महानदी कोलफील्ड्स में ई-कचरा प्रबंधन : छठे विशेष अभियान की प्रमुख पहल

महानदी कोलफील्ड्स में ई-कचरा प्रबंधन : छठे विशेष अभियान की प्रमुख पहल

महानदी कोलफील्ड्स में ई-कचरा प्रबंधन : छठे विशेष अभियान की प्रमुख पहल

MCL में ई-कचरा प्रबंधन सुधारअभियान शुरू31 अक्टूबर 2026 तकई-कचरा संग्रहकियोस्क स्थापितजागरूकता अभियानसमुदाय मेंनिपटान लक्ष्य600 मीट्रिक टनराजस्व अर्जनHEMM बैटरियों से
MCL में ई-कचरा प्रबंधन सुधार

✎ ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (प्रभावी 1 अप्रैल 2023) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) पर आधारित हैं और CPCB इनकी निगरानी करता है; MCL की HEMM बैटरियां बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण: प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: संसाधन-कुशलता, चक्रीय अर्थव्यवस्था और खनन क्षेत्र  |  GS Paper II — शासन: सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों का निपटान, संस्थागत सुधार और स्वच्छता पहल  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जीवन-चक्र और पुनर्चक्रण
  • Prelims: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, बेसल अभिसमय, नगरीय खनन (Urban Mining), चक्रीय अर्थव्यवस्था, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, विशेष अभियान 6.0 (DARPG), महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड — कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी, मुख्यालय संबलपुर (ओडिशा)
  • Essay: चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता भारत: कचरे से संसाधन तक, संवहनीय विकास और खनन उद्योग: उत्पादन तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (प्रभावी 1 अप्रैल 2023) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) पर आधारित हैं और CPCB इनकी निगरानी करता है; MCL की HEMM बैटरियां बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 के दायरे में आती हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने देश में चल रहे छठे विशेष अभियान में भाग लेकर अपने मुख्यालय और परिचालन क्षेत्रों में ई-अपशिष्ट (E-Waste) के दायित्वपूर्ण प्रबंधन की पहल की है। यह अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत अधिकृत पुनर्चक्रण चैनलों से जुड़े ई-अपशिष्ट संग्रह कियोस्क स्थापित किए गए हैं और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों में अनुचित निपटान के खतरों पर जागरूकता गतिविधियां चल रही हैं। कार्यान्वयन चरण के पहले सप्ताह में MCL ने 240 चिन्हित स्थानों में से 73 की सफाई की। लक्षित 10 लाख वर्ग फुट में से 3,06,663 वर्ग फुट क्षेत्र साफ किया गया। अभियान में 600 मीट्रिक टन कबाड़ के निपटान का लक्ष्य है। इस्तेमाल से बाहर हो चुकी 350 हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) बैटरियों के निपटान से राजस्व भी अर्जित हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • विशेष अभियान की शुरुआत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के नेतृत्व में सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों को कम करने के लिए हुई थी। इसके बाद के संस्करण हर वर्ष अक्टूबर में चलाए जाते हैं। छठा संस्करण इसी शृंखला की अगली कड़ी है।
  • इस अभियान में सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में अनुपयोगी वस्तुओं की छंटाई, कबाड़ का निपटान और कार्यस्थल की स्वच्छता पर ज़ोर दिया जाता है। इससे जगह खाली होती है और निपटान से राजस्व भी मिलता है।
  • विश्व स्तर पर ई-अपशिष्ट तेज़ी से बढ़ने वाली अपशिष्ट धारा है। ‘ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2024’ के अनुसार वर्ष 2022 में विश्व में लगभग 6.2 करोड़ टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न हुआ, जिसमें से केवल लगभग 22.3 प्रतिशत का औपचारिक रूप से संग्रह और पुनर्चक्रण हुआ। भारत ई-अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले शीर्ष देशों में गिना जाता है।
  • भारत में ई-अपशिष्ट का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में संसाधित होता है। वहां तेज़ाब से स्नान और खुले में जलाने जैसी असुरक्षित पद्धतियां अपनाई जाती हैं, जिनसे सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व वायु, मिट्टी और भूजल में पहुंचते हैं।
  • महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी है और इसका मुख्यालय संबलपुर (ओडिशा) में है। खनन उपक्रमों में बड़ी संख्या में HEMM, वाहन, बैटरियां और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रयोग होते हैं। इसलिए यहां अपशिष्ट प्रबंधन का पैमाना बड़ा होता है और इसकी पर्यावरणीय संवेदनशीलता भी अधिक है।
  • समाचार में उल्लिखित HEMM बैटरियां मुख्यतः सीसा-अम्ल (Lead-acid) प्रकार की होती हैं। विधिक दृष्टि से ये बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 के दायरे में आती हैं, ई-अपशिष्ट नियमों के नहीं। इस अंतर को परीक्षा में ध्यान रखना चाहिए।

ई-अपशिष्ट (E-Waste) क्या है और भारत में इसका प्रबंधन कैसे होता है?

  • अर्थ: ई-अपशिष्ट से आशय उन विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से है जिन्हें उपयोगकर्ता ने त्याग दिया है या जिनका जीवनकाल समाप्त हो गया है। इनमें कंप्यूटर, मोबाइल फोन, प्रिंटर, बैटरी और अन्य उपकरणों के पुर्ज़े भी शामिल हैं।
  • खतरा: ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा, कैडमियम और ब्रोमीन युक्त ज्वाला-रोधी पदार्थ जैसे विषैले तत्व होते हैं। अनुचित निपटान से वायु, मिट्टी और भूजल प्रदूषित होते हैं। इससे तंत्रिका तंत्र, गुर्दे और श्वसन संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ता है। यही चिंता MCL के जागरूकता कार्यक्रमों का केंद्र है।
  • अवसर: ई-अपशिष्ट में सोना, चांदी, तांबा, पैलेडियम जैसी मूल्यवान धातुएं और दुर्लभ मृदा तत्व होते हैं। इन्हें पुनः प्राप्त करना ‘नगरीय खनन’ कहलाता है। इससे प्राथमिक खनन पर निर्भरता और आयात घटते हैं, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था का मूल विचार है।
  • विधिक ढांचा: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बने हैं और 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हैं। इन्होंने ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 का स्थान लिया। इनके दायरे में अनुसूची में सूचीबद्ध 106 प्रकार के विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आते हैं।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR): निर्माता, उत्पादक, नवीनीकरणकर्ता और पुनर्चक्रणकर्ता को CPCB के पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है। उत्पादकों पर ई-अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण के निर्धारित लक्ष्य होते हैं। इन्हें EPR प्रमाणपत्रों के माध्यम से पूरा किया जाता है, जिनका व्यापार भी हो सकता है। यह व्यवस्था प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पर आधारित है।
  • संस्थागत भूमिका: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) नियमों के क्रियान्वयन की निगरानी करता है और EPR पोर्टल संचालित करता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य स्तर पर प्राधिकार और निरीक्षण का कार्य करते हैं। थोक उपभोक्ताओं, जैसे सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों से अपेक्षा है कि वे अपना ई-अपशिष्ट केवल अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं को दें। MCL के कियोस्क इसी सिद्धांत का पालन करते हैं।
  • संबद्ध नियम और संधियां: बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 भी EPR पर आधारित हैं और सीसा-अम्ल बैटरियों पर लागू होते हैं। खतरनाक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं सीमापार संचलन) नियम, 2016 तथा खतरनाक अपशिष्टों के सीमापार संचलन पर बेसल अभिसमय भी प्रासंगिक हैं।
  • संवैधानिक आधार: स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) में निहित माना गया है। अनुच्छेद 48-क राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निदेश देता है और अनुच्छेद 51-क(छ) नागरिकों का मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है।
  • चुनौतियां और आगे की राह: अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व, उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी, संग्रह तंत्र की कमज़ोरी और EPR प्रमाणपत्रों में अनियमितता प्रमुख चुनौतियां हैं। अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ना, संग्रह ढांचे का विस्तार और प्रभावी निगरानी आवश्यक है। अभियान तभी सार्थक होंगे जब कियोस्क और कबाड़ निपटान वर्ष भर की नियमित प्रक्रिया बनें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
छठा विशेष अभियान (31 अक्टूबर 2026 तक) यह अभियान केंद्र सरकार के विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, कबाड़ निपटान और लंबित कार्यों के निस्तारण पर केंद्रित है। इसकी निरंतरता से स्वच्छता संस्थागत आदत बनती है, एक बार का आयोजन भर नहीं रहती।
ई-अपशिष्ट (E-waste) संग्रह कियोस्क महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के क्षेत्रों में लगे ये कियोस्क अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों तक पुरानी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ पहुँचाते हैं। इससे अनौपचारिक कबाड़ बाज़ार में जाने का जोखिम घटता है।
जागरूकता गतिविधियाँ कर्मचारियों और आसपास के समुदायों को बताया जा रहा है कि अनुचित निपटान से वायु, मिट्टी और भूजल दूषित होते हैं। इससे स्वास्थ्य जोखिम के प्रति व्यवहार-परिवर्तन की नींव पड़ती है।
भौतिक लक्ष्य और प्रगति 240 चिह्नित स्थलों में से पहले सप्ताह में 73 स्थलों की सफाई हुई। 10 लाख वर्ग फुट के लक्ष्य में से 3,06,663 वर्ग फुट साफ हुआ। 600 मीट्रिक टन कबाड़ निपटान का लक्ष्य है। मापनीय लक्ष्य जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
350 HEMM बैटरियों का निपटान उपयोग से बाहर हुई उच्च क्षमता वाली भारी खनन मशीनरी (HEMM) की बैटरियों के निपटान से राजस्व अर्जित हुआ। यह अपशिष्ट से मूल्य सृजन का उदाहरण है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था की सोच से मेल खाता है।
कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी MCL कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी है और इसका मुख्यालय सम्बलपुर (ओडिशा) में है। खनन क्षेत्र का बड़ा सार्वजनिक उपक्रम होने के कारण इसकी पहल अन्य उपक्रमों के लिए मानक बन सकती है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्त्व

  • ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा, कैडमियम और ब्रोमीन युक्त ज्वाला-रोधी रसायन जैसे विषैले तत्त्व होते हैं। अधिकृत चैनल से निपटान करने पर ये वायु, मिट्टी और भूजल में नहीं पहुँचते।
  • खनन क्षेत्र पहले से ही भूमि, जल और वायु पर दबाव झेलते हैं। वहाँ अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान संचयी प्रदूषण-भार को कम करता है।
  • पुरानी बैटरियों और उपकरणों के पुनर्चक्रण से लिथियम, कोबाल्ट, ताँबा और सोने जैसी द्वितीयक धातुएँ मिलती हैं। इससे नए खनन पर निर्भरता घटती है।

आर्थिक और संसाधन-कुशलता संबंधी महत्त्व

  • कबाड़ और बैटरियों के निपटान से सार्वजनिक उपक्रम को राजस्व मिलता है तथा परिसरों में भंडारण की जगह खाली होती है।
  • औपचारिक रीसाइक्लिंग तंत्र से हरित रोज़गार और पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं का बाज़ार बढ़ता है।
  • यह चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में एक कदम है, जिसमें अपशिष्ट को संसाधन माना जाता है।

सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्त्व

  • अनौपचारिक क्षेत्र में तेज़ाब से धातु निकालने और खुले में जलाने से श्रमिकों में श्वसन और तंत्रिका संबंधी रोगों का जोखिम रहता है। औपचारिक चैनल इस जोखिम को घटाता है।
  • आसपास के समुदायों में जागरूकता बढ़ने से घरेलू स्तर पर भी ई-अपशिष्ट का सही निपटान शुरू हो सकता है।

शासन और संस्थागत महत्त्व

  • अभियान का मापनीय लक्ष्य-आधारित स्वरूप सुशासन और परिणाम-आधारित प्रबंधन को दर्शाता है।
  • सरकारी उपक्रम थोक उपभोक्ता के रूप में ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन का उदाहरण पेश कर सकते हैं। यह ‘नेतृत्व द्वारा उदाहरण’ के सिद्धांत के अनुरूप है।
  • यह पहल सतत विकास लक्ष्य 12 (उत्तरदायी उपभोग और उत्पादन) और लक्ष्य 11 (सतत शहर और समुदाय) में योगदान देती है।

चुनौतियाँ

1. अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व

  • वैश्विक ई-अपशिष्ट निगरानी रिपोर्ट 2024 के अनुसार 2022 में विश्व में लगभग 6.2 करोड़ टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न हुआ और केवल लगभग 22.3 प्रतिशत का औपचारिक रूप से दस्तावेज़ीकृत पुनर्चक्रण हुआ।
  • भारत में भी बड़ा हिस्सा अनौपचारिक कबाड़ी तंत्र से गुज़रता है, जहाँ सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं होता।

2. विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का क्रियान्वयन

  • EPR प्रमाणपत्रों के व्यापार में फर्ज़ी या कागज़ी पुनर्चक्रण की आशंका रहती है।
  • वास्तविक संग्रह और पुनर्चक्रित मात्रा का सत्यापन तथा उत्पादकों पर निगरानी प्रशासनिक रूप से कठिन है।

