26 Sep तमिलनाडु का ‘एक डिग्री, छह कौशल’ कार्यक्रम: जानिए क्या है योजना और कैसे मिलेगा लाभ
✎ तमिलनाडु की 'एक डिग्री, छह कौशल' योजना स्नातक छात्रों को उनकी नियमित डिग्री के साथ छह उद्योग-उन्मुख कौशल प्रदान करके उनकी रोज़गार क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसमें व्यावहारिक मूल्यांकन और उद्योग-अकादमिक सहयोग शामिल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा, मानव संसाधन) | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (कौशल विकास, रोज़गार)
- Prelims: कौशल विकास, उच्च शिक्षा, तमिलनाडु राज्य उच्च शिक्षा परिषद (TANSCHE), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), रोज़गारपरक शिक्षा
- Essay: उच्च शिक्षा में कौशल विकास की भूमिका: भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग, 21वीं सदी के लिए शिक्षा: पारंपरिक डिग्री और व्यावहारिक कौशल का संगम
त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु की ‘एक डिग्री, छह कौशल’ योजना स्नातक छात्रों को उनकी नियमित डिग्री के साथ छह उद्योग-उन्मुख कौशल प्रदान करके उनकी रोज़गार क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसमें व्यावहारिक मूल्यांकन और उद्योग-अकादमिक सहयोग शामिल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 181 सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों में स्नातक छात्रों के लिए ‘एक डिग्री, छह कौशल’ कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह योजना जनवरी 2027 से शुरू होने वाले सम सेमेस्टर से लागू होने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य मौजूदा शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण को एकीकृत करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली पारंपरिक रूप से सैद्धांतिक ज्ञान पर केंद्रित रही है, जिससे स्नातक छात्रों में रोज़गारपरक कौशल की कमी देखी जाती है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा में एकीकृत करने पर ज़ोर देती है ताकि छात्रों को भविष्य के लिए तैयार किया जा सके।
- युवा बेरोज़गारी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, और इसका एक प्रमुख कारण उद्योगों की ज़रूरतों के अनुरूप कौशल की कमी है।
- कई राज्य सरकारें छात्रों की रोज़गार क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न कौशल विकास पहल शुरू कर रही हैं।
- तमिलनाडु राज्य उच्च शिक्षा परिषद (Tamil Nadu State Council for Higher Education – TANSCHE) उच्च शिक्षा में सुधार और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- उद्योग-अकादमिक सहयोग (Industry-Academia Collaboration) छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभव और उद्योगों की अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है।
तमिलनाडु की ‘एक डिग्री, छह कौशल’ योजना क्या है?
- यह योजना तमिलनाडु के 181 सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों में स्नातक (Undergraduate) छात्रों के लिए है।
- इसके तहत, एक छात्र अपने तीन वर्षीय पारंपरिक स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम के दौरान प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम एक रोज़गार-उन्मुख कौशल सीखेगा।
- इस प्रकार, तीन साल की डिग्री पूरी करने वाला छात्र अपनी नियमित डिग्री के साथ छह अतिरिक्त उद्योग-उन्मुख कौशल प्राप्त करेगा।
- इन कौशल पाठ्यक्रमों को मुख्य डिग्री पाठ्यक्रम के साथ पढ़ाया जाएगा, न कि उसके स्थान पर।
- विभाग ने कला और बुनियादी विज्ञान के तहत 20 कौशल पाठ्यक्रमों की पहचान की है, जिनमें से कॉलेज अपनी पेशकश का चयन करेंगे।
- प्रत्येक कौशल पाठ्यक्रम में लगभग 30 से 45 घंटे का शिक्षण शामिल होगा और मूल्यांकन व्यावहारिक अनुप्रयोग पर केंद्रित होगा, जिसमें कोई पारंपरिक लिखित परीक्षा नहीं होगी।
- यह पहल तमिलनाडु राज्य उच्च शिक्षा परिषद (TANSCHE) के सहयोग से विकसित की गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | एक डिग्री, छह कौशल (One Degree, Six Skills) |
| लक्ष्य समूह | तमिलनाडु के 181 सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों के स्नातक छात्र |
| उद्देश्य | नियमित डिग्री के साथ प्रति सेमेस्टर एक नौकरी-उन्मुख कौशल प्रदान करना |
| अवधि | तीन वर्षीय स्नातक डिग्री के दौरान कुल छह अतिरिक्त कौशल |
| पाठ्यक्रम | कला और बुनियादी विज्ञान में 20 कौशल पाठ्यक्रम, जिनमें से कॉलेज अपनी पेशकश चुनेंगे |
| मूल्यांकन | लिखित परीक्षा के बजाय व्यावहारिक अनुप्रयोग, कौशल अभ्यास, व्यक्तिगत दक्षता और अंतिम प्रदर्शन पर केंद्रित |
महत्व
कौशल विकास और रोजगार
- यह कार्यक्रम छात्रों को पारंपरिक अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योग-उन्मुख कौशल से लैस करेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ेगी।
- यह उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल तैयार करने में मदद करेगा, जिससे कौशल अंतर (Skill Gap) को कम किया जा सकेगा।
