27 Jul केरल में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा एवं 400 MWh भंडारण को मंजूरी, 25 साल के लिए ₹2.93 प्रति यूनिट दर तय


मानचित्र व माइंड-मैप: Kerala solar procurement via SECI scheme
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन
- Prelims: राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC), सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI), दीर्घकालिक सौर ऊर्जा खरीद, ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, ISTS योजना
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व, जलवायु परिवर्तन से निपटने में सौर ऊर्जा की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) ने सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI) की ISTS योजना के तहत 25 वर्षों के लिए ₹2.93 प्रति यूनिट की दर से दीर्घकालिक सौर ऊर्जा खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी शामिल है, जो राज्यों को स्थिर और लागत प्रभावी ऊर्जा आपूर्ति प्रदान करेगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission – SERC) ने केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत 200 मेगावाट (MW) सौर ऊर्जा और 100 MW/400 मेगावाट घंटा (MWh) ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage System – ESS) के साथ दीर्घकालिक खरीद की जाएगी। यह खरीद सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (Solar Energy Corporation of India Limited – SECI) की ISTS ट्रेंच XX योजना के तहत ₹2.93 प्रति यूनिट की प्रतिस्पर्धी दर पर 25 वर्षों के लिए होगी, जो राज्य को अस्थिर जीवाश्म ईंधन कीमतों से बचाएगी और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए कई नीतियां और योजनाएं शुरू की हैं।
- सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) के तहत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Central Public Sector Unit) है, जो सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए प्रमुख एजेंसी है।
- राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) विद्युत अधिनियम, 2003 (Electricity Act, 2003) के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जो राज्यों में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को विनियमित करता है, जिसमें टैरिफ निर्धारण भी शामिल है।
- ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (ESS) नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की आंतरायिकता (Intermittency) की चुनौती का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त ऊर्जा को संग्रहीत किया जा सके और मांग के समय उपयोग किया जा सके।
- दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreements – PPAs) बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को स्थिर और अनुमानित दरों पर बिजली प्राप्त करने में मदद करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ होता है।
- ISTS (Inter-State Transmission System) योजनाएँ अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली से जुड़ी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देती हैं, जिससे देश भर में बिजली का कुशल संचरण संभव होता है।
सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI) और इसकी भूमिका
- सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI) भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में एक मिनीरत्न श्रेणी-I केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- इसकी स्थापना 2011 में राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission) के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी।
- SECI सौर ऊर्जा क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- यह सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी करता है, बिजली खरीद समझौते (PPA) और बिजली बिक्री समझौते (PSA) पर हस्ताक्षर करता है।
- SECI सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा (Wind Energy), हाइब्रिड परियोजनाएं (Hybrid Projects) और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems) को भी बढ़ावा देता है।
- इसका उद्देश्य भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान करना है।
- ISTS योजनाएं SECI द्वारा शुरू की गई हैं ताकि अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली से जुड़ी बड़ी सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सके, जिससे पूरे देश में नवीकरणीय ऊर्जा का वितरण हो सके।
- यह राज्य वितरण कंपनियों को प्रतिस्पर्धी दरों पर नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने का अवसर प्रदान करता है, जैसा कि केरल के मामले में देखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| दीर्घकालिक सौर ऊर्जा खरीद | केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) द्वारा 25 वर्षों की अवधि के लिए ₹2.93 प्रति यूनिट की निश्चित दर पर सौर ऊर्जा की खरीद। |
| ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) के साथ | 200 MW सौर ऊर्जा के साथ 100 MW/400 MWh ऊर्जा भंडारण, जो चरम मांग को पूरा करने में सहायक। |
| SECI की ISTS ट्रेंच XX योजना | यह खरीद सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) की इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) ट्रेंच XX योजना के तहत की जा रही है। |
| प्रतिस्पर्धी दर | ₹2.93 प्रति यूनिट की दर महंगी थर्मल पावर और अल्पकालिक एक्सचेंज पावर की तुलना में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है। |
