियों की सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को शामिल किया जाए।
2. **भारत में CSR का विनियामक ढांचा:**
* कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 का उल्लेख करें, जो कुछ कंपनियों के लिए CSR खर्च को अनिवार्य बनाती है (पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत)।
* CSR गतिविधियों के लिए अनुसूची VII में सूचीबद्ध क्षेत्रों का उल्लेख करें (जैसे गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण)।
* भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) की भूमिका का संक्षिप्त उल्लेख करें।
3. **कोयला क्षेत्र की हालिया CSR पहलें:**
* **थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY):** उद्देश्य (थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया का उपचार), कवरेज (21 अस्पताल, 10 लाख रुपये प्रति BMT), उपलब्धियां (1,050 से अधिक BMT), कार्यान्वयन भागीदार (थैलेसीमिक्स इंडिया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)।
* **नन्हा सा दिल पहल:** उद्देश्य (जन्मजात हृदय दोष का उपचार), कवरेज (झारखंड से शुरू होकर अन्य सहायक कंपनियों तक विस्तार), उपलब्धियां (2 लाख से अधिक बच्चों की जांच, 1,500 से अधिक सर्जरी), लागत-मुक्त उपचार।
* **भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक CSR रूपरेखा:** यह पहली क्षेत्र-विशिष्ट रूपरेखा है, जो IICA द्वारा तैयार की गई है, और परिणामोन्मुख CSR पर केंद्रित है।
4. **मूल्यांकन:**
* **सकारात्मक पक्ष:** दुर्लभ बीमारियों और जन्मजात विकारों के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान, वंचित बच्चों को जीवनदान, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार, सामाजिक कल्याण में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की भूमिका का प्रदर्शन, परिणामोन्मुख दृष्टिकोण।
* **चुनौतियाँ/सुधार के क्षेत्र (संक्षिप्त):** जागरूकता का अभाव, दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच, निरंतरता और दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करना।
5. **निष्कर्ष:** CSR पहलों के महत्व को दोहराएं और सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके योगदान पर बल दें, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों और अभिभावक संघों सहित सभी हितधारकों की सहभागिता के महत्व पर जोर दिया जाए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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