10 Sep आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने डेटा सेंटर भूमि आवंटन और पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर लिया संज्ञान
✎ उच्च न्यायालय द्वारा डेटा सेंटर के लिए मंदिर की भूमि के आवंटन और पर्यावरणीय चिंताओं पर संज्ञान लेना, पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर पर्यावरण संवेदनशील…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और आपदा प्रबंधन
- Prelims: पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ), राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), जनहित याचिका (PIL), न्यायिक समीक्षा, भूमि आवंटन, डेटा स्थानीयकरण
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास, न्यायपालिका की भूमिका: संतुलनकारी शक्ति
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्च न्यायालय द्वारा डेटा सेंटर के लिए मंदिर की भूमि के आवंटन और पर्यावरणीय चिंताओं पर संज्ञान लेना, पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने विशाखापत्तनम और अनाकापल्ली जिलों में एक इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) में स्थित मंदिर की भूमि को एक हाइपरस्केल डेटा सेंटर के लिए आवंटित करने के मामले में भूमि आवंटन और पर्यावरणीय चिंताओं पर संज्ञान लिया है। यह मामला डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता तथा भूमि आवंटन की वैधता से संबंधित है।
पृष्ठभूमि
- सिम्हाचलम देवस्थानम की भूमि को गूगल के हाइपरस्केल डेटा सेंटर के लिए आवंटित किया गया है, जो एक इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) में स्थित है।
- मामले में डेटा सेंटर के लिए आवश्यक भारी मात्रा में पानी और बिजली की खपत से संबंधित पर्यावरणीय चिंताएँ भी उठाई गई हैं।
- याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि परियोजना कंबलाकोंडा आरक्षित वन के ESZ से एक किलोमीटर के भीतर स्थित है, जिसके लिए केंद्रीय मानदंडों के अनुसार ‘श्रेणी-ए’ परियोजना के रूप में सख्त अनुपालन की आवश्यकता है, जबकि इसे ‘श्रेणी-बी’ के रूप में पारित किया गया था।
- महाधिवक्ता ने जनहित याचिका (PIL) की विचारणीयता पर सवाल उठाया, यह तर्क देते हुए कि इसमें दो अलग-अलग कारण शामिल हैं (भूमि आवंटन और पर्यावरणीय मंज़ूरी) और यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- मुख्य न्यायाधीश ने भूमि के पट्टे की अवधि (11 वर्ष बनाम 30 वर्ष) पर विरोधाभासी दावों की गहन जांच का आह्वान किया है।
पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) और न्यायिक समीक्षा
- पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zones – ESZ) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किए जाते हैं, जो राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के 10 किलोमीटर के भीतर के क्षेत्र होते हैं।
- इन क्षेत्रों का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास कुछ गतिविधियों को विनियमित करके ‘शॉक एब्जॉर्बर’ के रूप में कार्य करना और संरक्षित क्षेत्रों को औद्योगिक प्रदूषण तथा अत्यधिक विकास के नकारात्मक प्रभावों से बचाना है।
- ESZ में कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधित या विनियमित किया जाता है, जैसे खनन, प्रदूषणकारी उद्योग, बड़े जलविद्युत परियोजनाएँ, और वाणिज्यिक लकड़ी का उपयोग।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) भारतीय संविधान की एक मूलभूत विशेषता है, जिसके तहत न्यायपालिका विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों और कार्यपालिका द्वारा किए गए आदेशों की संवैधानिकता की जांच करती है।
- यदि कोई कानून या कार्यकारी आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक या शून्य घोषित कर सकती है।
- जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) न्यायिक समीक्षा का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो किसी भी व्यक्ति या संगठन को सार्वजनिक हित के मामलों में सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की अनुमति देता है।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए स्थापित एक विशेष निकाय है।
- NGT पर्यावरण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और व्यक्तियों तथा संपत्ति को हुए नुकसान के लिए राहत एवं मुआवज़ा देने का कार्य करता है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (Eco Sensitive Zone) · सिम्हाचलम देवस्थानम भूमि · डेटा सेंटर परियोजनाएँ · पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) · राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) · न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) · भूमि आवंटन नियम · डेटा स्थानीयकरण (Data Localisation) · सार्वजनिक हित याचिका (Public Interest Litigation) · श्रेणी ‘ए’ और ‘बी’ परियोजनाएँ · राज्य भूमि कानून · सतत विकास (Sustainable Development)
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास 10 किलोमीटर के भीतर अधिसूचित किए जाते हैं।
2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सिविल मामलों की सुनवाई करता है।
3. भारत में डेटा स्थानीयकरण का अर्थ है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा केवल भारत में ही संग्रहीत किया जाना चाहिए।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि ESZ की चौड़ाई 10 किमी तक हो सकती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है और विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकती है। कथन 2 सही है क्योंकि NGT पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सिविल मामलों की सुनवाई के लिए स्थापित एक विशेष निकाय है। कथन 3 सही है क्योंकि डेटा स्थानीयकरण का मुख्य उद्देश्य भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर संग्रहीत करना है।
Q2. कथन (A): आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सिम्हाचलम देवस्थानम भूमि के आवंटन और पर्यावरणीय चिंताओं से संबंधित एक मामले का संज्ञान लिया है।
कारण (R): यह मामला पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में एक डेटा सेंटर परियोजना के लिए भूमि आवंटन से संबंधित है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि उच्च न्यायालय ने वास्तव में इस मामले का संज्ञान लिया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि डेटा सेंटर परियोजना पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और इसके लिए पानी और बिजली की भारी खपत की चिंताएं उठाई गई हैं, जो उच्च न्यायालय के संज्ञान लेने का मुख्य कारण है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) में विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, भारत में डेटा केंद्रों के लिए भूमि आवंटन और नियामक अनुपालन से संबंधित चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) की अवधारणा और उनके महत्व को संक्षेप में परिभाषित करें।
2. **ESZ में विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव:**
* जैव विविधता पर प्रभाव (वनस्पति और जीव)
* पारिस्थितिक संतुलन का विघटन
* जल संसाधनों पर दबाव (जैसे डेटा केंद्रों में)
* प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि)
* जलवायु परिवर्तन में योगदान (ऊर्जा खपत)
3. **ESZ में विकास परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव:**
* स्थानीय समुदायों का विस्थापन या आजीविका पर प्रभाव
* सांस्कृतिक विरासत पर प्रभाव (जैसे मंदिर भूमि का आवंटन)
* मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि
* सामाजिक असमानताएँ
4. **डेटा केंद्रों के लिए भूमि आवंटन और नियामक अनुपालन से संबंधित चुनौतियाँ:**
* **भूमि आवंटन:**
* धार्मिक/देवस्थानम भूमि का व्यावसायिक उपयोग
* पट्टे की अवधि और नियमों का उल्लंघन (जैसे 11 वर्ष बनाम 30 वर्ष)
* पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी
* राज्य कानूनों का अनुपालन (अचल संपत्तियों से संबंधित)
* **नियामक अनुपालन:**
* पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की उचित प्रक्रिया का अभाव (श्रेणी ‘ए’ बनाम ‘बी’)
* पर्यावरण मंजूरी में विसंगतियाँ
* जल और बिजली की भारी खपत के लिए पर्याप्त मूल्यांकन का अभाव
* राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दे
* डेटा स्थानीयकरण जैसे व्यापक नीतिगत मुद्दों से जुड़ाव
5. **निष्कर्ष:** ESZ में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें मजबूत नियामक ढांचा, प्रभावी न्यायिक समीक्षा और सतत विकास सिद्धांतों का पालन शामिल हो।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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