केरल को केंद्र सरकार ने दिए 2,597 करोड़ रुपये, राज्यों को मिले 1.09 लाख करोड़

Centre releases ₹2,597 crore to Kerala as ‘additional instalment’ of tax devolution to boost capital spending — concept mind map

केरल को केंद्र सरकार ने दिए 2,597 करोड़ रुपये, राज्यों को मिले 1.09 लाख करोड़

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Tax devolution to Kerala

✎ कर हस्तांतरण भारतीय राजकोषीय संघवाद का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक निश्चित हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों को वितरित किया जाता है, ताकि उनके विकासात्मक और…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार।
  • Prelims: कर हस्तांतरण (Tax Devolution), वित्त आयोग (Finance Commission), पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure), राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism), संघीय करों का शुद्ध आगम (Net Proceeds of Union Taxes), राज्यों का वित्तीय सुदृढ़ीकरण (Financial Strengthening of States)
  • Essay: भारत में सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ और वित्तीय आयाम।, राज्यों के वित्तीय सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका और आर्थिक विकास पर इसका प्रभाव।

त्वरित पुनरावृत्ति: कर हस्तांतरण भारतीय राजकोषीय संघवाद का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक निश्चित हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों को वितरित किया जाता है, ताकि उनके विकासात्मक और पूंजीगत व्यय को वित्तपोषित किया जा सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने राज्यों के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय करों और शुल्कों के शुद्ध आगम (Net Proceeds of Union Taxes and Duties) से ₹1,09,019 करोड़ की ‘अग्रिम किस्त’ जारी की है। इसी क्रम में, केरल को कर हस्तांतरण (Tax Devolution) की ‘अतिरिक्त किस्त’ के रूप में ₹2,597 करोड़ प्राप्त हुए हैं। यह राशि राज्यों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण (Financial Strengthening) और विकासात्मक व्यय में तेज़ी लाने की केंद्र की प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जो नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय संविधान के तहत, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण का प्रावधान है, जिसे राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) कहा जाता है।
  • अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगम के वितरण की सिफारिश करता है।
  • वर्तमान में, केंद्र द्वारा एकत्रित करों का 41% राज्यों को कई किस्तों में हस्तांतरित किया जाता है, जैसा कि 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है।
  • कर हस्तांतरण राज्यों को उनके विकासात्मक और पूंजीगत व्यय को वित्तपोषित करने में मदद करता है, जिससे समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • पूंजीगत व्यय में सड़कों, पुलों, अस्पतालों और स्कूलों जैसे बुनियादी ढाँचे का निर्माण शामिल है, जिसका दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक लाभ होता है।
  • केंद्र सरकार समय-समय पर राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने और विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त या अग्रिम किस्तें जारी करती है।

भारत में कर हस्तांतरण (Tax Devolution) क्या है?

  • कर हस्तांतरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का एक हिस्सा राज्यों को वितरित किया जाता है।
  • यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 270 और 280 के तहत निर्धारित एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो राजकोषीय संघवाद का आधार है।
  • वित्त आयोग प्रत्येक पाँच वर्ष में केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगम के वितरण के सिद्धांतों और हिस्सेदारी की सिफारिश करता है।
  • वर्तमान में, 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, केंद्र के विभाज्य पूल (Divisible Pool) का 41% राज्यों को हस्तांतरित किया जाता है।
  • यह हस्तांतरण राज्यों को अपने सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी ढाँचे और विकासात्मक परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है।
  • कर हस्तांतरण के अलावा, केंद्र सरकार राज्यों को अनुदान (Grants) भी प्रदान करती है, जो विशिष्ट उद्देश्यों या योजनाओं के लिए होते हैं।
  • इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को बढ़ाना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है, जिससे संतुलित राष्ट्रीय विकास सुनिश्चित हो सके।
  • पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त किस्तें जारी करना राज्यों को दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कर हस्तांतरण की अतिरिक्त किस्त राज्यों को पूंजीगत व्यय बढ़ाने और विकास को गति देने में सहायता।
₹2,597 करोड़ का आवंटन (केरल के लिए) राज्य के वित्तीय संसाधनों को सुदृढ़ करता है और विकासात्मक परियोजनाओं को बढ़ावा देता है।
कुल ₹1,09,019 करोड़ का वितरण राज्यों के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है ताकि उनके वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
पूंजीगत व्यय को बढ़ावा दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण।
नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त राज्यों को अप्रत्याशित वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में लचीलापन प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्रदान करके पूंजीगत व्यय को बढ़ावा मिलता है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ता है।
  • पूंजीगत व्यय में वृद्धि से दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि यह उत्पादक क्षमता और रोजगार सृजन को बढ़ाता है।
  • राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करता है, जिससे वे अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पाते हैं और राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कम करने में मदद मिलती है।

