07 Sep केरल सरकार पीएम-एसएचआरआई योजना पर फैसला कब? जानिए राज्य सरकार की रणनीति

✎ PM-SHRI योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रदान…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढांचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों के मध्य वित्तीय संबंधों पर आधारित योजनाएँ | GS Paper II — सामाजिक न्याय – शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित विषय
- Prelims: PM-SHRI योजना, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, शिक्षा मंत्रालय, नई शिक्षा नीति 2020, सहयोगात्मक संघवाद, राज्यों का उत्तरदायित्व, समवर्ती सूची
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और शिक्षा के क्षेत्र में इसका प्रभाव, राष्ट्रीय विकास में केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी सहयोग का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: PM-SHRI योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रदान करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने PM-SHRI (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लागू करने पर निर्णय लेने के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति की रिपोर्ट का इंतजार करने की घोषणा की है। राज्य के शिक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य के बीच योजना के कार्यान्वयन को लेकर कुछ मतभेद हैं। पिछली सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन बाद में सत्तारूढ़ मोर्चे के भीतर विरोध के कारण इसे रोक दिया गया था। वर्तमान सरकार, जिसने पहले इस योजना का विरोध किया था, अब इस मामले की जांच के लिए एक उप-समिति का गठन किया है।
पृष्ठभूमि
- PM-SHRI योजना को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को विकसित करने के लिए शुरू किया था।
- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका अर्थ है कि इसके कार्यान्वयन की लागत केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एक निश्चित अनुपात में साझा की जाती है।
- योजना का उद्देश्य इन स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जो नई शिक्षा नीति की भावना को पूरी तरह से समाहित करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें।
- राज्यों को इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है, जिसमें कार्यान्वयन की शर्तों और जिम्मेदारियों का उल्लेख होता है।
- शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं। हालांकि, कार्यान्वयन में अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग की आवश्यकता होती है।
- केरल में पिछली सरकार ने PM-SHRI योजना के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन बाद में राजनीतिक विरोध के कारण इसे रोक दिया गया। वर्तमान सरकार अब इसके कार्यान्वयन पर पुनर्विचार कर रही है।
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की स्वायत्तता और वित्तीय बोझ अक्सर केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव का कारण बनते हैं।
PM-SHRI योजना क्या है?
- PM-SHRI योजना का पूर्ण रूप ‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ है।
- यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है और इसका उद्देश्य देश भर के मौजूदा सरकारी स्कूलों में से 14,500 से अधिक स्कूलों को ‘PM-SHRI स्कूल’ के रूप में अपग्रेड और विकसित करना है।
- इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की पूरी भावना को दर्शाते हुए मॉडल स्कूलों के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- योजना के तहत, PM-SHRI स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम, खेल और कला के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचा, डिजिटल पुस्तकालय, और व्यावसायिक शिक्षा जैसे उन्नत शिक्षण-अधिगम संसाधनों से लैस किया जाएगा।
- इन स्कूलों में अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning), समग्र विकास (Holistic Development), और योग्यता-आधारित शिक्षा (Competency-Based Education) पर जोर दिया जाएगा।
- योजना का लक्ष्य छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है, जिसमें महत्वपूर्ण सोच, रचनात्मकता और समस्या-समाधान शामिल हैं।
- PM-SHRI स्कूल अपने आसपास के अन्य स्कूलों के लिए एक संरक्षक (Mentor) के रूप में भी कार्य करेंगे, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगे और नेतृत्व प्रदान करेंगे।
- इस योजना का कुल परिव्यय 27,360 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 18,128 करोड़ रुपये है और यह 2022-23 से 2026-27 तक पांच साल की अवधि के लिए लागू की जाएगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| केंद्र-राज्य संबंध | यह योजना केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई है, लेकिन इसका कार्यान्वयन राज्यों के माध्यम से होता है। यह संघवाद (Federalism) और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांतों को दर्शाता है, जहाँ केंद्र और राज्य दोनों शिक्षा जैसे समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर सहयोग करते हैं। |
