17 Sep खान मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: ई-कचरा प्रबंधन में बड़ा कदम
✎ विशेष अभियान 6.0 खान मंत्रालय की एक पहल है जो ई-कचरा प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता में सुधार पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य सतत विकास और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू | GS Paper III — पर्यावरण, प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन; आपदा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: विशेष अभियान 6.0, ई-कचरा प्रबंधन, सतत विकास, राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM), JNARDDC, प्रशासनिक दक्षता
- Essay: सतत विकास के लिए ई-कचरा प्रबंधन की अनिवार्यता, सुशासन और प्रशासनिक सुधार: एक सतत प्रक्रिया
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 खान मंत्रालय की एक पहल है जो ई-कचरा प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता में सुधार पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य सतत विकास और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ने विशेष अभियान 5.0 की सफलताओं के बाद विशेष अभियान 6.0 शुरू करने का निर्णय लिया है। यह पहल स्वच्छता, सतत विकास और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- विशेष अभियान 5.0 की सफलता: इस अभियान के तहत 1,772 जन शिकायतों का निवारण किया गया, 3,751 भौतिक फाइलों को हटाया गया और 1.7 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय स्थान खाली कराया गया।
- राजस्व सृजन: अभियान के परिणामस्वरूप कबाड़ के निपटान से लगभग 19.33 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ।
- प्रशासनिक दक्षता: इन अभियानों का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना और सरकारी संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना है।
- ई-कचरा प्रबंधन का महत्व: विशेष अभियान 6.0 में ई-कचरा प्रबंधन को एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
- राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Minerals Mission – NCMM): ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और पुनर्प्राप्ति की पहल NCMM के उद्देश्यों के अनुरूप है।
- सहयोगी प्रयास: खान मंत्रालय, उसके संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) और स्वायत्त निकायों के समन्वित प्रयासों से लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- यह खान मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक दक्षता में सुधार और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
- इस वर्ष का मुख्य विषय ‘ई-कचरे का प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण और निपटान’ है।
- अभियान के तहत सांसदों, प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्य सरकारों से प्राप्त लंबित संदर्भों, जन शिकायतों और अपीलों का निपटान किया जाएगा।
- रिकॉर्ड की समीक्षा और प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे सरकारी परिसरों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।
- JNARDDC (एक स्वायत्त निकाय) को ई-कचरा संग्रहण के लिए बूथ स्थापित करने की सुविधा प्रदान करने हेतु नामित किया गया है, जो विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्य करेगा।
- इसका उद्देश्य ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और पुनर्प्राप्ति को सुगम बनाना है, जो राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के लक्ष्यों का समर्थन करता है।
- यह अभियान स्वच्छता, सतत विकास और कुशल शासन के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों में योगदान देगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ई-कचरा प्रबंधन पर ध्यान | यह अभियान ई-कचरे के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण और निपटान पर केंद्रित है, जो पर्यावरणीय स्थिरता और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। |
| प्रशासनिक दक्षता में सुधार | जन शिकायतों का निवारण, भौतिक फाइलों को हटाना और कार्यालय स्थान खाली करना प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करता है। |
| राजस्व सृजन | कबाड़ के निपटान से लगभग 19.33 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ, जो संसाधनों के कुशल उपयोग को दर्शाता है। |
| राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) से जुड़ाव | ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और पुनर्प्राप्ति को सुविधाजनक बनाना NCMM के उद्देश्यों के अनुरूप है। |
| समन्वित प्रयास | खान मंत्रालय, उसके संबद्ध कार्यालयों, CPSEs और स्वायत्त निकायों के बीच समन्वय से लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित होगी। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरे का सुरक्षित और प्रभावी निपटान पर्यावरण प्रदूषण को कम करता है, जिसमें मिट्टी और जल प्रदूषण शामिल हैं।
- यह खतरनाक पदार्थों के अनुचित निपटान से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में सहायक है।
- ई-कचरे के पुनर्चक्रण से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम होती है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
आर्थिक महत्व
- ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) की पुनर्प्राप्ति से देश की खनिज सुरक्षा बढ़ती है और आयात पर निर्भरता कम होती है।
- पुनर्चक्रण उद्योग को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर सृजित होते हैं और चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) को प्रोत्साहन मिलता है।
- कबाड़ के निपटान से राजस्व सृजन होता है, जो सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग का एक उदाहरण है।
शासनिक महत्व
- जन शिकायतों का निवारण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण सुशासन (good governance) को बढ़ावा देता है।
- सरकारी कार्यालयों में कुशल कार्यप्रणालियों को संस्थागत रूप देना पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करता है।
- यह अभियान सरकारी विभागों में स्वच्छता और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरा संग्रहण और पृथक्करण
- देश भर में ई-कचरे के प्रभावी संग्रहण और उसके उचित पृथक्करण के लिए व्यापक बुनियादी ढांचे का अभाव।
- उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के बीच ई-कचरा निपटान के सही तरीकों के बारे में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और प्रबंधन
2. अवैज्ञानिक निपटान
- अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector) द्वारा ई-कचरे का अवैज्ञानिक तरीके से निपटान, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है।
- खतरनाक रसायनों के रिसाव और उनके अनुचित प्रबंधन से उत्पन्न चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम
3. प्रौद्योगिकी और निवेश
- ई-कचरा पुनर्चक्रण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और आवश्यक निवेश की कमी।
- महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए कुशल और लागत प्रभावी प्रक्रियाओं का विकास।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी
4. नियामक और प्रवर्तन
- ई-कचरा प्रबंधन नियमों (E-Waste Management Rules) का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
- अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक क्षेत्र में लाने और उन्हें नियमों के दायरे में लाने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-कचरे की बढ़ती मात्रा | तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खपत के कारण ई-कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे प्रबंधन पर दबाव बढ़ रहा है। |
| खतरनाक घटक | ई-कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे खतरनाक रसायन होते हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। |
| पुनर्चक्रण दर | भारत में ई-कचरे के पुनर्चक्रण की दर कम है, जिससे मूल्यवान संसाधनों का नुकसान होता है और प्रदूषण बढ़ता है। |
| जागरूकता का अभाव | आम जनता और छोटे व्यवसायों के बीच ई-कचरे के सही निपटान और उसके खतरों के बारे में जागरूकता की कमी है। |
| अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व | ई-कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र की बड़ी भूमिका है, जो अक्सर असुरक्षित और अवैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Minerals Mission)
आगे की राह
- ई-कचरा प्रबंधन नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना।
- ई-कचरा संग्रहण के लिए देशव्यापी बुनियादी ढांचे का विकास करना, जिसमें अधिक संग्रहण केंद्र और सुविधाएँ शामिल हों।
- ई-कचरे के खतरों और उसके सही निपटान के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाना।
- ई-कचरा पुनर्चक्रण के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए।
- अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक क्षेत्र में एकीकृत करने के लिए नीतियाँ बनाना और उन्हें प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- उत्पादक उत्तरदायित्व विस्तार (Extended Producer Responsibility – EPR) सिद्धांतों को मजबूत करना और निर्माताओं को उनके उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में प्रबंधन के लिए जवाबदेह ठहराना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-कचरा प्रबंधन · विशेष अभियान 6.0 · सतत विकास · संसाधन प्रबंधन · प्रशासनिक दक्षता · चक्रीय अर्थव्यवस्था · महत्वपूर्ण खनिज · राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन · स्वच्छता अभियान · अपशिष्ट से धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार
- अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार
अवधारणा प्रवाह
ई-कचरे का बढ़ता उत्पादन → पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव → विशेष अभियान 6.0 का शुभारंभ → ई-कचरे का प्रभावी संग्रहण और निपटान → महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति → सतत विकास और संसाधन प्रबंधन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विशेष अभियान 6.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में ई-कचरे के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण और निपटान पर ध्यान केंद्रित करना है।
2. यह अभियान खान मंत्रालय द्वारा 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जाएगा।
3. इस अभियान के तहत, JNA RDD C को ई-कचरा संग्रहण के लिए बूथ स्थापित करने की सुविधा प्रदान करने हेतु नामित किया गया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान का मुख्य विषय ई-कचरा प्रबंधन है। कथन 2 सही है क्योंकि अभियान की अवधि 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। कथन 3 भी सही है क्योंकि JNA RDD C को ई-कचरा संग्रहण बूथ स्थापित करने के लिए नामित किया गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022’ का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
- यह केवल औद्योगिक ई-कचरे के निपटान से संबंधित है।
- यह ई-कचरे के उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को अनिवार्य करता है।
- यह केवल सरकारी कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित है।
- यह ई-कचरे के आयात और निर्यात को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
उत्तर: यह ई-कचरे के उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को अनिवार्य करता है। — ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 का एक प्रमुख प्रावधान विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) है, जो उत्पादकों को उनके उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में ई-कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी सौंपता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ई-कचरा प्रबंधन भारत में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौती प्रस्तुत करता है। इस संदर्भ में, विशेष अभियान 6.0 जैसे सरकारी प्रयासों की प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए और भारत में ई-कचरे के सतत प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रमुख उपायों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में ई-कचरा की बढ़ती मात्रा और उससे जुड़ी चुनौतियों (पर्यावरणीय, स्वास्थ्य, आर्थिक) का संक्षिप्त परिचय।
2. **विशेष अभियान 6.0 की प्रासंगिकता:**
* सरकारी कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना।
* प्रशासनिक दक्षता और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देना।
* महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCM M) से जुड़ाव।
* स्वच्छता और सतत विकास के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों में योगदान।
3. **ई-कचरे के सतत प्रबंधन के लिए प्रमुख उपाय:**
* **नियामक ढाँचा:** ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) का प्रभावी कार्यान्वयन।
* **बुनियादी ढाँचा:** ई-कचरा संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का विकास।
* **प्रौद्योगिकी:** पुनर्चक्रण और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग।
* **जागरूकता:** उपभोक्ताओं, उत्पादकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना।
* **अनौपचारिक क्षेत्र का एकीकरण:** अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक प्रणाली में शामिल करना।
* **चक्रीय अर्थव्यवस्था:** ई-कचरे को एक संसाधन के रूप में देखने और ‘अपशिष्ट से धन’ (Waste to Wealth) के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को साझा करना।
4. **निष्कर्ष:** ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें सरकारी पहल, नियामक ढाँचा और जनभागीदारी शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- AI नियमों के लिए UN की पहल: क्या है वैश्विक दृष्टिकोण? - September 17, 2026
- UN’s AI Governance Push: Can Global Rules Prevent Existential Risks? - September 17, 2026
- अल्लाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म और जीवनसाथी चुनने का अधिकार - September 17, 2026

No Comments