08 Aug केरल को केंद्र से 2,597 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि, पूंजीगत व्यय में वृद्धि का प्रयास
✎ कर हस्तांतरण वह संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके तहत वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक निश्चित हिस्सा राज्यों को उनके पूंजीगत और विकासात्मक व्यय को बढ़ावा देने के लिए वितरित किया जाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, वित्त आयोग | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट, राजकोषीय नीति, पूंजीगत व्यय
- Prelims: कर हस्तांतरण, वित्त आयोग, अनुच्छेद 280, पूंजीगत व्यय, राजकोषीय संघवाद, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
- Essay: भारत में सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, राज्यों के वित्तीय सशक्तिकरण में वित्त आयोग की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: कर हस्तांतरण वह संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके तहत वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक निश्चित हिस्सा राज्यों को उनके पूंजीगत और विकासात्मक व्यय को बढ़ावा देने के लिए वितरित किया जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने राज्यों के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय करों और शुल्कों की शुद्ध आय से अग्रिम किस्त के रूप में ₹1,09,019 करोड़ वितरित किए हैं। इसी क्रम में, केरल को कर हस्तांतरण (Tax Devolution) की ‘अतिरिक्त किस्त’ के रूप में ₹2,597 करोड़ जारी किए गए हैं। यह राशि राज्य को नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है और इसका उद्देश्य राज्यों के वित्त को मजबूत करना तथा उनके पूंजीगत एवं विकासात्मक व्यय में तेजी लाना है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के तहत, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का वितरण एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) कहा जाता है।
- वित्त आयोग (Finance Commission) एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर अनुच्छेद 280 के तहत किया जाता है।
- वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों में से एक केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों की शुद्ध आय का राज्यों के बीच वितरण (हस्तांतरण) है।
- वर्तमान में, केंद्र द्वारा एकत्र किए गए करों का 41% राज्यों को कई किस्तों में हस्तांतरित किया जाता है, जैसा कि 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है।
- यह हस्तांतरण राज्यों को उनके विकासात्मक और पूंजीगत व्यय को पूरा करने में मदद करता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- पूंजीगत व्यय में सड़कों, पुलों, अस्पतालों, स्कूलों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च शामिल होता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करता है।
कर हस्तांतरण (Tax Devolution) क्या है?
- कर हस्तांतरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक निश्चित हिस्सा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्यों को वितरित किया जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय असंतुलन को कम करना तथा राज्यों को उनके सार्वजनिक सेवाओं और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण के सिद्धांतों पर सिफारिशें करता है।
- वित्त आयोग अपनी सिफारिशें करते समय राज्यों की जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय असमानता, राजकोषीय अनुशासन और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं जैसे विभिन्न मानदंडों पर विचार करता है।
- यह हस्तांतरण राज्यों को अपने विवेक से धन का उपयोग करने की स्वतंत्रता देता है, जिससे वे अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाएँ बना सकते हैं।
- कर हस्तांतरण के अतिरिक्त, केंद्र सरकार राज्यों को अनुदान (Grants) भी प्रदान करती है, जो विशिष्ट उद्देश्यों या योजनाओं के लिए दिए जाते हैं।
- यह प्रणाली भारत में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करती है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर देश के समग्र विकास के लिए काम करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कर हस्तांतरण की अतिरिक्त किस्त | राज्यों को पूंजीगत व्यय बढ़ाने और विकासात्मक गतिविधियों को गति देने में सहायता। |
| केरल को ₹2,597 करोड़ | राज्य के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करता है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिलता है। |
| कुल ₹1,09,019 करोड़ राज्यों को | केंद्र सरकार की राज्यों के वित्तीय सुदृढीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे समग्र राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है। |
| नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त | राज्यों को अप्रत्याशित या तत्काल वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त तरलता प्रदान करता है। |
| पूंजीगत व्यय को बढ़ावा | आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को प्रोत्साहित करता है, रोजगार सृजित करता है और दीर्घकालिक उत्पादक क्षमता का निर्माण करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है और रोजगार सृजन होता है।
- यह अतिरिक्त वित्तीय सहायता राज्यों को अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाती है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं कम होती हैं और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
- राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से वे बाजार से बेहतर शर्तों पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी निवेश क्षमता और बढ़ती है।
राजकोषीय महत्व
- यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में विश्वास और सहयोग को मजबूत करता है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के लिए महत्वपूर्ण है।
- राज्यों को समय पर और पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने से उन्हें अपनी बजटीय योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलती है, जिससे राजकोषीय अनुशासन बना रहता है।
- यह कदम केंद्र सरकार की राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखने और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी भूमिका को पहचानने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रशासनिक महत्व
- राज्यों के पास अधिक वित्तीय संसाधन होने से वे अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार नीतियों और कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से डिजाइन और कार्यान्वित कर सकते हैं।
- यह राज्यों को अपनी विकासात्मक परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करता है, जिससे परियोजनाओं की लागत कम होती है और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।