3. अभियान की अल्पकालिकता और प्रतीकात्मकता

  • पखवाड़ों या महीने भर चलने वाले अभियान से स्थायी व्यवस्था नहीं बनती। केवल क्षेत्रफल या स्थलों की गिनती से वास्तविक पर्यावरणीय परिणाम नहीं मापे जा सकते।
  • पहले सप्ताह में 10 लाख वर्ग फुट के लक्ष्य में लगभग 3 लाख वर्ग फुट की ही सफाई हुई। लक्ष्य पूरा करने के दबाव में गुणवत्ता से समझौता हो सकता है।

4. खतरनाक बैटरी अपशिष्ट का प्रबंधन

  • भारी मशीनरी की बैटरियों में सीसा और अम्ल जैसे खतरनाक पदार्थ होते हैं। भंडारण, परिवहन और पुनर्चक्रण में चूक से मिट्टी और भूजल दूषित हो सकते हैं।
  • नीलामी में सबसे ऊँची बोली को प्राथमिकता मिले, तो पंजीकृत और मानक-अनुरूप पुनर्चक्रणकर्ता की अनिवार्यता कमज़ोर पड़ सकती है।

5. जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन की कमी

  • उपभोक्ता और कर्मचारी पुराने उपकरण घर या दफ़्तर में जमा रखते हैं या कबाड़ी को बेच देते हैं।
  • कियोस्क जैसी सुविधाएँ तभी कारगर होती हैं जब लोगों को प्रोत्साहन और जानकारी मिले।

6. क्षमता और अवसंरचना की असमानता

  • अधिकृत पुनर्चक्रण संयंत्र कुछ ही राज्यों में केंद्रित हैं। दूरस्थ खनन क्षेत्रों से वहाँ तक परिवहन महँगा पड़ता है।
  • आधुनिक तकनीक के अभाव में मूल्यवान धातुओं की वसूली कम रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अनौपचारिक पुनर्चक्रण खुले में जलाने और अम्ल-निक्षालन से श्रमिकों का स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों जोखिम में पड़ते हैं।
EPR अनुपालन फर्ज़ी प्रमाणपत्र और असत्यापित संग्रह के आँकड़ों से नियम का उद्देश्य विफल होता है।
खतरनाक बैटरी अपशिष्ट अनुचित भंडारण और परिवहन से भारी धातु और अम्ल का रिसाव होता है।
अभियान-आधारित दृष्टिकोण अभियान समाप्त होने पर स्थायी व्यवस्था न बने तो प्रगति टिकती नहीं।
जागरूकता की कमी उपभोक्ता और कर्मचारी उपकरण अनौपचारिक विक्रेताओं को बेच देते हैं।
अवसंरचना की सीमा पुनर्चक्रण संयंत्रों की दूरी और सीमित क्षमता से लागत बढ़ती है और वसूली घटती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 (Battery Waste Management Rules, 2022): बैटरी के उत्पादकों पर EPR लागू करते हैं और पुरानी बैटरियों का संग्रह तथा पुनर्चक्रण अनिवार्य करते हैं। यह HEMM बैटरियों के निपटान से सीधे जुड़ा है।
  • विशेष अभियान (Special Campaign): प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा समन्वित अभियान, जिसमें स्वच्छता, कबाड़ निपटान और लंबित मामलों का निस्तारण शामिल है। समाचार में उल्लिखित छठा अभियान इसी का अंग है।
  • स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission): कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के राष्ट्रीय उद्देश्य का आधार।

