09 Sep बीपीसीएल नेतृत्व में ऊर्जा फंड: ₹1 लाख करोड़ की बचत का लक्ष्य, स्टार्टअप्स को मिलेगा समर्थन
✎ यह पहल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने और रिफाइनिंग उद्योग की ऊर्जा लागत को ₹1 लाख करोड़ तक कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा एक रणनीतिक कदम है, जिसमें एक सेक्शन 8 कंपनी और एक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- Prelims: डीप-टेक स्टार्टअप्स, वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), सेक्शन 8 कंपनी, ऊर्जा दक्षता, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग
- Essay: भारत में नवाचार और उद्यमिता का महत्व, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता, सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: यह पहल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने और रिफाइनिंग उद्योग की ऊर्जा लागत को ₹1 लाख करोड़ तक कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा एक रणनीतिक कदम है, जिसमें एक सेक्शन 8 कंपनी और एक वैकल्पिक निवेश फंड शामिल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों का एक समूह, जिसमें HPCL शामिल है, ऊर्जा क्षेत्र की तकनीकी चुनौतियों को हल करने के उद्देश्य से एक डीप-टेक इनक्यूबेशन और निवेश इकोसिस्टम स्थापित कर रहा है। इसका लक्ष्य भारत के रिफाइनिंग उद्योग द्वारा प्रति वर्ष ऊर्जा पर खर्च किए जाने वाले लगभग ₹1 लाख करोड़ को कम करना है। इस पहल में MC2 प्लस नामक एक सेक्शन 8 कंपनी और एक वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) शामिल होगा, जो ऊर्जा-केंद्रित स्टार्टअप्स में निवेश करेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत का रिफाइनिंग उद्योग प्रति वर्ष लगभग 270 मिलियन टन की क्षमता रखता है और रिफाइनिंग प्रक्रिया में ऊर्जा पर लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च करता है।
- बदलते ऊर्जा परिदृश्य के कारण ऊर्जा स्रोतों और प्रौद्योगिकियों में विविधता आई है, जिसमें ग्रिड पावर, कैप्टिव जनरेशन, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण शामिल हैं।
- भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है, जिसमें 1.15 लाख से अधिक स्टार्टअप DPIIT के साथ पंजीकृत हैं और 130 से अधिक यूनिकॉर्न हैं।
- हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र में अधिकांश नवाचार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर केंद्रित हैं, जबकि कोर ऊर्जा क्षेत्र में डीप-टेक नवाचार की आवश्यकता है।
- यह पहल बड़ी ऊर्जा कंपनियों के स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ जुड़ने के तरीके में एक बदलाव का प्रतीक है, जो पारंपरिक खरीद से हटकर सक्रिय रूप से समस्याओं की पहचान करने, अनुसंधान बुनियादी ढांचा प्रदान करने और उद्यमियों को सलाह देने पर केंद्रित है।
- इस पहल का उद्देश्य अकादमिक और वैज्ञानिक समुदायों को बड़ी कंपनियों की शक्ति के साथ जोड़कर नवाचार को बढ़ावा देना है।
डीप-टेक स्टार्टअप्स और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) क्या हैं?
- डीप-टेक स्टार्टअप्स (Deep-tech Startups) वे कंपनियां हैं जो मौलिक वैज्ञानिक खोजों या इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित होती हैं, जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना होता है।
- ये स्टार्टअप्स अक्सर गहन अनुसंधान एवं विकास (R&D) में संलग्न होते हैं और इन्हें बाजार में आने में लंबा समय लग सकता है, लेकिन इनके पास परिवर्तनकारी क्षमता होती है।
- वैकल्पिक निवेश फंड (Alternative Investment Fund – AIF) भारत में SEBI (वैकल्पिक निवेश फंड) विनियम, 2012 के तहत परिभाषित एक फंड है जो पारंपरिक निवेश मार्गों जैसे स्टॉक, बॉन्ड और डिबेंचर के अलावा अन्य परिसंपत्तियों में निवेश करता है।
- AIF को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: श्रेणी I (स्टार्टअप्स, SME, सामाजिक उद्यमों में निवेश), श्रेणी II (इक्विटी, डेट, रियल एस्टेट में निवेश), और श्रेणी III (जटिल व्यापार रणनीतियों का उपयोग)।
- यह प्रस्तावित ‘इंडिया एनर्जी फंड’ एक AIF होगा, जो स्टार्टअप्स में निवेश करेगा, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में।
- सेक्शन 8 कंपनी (Section 8 Company) भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत एक गैर-लाभकारी संगठन है जिसका उद्देश्य कला, विज्ञान, वाणिज्य, धर्मार्थ या किसी अन्य उपयोगी वस्तु को बढ़ावा देना है।
- MC2 प्लस नामक सेक्शन 8 कंपनी एक इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर के रूप में काम करेगी, जो डीप-टेक स्टार्टअप्स को आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
- इनक्यूबेटर (Incubator) शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करते हैं, जबकि एक्सेलेरेटर (Accelerator) तेजी से विकास के लिए संरचित कार्यक्रम पेश करते हैं।
- यह पहल ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) में सुधार, लागत कम करने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों का संघ | ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख तकनीकी चुनौतियों का समाधान करने के लिए सामूहिक प्रयास। |
| MC2 प्लस (धारा 8 कंपनी) | डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर के रूप में कार्य करेगा। |
| इंडिया एनर्जी फंड (वैकल्पिक निवेश फंड – AIF) | ऊर्जा-केंद्रित स्टार्टअप्स में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी प्रदान करेगा। |
| उद्योग की समस्याओं की पहचान | पारंपरिक खरीद से हटकर, उद्योग की वास्तविक समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित। |