- राज्यों को सशक्त बनाने से विकेन्द्रीकरण (Decentralization) को बढ़ावा मिलता है और शासन में दक्षता व जवाबदेही बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय अनुशासन
- राज्यों द्वारा प्राप्त अतिरिक्त निधियों का प्रभावी और उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- अनुत्पादक व्यय या राजस्व व्यय में वृद्धि से बचना महत्वपूर्ण है, जिससे दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, केंद्र-राज्य संबंध
2. राजस्व सृजन में असमानता
- राज्यों के बीच स्वयं के राजस्व सृजन क्षमता में भिन्नता होती है, जिससे कुछ राज्य वित्तीय सहायता पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।
- यह असमानता राज्यों के बीच विकास के स्तर में अंतर को बढ़ा सकती है, यदि वित्तीय सहायता का वितरण न्यायसंगत न हो।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, क्षेत्रीय असमानताएं
3. निगरानी और जवाबदेही
- यह सुनिश्चित करना कि आवंटित धन का उपयोग इच्छित उद्देश्यों के लिए किया जाए, एक प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
- राज्यों द्वारा धन के उपयोग पर पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि दुरुपयोग को रोका जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. राजकोषीय संघवाद का संतुलन
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्ति के संतुलन को बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी पक्ष का अत्यधिक प्रभुत्व न हो।
- राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संरेखण सुनिश्चित करना एक नाजुक संतुलन है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यय की गुणवत्ता | यह सुनिश्चित करना कि अतिरिक्त धन का उपयोग उत्पादक पूंजीगत व्यय के लिए हो, न कि अनुत्पादक राजस्व व्यय के लिए। |
| वित्तीय निर्भरता | राज्यों की केंद्र पर वित्तीय निर्भरता में वृद्धि, जिससे उनकी राजकोषीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। |
| धन का दुरुपयोग | आवंटित धन के संभावित दुरुपयोग या अक्षम उपयोग को रोकना, जिससे सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी हो सकती है। |
| राजकोषीय घाटा | राज्यों के राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त धन के प्रभाव का प्रबंधन करना, विशेष रूप से यदि यह ऋणग्रस्तता को बढ़ाता है। |
| वितरण मानदंड | राज्यों के बीच कर हस्तांतरण के वितरण मानदंडों की निष्पक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- राज्यों द्वारा प्राप्त निधियों के उपयोग की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- राज्यों को पूंजीगत व्यय परियोजनाओं की पहचान और कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण प्रदान करना।
- राज्यों को अपने स्वयं के राजस्व आधार को मजबूत करने और वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संवाद और सहयोग को नियमित रूप से बढ़ावा देना ताकि साझा वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
- राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना ताकि पूंजीगत व्यय की दक्षता बढ़ाई जा सके।
- राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना ताकि राजकोषीय स्थिरता बनी रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजकोषीय संघवाद · कर हस्तांतरण · राज्यों का पूंजीगत व्यय · केंद्र-राज्य संबंध · वित्त आयोग · अनुच्छेद 280 · राज्यों का वित्तीय सशक्तिकरण · राजकोषीय घाटा प्रबंधन · विकास व्यय · संघीय व्यवस्था
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 270’, ‘note’: ‘केंद्र द्वारा लगाए गए करों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ और राज्य के बीच विधायी शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर हस्तांतरण की अतिरिक्त किस्त जारी की जाती है। → राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं। → राज्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विकासात्मक कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाते हैं। → आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है, रोजगार सृजन होता है और उत्पादकता बढ़ती है। → समग्र राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि और विकास को बढ़ावा मिलता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण की सिफारिश करता है।
2. केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर हस्तांतरण (Tax Devolution) केवल एक वार्षिक किस्त में किया जाता है।
3. भारत में, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को हस्तांतरित किए जाने वाले करों का प्रतिशत वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित होता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण की सिफारिश करता है। कथन 2 गलत है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर हस्तांतरण कई किस्तों में किया जाता है, जैसा कि समाचार में उल्लिखित ‘अतिरिक्त किस्त’ से स्पष्ट है। कथन 3 सही है। वित्त आयोग की सिफारिशें ही केंद्र द्वारा राज्यों को हस्तांतरित किए जाने वाले करों के प्रतिशत का आधार होती हैं।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार ने राज्यों के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ावा देने के लिए कर हस्तांतरण की अतिरिक्त किस्त जारी की है।
कारण (R): राज्यों का पूंजीगत व्यय आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि समाचार में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि केंद्र ने राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त किस्त जारी की है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि पूंजीगत व्यय से बुनियादी ढाँचे का निर्माण होता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और विकास को गति मिलती है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी है, क्योंकि पूंजीगत व्यय के महत्व के कारण ही केंद्र इसे बढ़ावा देना चाहता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) के संदर्भ में, केंद्र द्वारा राज्यों को कर हस्तांतरण के महत्व का परीक्षण कीजिए। क्या यह राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में प्रभावी उपकरण है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में राजकोषीय संघवाद और कर हस्तांतरण की अवधारणा स्पष्ट करें। मुख्य भाग में, कर हस्तांतरण के महत्व को विभिन्न बिंदुओं में समझाएं, जैसे कि राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना, विकास परियोजनाओं का वित्तपोषण आदि। इसके बाद, इस बात का विश्लेषण करें कि क्या यह राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में प्रभावी उपकरण है। इसमें वित्त आयोग की भूमिका, केंद्र की प्रतिबद्धता (जैसा कि समाचार में है), और राज्यों के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे राजकोषीय घाटा) का उल्लेख करें। निष्कर्ष में, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को मजबूत करने के लिए सुझाव दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments