उप-राष्ट्रपति ने ‘ग्लोबल साउथ’ देशों से बेहतर रणनीतिक सहयोग की अपील की

उपराष्ट्रपति ने उभरती सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए 'ग्लोबल साउथ ( विकासशील ) ' देशों के बीच बेहतर — labelled illustration

उप-राष्ट्रपति ने ‘ग्लोबल साउथ’ देशों से बेहतर रणनीतिक सहयोग की अपील की

✎ IN-STEP एक वार्षिक रणनीतिक संवाद कार्यक्रम है जिसका आयोजन राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में किया जाता है, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा एवं विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग बढ़ाना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper II — वैश्विक समूह एवं संगठन  |  GS Paper III — सुरक्षा संबंधी मुद्दे
  • Prelims: ग्लोबल साउथ, IN-STEP, साइबरस्पेस सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, महासागर सुरक्षा, G20 अध्यक्षता, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
  • Essay: वैश्वीकरण एवं राष्ट्रीय हित, सामूहिक सुरक्षा एवं विकास में सहयोग

त्वरित पुनरावृत्ति: IN-STEP एक वार्षिक रणनीतिक संवाद कार्यक्रम है जिसका आयोजन राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में किया जाता है, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा एवं विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग बढ़ाना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा 25 सितंबर 2026 को ‘इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम (IN-STEP)’ के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए विकासशील देशों के बीच सामूहिक रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने तकनीक, साइबरस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान हेतु वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की अपील की।

पृष्ठभूमि

  • वैश्विक सुरक्षा एवं विकास संबंधी चुनौतियाँ अब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीकी क्रांति, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक असमानताओं के कारण और जटिल हो गई हैं।
  • विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 85% है, किंतु वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सीमित है।
  • भारत ने G20 की अध्यक्षता (2023) के दौरान ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत को केंद्र में रखकर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया था, जिसमें विकासशील देशों की आवाज़ को प्रमुखता दी गई थी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) भारत सरकार का प्रमुख थिंक-टैंक है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के निर्माण एवं कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • IN-STEP कार्यक्रम का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के सहयोग से किया जाता है।
  • भारत द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के माध्यम से विकासशील देशों को टीके उपलब्ध कराए गए थे, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में योगदान मिला।

IN-STEP (इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम) क्या है?

  • IN-STEP एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका आयोजन राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) में किया जाता है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं नीति निर्माताओं के बीच रणनीतिक संवाद एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।
  • इस कार्यक्रम का चौथा संस्करण 25 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें 22 विकासशील देशों के 25 प्रतिनिधियों सहित कुल 38 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  • IN-STEP का उद्देश्य विकासशील देशों के अनुभवों एवं दृष्टिकोणों को वैश्विक सुरक्षा एवं विकास नीति निर्माण में शामिल करना है, जिससे आपसी सीख एवं सहयोग को बढ़ावा मिल सके।
  • कार्यक्रम में तकनीकी क्रांति, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा की जाती है।
  • IN-STEP भारत की G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान अपनाए गए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग को संस्थागत रूप देना है।
  • कार्यक्रम में भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधि आपसी सम्मान, संप्रभु समानता एवं साझा हितों के आधार पर रणनीतिक साझेदारी विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।
  • IN-STEP का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
  • कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सोचने, रणनीतिक रूप से जुड़ने एवं एकजुट होकर कार्य करने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ग्लोबल साउथ पर बल विकासशील देशों के बीच सहयोग और साझा प्राथमिकताओं को बढ़ावा देना।
रणनीतिक सहयोग का आग्रह उभरती सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने के लिए।
IN-STEP कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक जुड़ाव के लिए एक मंच प्रदान करना।
बहुआयामी चुनौतियाँ तकनीक, साइबरस्पेस, AI, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित।
भ्रष्टाचार उन्मूलन का आह्वान विकासशील देशों के लिए एक बड़ी बाधा के रूप में भ्रष्टाचार को संबोधित करना।
तकनीकी प्रगति का लाभ वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों को मानवता के सामूहिक कल्याण के लिए उपयोग करना।

महत्व

रणनीतिक महत्व

  • यह ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के देशों के बीच बढ़ती एकजुटता और साझा हितों को दर्शाता है, जो वैश्विक मंच पर उनकी सामूहिक आवाज़ को मजबूत करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक जुड़ाव कार्यक्रम (International Strategic Engagement Programme – IN-STEP) जैसे मंचों के माध्यम से भारत की भूमिका एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी और विकासशील देशों के नेता के रूप में स्थापित होती है।
  • यह उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों जैसे साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और समुद्री सुरक्षा के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता करता है।

आर्थिक महत्व

  • आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) और ऊर्जा सुरक्षा पर सहयोग आर्थिक स्थिरता और संवृद्धि (growth) के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर विकासशील देशों के लिए।
  • भ्रष्टाचार उन्मूलन का आह्वान व्यापार और निवेश के लिए एक अधिक पारदर्शी और अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करेगा, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति को साझा करना ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच आर्थिक असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

सामाजिक महत्व

  • जलवायु परिवर्तन और महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने से मानव कल्याण और सतत विकास सुनिश्चित होता है।
  • ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसी पहलें मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित करती हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में योगदान करती हैं।
  • सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और पारदर्शिता पर जोर सुशासन और नागरिक विश्वास को मजबूत करता है, जो सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. उभरती सुरक्षा चुनौतियाँ

