29 Oct एनएएमएएसटीई योजना: स्वच्छता कर्मियों के लिए सुरक्षा और सम्मान का मार्ग
✎ NAMASTE योजना (2023) सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए मशीनीकरण, पीपीई और कल्याणकारी सहायता के माध्यम से सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करती है, जिसका विधिक आधार हाथ से मैला ढोना (प्रतिषेध और पुनर्वास) अधिनियम, 2013 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय (कमजोर वर्गों के लिए योजनाएँ और उनका कार्यान्वयन) | GS Paper II — संवैधानिक प्रावधान और न्यायिक निर्णय (मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निदेशक तत्व)
- Prelims: NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem), हाथ से मैला ढोना (प्रतिषेध और पुनर्वास) अधिनियम, 2013, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK), अनुच्छेद 17, 21, 23 और 42, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020, पीपीई (Personal Protective Equipment) किट
- Essay: सम्मानजनक श्रम और सफाई कार्य में मानवीय गरिमा, तकनीक-आधारित स्वच्छता बनाम मानव-आधारित सफाई: सामाजिक न्याय की चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: NAMASTE योजना (2023) सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए मशीनीकरण, पीपीई और कल्याणकारी सहायता के माध्यम से सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करती है, जिसका विधिक आधार हाथ से मैला ढोना (प्रतिषेध और पुनर्वास) अधिनियम, 2013 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी एक केस स्टडी में राजस्थान के एक स्वच्छता कर्मी का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं और सीवर कर्मी के रूप में काम करते थे। उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के अभाव में असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। वर्ष 2025 में NAMASTE योजना के अंतर्गत उन्हें पीपीई किट और सुरक्षा किट प्रदान की गई। विज्ञप्ति इस बात पर बल देती है कि समय पर मिली सहायता और कल्याणकारी उपाय स्वच्छता कर्मियों की आजीविका सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और सम्मान को सुदृढ़ कर सकते हैं। यह कहानी ऐसे समय में प्रासंगिक है जब सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव-श्रम पर निर्भरता को कम करने के लिए मशीनीकरण और सुरक्षा मानकों पर नीतिगत ध्यान बढ़ रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है, जबकि अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की व्याख्या का मूल आधार है। अनुच्छेद 42 कार्य की मानवीय दशाओं और प्रसूति सहायता की बात करता है, जो राज्य के नीति निदेशक तत्वों में शामिल है।
- हाथ से मैला ढोना (प्रतिषेध और पुनर्वास) अधिनियम, 2013 ने हाथ से मैला ढोने को प्रतिबंधित किया और सीवर तथा सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के लिए सुरक्षा उपकरणों के बिना कार्य कराने पर रोक लगाई।
- सर्वोच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ (2014) मामले में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पुनर्वास और मृत्यु या गंभीर चोट के मामलों में मुआवजे पर दिशा-निर्देश दिए, जिससे सफाई कर्मियों के अधिकार न्यायिक दृष्टि से भी सुदृढ़ हुए।
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) सफाई कर्मियों के हितों की निगरानी और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा करता है, जबकि NSKFDC स्वरोजगार और वित्तीय सहायता के माध्यम से पुनर्वास में सहयोग करता है।
- स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों के बाद शौचालय और सीवेज प्रबंधन में विस्तार हुआ, जिससे सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में व्यावसायिक जोखिमों और मशीनीकरण की आवश्यकता पर ध्यान बढ़ा।
NAMASTE योजना क्या है?
