23 Jul नशामुक्ति सेवाओं के विस्तार से जुड़ी केंद्र सरकार की नई पहल: यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, मानव संसाधन से संबंधित विषय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराध
- Prelims: नशा मुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA), अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY), AIIMS NDDTC सर्वेक्षण
- Essay: भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग: एक सामाजिक-आर्थिक चुनौती और समाधान, नशा मुक्त समाज की ओर: सरकारी पहल और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना भारत में मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलें हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने हाल ही में मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के उपायों को मजबूत करने, नशामुक्ति सेवाओं का विस्तार करने और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत सहायता को सुव्यवस्थित करने की जानकारी दी है। मंत्रालय ने निधि जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और देश भर में पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के सरकारी प्रयासों में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हो सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या है, जिसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ हैं।
- एम्स के राष्ट्रीय मादक पदार्थ निर्भरता उपचार केंद्र (NDDTC) द्वारा किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, वयस्कों (18-75 वर्ष) में शराब का सेवन सबसे अधिक प्रचलित है, जिसमें लगभग 15.10 करोड़ लोग शामिल हैं।
- बच्चों और किशोरों (10-17 वर्ष) में भी मादक पदार्थों का सेवन चिंताजनक स्तर पर है, जिसमें अफीम, शराब और गांजा प्रमुख हैं।
- सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें जागरूकता, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास शामिल हैं।
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है।
- नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) इस दिशा में प्रमुख सरकारी पहलें हैं।
नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) क्या हैं?
- नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था और अगस्त 2023 तक सभी जिलों में लागू किया गया, जो मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक है।
- इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं तक पहुंच बनाना है, ताकि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों के बारे में शिक्षित किया जा सके।
- NMBA सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसमें ‘नशा मुक्ति मित्र’ जैसे स्वयंसेवक शामिल हैं, और शिक्षण संस्थानों में भी पहुंच गतिविधियां संचालित करता है।
- राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक व्यापक और साक्ष्य-आधारित रणनीति है, जिसका लक्ष्य मादक पदार्थों की मांग में कमी लाना है।
- यह योजना निवारक शिक्षा, जागरूकता पैदा करने, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी अस्पतालों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- NAPDDR के तहत, मंत्रालय देश भर में एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA), सामुदायिक सहयोग आधारित सहकर्मी नेतृत्व केंद्र (CPLI), पहुंच और ड्रॉप-इन केंद्र, जिला नशामुक्ति केंद्र (DDAC) और नशा उपचार केंद्र (ATF) जैसे विभिन्न संस्थानों को सहायता प्रदान करता है।
- यह योजना AIIMS NDDTC द्वारा किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित है, जो देश में मादक पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न का आकलन करता है।
- मंत्रालय ने इन योजनाओं के तहत निधि जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी लागू की है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मादक पदार्थों की मांग में कमी | यह नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की मूल समस्या को संबोधित करता है, जिससे समाज पर इसका समग्र प्रभाव कम होता है। |
| नशामुक्ति सेवाओं का विस्तार | उपचार और पुनर्वास तक पहुंच बढ़ाता है, जिससे अधिक प्रभावित व्यक्तियों को सहायता मिल पाती है। |
| केंद्र प्रायोजित योजनाओं का सुव्यवस्थित कार्यान्वयन | निधि जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाता है और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है, जिससे सेवाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित होती है। |
| राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान (नशा मुक्त भारत अभियान) | मादक द्रव्यों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करता है, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के बीच। |
| डेटा-आधारित रणनीति | एम्स के सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित है, जो हस्तक्षेपों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मादक पदार्थों के उपयोग के पैटर्न और सीमा की पहचान करता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली सामाजिक समस्याओं जैसे अपराध, हिंसा और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को कम करने में मदद करता है।
- समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को मादक द्रव्यों के सेवन से बचाता है, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
- पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में फिर से शामिल होने में सहायता करता है, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व
- मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारियों और मृत्यु दर को कम करने में योगदान देता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम होता है।
- उपचार और परामर्श सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
- निवारक शिक्षा और जागरूकता अभियानों के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देता है।
प्रशासनिक महत्व
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाता है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है।
- निधि जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और निगरानी तंत्र स्थापित करके प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है।
- राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और गैर सरकारी संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे एक एकीकृत दृष्टिकोण संभव होता है।
चुनौतियाँ
1. व्यापक पहुंच और कवरेज
- भारत जैसे बड़े और विविध देश में सभी प्रभावित व्यक्तियों तक पहुंचना और उन्हें सेवाएं प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है।
- दूरदराज के क्षेत्रों और ग्रामीण आबादी तक सेवाओं का विस्तार करना कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य