- व्यावहारिक कौशल पर जोर देने से छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता मिलेगी।
शिक्षा प्रणाली में सुधार
- यह पहल उच्च शिक्षा को अधिक प्रासंगिक और परिणाम-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह पारंपरिक डिग्री पाठ्यक्रमों को पूरक करके छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देगा।
- उद्योग-अकादमिक साझेदारी (Industry-Academia Partnership) के माध्यम से पाठ्यक्रम को अद्यतन रखने और इंटर्नशिप व प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी।
आर्थिक संवृद्धि
- कुशल कार्यबल की उपलब्धता राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की संवृद्धि को बढ़ावा देगी।
- बेरोजगारी दर में कमी आने की संभावना है, जिससे सामाजिक-आर्थिक स्थिरता आएगी।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण
- प्रशिक्षित और योग्य प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- सभी कॉलेजों में कौशल पाठ्यक्रमों की एकरूपता और गुणवत्ता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, शिक्षा
2. बुनियादी ढांचा और संसाधन
- कौशल प्रशिक्षण के लिए आवश्यक प्रयोगशालाओं, उपकरणों और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास।
- छोटे और दूरदराज के कॉलेजों में संसाधनों की कमी को पूरा करना।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, क्षेत्रीय असमानताएं
3. उद्योग-अकादमिक समन्वय
- उद्योग भागीदारों के साथ प्रभावी और निरंतर सहयोग स्थापित करना।
- उद्योग की बदलती मांगों के अनुसार पाठ्यक्रम को नियमित रूप से अद्यतन करना।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीति, नवाचार
4. छात्रों की भागीदारी और प्रेरणा
- छात्रों को नियमित डिग्री के साथ अतिरिक्त कौशल सीखने के लिए प्रेरित करना।
- कौशल पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों की रुचि और समर्पण बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा मनोविज्ञान, सामाजिक सशक्तिकरण
5. मूल्यांकन की चुनौतियाँ
- व्यावहारिक कौशल के मूल्यांकन के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और मानकीकृत प्रणाली विकसित करना।
- मूल्यांकन में व्यक्तिपरकता (Subjectivity) से बचना।
यूपीएससी लिंक: परीक्षा सुधार, गुणवत्ता नियंत्रण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रशिक्षकों की कमी | सभी 181 कॉलेजों में पर्याप्त संख्या में योग्य और अनुभवी कौशल प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है। |
| बुनियादी ढांचे का अभाव | कौशल प्रशिक्षण के लिए आवश्यक विशिष्ट उपकरण, प्रयोगशालाएँ और कार्यशालाएँ सभी कॉलेजों में उपलब्ध नहीं हो सकती हैं। |
| पाठ्यक्रम अद्यतन | उद्योग की तेजी से बदलती मांगों के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रमों को नियमित रूप से अद्यतन करने की चुनौती। |
| उद्योग भागीदारी | सभी कॉलेजों के लिए कम से कम तीन प्रमुख उद्योगों के साथ प्रभावी समझौता ज्ञापन (MoU) स्थापित करना और बनाए रखना। |
| मूल्यांकन की विश्वसनीयता | लिखित परीक्षा के बजाय व्यावहारिक मूल्यांकन में वस्तुनिष्ठता और मानकीकरण सुनिश्चित करना। |
| छात्रों पर अतिरिक्त बोझ | नियमित डिग्री पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त कौशल सीखने से छात्रों पर अकादमिक बोझ बढ़ सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नान मुधलवन (Naan Mudhalvan)
आगे की राह
- कौशल प्रशिक्षकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करना।
- कौशल प्रशिक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और उपकरणों में निवेश बढ़ाना, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में।
- उद्योग-अकादमिक इंटरफेस को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद और सहयोग तंत्र स्थापित करना।
- कौशल पाठ्यक्रमों के लिए एक गतिशील पाठ्यक्रम विकास प्रणाली बनाना जो उद्योग की उभरती जरूरतों के प्रति उत्तरदायी हो।
- व्यावहारिक कौशल मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम ढांचा विकसित करना।
- छात्रों को कौशल सीखने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू करना।
- कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और फीडबैक के आधार पर सुधार करना।
- कौशल पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के साथ संरेखित करना।
- अन्य राज्यों के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कौशल विकास · उच्च शिक्षा · उद्योग-अकादमिक सहयोग · रोजगारपरक शिक्षा · नई शिक्षा नीति · व्यावहारिक मूल्यांकन · युवा सशक्तिकरण · राज्य शिक्षा पहल
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 41: काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना
अवधारणा प्रवाह
कौशल अंतर की पहचान → उद्योग-उन्मुख कौशल पाठ्यक्रम का विकास → कॉलेजों में कौशल प्रशिक्षण का कार्यान्वयन → छात्रों द्वारा कौशल अधिग्रहण → रोजगार क्षमता में वृद्धि → आर्थिक संवृद्धि और विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. तमिलनाडु की ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना केवल इंजीनियरिंग कॉलेजों के स्नातक छात्रों के लिए है।