संघीय ढांचा

  • केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) के सिद्धांत को मजबूत करता है, जहां केंद्र राज्यों को उनके विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।
  • यह राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे वे अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बना सकते हैं।
  • राज्यों के बीच क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद करता है, क्योंकि यह उन राज्यों को अतिरिक्त सहायता प्रदान कर सकता है जिन्हें इसकी अधिक आवश्यकता है।

शासन और विकास

  • राज्यों को अपनी विकासात्मक और कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाता है, जिससे नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • यह केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह राज्यों के साथ मिलकर देश के समग्र विकास के लिए काम कर रही है।
  • बेहतर बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

चुनौतियाँ

1. राजकोषीय अनुशासन का अभाव

  • अतिरिक्त धन का उपयोग अनुत्पादक व्यय या राजस्व व्यय के लिए किया जा सकता है, जिससे पूंजीगत व्यय का मूल उद्देश्य विफल हो सकता है।
  • राज्यों द्वारा वित्तीय प्रबंधन में ढिलाई आ सकती है, यदि उन्हें लगता है कि केंद्र से अतिरिक्त सहायता आसानी से उपलब्ध होगी।

2. राज्यों के बीच असमानता

  • कुछ राज्यों को दूसरों की तुलना में अधिक या कम आवंटन से असंतोष पैदा हो सकता है, जिससे संघीय संबंधों में तनाव आ सकता है।
  • वित्तीय आयोग (Finance Commission) द्वारा निर्धारित मानदंडों के अतिरिक्त आवंटन से पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

3. धन के उपयोग की निगरानी

  • केंद्र सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि आवंटित धन का उपयोग वास्तव में पूंजीगत व्यय के लिए ही किया जा रहा है।
  • परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी या अक्षमता से धन का प्रभावी उपयोग बाधित हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राजकोषीय अनुशासन अतिरिक्त धन का अनुत्पादक व्यय में उपयोग होने का जोखिम।
राज्यों के बीच असमानता आवंटन मानदंडों पर संभावित असंतोष और संघीय तनाव।
धन के उपयोग की निगरानी पूंजीगत व्यय के लिए धन के वास्तविक उपयोग को सुनिश्चित करने में चुनौती।
परियोजना कार्यान्वयन परियोजनाओं में देरी या अक्षमता से धन का अप्रभावी उपयोग।
केंद्र पर निर्भरता राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर दीर्घकालिक प्रभाव, केंद्र पर बढ़ती निर्भरता।

आगे की राह

  • राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए आवंटित धन के उपयोग की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित किया जाए।
  • राज्यों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • अतिरिक्त कर हस्तांतरण के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मानदंड विकसित किए जाएं ताकि राज्यों के बीच निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
  • राज्यों को अपनी राजस्व सृजन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि केंद्र पर उनकी निर्भरता कम हो।
  • केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संवाद और सहयोग को मजबूत किया जाए ताकि वित्तीय संघवाद को बढ़ावा मिल सके।
  • पूंजीगत परियोजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजकोषीय संघवाद · कर हस्तांतरण · राज्यों का पूंजीगत व्यय · केंद्र-राज्य संबंध · वित्त आयोग · अनुच्छेद 280 · राजकोषीय सुदृढ़ीकरण · अतिरिक्त किस्त · राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता · आर्थिक संवृद्धि

