अल नीनो से मानसून पर असर: आईएमडी की तैयारी और पूर्वानुमान 2026

संसदीय प्रश्न: अल नीनो की स्थितियों के लिए तैयारी — concept mind map

अल नीनो से मानसून पर असर: आईएमडी की तैयारी और पूर्वानुमान 2026

✎ अल नीनो प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो आमतौर पर भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करती है, जिससे सामान्य से कम वर्षा होती है और कृषि तथा जल प्रबंधन के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न होती…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल: भारतीय भूगोल, जलवायु विज्ञान  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन: सूखा, कृषि पर प्रभाव  |  GS Paper III — पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
  • Prelims: अल नीनो, ला नीना, ENSO (अल नीनो दक्षिणी दोलन), भारतीय मानसून, दीर्घकालिक औसत (LPA), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, कृषि पर अल नीनो का प्रभाव
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और भारत की खाद्य सुरक्षा चुनौतियाँ, आपदा प्रबंधन में पूर्वानुमान और तैयारी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो आमतौर पर भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करती है, जिससे सामान्य से कम वर्षा होती है और कृषि तथा जल प्रबंधन के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करता है और संबंधित हितधारकों को तैयारी के लिए पूर्वानुमान जारी करता है। IMD ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीज़न के लिए सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, जो अल नीनो की स्थितियों के कारण कृषि और जल प्रबंधन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • अल नीनो (El Niño) एक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय क्षेत्र के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है।
  • भारत में, अल नीनो की घटना आमतौर पर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (दक्षिण-पश्चिम मानसून) को कमजोर करती है, जिससे सामान्य से कम बारिश होती है।
  • 1950 के बाद से, 16 अल नीनो घटनाओं में से 7 बार भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य से कम बारिश हुई।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) नियमित रूप से बारिश और तापमान के लिए मौसमी और मासिक पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें अल नीनो जैसी प्रमुख जलवायु घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences – MoES) के तहत भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology – IITM) कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर वर्षा और ENSO (अल नीनो दक्षिणी दोलन) के प्रभावों को समझने और जानकारी प्रदान करने के लिए काम कर रहा है।

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो ‘अल नीनो दक्षिणी दोलन’ (El Niño-Southern Oscillation – ENSO) नामक एक बड़ी घटना का गर्म चरण है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय दबाव में अनियमित आवधिक भिन्नताओं का वर्णन करता है।
  • यह हर कुछ वर्षों में होता है और आमतौर पर दिसंबर के आसपास चरम पर होता है, इसलिए इसे ‘छोटा लड़का’ (स्पेनिश में अल नीनो) कहा जाता है, जो शिशु ईसा मसीह के संदर्भ में है।
  • अल नीनो के दौरान, पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ठंडे पानी का ऊपर आना (upwelling) कम हो जाता है।
  • यह घटना व्यापारिक पवनों (trade winds) को कमजोर करती है या उलट देती है, जिससे गर्म पानी पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ता है।
  • अल नीनो वैश्विक मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और अन्य में भारी वर्षा हो सकती है।
  • भारत में, अल नीनो का संबंध आमतौर पर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से होता है, जिससे कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • इसके विपरीत, ला नीना (La Niña) ENSO का ठंडा चरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर में सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है और यह अक्सर भारत में मजबूत मानसून से जुड़ा होता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
अल नीनो (El Niño) यह प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जिसका वैश्विक मौसम पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण, जो देश की लगभग 70% वार्षिक वर्षा प्रदान करता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक प्रमुख एजेंसी जो मौसम और जलवायु संबंधी पूर्वानुमान जारी करती है, जिसमें मानसून और अल नीनो के प्रभाव शामिल हैं।
लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) यह 50 वर्षों की अवधि में हुई औसत वर्षा को दर्शाता है, जिसका उपयोग मानसून की वर्षा के पूर्वानुमान के लिए एक बेंचमार्क के रूप में किया जाता है।
फसल मौसम निगरानी (Crop Weather Watch) कृषि और जल प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर काम करने वाली एक प्रणाली, जो कृषि पर मौसम के प्रभावों की जानकारी प्रदान करती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • अल नीनो के कारण कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय पर नकारात्मक असर पड़ता है।
  • कम वर्षा से जलविद्युत उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
  • कृषि क्षेत्र में उत्पादन घटने से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ सकती है, विशेषकर खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

