दिल्ली हाईकोर्ट ने 2030 तक रेबीज़ उन्मूलन के लिए सरकार से जवाब तलब किया

Delhi High Court seeks government response on action plan for eliminating rabies by 2030 — diagram

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2030 तक रेबीज़ उन्मूलन के लिए सरकार से जवाब तलब किया

Rabies Elimination PlanSupreme CourtIssued suo motu directivesDelhi HCMonitors compliance, seeks action planMCD/NDMCConducts sterilisation/vaccination campsABC CentersEstablished per districtTargetRabies-free by 2030
Rabies Elimination Plan

✎ दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2030 तक आवारा कुत्तों से रेबीज उन्मूलन के लिए दिल्ली सरकार से कार्ययोजना पर जवाब मांगा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी का हिस्सा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
  • Prelims: रेबीज उन्मूलन, पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्र, जनहित याचिका (PIL), दिल्ली उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, पशु कल्याण
  • Essay: सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण: एक संतुलित दृष्टिकोण, न्यायपालिका की भूमिका: शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना

त्वरित पुनरावृत्ति: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2030 तक आवारा कुत्तों से रेबीज उन्मूलन के लिए दिल्ली सरकार से कार्ययोजना पर जवाब मांगा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी का हिस्सा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से आवारा कुत्तों से रेबीज को 2030 तक खत्म करने के लिए एक कार्ययोजना लागू करने हेतु उठाए जाने वाले कदमों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान (suo motu) जनहित याचिका (Public Interest Litigation) की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए पंजीकृत किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने मई में सभी उच्च न्यायालयों को आवारा कुत्तों के प्रबंधन और हमलों से संबंधित अपने निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान कार्यवाही दर्ज करने का निर्देश दिया था।

पृष्ठभूमि

  • सर्वोच्च न्यायालय ने देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण कार्यात्मक पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control – ABC) केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया था।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जनसंख्या घनत्व और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी ढांचे का विस्तार करने को कहा था।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने अगस्त में दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) को अपने-अपने क्षेत्रों में एक-एक वार्ड की पहचान करने और आवारा कुत्तों के बंध्याकरण (sterilisation) और टीकाकरण (vaccination) के लिए शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया था।
  • अदालत ने MCD और NDMC को इस संबंध में अपनी स्थिति रिपोर्ट (status report) दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।
  • न्यायालय ने मामले में न्याय मित्र (amicus curiae) द्वारा दिए गए सुझावों और सिफारिशों पर दिल्ली सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

रेबीज और इसका उन्मूलन

  • रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है जो संक्रमित जानवरों, विशेषकर कुत्तों के काटने से मनुष्यों में फैलती है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) को प्रभावित करती है और एक बार लक्षण विकसित होने के बाद यह लगभग हमेशा घातक होती है।
  • भारत में रेबीज का उन्मूलन एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य है, क्योंकि यह देश में एक बड़ी समस्या है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
  • रेबीज उन्मूलन के लिए मुख्य रणनीतियों में आवारा कुत्तों का सामूहिक टीकाकरण (mass vaccination) और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम शामिल हैं, जो कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रेबीज से होने वाली 99 प्रतिशत मानवीय मौतें कुत्तों के काटने से होती हैं, और प्रभावी टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है।
  • भारत सरकार ने 2030 तक रेबीज को खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ‘राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम’ (National Rabies Control Programme) जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्देश रेबीज उन्मूलन हेतु कार्ययोजना पर सरकार से जवाब मांगा गया, जो इस मुद्दे की गंभीरता और न्यायिक सक्रियता को दर्शाता है।
सुओ मोटो जनहित याचिका उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेना, आवारा कुत्तों के प्रबंधन और हमलों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश प्रत्येक जिले में कम से कम एक कार्यात्मक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र (Animal Birth Control Centre) स्थापित करने का निर्देश, जो देशव्यापी समाधान की आवश्यकता पर बल देता है।
पायलट परियोजना MCD और NDMC को नसबंदी और टीकाकरण शिविर आयोजित करने का निर्देश, जो जमीनी स्तर पर समाधान खोजने का एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है।
अमिकस क्यूरी की भूमिका न्यायालय को विशेषज्ञ सलाह प्रदान करना, जिससे मामले की जटिलताओं को समझने और प्रभावी समाधान सुझाने में मदद मिलती है।

