सीतापुर में ‘एक जिला-एक नदी’: मंत्री के पौधरोपण का सच, अब नहीं बचा निशान

सीतापुर में ‘एक जिला-एक नदी’: मंत्री के पौधरोपण का सच, अब नहीं बचा निशान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय  |  GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
  • Prelims: एक जिला-एक नदी योजना, नदी पुनर्जीवन, विश्व पर्यावरण दिवस, वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रदूषण, स्थानीय स्वशासन
  • Essay: सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: इरादे और यथार्थ के बीच की खाई, पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी और प्रशासनिक जवाबदेही की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: एक जिला-एक नदी योजना का उद्देश्य नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन है, लेकिन सीतापुर की सरायन नदी का मामला इसके क्रियान्वयन में गंभीर कमियों और प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के उद्देश्य से शुरू की गई ‘एक जिला-एक नदी’ योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठे हैं। सीतापुर जिले की सरायन नदी के किनारे, जहाँ विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून 2025 को मंत्रियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया था, वहाँ अब एक भी पौधा नहीं बचा है। यह ग्राउंड रिपोर्ट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर करती है, जहाँ नदी में सीवर का गंदा पानी गिर रहा है और सफाई का कोई निशान नहीं है।

पृष्ठभूमि

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए ‘एक जिला-एक नदी’ योजना शुरू की थी।
  • इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले में एक महत्वपूर्ण नदी का चयन कर उसके पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना था।
  • सीतापुर जिले में सरायन नदी को इस योजना के तहत चुना गया था, जिसका जीर्णोद्धार बीबीएयू के प्रो. वेंकटेश दत्ता के रेस्टोरेशन प्लान के तहत प्रस्तावित था।
  • 05 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर सरायन नदी के किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
  • इस अभियान में कारागार राज्य मंत्री और नगर विकास राज्य मंत्री सहित स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी।
  • अभियान का उद्देश्य नदी के सौंदर्य में वृद्धि करना, भूमि कटाव को रोकना और नदी के जल स्तर को बनाए रखने में मदद करना था, साथ ही नदी को प्लास्टिक मुक्त रखने का संकल्प भी लिया गया था।
  • हालिया ग्राउंड रिपोर्ट में पता चला है कि वृक्षारोपण स्थल पर अब एक भी पौधा मौजूद नहीं है, और नदी में सीवर का गंदा पानी गिर रहा है, जो योजना के क्रियान्वयन की विफलता को दर्शाता है।
  • पूर्व नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने नदी की बदहाली का कारण अतिक्रमण, चीनी मिलों और फैक्टरियों का रासायनिक युक्त पानी तथा शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कमी को बताया है।

एक जिला-एक नदी योजना

  • यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है।
  • योजना के तहत, प्रत्येक जिले में एक महत्वपूर्ण नदी का चयन किया जाता है, जिसके पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • इसका लक्ष्य नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना, जल प्रदूषण को कम करना और नदी के किनारों पर वृक्षारोपण के माध्यम से भूमि कटाव को रोकना है।
  • योजना में स्थानीय निकायों, वन विभाग, सामाजिक संगठनों और जनभागीदारी के माध्यम से नदी सफाई और संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • यह पहल नदियों के आसपास के क्षेत्रों में जैव विविधता को बढ़ाने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी सहायक मानी जाती है।
  • योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) से नदियों को मुक्त करना और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है।
  • हालांकि, सीतापुर की सरायन नदी के मामले में सामने आई स्थिति योजना के क्रियान्वयन में मौजूद चुनौतियों और निगरानी की कमी को उजागर करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
एक जिला-एक नदी योजना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का उद्देश्य।
सरायन नदी (सीतापुर) योजना में शामिल नदी, जिसके किनारे पौधरोपण अभियान चलाया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2025) इस दिन सरायन नदी के किनारे पौधरोपण अभियान की शुरुआत की गई थी।
प्लास्टिक प्रदूषण मुक्त थीम अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य नदी को प्लास्टिक मुक्त बनाना।
पारिस्थितिक तंत्र का पुनर्जीवन नदी के सौंदर्य में वृद्धि और भूमि कटाव को रोकने का लक्ष्य।

महत्व

पर्यावरणिक महत्व

  • नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नदी किनारे पौधरोपण भूमि कटाव को रोकने, जल स्तर बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में सहायक है।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छ नदियाँ पेयजल, सिंचाई और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण संसाधन हैं।
  • नदी प्रदूषण से जन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसे रोकने के लिए ऐसे अभियान आवश्यक हैं।

प्रशासनिक महत्व

  • सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुशासन और सार्वजनिक विश्वास के लिए आवश्यक है।
  • स्थानीय निकायों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से जनभागीदारी सुनिश्चित होती है, जो किसी भी अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. योजनाओं का अप्रभावी क्रियान्वयन

