16 Sep कर्नाटक सरकार ने पूर्ण रूप से लागू करेगी अनुच्छेद 371(जे), जानिए क्या है इसका महत्व

✎ अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसमें शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण तथा क्षेत्रीय विकास बोर्ड की स्थापना शामिल है, ताकि क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों के बीच संबंध
- Prelims: अनुच्छेद 371(J), कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र, हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र, विशेष प्रावधान, संवैधानिक संशोधन, क्षेत्रीय विकास बोर्ड, शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण, कल्याणा कर्नाटक आर्थिक मिशन
- Essay: भारत में क्षेत्रीय असमानताएँ और समावेशी विकास की चुनौतियाँ, संघवाद और राज्यों के भीतर विशेष प्रावधानों का महत्त्व
त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसमें शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण तथा क्षेत्रीय विकास बोर्ड की स्थापना शामिल है, ताकि क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक सरकार ने कल्याणा कर्नाटक (Kalyana Karnataka) क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए अनुच्छेद 371(J) के संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार इस क्षेत्र के साथ किसी भी तरह के अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी और अनुच्छेद 371(J) के कार्यान्वयन में किसी भी कमी को दूर किया जाएगा। इस क्षेत्र के लोगों को संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करने के लिए सरकार कटिबद्ध है।
पृष्ठभूमि
- यह अनुच्छेद कर्नाटक राज्य के हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र (जिसे अब कल्याणा कर्नाटक के नाम से जाना जाता है) के लिए विशेष प्रावधान करता है।
- इस क्षेत्र में गुलबर्गा (अब कलबुर्गी), बीदर, रायचूर, कोप्पल, यादगीर और बेल्लारी ज़िले शामिल हैं।
- इन प्रावधानों का उद्देश्य इस क्षेत्र की विकास संबंधी असमानताओं को दूर करना और यहाँ के लोगों को शिक्षा तथा रोज़गार के अवसर प्रदान करना है।
- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करना था, जो दशकों से उपेक्षित रहा था।
- यह प्रावधान राष्ट्रपति को राज्यपाल के माध्यम से इस क्षेत्र के लिए विशेष उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 371(J) क्या है?
- अनुच्छेद 371(J) भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान है जो कर्नाटक राज्य के कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र (पूर्व में हैदराबाद-कर्नाटक) के लिए विशिष्ट विकास और अवसर सुनिश्चित करता है।
- यह प्रावधान राज्यपाल को कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक पृथक विकास बोर्ड स्थापित करने का अधिकार देता है, जो इस क्षेत्र के विकास के लिए धन के आवंटन और खर्च की निगरानी करता है
- यह क्षेत्र के निवासियों के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
- यह राज्य सरकार की सेवाओं में इस क्षेत्र के निवासियों के लिए रोज़गार के आरक्षण का भी प्रावधान करता है।
- इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में शिक्षा और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है।
- यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि इस क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया जाए और उसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
- कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (Kalyana Karnataka Regional Development Board) इस अनुच्छेद के तहत स्थापित एक प्रमुख संस्था है, जिसने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।
- हाल ही में, इस क्षेत्र में आर्थिक संवृद्धि को गति देने के लिए कल्याणा कर्नाटक आर्थिक मिशन (Kalyana Karnataka Economic Mission) जैसी पहलें शुरू की गई हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कल्याण कर्नाटक क्षेत्र की पहचान | यह क्षेत्र कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी हिस्सों को संदर्भित करता है, जिसमें कलबुर्गी, बीदर, रायचूर, कोप्पल, यादगीर और विजयनगर जिले शामिल हैं। यह ऐतिहासिक रूप से हैदराबाद-कर्नाटक के नाम से जाना जाता था। |
| शैक्षिक और रोजगार आरक्षण | अनुच्छेद 371(J) इस क्षेत्र के निवासियों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान करता है, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में मदद मिलती है। |