महत्व

सार्वजनिक स्वास्थ्य

  • रेबीज एक घातक जूनोटिक रोग (Zoonotic Disease) है, जिसका उन्मूलन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • रेबीज के मामलों में कमी से मानव जीवन की रक्षा होगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम होगा।

पशु कल्याण

  • आवारा कुत्तों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण शामिल है, पशु कल्याण सुनिश्चित करता है।
  • मानवीय तरीके से कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना और उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना नैतिक जिम्मेदारी है।

शासन और न्यायिक सक्रियता

  • न्यायालयों द्वारा सरकार को कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश देना, शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
  • सुओ मोटो जनहित याचिकाएं (Suo Motu Public Interest Litigations) सामाजिक महत्व के मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप का एक प्रभावी माध्यम हैं।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • रेबीज के डर से मुक्ति से समुदाय में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।
  • रेबीज के इलाज पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, जिससे आर्थिक बोझ कम होगा।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढांचे का अभाव

  • पर्याप्त पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों (Animal Birth Control Centres) और पशु चिकित्सा सुविधाओं की कमी।
  • कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने और टीकाकरण के लिए प्रशिक्षित कर्मियों और संसाधनों का अभाव।

2. निगरानी और डेटा प्रबंधन

  • रेबीज के मामलों की सटीक निगरानी और डेटा संग्रह में चुनौतियाँ।
  • टीकाकरण कवरेज और नसबंदी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने में कठिनाई।

3. जन जागरूकता और सहयोग

  • रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के महत्व के बारे में जन जागरूकता की कमी।
  • समुदाय का सहयोग प्राप्त करने और पालतू जानवरों के टीकाकरण को बढ़ावा देने में चुनौतियाँ।

4. अंतर-विभागीय समन्वय

  • पशुपालन, स्वास्थ्य, शहरी विकास और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी।
  • नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण का अभाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी रेबीज के प्रसार और मानव-पशु संघर्ष का प्रमुख कारण।
टीकाकरण और नसबंदी की धीमी गति रेबीज उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा।
संसाधनों की कमी पशु चिकित्सा सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार में बाधा।
कानूनों का अपर्याप्त प्रवर्तन पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) और संबंधित नियमों का प्रभावी ढंग से लागू न होना।
जनता की भागीदारी का अभाव रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों की सफलता के लिए सामुदायिक सहयोग महत्वपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (National Rabies Control Programme)

आगे की राह

  • प्रत्येक जिले में पर्याप्त पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों (Animal Birth Control Centres) की स्थापना और उन्हें पूरी तरह से कार्यात्मक बनाना।
  • आवारा कुत्तों के लिए व्यापक नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम (Animal Birth Control and Anti-Rabies Vaccination – ABC-ARV) को प्राथमिकता देना।
  • रेबीज के मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली विकसित करना।
  • रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
  • पशुपालन, स्वास्थ्य, शहरी विकास और स्थानीय निकायों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
  • पशु चिकित्सा कर्मियों और स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • पालतू जानवरों के अनिवार्य टीकाकरण को बढ़ावा देना और उसका अनुपालन सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रेबीज उन्मूलन · पशु जन्म नियंत्रण · आवारा कुत्ते · जनहित याचिका · उच्च न्यायालय की भूमिका · सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश · स्वास्थ्य नीति · सार्वजनिक स्वास्थ्य · केंद्र-राज्य सहयोग · न्यायिक सक्रियता · पशु कल्याण · सतत विकास लक्ष्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार का संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राणियों के प्रति दया का भाव’}