| अनुसंधान अवसंरचना और मेंटरशिप | स्टार्टअप्स को आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करना। |
| ₹1 लाख करोड़ की बचत का लक्ष्य | परिष्करण (Refining) प्रक्रिया में ऊर्जा लागत को कम करके महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारतीय रिफाइनिंग उद्योग प्रति वर्ष ऊर्जा पर लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च करता है। इस पहल से इस लागत में कमी लाकर महत्वपूर्ण आर्थिक बचत की जा सकती है, जिससे कंपनियों की लाभप्रदता बढ़ेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश से नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान मिलेगा।
- ऊर्जा दक्षता में सुधार से आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और व्यापार घाटा कम हो सकता है।
तकनीकी और नवाचार महत्व
- यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में ‘डीप-टेक’ नवाचार को बढ़ावा देगी, जिससे जटिल तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजा जा सकेगा।
- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग से अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे भारत वैश्विक ऊर्जा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बन सकता है।
- हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen), ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा (Round-the-clock Renewable Power) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी आएगी।
रणनीतिक महत्व
- यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बाहरी झटकों के प्रति इसकी संवेदनशीलता कम होगी।
- यह स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Startup Ecosystem) को मजबूत करेगा, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में, जो अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर अधिक केंद्रित रहा है।
- यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) में तेजी लाने में मदद करेगी और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी एकीकरण और स्केलिंग
- विकसित की गई डीप-टेक प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर औद्योगिक प्रक्रियाओं में सफलतापूर्वक एकीकृत करना एक चुनौती हो सकती है।
- प्रोटोटाइप से वाणिज्यिक उत्पादन तक स्केलिंग के लिए महत्वपूर्ण पूंजी, विशेषज्ञता और समय की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, औद्योगिक नीति
2. फंडिंग और निवेश जोखिम
- डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश में उच्च जोखिम और लंबी परिपक्वता अवधि होती है, जिससे निवेशकों को आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- पर्याप्त और निरंतर फंडिंग सुनिश्चित करना, विशेष रूप से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स के लिए, महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र
3. प्रतिभा और विशेषज्ञता की उपलब्धता
- ऊर्जा क्षेत्र में डीप-टेक नवाचार के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रतिभा की आवश्यकता होती है, जिसकी उपलब्धता सीमित हो सकती है।
- अकादमिक और औद्योगिक विशेषज्ञों के बीच प्रभावी सहयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
4. नियामक और नीतिगत बाधाएँ
- ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार के लिए अनुकूल नियामक ढांचा और नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- नई प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षा मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं को विकसित करना समय लेने वाला हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, औद्योगिक नीति
5. बाजार अपनाने की दर
- नई प्रौद्योगिकियों को उद्योग द्वारा व्यापक रूप से अपनाने के लिए लागत-प्रभावशीलता, विश्वसनीयता और प्रदर्शन का प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण है।
- मौजूदा बुनियादी ढांचे और प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| परिष्करण में उच्च ऊर्जा व्यय | भारतीय रिफाइनिंग उद्योग प्रति वर्ष ऊर्जा पर ₹1 लाख करोड़ खर्च करता है, जो परिचालन लागत को बढ़ाता है। |
| बदलते ऊर्जा परिदृश्य | बिजली और ईंधन के कई विकल्प (ग्रिड, कैप्टिव, नवीकरणीय) और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता जटिलता बढ़ाती है। |
| डीप-टेक स्टार्टअप्स का कम प्रतिनिधित्व | भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा क्षेत्र के डीप-टेक स्टार्टअप्स का अनुपात अपेक्षाकृत कम है, खासकर EV से इतर। |
| बड़े उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच तालमेल की कमी | पारंपरिक रूप से बड़े ऊर्जा निगमों और छोटे, फुर्तीले स्टार्टअप्स के बीच सहयोग सीमित रहा है। |
| नवाचार के लिए अनुसंधान अवसंरचना की कमी | डीप-टेक स्टार्टअप्स को अक्सर आवश्यक अनुसंधान सुविधाओं और विशेषज्ञता तक पहुंच नहीं मिल पाती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
- स्टार्टअप इंडिया (Startup India)
आगे की राह
- डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, जिसमें प्रयोगशालाएं, परीक्षण सुविधाएं और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हो।
- इंडिया एनर्जी फंड जैसे वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) को पर्याप्त पूंजी और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना।
- अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि ज्ञान साझाकरण और संयुक्त नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
- ऊर्जा क्षेत्र में डीप-टेक नवाचार के लिए एक अनुकूल नियामक और नीतिगत ढांचा तैयार करना, जिसमें त्वरित अनुमोदन और प्रोत्साहन शामिल हों।
- ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और कार्बन कैप्चर जैसी प्रमुख तकनीकी चुनौतियों पर केंद्रित विशिष्ट इनक्यूबेशन और एक्सेलेरेशन कार्यक्रम शुरू करना।
- स्टार्टअप्स को बड़े ऊर्जा निगमों के साथ पायलट परियोजनाओं और वाणिज्यिक तैनाती के अवसर प्रदान करना, जिससे उनकी प्रौद्योगिकियों का सत्यापन और स्केलिंग हो सके।
- डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस और नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बनाना ताकि उन्हें संभावित निवेशकों, भागीदारों और ग्राहकों से जोड़ा जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
डीप-टेक स्टार्टअप · ऊर्जा क्षेत्र · वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) · पेट्रोलियम शोधन · ऊर्जा दक्षता · नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) · स्टार्टअप इंडिया · हरित हाइड्रोजन · ऊर्जा संक्रमण · आत्मनिर्भर भारत · औद्योगिक नवाचार
अवधारणा प्रवाह
उच्च ऊर्जा लागत और तकनीकी चुनौतियाँ → सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का संघ → MC2 प्लस (इनक्यूबेटर) और इंडिया एनर्जी फंड (AIF) → डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश और मेंटरशिप → ऊर्जा दक्षता में सुधार और नवाचार → ₹1 लाख करोड़ की बचत और ऊर्जा सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) भारत में SEBI द्वारा विनियमित होते हैं।
2. ‘डीप-टेक’ स्टार्टअप आमतौर पर मौलिक वैज्ञानिक खोजों या इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित होते हैं।
3. भारत में पेट्रोलियम शोधन उद्योग प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये ऊर्जा पर खर्च करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है: वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) भारत में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा विनियमित होते हैं।
कथन 2 सही है: डीप-टेक स्टार्टअप वे होते हैं जो महत्वपूर्ण वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग प्रगति पर आधारित होते हैं, जिनमें अक्सर लंबा अनुसंधान और विकास चक्र होता है।
कथन 3 सही है: समाचार के अनुसार, भारत का शोधन उद्योग अकेले शोधन प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली ऊर्जा पर प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है।
Q2. भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अधिकांश नवाचार इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र की ओर केंद्रित हैं।
2. डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) भारत में स्टार्टअप्स को पंजीकृत करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है: समाचार के अनुसार, भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार का एक बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र की ओर झुका हुआ है।
कथन 2 सही है: DPIIT भारत में स्टार्टअप्स को मान्यता और पंजीकरण प्रदान करता है, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों तक पहुँच मिलती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सार्वजनिक क्षेत्र के तेल और गैस कंपनियों द्वारा डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक ऊर्जा फंड की स्थापना का महत्व क्या है? भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में यह पहल कितनी सहायक हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सार्वजनिक क्षेत्र के तेल और गैस कंपनियों (जैसे BPCL, HPCL) द्वारा डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए ‘इंडिया एनर्जी फंड’ और MC2 प्लस जैसे इनक्यूबेशन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना का संक्षिप्त परिचय दें।
2. महत्व: इस पहल के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं के तहत समझाएं:
क. ऊर्जा दक्षता: शोधन उद्योग में प्रति वर्ष 1 लाख करोड़ रुपये की ऊर्जा लागत में कटौती की क्षमता।
ख. नवाचार को बढ़ावा: डीप-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, अनुसंधान अवसंरचना और मेंटरशिप प्रदान करना।
ग. उद्योग-अकादमिक सहयोग: बड़े निगमों, शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों को एक साथ लाना।
घ. ऊर्जा संक्रमण: हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश।
ङ. आत्मनिर्भरता: महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू क्षमताओं का विकास।
च. स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विविधीकरण: EV केंद्रित स्टार्टअप्स से हटकर कोर ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
3. सहायक होने की सीमा: यह पहल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में कितनी सहायक हो सकती है, इसका विश्लेषण करें:
क. सकारात्मक पक्ष: बड़े पैमाने पर निवेश, उद्योग की विशेषज्ञता, बाजार तक पहुंच, और नीतिगत समर्थन से स्टार्टअप्स को तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। यह ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा।
ख. चुनौतियाँ/सीमाएँ: डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए लंबा विकास चक्र, उच्च जोखिम, पर्याप्त पूंजी की निरंतर उपलब्धता, और नियामक बाधाएं। यह भी बताएं कि क्या यह फंड पर्याप्त होगा या और अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।
4. निष्कर्ष: भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए इस पहल के दीर्घकालिक दृष्टिकोण और संभावित प्रभावों को संक्षेप में प्रस्तुत करें, जिसमें ऊर्जा स्वतंत्रता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर जोर दिया जाए।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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