2. इस योजना के तहत, छात्र अपने नियमित डिग्री कोर्स के साथ प्रत्येक सेमेस्टर में एक नौकरी-उन्मुख कौशल सीखेंगे।
3. कौशल पाठ्यक्रमों का मूल्यांकन पारंपरिक लिखित परीक्षा के बजाय व्यावहारिक अनुप्रयोग पर केंद्रित होगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना सरकारी कला और विज्ञान कॉलेजों के स्नातक छात्रों के लिए है। कथन 2 सही है क्योंकि यह योजना छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में एक अतिरिक्त कौशल सिखाने पर केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि मूल्यांकन व्यावहारिक अनुप्रयोग और प्रदर्शन पर आधारित होगा, न कि लिखित परीक्षा पर।
Q2. अभिकथन (A): तमिलनाडु की ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना का उद्देश्य स्नातक छात्रों की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
कारण (R): यह योजना उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण को मौजूदा शैक्षणिक पाठ्यक्रम में एकीकृत करती है और व्यावहारिक मूल्यांकन पर जोर देती है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नौकरी-उन्मुख कौशल प्रदान करके उनकी रोजगार क्षमता में सुधार करना है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण और व्यावहारिक मूल्यांकन ही रोजगार क्षमता बढ़ाने के प्रमुख तरीके हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ तमिलनाडु की ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना उच्च शिक्षा में कौशल विकास को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? इस संदर्भ में, भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली के समक्ष कौशल अंतर (skill gap) की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना का संक्षिप्त परिचय दें, इसके मुख्य उद्देश्यों और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालें (सरकारी कला और विज्ञान कॉलेजों के स्नातक छात्रों के लिए एक डिग्री के साथ छह कौशल, उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण, व्यावहारिक मूल्यांकन)।
2. योजना की सहायक भूमिका: बताएं कि यह योजना कौशल विकास को कैसे बढ़ावा दे सकती है:
– रोजगार क्षमता में वृद्धि: छात्रों को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करना।
– उद्योग-अकादमिक सहयोग: पाठ्यक्रम अद्यतन और इंटर्नशिप/प्लेसमेंट के लिए उद्योगों की भागीदारी।
– व्यावहारिक मूल्यांकन: सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय ‘करके सीखने’ पर जोर।
– समग्र विकास: पारंपरिक डिग्री के साथ अतिरिक्त कौशल का अधिग्रहण।
3. कौशल अंतर की चुनौतियाँ: भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली के समक्ष मौजूदा कौशल अंतर की चुनौतियों का विश्लेषण करें:
– पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता: उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम का अभाव।
– व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी: सैद्धांतिक ज्ञान पर अधिक जोर, व्यावहारिक अनुभव का अभाव।
– संकाय की क्षमता: अद्यतन कौशल और शिक्षण पद्धतियों में संकाय का प्रशिक्षण।
– उद्योग-अकादमिक अलगाव: उद्योग और शिक्षाविदों के बीच समन्वय की कमी।
– मूल्यांकन प्रणाली: रटने पर आधारित पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली।
– बुनियादी ढाँचा: कौशल प्रयोगशालाओं और आधुनिक उपकरणों का अभाव।
4. निष्कर्ष: इन चुनौतियों का समाधान करने में ऐसी योजनाओं के महत्व को दोहराएं और एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जिसमें नीतिगत सुधार, उद्योग सहयोग और निरंतर मूल्यांकन शामिल हो।
स्रोत: The Indian Express
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू की गई ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना के अंतर्गत प्रति सेमेस्टर कितनी कौशल विकास गतिविधियाँ प्रदान की जाती हैं?
- 1 कौशल प्रति सेमेस्टर
- 2 कौशल प्रति सेमेस्टर
- 3 कौशल प्रति सेमेस्टर
- 6 कौशल प्रति सेमेस्टर
उत्तर: 1 कौशल प्रति सेमेस्टर — तमिलनाडु सरकार की ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना के अंतर्गत प्रत्येक स्नातक छात्र को प्रति सेमेस्टर एक कौशल विकास गतिविधि प्रदान की जाती है।
Mains: तमिलनाडु सरकार की ‘वन डिग्री, सिक्स स्किल्स’ योजना के उद्देश्यों एवं इसके तहत प्रदान किए जाने वाले कौशलों का वर्णन करते हुए, राज्य के उच्च शिक्षा में कौशल विकास को बढ़ावा देने में इस योजना की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- गृह मंत्री ने मध्य प्रदेश में गौपालक सम्मेलन का किया उद्घाटन, नए अपराध कानूनों पर प्रदर्शनी का किया शुभारंभ - October 3, 2026
- Jal Arpan: 1850+ Gram Panchayats Join Hands for Rural Water Supply - October 3, 2026
- भारत ने किया 5.56 किमी मुक्त अंतरिक्ष क्वांटम की वितरण लिंक का सफल परीक्षण - October 3, 2026

No Comments