झारखंड के खनिज अधिकार: हेमंत सोरेन ने केंद्र के खिलाफ उठाया सवाल, जानिए पूरा मामला

झारखंड: ‘खनिज हमारे, हक हमारा... दिल्ली क्यों तय करे?’ संसद में बिल पास होने पर हेमंत सोरेन का केंद्र पर हमला — concept mind map

झारखंड के खनिज अधिकार: हेमंत सोरेन ने केंद्र के खिलाफ उठाया सवाल, जानिए पूरा मामला

केंद्र बनाम राज्य: खनिज अधिकारकेंद्र सरकारझारखंड राज्यखनिज नियंत्रणविधेयक पारितअधिकार छिनेराजस्व स्रोतनिवेश बढ़ानाआय में कमीसंशोधन उद्देश्यपारदर्शिताअनुचित हस्तक्षेपराजस्व साझानियंत्रणस्वायत्तताप्रभावउत्पादन बढ़ानासामाजिक योजनाएं
केंद्र बनाम राज्य: खनिज अधिकार

✎ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनिज संसाधनों के विनियमन का आधार है, जिसके संशोधन अक्सर केंद्र-राज्य संबंधों और संघीय ढाँचे पर बहस छेड़ते हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ; स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper III — भारत में खनिज संसाधनों का वितरण
  • Prelims: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957, संविधान की सातवीं अनुसूची, संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची, संघवाद, सहकारी संघवाद, खनिज नीति
  • Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ, प्राकृतिक संसाधनों पर राज्यों के अधिकार और केंद्र की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनिज संसाधनों के विनियमन का आधार है, जिसके संशोधन अक्सर केंद्र-राज्य संबंधों और संघीय ढाँचे पर बहस छेड़ते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

झारखंड के मुख्यमंत्री ने संसद द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक पर कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि यह विधेयक राज्य के खनिज अधिकारों को कमजोर करता है और राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने इस विधेयक को झारखंड के साथ अन्याय बताते हुए केंद्र सरकार पर जल्दबाजी में इसे पारित करने का आरोप लगाया है और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में खनिज संसाधनों का विनियमन खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) द्वारा नियंत्रित होता है।
  • राज्यों को अपने क्षेत्र में खनिजों के पट्टे और रॉयल्टी से राजस्व प्राप्त होता है, जो उनके बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, विशेषकर खनिज-समृद्ध राज्यों के लिए।
  • केंद्र सरकार समय-समय पर खनिज नीति में संशोधन करती रहती है, जिसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना, उत्पादन बढ़ाना और पारदर्शिता लाना होता है।
  • विगत में भी, खनिज संसाधनों के नियंत्रण और राजस्व के बँटवारे को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच विवाद होते रहे हैं, जो भारत के संघीय ढाँचे की एक अंतर्निहित चुनौती को दर्शाता है।
  • हालिया संशोधन विधेयक का उद्देश्य खनन क्षेत्र में सुधार लाना और खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, लेकिन राज्यों का मानना है कि यह उनके अधिकारों का अतिक्रमण करता है।

खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957

  • यह अधिनियम भारत में खनन क्षेत्र के विनियमन और विकास के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश में खनिजों के व्यवस्थित विकास और संरक्षण को सुनिश्चित करना है।
  • यह अधिनियम खनिजों के पूर्वेक्षण (prospecting), खनन पट्टों (mining leases) और रॉयल्टी (royalty) से संबंधित प्रावधानों को निर्धारित करता है।
  • अधिनियम के तहत, केंद्र सरकार कुछ खनिजों के विनियमन और विकास के लिए नियम बना सकती है, जबकि अन्य खनिजों के लिए राज्य सरकारें नियम बनाती हैं।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को खनिज रियायतों के लिए नियम बनाने की शक्ति देता है, जिसमें नीलामी प्रक्रिया भी शामिल है।
  • अधिनियम में समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं ताकि खनन क्षेत्र में नई चुनौतियों और आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
  • संशोधनों का उद्देश्य अक्सर खनन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना, उत्पादन दक्षता बढ़ाना और अवैध खनन पर अंकुश लगाना होता है
  • यह अधिनियम खनिज संसाधनों के प्रबंधन में केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिकाओं को परिभाषित करता है, हालांकि इन भूमिकाओं को लेकर अक्सर संघीय विवाद उत्पन्न होते रहते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
खनिज संसाधनों पर राज्यों का अधिकार राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण।
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक केंद्र सरकार द्वारा खनिजों के विनियमन और विकास से संबंधित कानून में परिवर्तन।
राजस्व पर प्रभाव संशोधन विधेयक से राज्य सरकारों के खनिज राजस्व में संभावित कमी।
संघवाद का सिद्धांत केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बँटवारे से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था।
सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ राज्य सरकारों द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाएँ, जो राजस्व पर निर्भर करती हैं।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • खनिज समृद्ध राज्यों के लिए खनिज राजस्व आय का एक प्रमुख स्रोत है, जो उनके बजट और विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।
  • संशोधन विधेयक से राज्य के राजस्व में कमी आने की आशंका है, जिससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