| स्थानीय निकायों के लिए विशेष प्रावधान | यह स्थानीय निकायों में सीटों के आरक्षण और क्षेत्र के विकास के लिए विशेष निधियों के आवंटन का भी प्रावधान करता है। |
| कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) | इस बोर्ड की स्थापना क्षेत्र के विकास की निगरानी और परियोजनाओं को लागू करने के लिए की गई है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढांचा शामिल है। |
| आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा | कल्याण कर्नाटक आर्थिक मिशन और LEAP कार्यक्रम जैसे पहल क्षेत्र में आर्थिक विकास और निवेश को गति देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। |
महत्व
क्षेत्रीय विकास और समानता
- यह अनुच्छेद कर्नाटक के एक पिछड़े क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक उपकरण है।
- यह क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद करता है।
- यह क्षेत्र के लोगों को सशक्त बनाता है और उन्हें मुख्यधारा के विकास में शामिल करता है।
सामाजिक न्याय
- यह क्षेत्र के युवाओं के लिए शैक्षिक और रोजगार के अवसर प्रदान करके सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
- यह हाशिए पर पड़े समुदायों और व्यक्तियों को विकास प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देता है।
संघवाद और विकेंद्रीकरण
- यह भारतीय संघवाद (Federalism) की भावना को दर्शाता है, जहां राज्यों के भीतर विशिष्ट क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाते हैं।
- यह क्षेत्रीय विकास बोर्डों के माध्यम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकेंद्रीकरण (Decentralization) को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में कमियाँ
- अनुच्छेद 371(J) के तहत प्रदान किए गए लाभों को पूरी तरह से लोगों तक पहुँचाने में चुनौतियाँ।
- योजनाओं और परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में प्रशासनिक और नौकरशाही बाधाएँ।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक न्याय
2. निगरानी और जवाबदेही
- विकास परियोजनाओं की प्रगति की प्रभावी निगरानी की कमी।
- निधियों के उपयोग और परिणामों के संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता
3. जागरूकता की कमी
- क्षेत्र के निवासियों, विशेषकर युवाओं के बीच संवैधानिक प्रावधानों और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता की कमी।
- लाभार्थियों तक जानकारी पहुँचाने में संचार अंतराल।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण
4. आर्थिक विकास में असमानताएँ
- क्षेत्र के भीतर भी विभिन्न जिलों और उप-क्षेत्रों में विकास के स्तर में असमानताएँ।
- औद्योगिक और बुनियादी ढाँचे के विकास को गति देने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, क्षेत्रीय असमानताएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूर्ण कार्यान्वयन का अभाव | संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद, क्षेत्र के लोगों को अभी भी सभी लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। |
| निधियों का प्रभावी उपयोग | आवंटित निधियों का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए कुशल उपयोग और प्रबंधन की आवश्यकता। |
| नौकरशाही बाधाएँ | परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और अक्षमता, जिससे विकास प्रक्रिया धीमी हो जाती है। |
| जागरूकता का प्रसार | क्षेत्र के निवासियों को उनके अधिकारों और उपलब्ध अवसरों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता। |
| आर्थिक मिशन की गति | कल्याण कर्नाटक आर्थिक मिशन जैसी पहलों को तेजी से लागू करने और उनके परिणामों को सुनिश्चित करने की चुनौती। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कल्याण कर्नाटक आर्थिक मिशन (Kalyana Karnataka Economic Mission)
- LEAP कार्यक्रम (LEAP Programme)
आगे की राह
- अनुच्छेद 371(J) के प्रावधानों का 100% कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और समय-सीमा निर्धारित करना।
- कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) को और अधिक अधिकार और संसाधन प्रदान करना ताकि वह प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।
- क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित करना और निधियों के उपयोग की नियमित निगरानी करना।
- क्षेत्र के युवाओं और छात्रों के बीच अनुच्छेद 371(J) के तहत उपलब्ध अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
- कल्याण कर्नाटक आर्थिक मिशन और LEAP कार्यक्रम जैसी आर्थिक पहलों को तेजी से लागू करना और निजी निवेश को आकर्षित करना।
