26 Jul केंद्र सरकार ने कर्नाटक और हिमाचल में न्यायिक ढांचे को किया मजबूत, जानिए विस्तार से
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: केंद्र प्रायोजित योजना (CSS), न्यायिक अवसंरचना, ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ, जिला और अधीनस्थ न्यायालय, न्याय विकास पोर्टल
- Essay: न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यकुशलता, भारत में सुशासन के लिए न्यायिक सुधार
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के भौतिक व डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करके न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता और पहुंच में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना (Centrally Sponsored Scheme for Judicial Infrastructure) के तहत कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है। इस पहल में न्यायालय कक्षों, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयों और डिजिटल अवसंरचना का विकास शामिल है, जो न्यायपालिका की कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार 1993-94 से जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) लागू कर रही है।
- इस योजना के अंतर्गत पाँच प्रमुख घटक शामिल हैं: कोर्ट हॉल, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष।
- केंद्र प्रायोजित योजना के तहत परियोजनाओं की पहचान संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
- राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से पात्र प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद उन्हें निधि का अस्थायी आवंटन किया जाता है तथा मुख्य स्वीकृति (Mother Sanction) जारी की जाती है।
- पिछले पाँच वर्षों में कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश को इस योजना के तहत महत्वपूर्ण धनराशि जारी की गई है, जिससे इन राज्यों में न्यायिक अवसंरचना में सुधार हुआ है।
- ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना (e-Courts Mission Mode Project) के तहत न्यायालयों के लिए एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित किया गया है, जो मुकदमे की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से समर्थन प्रदान करता है।
केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना
- यह योजना जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है।
- इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण और रहने की स्थिति प्रदान करना है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता बढ़े।
- योजना के तहत कोर्ट हॉल, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष जैसे प्रमुख घटकों का निर्माण और उन्नयन किया जाता है।
- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका अर्थ है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इसके वित्तपोषण में योगदान करती हैं।
- परियोजनाओं का क्रियान्वयन राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों के समन्वय से होता है।
- न्याय विकास पोर्टल (Nyaya Vikas Portal) और एमआईएस पोर्टल (MIS Portal) जैसी प्रणालियों का उपयोग परियोजनाओं की प्रगति और निधि के उपयोग की निगरानी के लिए किया जाता है।
- ई-कोर्ट परियोजना के तृतीय चरण के तहत न्यायालयों के डिजिटलीकरण के लिए भी पर्याप्त धनराशि जारी की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रियाएँ अधिक सुलभ और पारदर्शी बन सकें।
- इस योजना का अंतिम लक्ष्य न्यायपालिका को मजबूत करना और नागरिकों को त्वरित तथा प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| न्यायिक अवसंरचना योजना | जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास। |
| पांच प्रमुख घटक | न्यायालय कक्ष, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष शामिल हैं। |
| केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) | केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वित। |
| ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना | न्यायालयों में डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण और डिजिटलीकरण को बढ़ावा। |
| निधि आवंटन प्रक्रिया | राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्रस्ताव प्राप्त होने पर अस्थायी आवंटन और मुख्य स्वीकृति जारी करना। |
महत्व
न्यायिक प्रशासन
- न्यायालयों के भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करके न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता में वृद्धि।
- न्यायिक अधिकारियों और वकीलों के लिए बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करना, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आती है।
- डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से मामलों की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता और पहुंच में सुधार।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करके न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास में केंद्र सरकार की भूमिका।
- राज्यों और उच्च न्यायालयों द्वारा परियोजनाओं की पहचान, जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास सुनिश्चित करती है।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- न्याय तक पहुंच में सुधार से नागरिकों का न्यायिक प्रणाली में विश्वास बढ़ता है।
- तेज और कुशल न्याय प्रणाली आर्थिक विकास और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाती है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढांचे की कमी
- स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या के मुकाबले न्यायालय कक्षों और आवासीय इकाइयों की अपर्याप्त उपलब्धता।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास और न्याय के मुद्दे
2. निधि का उपयोग और कार्यान्वयन
- राज्यों द्वारा प्राप्त निधियों के समय पर और प्रभावी उपयोग में चुनौतियाँ।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी, जिससे लागत में वृद्धि और लाभों में विलंब होता है।
यूपीएससी लिंक: सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
3. डिजिटल डिवाइड
- दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी की कमी, जिससे ई-कोर्ट सेवाओं की पहुंच सीमित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास
4. मानव संसाधन
- न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों की कमी, जो नए बुनियादी ढांचे के पूर्ण उपयोग को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन का विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| न्यायालय कक्षों की कमी | स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या के अनुपात में उपलब्ध न्यायालय कक्षों की अपर्याप्तता न्याय वितरण को प्रभावित करती है। |
| आवासीय इकाइयों की कमी | न्यायिक अधिकारियों के लिए पर्याप्त आवास की कमी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, उनकी कार्यकुशलता को प्रभावित कर सकती है। |
| निधि के उपयोग में असमानता | विभिन्न राज्यों को जारी की गई केंद्रीय निधि और उनके उपयोग में अंतर, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होता है। |
| परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी | निर्माणाधीन परियोजनाओं की संख्या, जो समय पर पूरा न होने पर लागत में वृद्धि और लाभों में विलंब का कारण बनती है। |
| डिजिटल अवसंरचना का पूर्ण उपयोग | ई-कोर्ट परियोजना के तहत जारी धन के बावजूद, सभी न्यायालयों में डिजिटल सुविधाओं के पूर्ण और समान उपयोग की चुनौती। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना
- ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना
आगे की राह
- न्यायिक अवसंरचना योजना के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाना और समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना।
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जारी निधियों के प्रभावी और समय पर उपयोग के लिए क्षमता निर्माण और निगरानी तंत्र को मजबूत करना।
- न्यायालय कक्षों और आवासीय इकाइयों की कमी को दूर करने के लिए लक्षित निवेश और प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य।
- ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत डिजिटल अवसंरचना का विस्तार करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
- न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना ताकि नव-निर्मित बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग हो सके।
- न्यायिक अवसंरचना विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की संभावनाओं का पता लगाना।
- योजना के तहत परियोजनाओं की पहचान और अनुमोदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
न्यायिक अवसंरचना · केंद्र प्रायोजित योजना · न्यायिक अधिकारियों की आवासीय इकाइयाँ · ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना · न्याय तक पहुंच · डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र · जिला और अधीनस्थ न्यायालय · राज्यों को केंद्रीय सहायता · न्यायिक सुधार · विधि एवं न्याय मंत्रालय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 233-237’, ‘note’: ‘अधीनस्थ न्यायालयों का संगठन और नियंत्रण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39A’, ‘note’: ‘समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना का क्रियान्वयन। → न्यायालयों के लिए भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास। → न्यायिक अधिकारियों और वकीलों के लिए बेहतर कार्य वातावरण। → न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता और पहुंच में वृद्धि। → नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय की प्राप्ति।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना 1993-94 से जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु लागू की जा रही है।
2. इस योजना के तहत केवल कोर्ट हॉल और न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं।
3. परियोजनाओं की पहचान संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना 1993-94 से लागू है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसमें वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष भी शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि परियोजनाओं की पहचान राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
Q2. ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- केवल न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाना।
- न्यायालयों में भौतिक अवसंरचना का निर्माण करना।
- मुकदमे की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से सुगम बनाना।
- वकीलों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
उत्तर: मुकदमे की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से सुगम बनाना। — ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना का उद्देश्य एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जो मुकदमे की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करता है, जिससे न्याय तक पहुंच और दक्षता में सुधार होता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में न्यायिक अवसंरचना के विकास में केंद्र प्रायोजित योजना की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने और न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने में यह योजना कितनी प्रभावी रही है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना के उद्देश्यों, घटकों और कार्यान्वयन तंत्र का संक्षिप्त परिचय दें। दूसरे भाग में, योजना की सफलताओं और सीमाओं का विश्लेषण करें, विशेष रूप से न्याय तक पहुंच और न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने के संदर्भ में। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के आंकड़ों का उपयोग करते हुए योजना के प्रभाव को दर्शाएं। ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना जैसे पूरक प्रयासों का भी उल्लेख करें। अंत में, न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए आगे के उपायों और चुनौतियों पर एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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