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 270’, ‘note’: ‘केंद्र द्वारा लगाए गए करों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 275’, ‘note’: ‘राज्यों को संघ से अनुदान’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा अतिरिक्त कर हस्तांतरण  →  राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध  →  पूंजीगत व्यय में वृद्धि का प्रोत्साहन  →  बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किया जाता है।
2. वित्त आयोग केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों के शुद्ध आय के राज्यों के बीच वितरण के लिए सिफारिशें करता है।
3. वर्तमान में, केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों का 41% राज्यों को हस्तांतरित किया जाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है। कथन 2 भी सही है। वित्त आयोग का मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आय के वितरण के सिद्धांतों की सिफारिश करना है। कथन 3 भी सही है। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, केंद्र के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 41% है।

Q2. राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से संबंधित है।
2. यह राज्यों को अपने विकास और पूंजीगत व्यय के लिए अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

  1. A
  2. B
  3. C
  4. D

उत्तर: C — राजकोषीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों के विभाजन से संबंधित है। यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों के पास अपने विकास और पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों, जिससे उन्हें अधिक वित्तीय स्वायत्तता मिलती है। इसलिए, दोनों कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राजकोषीय संघवाद के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए, भारत में केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण की प्रक्रिया का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में इस प्रक्रिया की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राजकोषीय संघवाद की अवधारणा को परिभाषित करें – केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों का विभाजन।
2. **राजकोषीय संघवाद का सिद्धांत:** भारतीय संदर्भ में इसके महत्व को समझाएं, जिसमें विभिन्न स्तरों पर सरकारों के बीच संसाधनों का ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज असंतुलन शामिल है।
3. **कर हस्तांतरण की प्रक्रिया:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग की भूमिका का उल्लेख करें।
* **वित्त आयोग की सिफारिशें:** 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों (जैसे 41% कर हस्तांतरण) और उसके पीछे के मानदंडों (जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय अंतर, राजकोषीय प्रयास) का संक्षिप्त विवरण दें।
* **हस्तांतरण के तरीके:** मासिक किस्तों और अतिरिक्त/अग्रिम किस्तों के माध्यम से हस्तांतरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
4. **आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पहलू:** राज्यों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना, राज्यों को विकासात्मक व्यय के लिए सशक्त बनाना।
* **चुनौतियाँ/आलोचनाएँ:**
* केंद्र पर राज्यों की निर्भरता।
* शर्तों के साथ अनुदान (Centrally Sponsored Schemes) का बढ़ता प्रचलन, जो राज्यों की स्वायत्तता को प्रभावित करता है।
* राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में वित्त आयोग की सिफारिशों की सीमाएँ।
* केंद्र द्वारा उपकर और अधिभार (Cesses and Surcharges) के माध्यम से राजस्व संग्रह, जो विभाज्य पूल से बाहर रहते हैं।
5. **पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में भूमिका:**
* पूंजीगत व्यय का महत्व (बुनियादी ढांचा, रोजगार सृजन, दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि)।
* कर हस्तांतरण से राज्यों को प्राप्त अतिरिक्त धन का उपयोग पूंजीगत परियोजनाओं में कैसे किया जा सकता है।
* हाल के उदाहरण (जैसे केरल को अतिरिक्त किस्त) का उल्लेख करें जो राज्यों को पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
6. **निष्कर्ष:** एक सुदृढ़ राजकोषीय संघवाद के लिए संतुलन और सहयोग के महत्व पर जोर दें, जो राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और राष्ट्रीय विकास दोनों को बढ़ावा दे।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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