| ईंधन की अस्थिरता से बचाव | 25 साल के लिए दर तय होने से जीवाश्म ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और अनिश्चित बाजार मूल्यों से बचाव होगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह समझौता राज्य को 25 वर्षों के लिए ₹2.93 प्रति यूनिट की निश्चित दर पर ऊर्जा उपलब्ध कराएगा, जिससे बिजली खरीद लागत में स्थिरता आएगी।
- महंगी पीक थर्मल (Peak Thermal) और अल्पकालिक एक्सचेंज पावर (Short-term Exchange Power) की तुलना में यह एक लागत प्रभावी विकल्प है, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम हो सकता है।
- जीवाश्म ईंधन की कीमतों में अस्थिरता से बचाव होगा, जिससे राज्य के बजट पर अप्रत्याशित दबाव कम होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता
- सौर ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage System) का संयोजन दिन के समय के साथ-साथ चरम मांग के घंटों के दौरान भी बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
- यह राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय स्रोत प्रदान करेगा, जिससे ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी।
- दीर्घकालिक अनुबंध (Long-term Contract) राज्य को ऊर्जा आपूर्ति के संबंध में भविष्य की योजना बनाने में मदद करेगा।
पर्यावरणीय लाभ
- सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देगा, जो राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे पहलों के अनुरूप है।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के विस्तार से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
नीतिगत निहितार्थ
- राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission) की मंजूरी केंद्र सरकार की योजनाओं, जैसे SECI की ISTS ट्रेंच XX योजना, के प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाती है।
- यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है ताकि वे अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसी तरह के दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौतों पर विचार कर सकें।
- यह भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चुनौतियाँ
1. ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता
- सौर ऊर्जा की आंतरायिक प्रकृति (Intermittent Nature) के कारण ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems) की आवश्यकता बढ़ जाती है।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Battery Energy Storage Systems) की लागत अभी भी अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे परियोजना की कुल लागत प्रभावित हो सकती है।
- राज्य को अपनी बढ़ती चरम मांग को पूरा करने के लिए अधिक बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और हाइब्रिड पावर प्लांट (Hybrid Power Plants) से बिजली प्राप्त करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड प्रबंधन
2. दीर्घकालिक योजना और कार्यान्वयन
- 25 साल के दीर्घकालिक अनुबंधों के लिए सटीक मांग पूर्वानुमान (Demand Forecasting) और ग्रिड एकीकरण (Grid Integration) योजना की आवश्यकता होती है।
- परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन और निर्धारित तिथि (जैसे 1 अप्रैल, 2028) तक आपूर्ति शुरू करने में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
- नियामक ढांचे (Regulatory Framework) को दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए अनुकूल होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, ऊर्जा नीति, शासन
3. वित्तीय व्यवहार्यता
- हालांकि ₹2.93 प्रति यूनिट की दर प्रतिस्पर्धी है, लेकिन भविष्य में प्रौद्योगिकी में सुधार और लागत में कमी के साथ और भी बेहतर दरें संभव हो सकती हैं।
- प्रोजेक्ट के वित्तपोषण और निवेश को आकर्षित करने में चुनौतियाँ हो सकती हैं, खासकर बड़े पैमाने पर भंडारण घटकों के साथ।
- राज्य विद्युत बोर्डों की वित्तीय स्थिति (Financial Health) ऐसे दीर्घकालिक समझौतों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, ऊर्जा वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
4. नियामक और नीतिगत मुद्दे
- राज्य विद्युत नियामक आयोगों को नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौतों के लिए उचित टैरिफ (Tariff) और शर्तों को निर्धारित करने में संतुलन बनाना होता है।
- प्रोज़्यूमर्स (Prosumers) द्वारा नेट-बैंक्ड ऊर्जा (Net Banked Energy) के लिए औसत पूल्ड लागत (Average Pooled Cost of Power Purchase – APPC) दर जैसे मुद्दों पर असहमति नियामक चुनौतियों का हिस्सा है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों के समन्वय की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा विनियमन, संघवाद, नीति निर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सौर ऊर्जा की आंतरायिकता | दिन के समय ही बिजली उत्पादन, रात में या बादलों वाले मौसम में उपलब्धता नहीं। |
| ऊर्जा भंडारण की लागत | बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना और रखरखाव की उच्च लागत। |
| दीर्घकालिक अनुबंधों का प्रबंधन | 25 साल की अवधि के लिए मांग, आपूर्ति और तकनीकी परिवर्तनों का प्रबंधन। |
| नियामक असहमति | प्रोज़्यूमर्स और नियामक आयोग के बीच नेट-बैंक्ड ऊर्जा के लिए APPC दर पर मतभेद। |
| ग्रिड एकीकरण | बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा को मौजूदा ग्रिड में कुशलतापूर्वक एकीकृत करना। |
| क्षमता उपयोग | सौर ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता उपयोग दर (Capacity Utilisation Factor) का अनुकूलन। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI) की ISTS ट्रेंच XX योजना
आगे की राह
- ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा उनकी लागत कम करने के उपाय करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौतों (PPA) के लिए एक सुदृढ़ और पारदर्शी नियामक ढांचा विकसित करना, जो सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे।
- राज्यों को अपनी चरम मांग को पूरा करने के लिए हाइब्रिड पावर प्लांट (Hybrid Power Plants) और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से अधिक बिजली प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) प्रौद्योगिकियों और उन्नत मांग-प्रतिक्रिया (Demand-Response) तंत्रों को अपनाना ताकि नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सुगम बनाया जा सके।
- दीर्घकालिक ऊर्जा योजना और मांग पूर्वानुमान क्षमताओं को मजबूत करना ताकि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को सटीक रूप से पूरा किया जा सके।
- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के नए और अभिनव मॉडल तलाशना, जिसमें हरित बांड (Green Bonds) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी शामिल हैं।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) उपायों को बढ़ावा देना ताकि कुल ऊर्जा मांग को कम किया जा सके और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम हो।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों और कार्यान्वयन रणनीतियों में बेहतर समन्वय स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के तहत बिजली से संबंधित विधायी शक्तियों का वितरण।
- अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से किसी भी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अनुदान।
- अनुच्छेद 292: भारत सरकार द्वारा ऋण लेने की शक्ति, जो ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण से संबंधित हो सकती है।
अवधारणा प्रवाह
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने KSEB के प्रस्ताव को मंजूरी दी। → KSEB, SECI की ISTS ट्रेंच XX योजना के तहत सौर ऊर्जा खरीदेगा। → यह खरीद 200 MW सौर ऊर्जा और 100 MW/400 MWh ऊर्जा भंडारण के साथ होगी। → ₹2.93 प्रति यूनिट की निश्चित दर पर 25 वर्षों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित होगी। → यह राज्य की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करेगा और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगा। → जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (SECI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SECI नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
2. यह भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए प्राथमिक नोडल एजेंसी है।
3. SECI केवल सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, न कि ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। SECI नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है और भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए प्राथमिक नोडल एजेंसी है। कथन 3 गलत है क्योंकि SECI ऊर्जा भंडारण प्रणालियों सहित सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए व्यापक सहायता प्रदान करता है, जैसा कि ISTS ट्रेंच XX योजना में सौर ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण के प्रावधान से स्पष्ट है।
Q2. भारत में राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission – SERC) के कार्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SERC विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
2. यह राज्य में बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण के लिए टैरिफ निर्धारित करता है।
3. SERC केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली खरीद को मंजूरी देता है, पारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं से नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। SERC विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है और राज्य में बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण के लिए टैरिफ निर्धारित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि SERC पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों ऊर्जा स्रोतों से बिजली खरीद को मंजूरी देता है, न कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन लक्ष्यों को प्राप्त करने में नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems – ESS) की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, राज्य विद्युत नियामक आयोगों (SERCs) द्वारा दीर्घकालिक ऊर्जा खरीद समझौतों को मंजूरी देने का क्या महत्व है?
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की भूमिका का मूल्यांकन करें। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता को संबोधित करना, ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करना, पीक मांग को पूरा करना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना शामिल है। दूसरे भाग में, SERCs द्वारा दीर्घकालिक ऊर्जा खरीद समझौतों को मंजूरी देने के महत्व पर चर्चा करें। इसमें निवेश को बढ़ावा देना, लागत स्थिरता प्रदान करना, जोखिम कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करना शामिल है। निष्कर्ष में, भारत के ऊर्जा परिदृश्य के लिए इसके समग्र निहितार्थों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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