  • योजनाओं की घोषणा और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन में बड़ा अंतर।
  • पौधरोपण के बाद पौधों की देखभाल और निगरानी का अभाव।

2. प्रशासनिक उपेक्षा और जवाबदेही की कमी

  • अधिकारियों और संबंधित विभागों द्वारा नदियों के संरक्षण के प्रति उदासीनता।
  • योजनाओं की विफलता के लिए किसी की जवाबदेही तय न होना।

3. प्रदूषण और अतिक्रमण

  • सीवर का गंदा पानी, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले में शौच जैसी समस्याएँ।
  • नदी किनारों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे, जो संरक्षण प्रयासों को बाधित करते हैं।

4. बुनियादी ढाँचे का अभाव

  • शहरी क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कमी, जिससे अनुपचारित सीवेज नदियों में गिरता है।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की अपर्याप्त व्यवस्था।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पौधरोपण के बाद पौधों का गायब होना सरकारी अभियानों की गंभीरता और उनके परिणामों पर सवाल।
सीवर का गंदा पानी नदी में गिरना नदी प्रदूषण और जल गुणवत्ता पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव।
नदी किनारे खुले में शौच स्वच्छता अभियान की विफलता और जन स्वास्थ्य के लिए खतरा।
नदी पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करना।
चीनी मिलों और फैक्टरियों का केमिकल युक्त पानी औद्योगिक प्रदूषण से नदी के जल और जलीय जीवन को गंभीर क्षति।
शहरी क्षेत्रों में STP का अभाव अनुपचारित सीवेज के कारण नदियों का लगातार प्रदूषित होना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • एक जिला-एक नदी योजना

आगे की राह

  • पौधरोपण के बाद पौधों की नियमित निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की जाए, जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी हो।
  • नदियों में गिरने वाले सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट को रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) स्थापित किए जाएँ।
  • नदी किनारों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों को सख्ती से हटाया जाए और भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँ।
  • जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि लोग नदियों के महत्व को समझें और उन्हें स्वच्छ रखने में सहयोग करें।
  • योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि विफलताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
  • नदी पुनर्जीवन योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन और उसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
  • स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों को नदी संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नदी संरक्षण · पर्यावरण पुनर्जीवन · एक जिला-एक नदी योजना · स्थानीय शासन की भूमिका · सतत विकास · अपशिष्ट प्रबंधन · सामुदायिक भागीदारी · पर्यावरण प्रभाव आकलन · जल प्रदूषण · पारिस्थितिकी तंत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा ‘एक जिला-एक नदी’ योजना की घोषणा  →  विश्व पर्यावरण दिवस पर सरायन नदी किनारे पौधरोपण अभियान  →  अभियान के बाद पौधों की उपेक्षा और निगरानी का अभाव  →  नदी में सीवर का पानी और प्रदूषण जारी  →  योजना के उद्देश्यों की पूर्ति में विफलता  →  नदी के पारिस्थितिक तंत्र और जन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘एक जिला-एक नदी’ योजना का उद्देश्य नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है।
2. विश्व पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है।
3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का संबंध नदी संरक्षण से है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। ‘एक जिला-एक नदी’ योजना का उद्देश्य नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन है, जैसा कि समाचार में उल्लेख किया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने से है, न कि नदी संरक्षण से।

Q2. भारत में नदियों के प्रदूषण और अतिक्रमण के प्रमुख कारणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं?
1. शहरी सीवेज का अनुपचारित निर्वहन
2. औद्योगिक अपशिष्टों का सीधा बहाव
3. नदी किनारे अतिक्रमण और अवैध निर्माण
4. कृषि अपवाह में कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प नदियों के प्रदूषण और अतिक्रमण के प्रमुख कारण हैं। शहरी सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, अतिक्रमण और कृषि अपवाह सभी नदियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में नदी संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यक्रमों की सफलता में स्थानीय शासन, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी निगरानी की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। ‘एक जिला-एक नदी’ जैसी योजनाओं के संदर्भ में, इन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत में नदी संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता में स्थानीय शासन, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी निगरानी के महत्व पर प्रकाश डालना है। इसमें इनकी सकारात्मक भूमिका और अनुपस्थिति में आने वाली चुनौतियों को बताना होगा। दूसरे भाग में ‘एक जिला-एक नदी’ जैसी योजनाओं के संदर्भ में, इन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस उपाय सुझाने होंगे, जैसे कि जवाबदेही तय करना, नियमित ऑडिट, तकनीकी सहायता, जन जागरूकता और कठोर प्रवर्तन।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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