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और नौकरशाही बाधाओं को कम करना ताकि विकास परियोजनाओं का त्वरित कार्यान्वयन हो सके।
- क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए डेटा-आधारित नीतियों का विकास करना और लक्षित हस्तक्षेपों को लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अनुच्छेद 371(J) · कल्याण कर्नाटक क्षेत्र · विशेष प्रावधान · क्षेत्रीय असमानता · संवैधानिक संशोधन · शिक्षा में आरक्षण · रोजगार में आरक्षण · क्षेत्रीय विकास बोर्ड · समावेशी विकास · संघवाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 371(J): कर्नाटक के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान।
अवधारणा प्रवाह
कल्याण कर्नाटक क्षेत्र की ऐतिहासिक पिछड़ापन। → क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की आवश्यकता। → संविधान में अनुच्छेद 371(J) का समावेश। → शिक्षा, रोजगार और विकास परियोजनाओं में विशेष प्रावधान। → कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) का गठन। → क्षेत्र के समग्र विकास और सामाजिक न्याय का लक्ष्य।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक राज्य के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करता है।
2. यह अनुच्छेद शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का प्रावधान करता है।
3. अनुच्छेद 371(J) को 98वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2012 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 371(J) कर्नाटक के छह पिछड़े जिलों – बीदर, गुलबर्गा (कलबुर्गी), यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिन्हें सामूहिक रूप से कल्याण कर्नाटक क्षेत्र कहा जाता है। कथन 2 सही है। यह अनुच्छेद इस क्षेत्र के लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण सुनिश्चित करता है, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जा सके। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 371(J) को 98वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2012 के माध्यम से संविधान में शामिल किया गया था।
Q2. अनुच्छेद 371(J) के तहत ‘कल्याण कर्नाटक’ क्षेत्र में निम्नलिखित में से कौन से जिले शामिल हैं?
1. बीदर
2. मैसूरु
3. कोप्पल
4. बेल्लारी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 3 और 4
- केवल 2, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 3 और 4 — कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में बीदर, गुलबर्गा (कलबुर्गी), यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी जिले शामिल हैं। मैसूरु इस क्षेत्र का हिस्सा नहीं है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा अनुच्छेद भारत के संविधान में ‘कुछ राज्यों के संबंध में विशेष प्रावधान’ से संबंधित नहीं है?
- अनुच्छेद 371
- अनुच्छेद 371(A)
- अनुच्छेद 371(D)
- अनुच्छेद 370
उत्तर: अनुच्छेद 370 — अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य के संबंध में विशेष प्रावधानों से संबंधित था, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है। अनुच्छेद 371 से 371(J) तक विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा और कर्नाटक के लिए विशेष प्रावधान करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371(J) के तहत कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए किए गए विशेष प्रावधानों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में यह प्रावधान कितना सफल रहा है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में अनुच्छेद 371(J) के तहत कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए किए गए संवैधानिक प्रावधानों का विस्तृत वर्णन होना चाहिए। इसमें शिक्षा और रोजगार में आरक्षण, क्षेत्रीय विकास बोर्ड की स्थापना और स्थानीय संसाधनों के उपयोग जैसे प्रावधान शामिल होने चाहिए। इसके बाद, इन प्रावधानों की सफलता का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिसमें सकारात्मक प्रभावों (जैसे रोजगार सृजन, शैक्षिक अवसरों में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास) और संभावित कमियों या कार्यान्वयन में चुनौतियों (जैसे अपर्याप्त निधि, नौकरशाही बाधाएँ, लक्षित लाभों का लोगों तक न पहुँचना) दोनों पर चर्चा की जाए। उत्तर में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में इसकी भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और भविष्य के लिए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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