राजकोषीय संघवाद

  • यह मुद्दा केंद्र और राज्यों के बीच राजकोषीय संबंधों और संसाधनों के बँटवारे से संबंधित है, जो भारतीय संघवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • राज्यों का तर्क है कि खनिजों पर उनका अधिकार उनकी वित्तीय स्वायत्तता का आधार है, जिस पर केंद्र का हस्तक्षेप अनुचित है।

शासन और नीति निर्माण

  • यह घटना केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया और राज्यों के साथ परामर्श के महत्व पर सवाल उठाती है।
  • राज्यों की आपत्तियाँ यह दर्शाती हैं कि केंद्र के विधायी निर्णयों का राज्यों पर सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

चुनौतियाँ

1. केंद्र-राज्य संबंध

  • खनिज संसाधनों के नियंत्रण को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच तनाव भारतीय संघवाद के लिए एक चुनौती है।
  • राज्यों की स्वायत्तता और केंद्र के विधायी अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करना महत्वपूर्ण है।

2. राजकोषीय स्वायत्तता

  • खनिज राजस्व में कमी से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है, जिससे उन्हें अपनी विकास योजनाओं को लागू करने में कठिनाई होगी।
  • राज्यों को अपने संसाधनों पर अधिक नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि वे अपनी विशिष्ट क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

3. संसाधन प्रबंधन

  • खनिज संसाधनों के कुशल और सतत प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग आवश्यक है।
  • नीति निर्माण में राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा सके।

4. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • राजस्व में कमी से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे हाशिए पर पड़े समुदायों को नुकसान होगा।
  • खनिज समृद्ध क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
खनिज अधिकारों का निर्धारण राज्यों का मानना है कि उनके खनिजों पर निर्णय दिल्ली में नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर होने चाहिए।
राजस्व पर प्रभाव संशोधन विधेयक से राज्य के राजस्व में कमी आने की आशंका, जिससे सामाजिक योजनाओं पर असर।
जल्दबाजी में विधेयक पारित करना केंद्र सरकार पर राज्यों से पर्याप्त परामर्श के बिना विधेयक पारित करने का आरोप।
संघवाद का उल्लंघन राज्यों द्वारा इसे केंद्र द्वारा उनकी स्वायत्तता और संघवाद के सिद्धांतों पर अतिक्रमण मानना।
आंदोलन की चेतावनी राज्य सरकार द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना।