| शिक्षा क्षेत्र में सुधार | PM-SHRI योजना का उद्देश्य देश भर में मौजूदा स्कूलों को ‘आदर्श विद्यालयों’ के रूप में विकसित करना है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) के उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। |
| राज्यों की स्वायत्तता | केरल सरकार का इस योजना पर निर्णय लेने में समय लेना राज्यों की नीतिगत स्वायत्तता और केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को लागू करने में उनकी स्वतंत्रता को दर्शाता है। यह राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार देता है। |
| वित्तीय निहितार्थ | केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र और राज्य के बीच लागत-साझाकरण का एक घटक होता है। राज्यों को इन योजनाओं को अपनाने से पहले अपने वित्तीय बोझ और प्राथमिकताओं का मूल्यांकन करना होता है। |
| राजनीतिक सहमति | योजना के कार्यान्वयन पर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मतभेद और पिछली सरकार द्वारा किए गए समझौते का वर्तमान सरकार द्वारा पुनर्मूल्यांकन, नीति निर्माण में राजनीतिक सहमति और निरंतरता के महत्व को उजागर करता है। |
महत्व
शासन और नीति निर्माण
- यह घटना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीतिगत समन्वय और कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है, विशेषकर समवर्ती सूची के विषयों पर।
- यह राज्यों की नीतिगत स्वायत्तता और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अपनाने या न अपनाने के उनके अधिकार को रेखांकित करता है।
- यह दर्शाता है कि कैसे एक सरकार द्वारा किए गए निर्णय अगली सरकार के लिए बाध्यकारी हो सकते हैं, लेकिन उनका पुनर्मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
संघवाद
- यह सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को दर्शाता है, जहाँ केंद्र और राज्य शिक्षा जैसे साझा विषयों पर मिलकर काम करते हैं, लेकिन इसमें संभावित मतभेद भी सामने आते हैं।
- यह संघवाद के भीतर राज्यों की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता के महत्व पर प्रकाश डालता है।
शिक्षा क्षेत्र
- PM-SHRI योजना का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे में सुधार करना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है।
- योजना के कार्यान्वयन में देरी से उन स्कूलों के आधुनिकीकरण और उन्नयन में विलंब हो सकता है जिन्हें इस योजना के तहत लाभ मिलना है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन पर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद संघवाद के ढांचे में तनाव पैदा कर सकते हैं।
- राज्यों द्वारा योजनाओं को अपनाने में देरी से राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. नीतिगत निरंतरता का अभाव
- सरकार बदलने पर पिछली सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का पुनर्मूल्यांकन नीतिगत अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
- इससे योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होती है और लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति निर्माण
3. वित्तीय निहितार्थ
- राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत अपने हिस्से के वित्तपोषण के लिए संसाधनों की व्यवस्था करनी होती है, जो उनके वित्तीय बोझ को बढ़ा सकता है।
- राज्य सरकारें अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं के आधार पर योजनाओं को अपनाने का निर्णय लेती हैं।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, राज्य वित्त
4. स्थानीय आवश्यकताओं का समायोजन
- केंद्र द्वारा तैयार की गई योजनाएं हमेशा सभी राज्यों की विशिष्ट स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं हो सकती हैं।
- राज्यों को अपनी विशिष्ट जरूरतों के अनुसार योजनाओं में लचीलेपन की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: विकेंद्रीकरण, स्थानीय शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजना कार्यान्वयन पर मतभेद | केंद्र और राज्य के बीच PM-SHRI योजना के कार्यान्वयन पर मतभेद राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा डाल सकते हैं। |
| पिछली सरकार का समझौता | पिछली सरकार द्वारा किए गए समझौते को वर्तमान सरकार द्वारा पुनर्मूल्यांकन करना नीतिगत निरंतरता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। |
| मंत्रिमंडलीय उप-समिति की रिपोर्ट | रिपोर्ट में देरी से योजना के कार्यान्वयन में और विलंब हो सकता है, जिससे स्कूलों के आधुनिकीकरण में देरी होगी। |
| राज्यों की स्वायत्तता बनाम राष्ट्रीय लक्ष्य | राज्यों की नीतिगत स्वायत्तता का सम्मान करते हुए भी, राष्ट्रीय महत्व की योजनाओं के सुचारु कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना एक चुनौती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- PM-SHRI योजना (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया योजना)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच संवाद और परामर्श को मजबूत करना ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन पर आम सहमति बन सके।
