08 Aug एसआरआईएसैलम टाइगर रिजर्व में हालिया बाघों की मौतों पर सरकारी जांच शुरू
✎ नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की हालिया मौतों ने भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक वैधानिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
- Prelims: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), बाघ संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीव गलियारे, प्रोजेक्ट टाइगर
- Essay: भारत में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और पर्यावरण संतुलन: एक अनिवार्य संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की हालिया मौतों ने भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक वैधानिक निकाय है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में जुलाई 2026 में तीन बाघों की मौत की खबरें सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इन घटनाओं की उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। इस वर्ष मई में भी एक बाघ की मृत्यु हुई थी, जिसे प्राकृतिक कारणों से हुई मृत्यु माना गया था। इन मौतों ने वन्यजीव संरक्षण और विशेष रूप से बाघों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जिसके बाद सरकार ने कारणों का पता लगाने और दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की सिफारिश करने के लिए एक समिति का गठन किया है।
पृष्ठभूमि
- नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य (Tiger Reserve) है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
- यह रिजर्व नल्लामाला पहाड़ियों के बीहड़ इलाके में स्थित है और कृष्णा नदी इसके बीच से होकर गुजरती है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों के लिए एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत किया गया है।
- बाघों की मृत्यु के कारणों में प्राकृतिक कारण, अवैध शिकार (Poaching), मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict), बीमारियों और पर्यावास (Habitat) का नुकसान शामिल हो सकते हैं।
- भारत में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Project Tiger) 1973 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में बाघों की आबादी को बचाना और उनके पर्यावास को संरक्षित करना है।
- वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) बाघों और अन्य वन्यजीवों को विभिन्न पर्यावासों के बीच आवागमन की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे उनकी आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बनी रहती है और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) क्या है?
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
- इसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन करके 2006 में किया गया था।
- NTCA का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन को मजबूत करना और बाघ संरक्षण को बढ़ावा देना है।
- यह बाघ अभयारण्यों के लिए प्रबंधन योजनाएँ तैयार करने, दिशानिर्देश जारी करने और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करने का कार्य करता है।
- यह बाघों की आबादी के अनुमान और उनके पर्यावास की स्थिति का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक निगरानी भी करता है।
- NTCA अवैध शिकार विरोधी अभियानों को मजबूत करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों की सिफारिश करता है।
- यह बाघ संरक्षण के लिए राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- प्राधिकरण बाघ अभयारण्यों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) | भारत के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक, बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण। |
| बाघों की मृत्यु | हाल ही में जुलाई 2026 में तीन बाघों की मौत, मई में एक और मौत। |
| उच्च-स्तरीय जांच समिति | सेवानिवृत्त IFS अधिकारी पी. मल्लिकार्जुन राव की अध्यक्षता में गठित। |
| जांच के दायरे | मृत्यु के कारणों का पता लगाना, दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की सिफारिश करना। |
| समिति के अन्य कार्य | शिकार-रोधी अभियानों को मजबूत करना, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, वैज्ञानिक निगरानी बढ़ाना। |
| राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) | बाघों की मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड रखता है और संरक्षण नीतियों का निर्धारण करता है। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर स्थित एक प्रमुख प्रजाति (Keystone Species) हैं, जिनकी अनुपस्थिति पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है।
- बाघों की मृत्यु जैव विविधता (Biodiversity) के नुकसान का संकेत है, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन
- यह घटना भारत के बाघ संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है, खासकर संरक्षित क्षेत्रों के भीतर।
- यह वन्यजीव अपराधों, जैसे अवैध शिकार (Poaching) और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) के प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।
शासन और नीति निर्माण
- राज्य सरकार द्वारा उच्च-स्तरीय समिति का गठन समस्या की गंभीरता और उसके समाधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- समिति की सिफारिशें भविष्य में बेहतर वन्यजीव संरक्षण नीतियों और प्रबंधन रणनीतियों के लिए आधार प्रदान करेंगी।
चुनौतियाँ
1. अवैध शिकार और वन्यजीव अपराध
- बाघों के अंगों की अवैध तस्करी (Illegal Trafficking) और शिकार वन्यजीवों के लिए एक बड़ा खतरा है।
- वन्यजीव अपराधों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन तंत्र की कमी।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, आंतरिक सुरक्षा
2. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- वन्यजीव आवासों के अतिक्रमण (Encroachment) और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण संघर्ष में वृद्धि।
- फसलों को नुकसान या पशुधन पर हमले के कारण स्थानीय समुदायों में वन्यजीवों के प्रति नकारात्मक धारणा।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, सामाजिक मुद्दे
3. पर्यावास का विखंडन और क्षरण
- विकास परियोजनाओं, जैसे सड़कों, बांधों और खनन के कारण बाघों के आवासों का विखंडन (Habitat Fragmentation)।
- वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) की कमी या उनका बाधित होना, जिससे बाघों की आवाजाही प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, जैव विविधता
4. वैज्ञानिक निगरानी और प्रबंधन की कमी
- बाघों की आबादी, स्वास्थ्य और व्यवहार पर नियमित और वैज्ञानिक डेटा संग्रह की कमी।
- प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता का अपर्याप्त उपयोग।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण प्रबंधन
5. संसाधनों की कमी
- वन विभाग के पास कर्मियों, उपकरणों और वित्तीय संसाधनों की कमी, जिससे प्रभावी गश्त और संरक्षण कार्य बाधित होते हैं।
- प्रशिक्षित वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बाघों की लगातार मृत्यु | संरक्षित क्षेत्र में सुरक्षा और प्रबंधन की प्रभावशीलता पर प्रश्न। |
| मृत्यु के अज्ञात कारण | अवैध शिकार, बीमारी या अन्य मानवजनित कारकों की संभावना। |
| वन्यजीव गलियारों का क्षरण | बाघों की आवाजाही और आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) के लिए खतरा। |
| समुदाय की भागीदारी का अभाव | स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना संरक्षण प्रयासों की सीमित सफलता। |
| अपर्याप्त गश्त और निगरानी | वन्यजीव अपराधों को रोकने में बाधा। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष | स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों दोनों के लिए जोखिम। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA)
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
आगे की राह
- बाघों की मृत्यु के कारणों की गहन और त्वरित जांच की जाए, जिसमें फोरेंसिक विश्लेषण (Forensic Analysis) और विशेषज्ञ राय शामिल हो।
- शिकार-रोधी अभियानों को मजबूत किया जाए, जिसमें उन्नत निगरानी तकनीकें, जैसे ड्रोन और थर्मल इमेजिंग, का उपयोग किया जाए।
- वन्यजीव गलियारों को संरक्षित और बहाल किया जाए, ताकि बाघों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए और उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
- वैज्ञानिक निगरानी प्रणालियों को बढ़ाया जाए, जिसमें बाघों की आबादी, स्वास्थ्य और व्यवहार पर नियमित डेटा संग्रह शामिल हो।
- वन विभाग के कर्मियों को उन्नत प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन प्रदान किए जाएं, ताकि वे प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
- सतत पर्यावरण-पर्यटन (Sustainable Eco-tourism) को बढ़ावा दिया जाए, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर पैदा हों और संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बढ़े।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाघ संरक्षण · नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) · मानव-वन्यजीव संघर्ष · अवैध शिकार विरोधी अभियान · वन्यजीव गलियारे · वैज्ञानिक निगरानी · सामुदायिक भागीदारी · सतत पारिस्थितिकी पर्यटन · पर्यावरण संरक्षण · जैव विविधता · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया भाव’}
अवधारणा प्रवाह
नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु → राज्य सरकार द्वारा उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन → मृत्यु के कारणों और संरक्षण उपायों की जांच → शिकार-रोधी अभियानों और वैज्ञानिक निगरानी में सुधार की सिफारिशें → दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों का विकास और क्रियान्वयन → बाघों की आबादी का संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।
2. यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों में फैला हुआ है।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य वास्तव में भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों में फैला हुआ है। कथन 3 भी सही है क्योंकि NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
Q2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
अभिकथन (A): NTCA बाघ संरक्षण से संबंधित मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देता है।
कारण (R): NTCA की स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य बाघों और उनके आवासों का संरक्षण करना है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि NTCA का एक प्रमुख कार्य बाघ संरक्षण पर सरकारों को सलाह देना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि NTCA की स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी, और यह अभिकथन की सही व्याख्या भी करता है कि यह सलाह क्यों देता है – क्योंकि इसे अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है ताकि बाघों और उनके आवासों का संरक्षण किया जा सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में हाल ही में हुई बाघों की मौतों ने भारत में बाघ संरक्षण के समक्ष चुनौतियों को उजागर किया है। इन चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और बाघों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक संरक्षण उपायों का सुझाव दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में बाघों की मौतों का संक्षिप्त उल्लेख और भारत में बाघ संरक्षण के महत्व पर प्रकाश।
2. बाघ संरक्षण के समक्ष चुनौतियाँ (विभिन्न आयामों में): अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का नुकसान और विखंडन, वन्यजीव गलियारों का अभाव, वैज्ञानिक निगरानी की कमी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, सामुदायिक भागीदारी का अभाव, अपर्याप्त गश्त और प्रवर्तन।
3. दीर्घकालिक संरक्षण उपाय: अवैध शिकार विरोधी अभियानों को मजबूत करना, गश्त प्रणालियों में सुधार, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी को बढ़ाना (जैसे कैमरा ट्रैप, रेडियो-टैगिंग), सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना (स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना), सतत पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा देना, वन कर्मचारियों का क्षमता निर्माण, और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन।
4. निष्कर्ष: बाघ संरक्षण के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जो पारिस्थितिकी संतुलन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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