  • तकनीकी प्रगति के साथ-साथ साइबरस्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पन्न होने वाले नए खतरे।
  • पारंपरिक सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ।

2. जलवायु परिवर्तन

  • विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन का असमान प्रभाव और अनुकूलन (adaptation) तथा शमन (mitigation) के लिए संसाधनों की कमी।
  • जलवायु न्याय और साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (common but differentiated responsibilities) के सिद्धांत को लागू करने में चुनौतियाँ।

3. आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता (vulnerability) और भू-राजनीतिक तनावों का उन पर प्रभाव।
  • आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर खाद्य और ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

4. भ्रष्टाचार

  • विकासशील देशों में भ्रष्टाचार का व्यापक प्रसार और आर्थिक विकास पर इसका नकारात्मक प्रभाव।
  • भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रभावी शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही (accountability) सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

5. तकनीकी असमानता

  • विकासशील और विकसित देशों के बीच तकनीकी प्रगति और नवाचार तक पहुंच में अंतर।
  • डिजिटल विभाजन (digital divide) को पाटना और सभी के लिए तकनीकी लाभ सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी सुरक्षा साइबर हमले, डेटा उल्लंघन और AI के दुरुपयोग का बढ़ता खतरा।
ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और विकासशील देशों के लिए ऊर्जा पहुंच की चुनौती।
समुद्री सुरक्षा समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना और समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव चरम मौसमी घटनाएँ, खाद्य असुरक्षा और विस्थापन।
भ्रष्टाचार सुशासन में बाधा, आर्थिक विकास में रुकावट और सार्वजनिक विश्वास का क्षरण।
आपूर्ति श्रृंखला की भेद्यता महामारी और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण आवश्यक वस्तुओं की कमी।

आगे की राह

  • ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय वार्ता और रणनीतिक परामर्श को बढ़ावा देना।
  • तकनीकी नवाचारों, विशेषकर साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन के लिए संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में निवेश करना।
  • भ्रष्टाचार विरोधी तंत्रों को मजबूत करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक वैश्विक ढाँचा विकसित करना।
  • आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय सहायता के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाना, जैसा कि ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल में देखा गया।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला और समावेशी बनाने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ को मजबूत करना और वैश्विक शासन में उनकी भूमिका को बढ़ाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ग्लोबल साउथ · रणनीतिक सहयोग · विकासशील देश · बहुपक्षवाद · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · सुरक्षा चुनौतियाँ · विकास संबंधी चुनौतियाँ · भ्रष्टाचार · तकनीकी प्रगति · आपूर्ति श्रृंखला · जलवायु परिवर्तन · ऊर्जा सुरक्षा

अवधारणा प्रवाह

उपराष्ट्रपति का आह्वान  →  ग्लोबल साउथ के बीच रणनीतिक सहयोग  →  उभरती सुरक्षा और विकास चुनौतियाँ  →  सामूहिक प्रतिक्रियाएँ और समाधान  →  वैश्विक स्थिरता और संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द उन देशों को संदर्भित करता है जो मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में स्थित हैं।
2. भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ अपने जुड़ाव को आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित मानता है।
3. ‘इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम’ (IN-STEP) का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द भौगोलिक स्थिति से अधिक विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को संदर्भित करता है, जिनमें से कई उत्तरी गोलार्ध में भी स्थित हैं। कथन 2 सही है। भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ अपने जुड़ाव को आपसी सम्मान, साझा हितों, संप्रभु समानता और हर देश की विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं को समझने पर आधारित मानता है। कथन 3 सही है। IN-STEP का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।

Q2. अभिकथन (A): उपराष्ट्रपति ने उभरती सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के बीच बेहतर रणनीतिक सहयोग की अपील की है।
कारण (R): आज की दुनिया की परस्पर जुड़ी प्रकृति के कारण देशों के लिए अकेले दम पर उभरती चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो गया है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि उपराष्ट्रपति ने ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की अपील की। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि वैश्विक चुनौतियाँ परस्पर जुड़ी हुई हैं और किसी एक देश के लिए अकेले उनका सामना करना कठिन है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि इन्हीं परस्पर जुड़ी चुनौतियों के कारण सहयोग की आवश्यकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता को समझाइए। भारत इस सहयोग को मजबूत करने में क्या भूमिका निभा सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: ‘ग्लोबल साउथ’ की अवधारणा और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को परिभाषित करें।
मुख्य भाग:
1. रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता:
– उभरती सुरक्षा चुनौतियाँ (साइबरस्पेस, AI, समुद्री सुरक्षा)।
– विकास संबंधी चुनौतियाँ (जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा, भ्रष्टाचार)।
– बहुपक्षवाद और सामूहिक प्रतिक्रियाओं का महत्व।
– परस्पर जुड़ी वैश्विक प्रकृति के कारण अकेले चुनौतियों का सामना करने में कठिनाई।
2. भारत की भूमिका:
– ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसी पहलें (कोविड-19 के दौरान सहायता)।
– साझा हितों, संप्रभु समानता और आपसी सम्मान पर आधारित जुड़ाव।
– G20 अध्यक्षता के दौरान सार्थक बातचीत और रणनीतिक जुड़ाव के लिए मंच प्रदान करना।
– तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति को मानवता के सामूहिक कल्याण के लिए साझा करने पर जोर।
– भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों का आह्वान।
– ‘वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और एकजुट होकर काम करें’ के सिद्धांत को बढ़ावा देना।
निष्कर्ष: ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच सहयोग के महत्व को दोहराते हुए एक समावेशी और न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में इसकी क्षमता पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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