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के डिजाइन में राज्यों को अधिक लचीलापन प्रदान करना ताकि वे अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन कर सकें।
- केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों और लाभों के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान करना।
- राज्यों को अपनी नीतिगत स्वायत्तता का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रीय महत्व की योजनाओं के लाभों का मूल्यांकन निष्पक्ष रूप से करना चाहिए।
- एक अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) जैसे मंचों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना ताकि केंद्र-राज्य विवादों को हल किया जा सके।
- नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सरकारों के बीच एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम या सहमति विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ
- सातवीं अनुसूची: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ
- अनुच्छेद 263: अंतर-राज्यीय परिषद का गठन
- अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अनुदान
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार PM-SHRI योजना शुरू करती है। → राज्य सरकारें योजना को लागू करने पर विचार करती हैं। → केरल सरकार पिछली सरकार के समझौते का पुनर्मूल्यांकन करती है। → मंत्रिमंडलीय उप-समिति रिपोर्ट तैयार करती है। → केरल सरकार रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेगी। → योजना का कार्यान्वयन या स्थगन होता है। → शिक्षा क्षेत्र और केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव पड़ता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीएम-श्री (PM-SHRI) योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है।
2. यह योजना केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषित है।
3. शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। पीएम-श्री योजना का लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है। कथन 2 गलत है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच लागत साझा की जाती है (आमतौर पर 60:40 के अनुपात में, कुछ विशेष राज्यों के लिए अलग)। कथन 3 सही है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया था।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (Centrally Sponsored Schemes) अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेदों का कारण बनती हैं।
कारण (R): इन योजनाओं में राज्यों को केंद्रीय दिशानिर्देशों का पालन करना होता है, भले ही वे राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप न हों।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है। केंद्र प्रायोजित योजनाएँ अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेदों का कारण बनती हैं, जैसा कि पीएम-श्री योजना के मामले में देखा जा रहा है। कारण (R) भी सत्य है और A की सही व्याख्या है। इन योजनाओं में राज्यों को केंद्र द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों और शर्तों का पालन करना होता है, जो कभी-कभी राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं से भिन्न हो सकते हैं, जिससे कार्यान्वयन में बाधाएँ आती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्यों की स्वायत्तता और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। पीएम-श्री योजना के संदर्भ में अपने तर्कों की पुष्टि कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की संक्षिप्त परिभाषा। पीएम-श्री योजना का संदर्भ दें।
2. केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लाभ: राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति, राज्यों को वित्तीय सहायता, न्यूनतम मानकों का निर्धारण।
3. राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव: राज्यों पर वित्तीय बोझ, केंद्रीय दिशानिर्देशों का पालन करने की बाध्यता, स्थानीय आवश्यकताओं की अनदेखी, नीतिगत स्वतंत्रता का हनन।
4. सहकारी संघवाद के सिद्धांत: केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग, साझा लक्ष्य, विश्वास और समन्वय।
5. संतुलन स्थापित करने की चुनौतियाँ: वित्तपोषण पैटर्न, योजना डिजाइन में राज्यों की भागीदारी की कमी, विभिन्न राज्यों की विविध आवश्यकताएँ, राजनीतिक मतभेद।
6. पीएम-श्री योजना का विशिष्ट संदर्भ: केरल सरकार के मामले का उल्लेख, योजना के क्रियान्वयन पर मतभेद, राज्य की आपत्तियाँ।
7. आगे का मार्ग: योजना डिजाइन में राज्यों की अधिक भागीदारी, लचीलापन, वित्तीय हस्तांतरण में पारदर्शिता, अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) जैसे मंचों का प्रभावी उपयोग, नीति आयोग (NITI Aayog) की भूमिका।
8. निष्कर्ष: केंद्र और राज्यों के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग के माध्यम से ही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है, जो संघवाद की भावना को मजबूत करेगा।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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