आगे की राह

  • विशेष अभियान की गतिविधियों को स्थायी मानक संचालन प्रक्रिया में बदला जाए। इसमें नियमित ई-अपशिष्ट ऑडिट, तिमाही निपटान और रिकॉर्ड-प्रबंधन शामिल हों।
  • ई-अपशिष्ट और बैटरियों का निपटान केवल CPCB-पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं को हो और निविदा शर्तों में पंजीकरण, मानक-अनुपालन और निपटान प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाएँ।
  • EPR प्रमाणपत्रों का सत्यापन डिजिटल ट्रैकिंग, भौतिक ऑडिट और अपशिष्ट के स्रोत-से-अंत तक पता लगाने (ट्रेसेबिलिटी) से मज़बूत किया जाए।
  • अनौपचारिक कबाड़ी और श्रमिकों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और औपचारिक मूल्य-शृंखला में एकीकरण के माध्यम से मुख्यधारा में लाया जाए।
  • खनन क्षेत्रों के निकट क्षेत्रीय संग्रह और पुनर्चक्रण केंद्र विकसित किए जाएँ, ताकि परिवहन लागत घटे और मूल्यवान धातुओं की वसूली बढ़े।
  • सफलता का मापन क्षेत्रफल या स्थलों की गिनती से आगे जाकर पुनर्चक्रित मात्रा, सुरक्षित निपटान के प्रतिशत और भूजल तथा मिट्टी की गुणवत्ता जैसे परिणाम-संकेतकों से किया जाए।
  • स्कूलों, कर्मचारी कॉलोनियों और स्थानीय समुदायों में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ और सही निपटान के लिए प्रोत्साहन दिए जाएँ।
  • सार्वजनिक उपक्रम अपनी सतत विकास रिपोर्ट में अपशिष्ट-निपटान के आँकड़े प्रकाशित करें, ताकि पारदर्शिता और सहकर्मी-अनुकरण बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) और EPR प्रमाणपत्र · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत और सतर्कता सिद्धांत · चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी खनन · अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिकीकरण · खतरनाक अपशिष्ट और बेसल अभिसमय · अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) और अनुच्छेद 51A(g) · अधिकृत रीसाइक्लर और संग्रह कियोस्क · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की पर्यावरणीय जवाबदेही · विशेष अभियान: स्वच्छता और कबाड़ निपटान · बैटरी (प्रबंधन) नियम, 2022 · संसाधन दक्षता और सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन करेगा (नीति निदेशक तत्त्व)
  • अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य
  • अनुच्छेद 21: स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार (न्यायिक व्याख्या)

अवधारणा प्रवाह

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और भारी मशीनरी बैटरियों का उपयोग-काल समाप्त होना, जिससे ई-अपशिष्ट और कबाड़ जमा होना  →  अनुचित निपटान से विषैले रसायनों का वायु, मिट्टी और भूजल में पहुँचना और स्वास्थ्य तथा पर्यावरण जोखिम बढ़ना  →  ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 के तहत EPR और अधिकृत निपटान की बाध्यता  →  छठे विशेष अभियान में MCL द्वारा कियोस्क की स्थापना, स्थलों की सफाई, कबाड़ और बैटरी निपटान तथा जागरूकता गतिविधियाँ  →  अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनल से संसाधनों की वसूली, राजस्व अर्जन और प्रदूषण में कमी  →  चक्रीय अर्थव्यवस्था और संसाधन-कुशल सतत विकास की ओर संक्रमण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।
2. इनमें विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को EPR प्रमाणपत्रों के माध्यम से लागू किया गया है, जिसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल है।
3. इन नियमों के अंतर्गत अपशिष्ट बैटरियाँ भी ई-अपशिष्ट के रूप में शामिल हैं और उनका निपटान इन्हीं नियमों से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं। कथन 2 सही है: उत्पादक, निर्माता, नवीनीकरणकर्ता और रीसाइक्लर CPCB पोर्टल पर पंजीकृत होते हैं और EPR प्रमाणपत्रों का व्यापार होता है। कथन 3 गलत है: अपशिष्ट बैटरियाँ इन नियमों के दायरे से बाहर हैं और बैटरी (प्रबंधन) नियम, 2022 से शासित होती हैं। इसलिए केवल दो कथन सही हैं।

Q2. अभिकथन (A): अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा किया जाने वाला ई-अपशिष्ट का पुनर्चक्रण पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक माना जाता है।
कारण (R): खुले में जलाने और अम्ल से धातु निकालने जैसी अवैज्ञानिक विधियों से सीसा, पारा और डाइऑक्सिन जैसे विषैले पदार्थ वायु, मृदा और भूजल में पहुँचते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, किंतु R गलत है
  4. A गलत है, किंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — अनौपचारिक क्षेत्र में प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के बिना केवल मूल्यवान धातुएँ निकालने पर ध्यान दिया जाता है। खुले में जलाने और अम्ल-निक्षालन से विषैले पदार्थ उत्सर्जित होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को हानि पहुँचाते हैं। अतः R, A की सही व्याख्या करता है।

Q3. सूची-I (अंतरराष्ट्रीय अभिसमय) को सूची-II (मुख्य विषय) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
A. बेसल अभिसमय
B. मिनामाता अभिसमय
C. स्टॉकहोम अभिसमय
D. रॉटरडैम अभिसमय
सूची-II
1. पारे पर नियंत्रण
2. खतरनाक अपशिष्टों का सीमापारीय संचलन
3. सतत कार्बनिक प्रदूषक (POPs)
4. खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के व्यापार में पूर्व सूचित सहमति प्रक्रिया