- NAMASTE योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023 में आरंभ की गई, जिसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में लगे कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना तथा सफाई के मशीनीकरण को बढ़ावा देना है।
- इस योजना के अंतर्गत सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान और पंजीकरण के लिए सर्वेक्षण किया जाता है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुँच सके।
- पीपीई और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता इस योजना का मुख्य घटक है, जिससे कार्यस्थल पर जोखिम कम हो और सुरक्षित कार्य-पद्धति अपनाई जा सके।
- कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों के माध्यम से कर्मियों को सफाई के अतिरिक्त रोजगार की ओर उन्मुख करने का प्रयास किया जाता है।
- स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय सहायता के उपाय, जैसे पहचाने गए कर्मियों के लिए स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था और NSKFDC के माध्यम से ऋण सुविधा, इस योजना के कल्याणकारी पक्ष को दर्शाते हैं।
- योजना का कार्यान्वयन केंद्र, राज्य सरकारों, नगरपालिका निकायों और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से होता है, जिससे संस्थागत समन्वय आवश्यक हो जाता है।
- NAMASTE योजना का तात्विक संदेश यह है कि सफाई कार्य को मानव-जोखिम से हटाकर तकनीकी और संस्थागत सुरक्षा ढाँचे के भीतर लाया जाए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना का नाम | मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem), जिसे NAMASTE कहा जाता है। इसका संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है |
| लक्षित समूह | सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में लगे कर्मचारी, जिन्हें सुरक्षा उपकरण और मशीनों के माध्यम से सीधे मानव-जोखिम से बचाने का लक्ष्य है |
| प्रमुख हस्तक्षेप | व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) और सुरक्षा किट का वितरण, सुरक्षित कार्य-पद्धतियों को अपनाना, तथा कर्मियों के कल्याण पर ध्यान देना |
| कार्यान्वयन की व्यवस्था | केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय के माध्यम से लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाना, जिसमें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) की भूमिका प्रमुख है |
| नीतिगत संदेश | सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता से कार्यस्थल के जोखिम घटते हैं, आजीविका सुरक्षित होती है और श्रम की गरिमा की रक्षा होती है |
महत्व
सामाजिक महत्व
- सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों को सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य-परिवेश उपलब्ध कराकर सामाजिक समानता के संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाना
- कर्मियों के परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और मानसिक दबाव को कम करना, जिससे पीढ़ियों के बीच गरीबी का चक्र टूटने की संभावना बढ़ती है
- सफाई कार्य को केवल श्रम के रूप में नहीं, बल्कि आवश्यक सार्वजनिक सेवा के रूप में मान्यता देना
आर्थिक महत्व
- दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर परिवारों को न्यूनतम आर्थिक स्थिरता देने में सुरक्षा उपकरण सहायक होते हैं, क्योंकि दुर्घटना या बीमारी से आय का स्रोत सीधे प्रभावित होता है
- सुरक्षित कार्य-पद्धति से श्रम-हानि और दुर्घटना-जनित व्यय घटते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय पर भी असर डालता है
- आजीविका की सुरक्षा से कर्मियों की उत्पादकता और कार्य में स्थिरता बढ़ती है
स्वास्थ्य और मानवाधिकार संबंधी महत्व
- सीवर में विषैली गैसों और संक्रमण से होने वाले खतरों के विरुद्ध PPE एक प्रत्यक्ष सुरक्षा-कवच का काम करता है
- जीवन के अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की व्यावहारिक रक्षा इस प्रकार की योजनाओं से होती है
- सुरक्षा-मानकों को लागू करना नियोक्ता और राज्य दोनों की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है
प्रशासनिक और नीतिगत महत्व
- मशीनीकरण की ओर बढ़ते कदम से हाथ से मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा के उन्मूलन के लक्ष्य को व्यावहारिक आधार मिलता है
- लक्षित लाभार्थी-आधारित हस्तक्षेप से सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुँच और जवाबदेही की परख होती है
चुनौतियाँ
1. सुरक्षा उपकरणों की कमी और उपलब्धता का असमान वितरण
- कई स्थानीय निकायों और ठेकेदारों के पास पर्याप्त PPE उपलब्ध नहीं होते, जिससे कर्मी असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को विवश रहते हैं
- उपकरण मिलने के बाद उनके नियमित रख-रखाव, प्रतिस्थापन और उपयोग की निगरानी एक अलग चुनौती है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और लक्षित वर्ग तक पहुँच
2. असंगठित श्रम और सामाजिक सुरक्षा का अभाव
- अधिकांश सफाई कर्मी दिहाड़ी या अनुबंध पर कार्यरत हैं, जिससे उन्हें नियमित वेतन, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसे लाभ सीमित रूप से मिलते हैं
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में कार्यस्थल-दुर्घटना की स्थिति में आय का कोई विकल्प नहीं होता
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सुरक्षा संहिता; असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कल्याण योजनाएँ
3. जातिगत पहचान और सामाजिक भेदभाव
- सफाई कार्य को परंपरागत रूप से निम्न समझे जाने की मानसिकता से इन कर्मियों की सामाजिक गरिमा प्रभावित होती है
