09 Sep तमिलनाडु में एआईएडीएमके-डीएमके सरकारों ने एससी/एसटी छात्रवृत्ति योजनाओं का पर्याप्त प्रचार नहीं किया: सीएजी रिपोर्ट
✎ CAG भारत में सार्वजनिक धन के संरक्षक के रूप में कार्य करता है, सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जैसा कि अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं पर इसकी हालिया रिपोर्ट से स्पष्ट होता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, इन योजनाओं का प्रदर्शन एवं कमजोरियाँ | GS Paper II — शासन: सरकारी नीतियों और योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: समावेशन और इससे उत्पन्न मुद्दे
- Prelims: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), अनुच्छेद 148, अनुसूचित जाति (SC) छात्रवृत्ति योजनाएँ, अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रवृत्ति योजनाएँ, पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ
- Essay: भारत में सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ और उनके समाधान में कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका, जवाबदेह शासन: लोक लेखा परीक्षा का महत्व और प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: CAG भारत में सार्वजनिक धन के संरक्षक के रूप में कार्य करता है, सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जैसा कि अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं पर इसकी हालिया रिपोर्ट से स्पष्ट होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया रिपोर्ट में तमिलनाडु में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए शैक्षिक छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रचार-प्रसार में कमी और उनके कार्यान्वयन में कई खामियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अपर्याप्त प्रचार के कारण पात्र छात्र इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह गए, जिससे सामाजिक न्याय के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगा है।
पृष्ठभूमि
- भारत के संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें शिक्षा को बढ़ावा देना एक प्रमुख घटक है।
- केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएँ चलाती हैं, जैसे पूर्व-मैट्रिक (Pre-Matric) और पोस्ट-मैट्रिक (Post-Matric) छात्रवृत्ति योजनाएँ, जिनका उद्देश्य इन समुदायों के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनकी शिक्षा सुनिश्चित करना है।
- ये योजनाएँ शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने, ड्रॉपआउट दर कम करने और इन वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- CAG की रिपोर्ट में 2017-23 की अवधि को कवर किया गया है और इसमें योजनाओं के प्रचार की कमी, पात्र छात्रों के छूट जाने, छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी और अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है।
- रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि निजी संस्थानों में प्रबंधन कोटा (Management Quota) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मनमानी के कारण अपात्र छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला।
- तमिलनाडु में 2019-22 के दौरान, नमूनाकृत जिलों के औसतन 46% स्कूलों ने पूर्व-मैट्रिक और 39% स्कूलों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ नहीं उठाया।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका और कार्य
- CAG भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है।
- यह भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण (Audit) करता है, जिसमें सरकारी कंपनियों और निगमों का लेखा-परीक्षण भी शामिल है।
- CAG का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए इसे आवंटित किया गया था, और यह कि खर्च कानून के अनुसार हुआ है।
- CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं। राज्य स्तर पर, CAG अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
- CAG की रिपोर्टों पर संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) द्वारा विचार-विमर्श किया जाता है।
- CAG को ‘लोक वित्त का प्रहरी’ और ‘संविधान का संरक्षक’ माना जाता है, जो सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह केवल व्यय की वैधता की जाँच नहीं करता, बल्कि यह भी देखता है कि क्या व्यय ‘मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता’ के सिद्धांतों के अनुरूप है, जिसे प्रदर्शन लेखा-परीक्षण (Performance Audit) कहा जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| छात्रवृत्ति योजनाओं का अपर्याप्त प्रचार | अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के पात्र छात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे शिक्षा में असमानता बढ़ती है। |
| प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं में कम कवरेज | नमूना जिलों में बड़ी संख्या में स्कूल इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा रहे हैं, जिससे पात्र छात्रों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छूट रहा है। |
| छात्रों का बीच में पढ़ाई छोड़ना/बाहर होना | छात्रवृत्ति स्वीकृत होने के बाद भी छात्रों का पढ़ाई छोड़ना या बाहर हो जाना योजना के उद्देश्यों को कमजोर करता है और शिक्षा तक पहुंच में बाधाओं को दर्शाता है। |
| आय/जाति प्रमाण पत्रों का संलग्न न होना | आवेदन प्रक्रिया में दस्तावेज़ों की कमी पारदर्शिता और पात्रता सत्यापन में गंभीर खामियों को उजागर करती है। |