आगे की राह

  • केंद्र और राज्यों के बीच खनिज नीति पर व्यापक संवाद और परामर्श की आवश्यकता है।
  • खनिज राजस्व के बँटवारे के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
  • राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक राजस्व स्रोतों पर विचार किया जा सकता है।
  • खनिज समृद्ध क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • केंद्र सरकार को विधायी प्रक्रिया में राज्यों की चिंताओं और सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संघवाद · केंद्र-राज्य संबंध · खनिज नीति · राजस्व बंटवारा · संवैधानिक प्रावधान · सातवीं अनुसूची · समवर्ती सूची · राज्य सूची · खनन कानून · आर्थिक न्याय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में शक्तियों का बँटवारा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292, 293’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा उधार लेने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और उसके कार्य’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पारित  →  झारखंड सरकार द्वारा विधेयक का विरोध और आपत्ति  →  राजस्व में कमी की आशंका और सामाजिक योजनाओं पर प्रभाव  →  राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघवाद पर बहस  →  केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और संभावित आंदोलन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘खनिज’ विषय राज्य सूची के अंतर्गत आता है।
2. संसद के पास खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत खनिज विकास और विनियमन से संबंधित कानून बनाने की शक्ति है।
3. राज्य सरकारें केवल उन खनिजों के विनियमन के लिए नियम बना सकती हैं जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नहीं किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘खनिज’ विषय संघ सूची की प्रविष्टि 54 (तेल क्षेत्रों और खनिज तेल संसाधनों, पेट्रोलियम और अन्य तरल पदार्थों और गैसों; कोयला खानों और खनिजों के विकास और विनियमन) और राज्य सूची की प्रविष्टि 23 (खनन और खनिज विकास का विनियमन, संघ सूची के प्रावधानों के अधीन) दोनों में शामिल है। कथन 2 सही है। संसद ने इस विषय पर कानून बनाने के लिए खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 पारित किया है। कथन 3 गलत है। राज्य सरकारें उन खनिजों के विनियमन के लिए नियम बना सकती हैं जो संघ सूची के अंतर्गत नहीं आते हैं, या जिन पर केंद्र सरकार ने कानून नहीं बनाया है, लेकिन यह केंद्र के कानूनों के अधीन होता है।

Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक पारित करने से राज्यों के राजस्व पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
कारण (R): संविधान के तहत, खनिजों से प्राप्त राजस्व का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों को आवंटित किया जाता है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि खनिज कानूनों में कोई भी परिवर्तन, विशेष रूप से रॉयल्टी दरों या आवंटन प्रक्रियाओं से संबंधित, राज्यों के राजस्व संग्रह को सीधे प्रभावित कर सकता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि संविधान के तहत, खनन पट्टों से प्राप्त रॉयल्टी और अन्य शुल्कों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य सरकारों को मिलता है, जो उनके राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में खनिज संसाधनों के विनियमन में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, राज्यों के राजस्व अधिकारों पर हालिया विधायी परिवर्तनों के संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में खनिज संसाधनों की प्रचुरता और उनके विनियमन में केंद्र-राज्य संबंधों के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **संवैधानिक प्रावधान:**
* सातवीं अनुसूची का संदर्भ: संघ सूची की प्रविष्टि 54 और राज्य सूची की प्रविष्टि 23 का विस्तार से वर्णन।
* अनुच्छेद 246 के तहत संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों का उल्लेख।
3. **कानूनी ढांचा:**
* खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) और इसके तहत केंद्र की प्रमुख भूमिका।
* राज्य सरकारों की भूमिका: केंद्र के कानूनों के अधीन रहते हुए नियम बनाने की शक्ति।
4. **शक्तियों के वितरण का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **केंद्र के पक्ष में झुकाव:** MMDR अधिनियम के माध्यम से केंद्र का व्यापक नियंत्रण, विशेष रूप से प्रमुख खनिजों पर।
* **राज्यों की चिंताएं:** राजस्व बंटवारे, रॉयल्टी दरों के निर्धारण और खनन पट्टों के आवंटन में सीमित स्वायत्तता।
* **संघवाद पर प्रभाव:** सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के साथ संभावित टकराव, विशेषकर जब राज्यों की सहमति के बिना नीतियां बनती हैं।
5. **हालिया विधायी परिवर्तनों का प्रभाव (खान एवं खनिज संशोधन विधेयक):**
* **राजस्व पर प्रभाव:** रॉयल्टी दरों, नीलामी प्रक्रियाओं या खनिज ब्लॉकों के आवंटन में बदलाव से राज्य के राजस्व पर सीधा प्रभाव।
* **सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर असर:** राजस्व में कमी से राज्यों की सामाजिक कल्याण योजनाओं के वित्तपोषण की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव।
* **राज्यों की स्वायत्तता में कमी:** केंद्र द्वारा अधिक नियंत्रण से राज्यों की अपनी खनिज संपदा पर निर्णय लेने की शक्ति का क्षरण।
6. **निष्कर्ष:** केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता, जिसमें राज्यों के अधिकारों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हित में खनिजों का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का पालन करने पर जोर।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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