- इस सोच के कारण सुरक्षा और सम्मान की माँगें अक्सर अनदेखी रह जाती हैं
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; सामाजिक बहिष्करण और संवैधानिक समानता के प्रावधान
4. मशीनीकरण की गति और तकनीकी अपनाने की बाधाएँ
- छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सीवर-सफाई मशीनों की उपलब्धता और संचालन-प्रशिक्षण सीमित है
- पुराने ढाँचे वाली सीवर लाइनों में मशीनों का उपयोग कठिन होता है, जिससे मानव-प्रवेश की आवश्यकता बनी रहती है
यूपीएससी लिंक: आधारभूत संरचना; नगरीय स्थानीय शासन और तकनीकी नवाचार
5. कार्य-स्थल पर सुरक्षा निगरानी का अभाव
- नियोक्ता द्वारा सुरक्षा-मानकों के पालन की नियमित जाँच और दंडात्मक कार्रवाई का तंत्र कई स्थानों पर कमजोर है
- कर्मियों में अपने अधिकारों और सुरक्षा-प्रक्रियाओं की जानकारी का अभाव रहता है
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक सुधार; नियामक संस्थाओं की भूमिका और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| PPE की उपलब्धता | उपकरणों की कमी से दैनिक जोखिम बढ़ते हैं और सुरक्षा-मानकों का पालन कठिन हो जाता है |
| आजीविका की अस्थिरता | दिहाड़ी और अनुबंध आधारित काम में आय अनिश्चित रहती है, जिससे परिवार बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं |
| सामाजिक गरिमा | परंपरागत जातिगत धारणाएँ सफाई कर्मियों के सम्मान और सामाजिक स्वीकार्यता को सीमित करती हैं |
| मशीनीकरण की सीमा | छोटे और पुराने ढाँचे वाले क्षेत्रों में मशीनों की पहुँच सीमित होने से मानव-प्रवेश का खतरा बना रहता है |
| निगरानी और प्रवर्तन | सुरक्षा-नियमों के पालन की नियमित जाँच और जवाबदेही की कमी से योजना का प्रभाव सीमित हो सकता है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem / NAMASTE)
आगे की राह
- सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए PPE और सुरक्षा उपकरणों की नियमित आपूर्ति, रख-रखाव और प्रतिस्थापन के लिए स्पष्ट समय-सीमा और निगरानी तंत्र बनाया जाए
- स्थानीय निकायों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए सुरक्षा-मानकों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधानों का प्रभावी प्रवर्तन किया जाए
- सीवर-सफाई के मशीनीकरण को छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाए, साथ ही संचालन और रख-रखाव का प्रशिक्षण दिया जाए
- कर्मियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा-प्रक्रियाओं और योजनाओं के लाभों की जानकारी देने हेतु जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएँ
- सफाई कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना-सहायता और कौशल-विकास जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों से व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाए
- असंगठित और अनुबंध आधारित कर्मियों का पंजीकरण और डेटाबेस तैयार किया जाए, ताकि योजनाओं का लक्ष्यीकरण सटीक हो सके
- सफाई कार्य के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदलने के लिए संवेदनशीलता और सम्मान-आधारित सार्वजनिक संवाद को बढ़ावा दिया जाए
- राज्य स्तर पर योजना के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा और सार्वजनिक रिपोर्टिंग से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मशीनीकृत स्वच्छता · हाथ से मैला ढोना (Manual Scavenging) · व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protective Equipment — PPE) · गरिमा के साथ जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) · अस्पृश्यता का उन्मूलन (अनुच्छेद 17) · कार्य की मानवीय दशाएँ (अनुच्छेद 42) · मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार का प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 · व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020 · राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) · सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ वाद (2014) · आजीविका सुरक्षा और सामाजिक न्याय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: गरिमापूर्ण जीवन और सुरक्षित कार्य-परिवेश का अधिकार
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का उन्मूलन, हाथ से मैला ढोने से जुड़ा सामाजिक पहलू
- अनुच्छेद 42: कार्य की मानवीय और न्यायोचित परिस्थितियाँ सुनिश्चित करना
अवधारणा प्रवाह
सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में PPE और सुरक्षा उपकरणों की कमी से कर्मियों का खतरा बढ़ता है → NAMASTE योजना के माध्यम से सुरक्षा उपकरणों और मशीनीकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा जाता है → लाभार्थी को PPE और सुरक्षा किट जैसी लक्षित सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाती है → सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों से दुर्घटना और स्वास्थ्य-जोखिम घटते हैं और कर्मी अधिक आत्मविश्वास से काम कर पाते हैं → जोखिम में कमी और आय की स्थिरता से परिवार का जीवन-स्तर सुधरता है तथा कार्य की गरिमा और सामाजिक सम्मान मजबूत होता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. NAMASTE योजना का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
2. यह योजना सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने को बढ़ावा देती है।
3. मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार का प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 के अंतर्गत बिना सुरक्षात्मक उपकरणों के जोखिमपूर्ण सफाई पर रोक है।