| निजी संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया में मनमानी | प्रबंधन कोटा के तहत प्रवेश में पारदर्शिता की कमी और मनमानी से अपात्र छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे वास्तविक ज़रूरतमंद वंचित रह जाते हैं। |
| छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी या गैर-भुगतान | छात्रवृत्ति के समय पर न मिलने या बैंक खातों की समस्याओं के कारण भुगतान न होने से छात्रों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे शिक्षा जारी रखने में असमर्थ हो सकते हैं। |
महत्व
सामाजिक न्याय और समावेशन
- यह रिपोर्ट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने में मौजूदा कमियों को उजागर करती है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के लिए महत्वपूर्ण है।
- छात्रवृत्ति योजनाओं का उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाना है; अपर्याप्त कार्यान्वयन इस लक्ष्य को बाधित करता है और समावेशी विकास में बाधा डालता है।
मानव पूंजी विकास
- शिक्षा में निवेश मानव पूंजी के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी से एक बड़े वर्ग की शैक्षिक क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।
- शिक्षित कार्यबल की कमी से समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शासन और जवाबदेही
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में जवाबदेही और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करती है।
- योजनाओं के प्रभावी प्रचार, समय पर भुगतान और उचित सत्यापन तंत्र की कमी सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
चुनौतियाँ
1. योजनाओं का अपर्याप्त प्रचार
- पात्र लाभार्थियों तक जानकारी का अभाव, जिससे वे योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते।
- विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों और वंचित समुदायों में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, सरकारी योजनाएं
2. कार्यान्वयन में खामियां
- छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी या भुगतान न होना, जिससे छात्रों को वित्तीय कठिनाई होती है।
- बैंक खातों से संबंधित समस्याएं (ब्लॉक, फ्रीज, बंद) जो भुगतान प्रक्रिया को बाधित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
3. प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताएं
- निजी संस्थानों में प्रबंधन कोटा के तहत प्रवेश में पारदर्शिता की कमी और मनमानी।
- अपात्र छात्रों को छात्रवृत्ति का गलत तरीके से मिलना, जिससे वास्तविक ज़रूरतमंद वंचित रह जाते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शिक्षा
4. दस्तावेज़ीकरण और सत्यापन की कमी
- आय/जाति प्रमाण पत्रों का आवेदन पत्रों के साथ संलग्न न होना।
- पात्रता सत्यापन प्रक्रिया में ढिलाई, जिससे गलत लाभार्थियों को लाभ मिल सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता
5. छात्रों का बीच में पढ़ाई छोड़ना
- छात्रवृत्ति मिलने के बाद भी छात्रों का पढ़ाई छोड़ना, जो योजना के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करता है।
- इसके पीछे के कारणों (जैसे सामाजिक-आर्थिक दबाव, शैक्षणिक सहायता की कमी) को समझने और संबोधित करने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा, सामाजिक मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| छात्रवृत्ति योजनाओं का कम कवरेज | लाखों पात्र SC/ST छात्र शिक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता से वंचित रह जाते हैं। |
| भुगतान में देरी/गैर-भुगतान | छात्रों को अपनी शिक्षा जारी रखने में वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है। |
| प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताएं | छात्रवृत्ति का लाभ अपात्र व्यक्तियों तक पहुंचता है, जिससे संसाधनों का दुरुपयोग होता है और वास्तविक ज़रूरतमंदों का हक मारा जाता है। |
| दस्तावेज़ों की कमी | योजनाओं की अखंडता और पारदर्शिता पर सवाल उठता है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है। |
| छात्रों का बीच में पढ़ाई छोड़ना | सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों के लिए शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण का लक्ष्य अधूरा रह जाता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (Pre-Matric Scholarship Scheme) SC/ST छात्रों के लिए
- पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (Post-Matric Scholarship Scheme) SC/ST छात्रों के लिए
आगे की राह
- छात्रवृत्ति योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक और लक्षित प्रचार अभियान चलाए जाएं, जिसमें स्थानीय भाषाओं और विभिन्न मीडिया माध्यमों का उपयोग हो।
- छात्रवृत्ति के वितरण में देरी को कम करने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ और पारदर्शी भुगतान तंत्र विकसित किया जाए।
- बैंक खातों से संबंधित समस्याओं (जैसे ब्लॉक/फ्रीज खाते) को हल करने के लिए बैंकों और शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
- निजी संस्थानों में प्रबंधन कोटा के तहत प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और छात्रवृत्ति के लिए पात्रता सत्यापन को सख्त किया जाए।
- आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और आय/जाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए एक डिजिटल और एकीकृत प्रणाली लागू की जाए।
- छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बाद छात्रों के ड्रॉपआउट कारणों का विश्लेषण किया जाए और उन्हें शिक्षा जारी रखने में सहायता के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक या परामर्श संबंधी सहायता प्रदान की जाए।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए, जिसमें CAG की सिफारिशों को गंभीरता से लिया जाए और सुधारात्मक उपाय किए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · अनुसूचित जाति (SC) · अनुसूचित जनजाति (ST) · छात्रवृत्ति योजनाएँ · सामाजिक न्याय · कल्याणकारी राज्य · प्रदर्शन लेखापरीक्षा (Performance Audit) · सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन · वित्तीय जवाबदेही · शिक्षा का अधिकार · समावेशी विकास · नीति निर्माण और क्रियान्वयन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 15(4): SC/ST के लिए विशेष प्रावधान
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का उन्मूलन
- अनुच्छेद 46: SC/ST के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा
- अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
- अनुच्छेद 338A: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
अवधारणा प्रवाह
CAG रिपोर्ट में छात्रवृत्ति योजनाओं में कमियां उजागर → योजनाओं के अपर्याप्त प्रचार और कार्यान्वयन में खामियां → पात्र SC/ST छात्रों का छात्रवृत्ति से वंचित रहना → शिक्षा तक पहुंच में असमानता और ड्रॉपआउट दर में वृद्धि → सामाजिक न्याय और मानव पूंजी विकास पर नकारात्मक प्रभाव → सुशासन और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का पद एक संवैधानिक निकाय है।
2. CAG केंद्र और राज्य सरकारों के सभी खर्चों का लेखा-जोखा करता है।
3. CAG की रिपोर्टों पर संसद में लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा विचार किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि CAG का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है। कथन 2 सही है क्योंकि CAG का कार्य केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्ययों का लेखा-जोखा करना है। कथन 3 सही है क्योंकि CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के समक्ष रखता है, और फिर लोक लेखा समिति (PAC) इन रिपोर्टों की जांच करती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं के संदर्भ में सही नहीं है?
- ये योजनाएँ शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं।
- पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएँ कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए होती हैं।
- पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए होती हैं।
- CAG की रिपोर्टें केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच करती हैं।
उत्तर: CAG की रिपोर्टें केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच करती हैं। — विकल्प (d) सही नहीं है। CAG केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के खर्चों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच करता है, जैसा कि हालिया रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार की योजनाओं से संबंधित है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं के संदर्भ में हालिया CAG रिपोर्ट के निष्कर्षों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: CAG की संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 148) और उसके मुख्य कार्य (लेखापरीक्षा) का संक्षिप्त विवरण। सामाजिक न्याय के संदर्भ में उसकी भूमिका का उल्लेख।
2. सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में CAG की भूमिका:
• सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी: यह सुनिश्चित करना कि योजनाएँ लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचें।
• वित्तीय अनियमितताओं और अपव्यय को उजागर करना: सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकना।
• जवाबदेही तय करना: सरकारी विभागों और अधिकारियों को उनके प्रदर्शन के लिए जवाबदेह ठहराना।
• नीति निर्माण में सहायता: लेखापरीक्षा निष्कर्षों के माध्यम से नीतियों में सुधार के लिए इनपुट प्रदान करना।
• कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा: विशेष रूप से SC/ST, महिलाओं और बच्चों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच।
3. हालिया CAG रिपोर्ट के निष्कर्षों की चर्चा (SC/ST छात्रवृत्ति योजनाओं के संदर्भ में):
• अपर्याप्त प्रचार: योजनाओं के बारे में जागरूकता की कमी।
• पात्र छात्रों का छूटना: प्रचार की कमी के कारण पात्र SC/ST छात्रों को लाभ न मिलना।
• आवेदन प्रक्रिया में अनियमितताएँ: आय/जाति प्रमाण पत्रों का संलग्न न होना।
• निजी संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी: प्रबंधन कोटा के तहत अपात्र छात्रों को छात्रवृत्ति।
• छात्रवृत्ति भुगतान में देरी या गैर-भुगतान: छात्रों के बैंक खातों में समस्याओं के कारण।
• ड्रॉपआउट दर: छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्रों का अगले वर्ष पढ़ाई छोड़ देना।
4. समालोचनात्मक विश्लेषण:
• CAG की रिपोर्टें केवल सिफारिशी प्रकृति की होती हैं, बाध्यकारी नहीं।
• रिपोर्टों पर सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई की कमी।
• लेखापरीक्षा के दायरे और गहराई की सीमाएँ।
• CAG की भूमिका ‘पोस्टमॉर्टम’ प्रकृति की है, जो घटना के बाद की जांच करती है।
5. निष्कर्ष: सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को प्राप्त करने में CAG की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सरकार की इच्छाशक्ति और रिपोर्टों पर कार्रवाई पर निर्भर करती है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता के लिए CAG के निष्कर्षों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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