सामाजिक महत्व

  • कमजोर मानसून से पेयजल की कमी हो सकती है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
  • कृषि पर निर्भर लाखों किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और पलायन बढ़ सकता है।
  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि से आम जनता की क्रय शक्ति प्रभावित होती है, जिससे जीवन-यापन की लागत बढ़ जाती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • कम वर्षा से भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।
  • सूखे की स्थिति से वनों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है और वन्यजीवों के आवासों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • नदियों और जलाशयों में पानी की कमी से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) पर दबाव पड़ता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए सरकार को आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और राहत कार्यों पर अधिक संसाधन खर्च करने पड़ सकते हैं।
  • मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि नीतियों, जल प्रबंधन रणनीतियों और खाद्य भंडारण योजनाओं को समय पर संशोधित करना आवश्यक हो जाता है।
  • राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है ताकि अल नीनो के प्रभावों को कम किया जा सके।

चुनौतियाँ

1. पूर्वानुमान की सटीकता

  • अल नीनो की तीव्रता और भारतीय मानसून पर इसके सटीक प्रभाव का अनुमान लगाना जटिल है, जैसा कि 1950 के बाद के 16 अल नीनो घटनाओं में से केवल 7 में मानसून पर असर पड़ने से स्पष्ट है।
  • मॉडल त्रुटि (Model Error) की संभावना हमेशा बनी रहती है, जिससे पूर्वानुमानों में अनिश्चितता आती है।

2. कृषि क्षेत्र पर निर्भरता

  • भारतीय कृषि का एक बड़ा हिस्सा अभी भी मानसून पर निर्भर है, जिससे अल नीनो के कारण होने वाले सूखे का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है।
  • छोटे और सीमांत किसान विशेष रूप से कमजोर होते हैं क्योंकि उनके पास जोखिम से निपटने के लिए सीमित संसाधन होते हैं।

3. जल प्रबंधन

  • कमजोर मानसून से जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए जल उपलब्धता प्रभावित होती है।
  • राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ सकता है, खासकर सूखे की स्थिति में।

4. नीतिगत प्रतिक्रिया और समन्वय

  • अल नीनो के प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और त्वरित नीतिगत प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है।
  • जिले-वार जोखिम और प्रभाव आकलन की कमी तैयारियों को बाधित कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
अल नीनो की जटिलता भारतीय मानसून पर अल नीनो का प्रभाव हमेशा सीधा नहीं होता, जिससे सटीक पूर्वानुमान और तैयारी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
कृषि पर सीधा प्रभाव कमजोर मानसून से फसल उत्पादन में कमी, किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव और ग्रामीण संकट का खतरा।
जल संकट पेयजल, सिंचाई और ऊर्जा उत्पादन के लिए जल उपलब्धता में कमी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में तनाव बढ़ सकता है।
मुद्रास्फीति का दबाव खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और सरकार के लिए चुनौती उत्पन्न होती है।
आपदा प्रबंधन सूखे जैसी चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन योजनाओं और संसाधनों की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • फसल मौसम निगरानी (Crop Weather Watch)

आगे की राह

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना।
  • कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और जल-कुशल कृषि पद्धतियों (Water-efficient Agricultural Practices) को बढ़ावा देना, जैसे ड्रिप सिंचाई।
  • किसानों को मौसम-आधारित फसल बीमा योजनाओं (Weather-based Crop Insurance Schemes) के तहत अधिक कवरेज प्रदान करना और उन्हें समय पर मुआवजा सुनिश्चित करना।
  • पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता देना।
  • खाद्य भंडारण और वितरण प्रणाली को मजबूत करना ताकि कमजोर मानसून की स्थिति में भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि अल नीनो के प्रभावों से निपटने के लिए एक एकीकृत रणनीति बनाई जा सके।
  • किसानों और संबंधित हितधारकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर मौसम संबंधी जानकारी और सलाह का समय पर प्रसार सुनिश्चित करना।
  • कृषि विविधीकरण (Agricultural Diversification) को बढ़ावा देना और ऐसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना जो कम पानी में उग सकें या सूखे के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो · भारतीय मानसून · भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · दीर्घकालिक पूर्वानुमान · कृषि पर प्रभाव · जल प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन · आपदा प्रबंधन · मौसम संबंधी चेतावनी · खाद्य सुरक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 257’, ‘note’: ‘राज्यों पर संघ का नियंत्रण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘कृषि और जल राज्य सूची के विषय’}