4. अनुच्छेद 23 में कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं का उल्लेख है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- चारों
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 और 2 सही हैं, क्योंकि NAMASTE का नोडल मंत्रालय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय है और इसका केंद्र सीवर व सेप्टिक टैंक सफाई कर्मियों की सुरक्षा है। कथन 3 सही है, क्योंकि 2013 का अधिनियम जोखिमपूर्ण सफाई के लिए सुरक्षात्मक उपकरणों को अनिवार्य करता है। कथन 4 गलत है, क्योंकि कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं का उल्लेख अनुच्छेद 42 में है; अनुच्छेद 23 बलात् श्रम के प्रतिषेध से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देने से सीवर में काम करने वाले कर्मियों की मृत्यु और चोट के जोखिम में कमी लाने में सहायता मिलती है।
कारण (R): बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में मानव प्रवेश व्यावसायिक दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है, और 2013 के अधिनियम के अंतर्गत जोखिमपूर्ण सफाई पर रोक लगाई गई है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — मशीनीकरण का मूल उद्देश्य मानव को सीधे जोखिमपूर्ण सीवर और सेप्टिक टैंक में भेजने की आवश्यकता को कम करना है, इसलिए अभिकथन सही है। कारण भी सही है, और यही तर्क मशीनीकरण को सुरक्षा से जोड़ता है, अतः (R) (A) की सही व्याख्या है। 2013 का अधिनियम हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध और जोखिमपूर्ण सफाई पर रोक का प्रावधान करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (संवैधानिक अनुच्छेद):
1. अनुच्छेद 17
2. अनुच्छेद 42
3. अनुच्छेद 46
4. अनुच्छेद 21
सूची II (विषय):
A. कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाएँ
B. अस्पृश्यता का उन्मूलन
C. दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति
D. जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता का संरक्षण
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
- 1-B, 2-A, 3-C, 4-D
- 1-B, 2-C, 3-A, 4-D
- 1-D, 2-A, 3-B, 4-C
उत्तर: 1-B, 2-A, 3-C, 4-D — अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता के उन्मूलन से संबंधित है (1-B)। अनुच्छेद 42 कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं का प्रावधान करता है (2-A)। अनुच्छेद 46 राज्य को दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति का निर्देश देता है (3-C)। अनुच्छेद 21 जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के संरक्षण की गारंटी देता है (4-D)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छता कर्मियों की कार्य-दशाओं में सुधार के लिए केवल सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मशीनीकरण, संस्थागत सहयोग और सामाजिक गरिमा का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। NAMASTE योजना के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि मशीनीकरण केवल तकनीकी उपाय बनकर रह जाए और सामाजिक भेदभाव बना रहे, तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) प्रस्तावना: हाथ से मैला ढोने की समस्या को तकनीकी, विधिक और सामाजिक आयामों में रखना; गांधी का स्वच्छता-श्रम संबंधी विचार और डॉ. बी.आर. आंबेडकर का जाति-आधारित व्यवसायों पर विश्लेषण उल्लेखनीय। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन), अनुच्छेद 21 (गरिमा सहित जीवन का अधिकार, सुरक्षा के संदर्भ में विस्तारित व्याख्या), अनुच्छेद 23 (बलात् श्रम का प्रतिषेध), अनुच्छेद 42 (कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाएँ), अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के हित)। (3) विधिक ढाँचा: मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार का प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 (हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध, जोखिमपूर्ण सफाई पर रोक तथा पुनर्वास); व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020 में नियोक्ता के सुरक्षा दायित्व। सर्वोच्च न्यायालय का सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ (2014) निर्णय, जिसमें सीवर और सेप्टिक टैंक में मृत्यु के मामलों में क्षतिपूर्ति और सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए गए थे। (4) नीतिगत ढाँचा: NAMASTE योजना के घटक, जैसे सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, कौशल विकास, स्वास्थ्य कवरेज और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) के माध्यम से ऋण सहायता; राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) की भूमिका; स्वच्छ भारत मिशन में मशीनीकरण पर बल। (5) समालोचना: सुरक्षा उपकरण अकेले पर्याप्त क्यों नहीं (उपयोग का प्रशिक्षण, निगरानी, ठेकेदारी व्यवस्था में जवाबदेही, पहचान और सूचीकरण की चुनौती); मशीनीकरण की लागत, छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच, तथा रोजगार-हानि की आशंका का संतुलित मूल्यांकन। (6) परिणाम-विश्लेषण: यदि सामाजिक भेदभाव बना रहे तो मशीनीकरण से काम का स्वरूप बदलेगा पर सामाजिक श्रेणीबद्धता नहीं टूटेगी; कर्मियों का पुनर्वास और कौशल-उन्नयन न होने पर निर्भरता बनी रहेगी; सम्मान और न्याय का संवैधानिक लक्ष्य अधूरा रहेगा। (7) निष्कर्ष: तकनीक, विधि, कौशल और सामाजिक दृष्टिकोण का समेकित दृष्टिकोण ही टिकाऊ समाधान है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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