2. कलंक और सामाजिक स्वीकृति
- मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण कई व्यक्ति सहायता मांगने से कतराते हैं।
- समुदाय में नशामुक्ति को लेकर जागरूकता और स्वीकृति की कमी उपचार में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, नैतिकता
3. संसाधनों की कमी
- नशामुक्ति केंद्रों, प्रशिक्षित कर्मियों और वित्तीय संसाधनों की कमी सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।
- विशेषज्ञ उपचार और पुनर्वास सुविधाओं की आवश्यकता हमेशा पूरी नहीं हो पाती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र, शासन
4. पुनरावृत्ति की उच्च दर
- उपचार के बाद भी मादक द्रव्यों के सेवन की पुनरावृत्ति (relapse) एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए निरंतर सहायता और अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
- सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारकों के कारण व्यक्ति फिर से नशे की ओर लौट सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: मानव व्यवहार, स्वास्थ्य
5. अवैध मादक पदार्थों की उपलब्धता
- अवैध मादक पदार्थों की निरंतर उपलब्धता और तस्करी मांग में कमी लाने के प्रयासों को कमजोर करती है।
- सीमा पार से होने वाली तस्करी और घरेलू उत्पादन पर नियंत्रण एक जटिल मुद्दा है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नशीले पदार्थों का बढ़ता उपयोग | विशेषकर बच्चों और किशोरों में मादक द्रव्यों के सेवन में वृद्धि चिंता का विषय है, जो भविष्य की पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है। |
| शराब और गांजा का व्यापक सेवन | सर्वेक्षण के अनुसार, शराब और गांजा का सेवन सबसे अधिक है, जो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती प्रस्तुत करता है। |
| सेवाओं की असमान पहुंच | देश के विभिन्न हिस्सों में नशामुक्ति और पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में असमानता है। |
| डेटा की निरंतर निगरानी | मादक पदार्थों के उपयोग के पैटर्न और सीमा पर नवीनतम और सटीक डेटा की निरंतर निगरानी आवश्यक है ताकि प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें। |
| गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका | गैर-सरकारी संगठनों को अनुदान जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के बावजूद, उनकी क्षमता निर्माण और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR)
- अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)
- नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA)
आगे की राह
- नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की संख्या और गुणवत्ता में वृद्धि करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- मादक द्रव्यों के सेवन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल पाठ्यक्रम में निवारक शिक्षा को शामिल करना।
- अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और उपलब्धता पर अंकुश लगाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत करना।
- नशामुक्ति के बाद व्यक्तियों को रोजगार और सामाजिक एकीकरण के अवसर प्रदान करके पुनरावृत्ति दर को कम करना।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण तंत्र को मजबूत करना ताकि मादक पदार्थों के उपयोग के बदलते पैटर्न को समझा जा सके।
- समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों और सहकर्मी सहायता समूहों को बढ़ावा देना ताकि सामाजिक समर्थन प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
- नशामुक्ति सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को एकीकृत करना, क्योंकि अक्सर मादक द्रव्यों का सेवन मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा होता है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मादक पदार्थों की मांग में कमी · नशा मुक्त भारत अभियान · राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना · सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय · केंद्र प्रायोजित योजनाएं · पुनर्वास सेवाएं · सामुदायिक भागीदारी · मादक द्रव्य दुरुपयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
मादक पदार्थों के दुरुपयोग की पहचान (एम्स सर्वेक्षण) → मांग में कमी लाने की व्यापक रणनीति (NAPDDR) → जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी (NMBA) → नशामुक्ति और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार → केंद्र प्रायोजित योजनाओं का सुव्यवस्थित कार्यान्वयन → सामाजिक न्याय और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
2. इसका उद्देश्य निवारक शिक्षा, जागरूकता पैदा करने, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
3. यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों में मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने पर केंद्रित है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है और इसका उद्देश्य निवारक शिक्षा, जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह योजना देश भर में लागू है, न कि केवल शहरी क्षेत्रों में।
Q2. नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था।
2. यह मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक है।
3. यह अभियान केवल युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। नशा मुक्त भारत अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था और यह मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक है। कथन 3 गलत है क्योंकि अभियान ने युवाओं और महिलाओं सहित 29.68 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंच बनाई है, लेकिन यह केवल इन्हीं पर केंद्रित नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। इस संदर्भ में, नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) की भूमिका पर प्रकाश डालें।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की वर्तमान स्थिति और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का संक्षिप्त परिचय दें। फिर, सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों, जैसे जागरूकता अभियान, नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र, वित्तीय सहायता और नीतिगत पहलों का विस्तार से वर्णन करें। दूसरे भाग में, नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) के उद्देश्यों, कार्यान्वयन और अब तक की उपलब्धियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करें। अंत में, इन पहलों की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें, उनकी सफलताओं और चुनौतियों दोनों पर चर्चा करें, और भविष्य के लिए कुछ सुझावों के साथ निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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