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-3, D-4
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-4, B-1, C-3, D-2

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — बेसल अभिसमय खतरनाक अपशिष्टों के सीमापारीय संचलन और निपटान को नियंत्रित करता है, इसलिए ई-अपशिष्ट के निर्यात-आयात से भी संबंधित है। मिनामाता अभिसमय पारे पर है, स्टॉकहोम अभिसमय POPs पर और रॉटरडैम अभिसमय पूर्व सूचित सहमति प्रक्रिया पर है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ई-अपशिष्ट की बढ़ती मात्रा पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के विशेष संदर्भ में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढाँचे की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसे सार्वजनिक उपक्रमों की ऐसे प्रबंधन में भूमिका पर टिप्पणी कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: भूमिका (2-3 पंक्तियाँ): Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार विश्व में 2022 में लगभग 6.2 करोड़ टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न हुआ और केवल लगभग 22% का औपचारिक संग्रह एवं पुनर्चक्रण हुआ; भारत शीर्ष उत्पादकों में है। प्रसंग: कोयला मंत्रालय के अधीन MCL (कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी) ने छठे विशेष अभियान में ई-अपशिष्ट संग्रह कियोस्क लगाए, अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों से निपटान किया और 600 मीट्रिक टन कबाड़ निपटान का लक्ष्य रखा।

1. कानूनी और संवैधानिक आधार: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; अनुच्छेद 48A, 51A(g) और अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार; वेल्लोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम (1996) में प्रदूषक भुगतान और सतर्कता सिद्धांत।
2. नियम, 2022 की मुख्य विशेषताएँ: 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी; 2016 के नियमों का स्थान; अनुसूची-I में 100 से अधिक विद्युत-इलेक्ट्रॉनिक उपकरण; उत्पादक, निर्माता, नवीनीकरणकर्ता और रीसाइक्लर का CPCB पोर्टल पर पंजीकरण; EPR प्रमाणपत्र और वार्षिक पुनर्चक्रण लक्ष्य; न्यूनतम मूल्य का प्रावधान; दायित्व पूरा न करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति; अपशिष्ट बैटरियाँ अलग से बैटरी (प्रबंधन) नियम, 2022 के अधीन।
3. सफलताएँ: जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण, पारदर्शी डिजिटल पोर्टल, औपचारिक रीसाइक्लिंग का विस्तार, पुनर्चक्रण से धातु-पुनर्प्राप्ति (शहरी खनन) और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बल।
4. सीमाएँ: अनौपचारिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा, जिसमें अधिकांश संग्रह होता है, ढाँचे से बाहर रह जाता है; EPR प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े और कागजी अनुपालन का जोखिम; उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी और संग्रह-तंत्र की कमजोरी; राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की निगरानी-क्षमता सीमित; रीसाइक्लिंग संयंत्रों का असमान वितरण; नवीनीकरण और मरम्मत के अधिकार का सीमित एकीकरण।
5. सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका (टिप्पणी): ये उपयोगकर्ता के रूप में बड़े ई-अपशिष्ट और कबाड़ के स्रोत हैं, इसलिए इन्हें अधिकृत रीसाइक्लर के माध्यम से निपटान, संग्रह कियोस्क, कर्मचारी और आसपास के समुदायों में जागरूकता तथा निपटान से राजस्व अर्जन का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। साथ ही विशेष अभियान जैसी मौसमी पहलों को वर्ष भर की संस्थागत प्रणाली में बदलना आवश्यक है।
6. आगे की राह: अनौपचारिक क्षेत्र को प्रशिक्षण, पंजीकरण और ऋण देकर औपचारिक श्रृंखला में लाना; EPR प्रमाणपत्रों का तृतीय-पक्ष लेखा-परीक्षण; डिज़ाइन द्वारा पुनर्चक्रण और मरम्मत का अधिकार; बेसल अभिसमय के अनुरूप सीमापारीय निगरानी; उपभोक्ता प्रोत्साहन और वापसी योजनाएँ।
निष्कर्ष: संतुलित मत यह है कि EPR सही दिशा में है, किंतु उसकी सफलता प्रवर्तन, अनौपचारिक क्षेत्र के समावेशन और जन-भागीदारी पर निर्भर है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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