अवधारणा प्रवाह

दिल्ली उच्च न्यायालय का सुओ मोटो संज्ञान  →  सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन  →  रेबीज उन्मूलन कार्ययोजना पर सरकार से जवाब  →  पशु जन्म नियंत्रण और टीकाकरण कार्यक्रमों का विस्तार  →  रेबीज मुक्त भारत 2030 का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेबीज एक विषाणुजनित रोग है जो संक्रमित पशुओं के काटने से फैलता है।
2. भारत ने वर्ष 2030 तक रेबीज के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।
3. पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम रेबीज नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रेबीज (Rabies) एक घातक विषाणुजनित रोग है जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों, जैसे कुत्तों, बिल्लियों, चमगादड़ों आदि के काटने या खरोंचने से फैलता है। कथन 2 सही है। भारत सरकार ने ‘राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम’ (National Rabies Control Programme) के तहत वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। कथन 3 सही है। पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control – ABC) कार्यक्रम, जिसमें आवारा कुत्तों का बंध्याकरण (sterilization) और टीकाकरण (vaccination) शामिल है, रेबीज नियंत्रण और मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए एक प्रभावी और मानवीय रणनीति मानी जाती है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘जनहित याचिका’ (Public Interest Litigation – PIL) के संबंध में सही नहीं है?

  1. इसे किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा सार्वजनिक हित के मामलों में दायर किया जा सकता है।
  2. यह न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
  3. यह केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही दायर की जा सकती है।
  4. इसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना है।

उत्तर: यह केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही दायर की जा सकती है। — जनहित याचिका (PIL) सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्च न्यायालयों में भी दायर की जा सकती है। यह किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा सार्वजनिक हित के मामलों में दायर की जा सकती है, न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, और इसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ रेबीज उन्मूलन के लिए भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** रेबीज की समस्या और भारत के 2030 तक उन्मूलन के लक्ष्य का संक्षिप्त उल्लेख। न्यायिक हस्तक्षेप के संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश का उल्लेख।
2. **न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका:**
* **न्यायिक सक्रियता:** जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से न्यायालयों का सक्रिय होना।
* **कार्यकारी जवाबदेही:** सरकारों को कार्य योजना प्रस्तुत करने और निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य करना।
* **नीति निर्माण में प्रभाव:** न्यायालयों द्वारा दिए गए सुझावों और सिफारिशों का नीति निर्माण पर प्रभाव।
* **निगरानी तंत्र:** निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही।
3. **सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का महत्व:**
* मई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सभी उच्च न्यायालयों को दिए गए निर्देश।
* प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण कार्यात्मक पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्र स्थापित करने का निर्देश।
* राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनसंख्या घनत्व और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी ढांचे का विस्तार करने का निर्देश।
* इन निर्देशों का राष्ट्रीय स्तर पर रेबीज नियंत्रण प्रयासों को गति देने में भूमिका।
4. **उच्च न्यायालयों की भूमिका (दिल्ली उच्च न्यायालय के संदर्भ में):**
* सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करना।
* दिल्ली सरकार, MCD और NDMC को कार्य योजना और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश।
* पायलट परियोजनाओं के रूप में बंध्याकरण और टीकाकरण शिविर आयोजित करने का निर्देश।
* स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
5. **समालोचनात्मक विश्लेषण:**
* **सकारात्मक पक्ष:** सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण में सुधार, सरकारों पर दबाव, कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा।
* **चुनौतियाँ/सीमाएँ:** न्यायिक अतिरेक (judicial overreach) की संभावना, संसाधनों की कमी, कार्यान्वयन में देरी, केवल न्यायिक निर्देशों से समस्या का पूर्ण समाधान न होना।
6. **निष्कर्ष:** रेबीज उन्मूलन के लिए न्यायिक हस्तक्षेप एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक है, लेकिन इसकी सफलता के लिए सरकार, नागरिक समाज और स्थानीय निकायों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। सतत और प्रभावी कार्यान्वयन पर बल।

स्रोत: The Indian Express

Delhi PCS (DSSSB) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: दिल्ली उच्च न्यायालय ने किस वर्ष तक दिल्ली से रेबीज को समाप्त करने के लिए सरकारी योजना पर जवाब मांगे हैं?

  1. 2025
  2. 2030
  3. 2035
  4. 2040

उत्तर: 2030 — दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से रेबीज उन्मूलन के लिए 2030 तक का कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा है।

Mains: दिल्ली में रेबीज उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित कार्य योजना की प्रमुख चुनौतियों एवं उनके समाधानों पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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