अवधारणा प्रवाह

अल नीनो की स्थिति विकसित होती है (प्रशांत महासागर में सतही जल का गर्म होना)।  →  भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है (कमजोर या सामान्य से कम वर्षा)।  →  कृषि उत्पादन प्रभावित होता है (फसल की पैदावार में कमी)।  →  खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय पर असर पड़ता है (मुद्रास्फीति और गरीबी)।  →  जल संसाधन प्रभावित होते हैं (पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की कमी)।  →  सरकार आपदा प्रबंधन और नीतिगत प्रतिक्रियाएं लागू करती है (राहत उपाय और योजना)।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो की घटना के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून सामान्यतः कमजोर रहता है।
2. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) केवल मासिक मौसम पूर्वानुमान जारी करता है, मौसमी नहीं।
3. 1950 के बाद से हुई सभी अल नीनो घटनाओं ने भारतीय मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अल नीनो आमतौर पर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून को कमजोर करता है। कथन 2 गलत है। IMD मौसमी और मासिक दोनों पूर्वानुमान जारी करता है। कथन 3 गलत है। 1950 के बाद से 16 अल नीनो घटनाओं में से केवल 7 ने भारतीय मानसून को प्रभावित किया है।

Q2. अभिकथन (A): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) संबंधित हितधारकों को तैयारी और योजना बनाने के लिए पहले से जानकारी प्रदान करता है।
कारण (R): IMD दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना का संकेत अपने मौसमी पूर्वानुमानों में देता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। IMD अल नीनो की संभावना का पूर्वानुमान लगाकर हितधारकों को तैयारी के लिए अग्रिम जानकारी देता है।

Q3. भारत में ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) शब्द का उपयोग किस संदर्भ में किया जाता है?

  1. भारत के राजकोषीय घाटे का औसत
  2. भारतीय मानसून की दीर्घकालिक औसत वर्षा
  3. भारत की प्रति व्यक्ति आय का औसत
  4. भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का औसत

उत्तर: भारतीय मानसून की दीर्घकालिक औसत वर्षा — लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) भारतीय मानसून की दीर्घकालिक औसत वर्षा को संदर्भित करता है, जिसका उपयोग IMD द्वारा मानसून के पूर्वानुमानों में बेंचमार्क के रूप में किया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो की घटना भारतीय मानसून को किस प्रकार प्रभावित करती है? भारत में कृषि और जल प्रबंधन पर इसके संभावित प्रभावों को कम करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: अल नीनो की संक्षिप्त परिभाषा और यह भारतीय मानसून को कैसे प्रभावित करता है, बताएं।
मुख्य भाग 1: अल नीनो और भारतीय मानसून के बीच संबंध का विस्तार से वर्णन करें (कमजोर मानसून, तीव्रता का प्रभाव, सितंबर की बारिश से संबंध, ऐतिहासिक डेटा – 1950 के बाद की 16 घटनाओं में से 7 का प्रभाव)।
मुख्य भाग 2: कृषि और जल प्रबंधन पर अल नीनो के संभावित प्रभावों की चर्चा करें (फसल उत्पादन पर असर, जल उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा)।
मुख्य भाग 3: भारत सरकार (विशेषकर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और IMD) द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक परीक्षण करें:
• IMD के पूर्वानुमान (दीर्घकालिक, मौसमी, मासिक, दैनिक) और चेतावनियां (बारिश, तापमान, हीटवेव)।
• हितधारकों को जानकारी का प्रसार (PMO, MHA, MoAFW की बैठकों में भागीदारी)।
• MoAFW की ‘क्रॉप वेदर वॉच’ के तहत कृषि सलाह।
• भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) का कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ सहयोग।
• जिला-वार जोखिम आकलन या दिशानिर्देशों की अनुपस्थिति पर भी चर्चा करें जैसा कि संसदीय प्रश्न में बताया गया है, और इसके निहितार्थ।
निष्कर्ष: इन उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें और भविष्य के लिए सुझाव दें, जैसे कि स्थानीय स्तर पर तैयारी को मजबूत करना और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में अनुकूलन रणनीतियाँ।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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