29 Jul ग्रीन हाईवे परियोजनाएं: पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ निर्माण की दिशा में सरकार के प्रयास


मानचित्र व माइंड-मैप: Green Highways Projects in India
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, अवसंरचना, आर्थिक विकास | GS पेपर I — भूगोल (पर्यावरण भूगोल)
- Prelims: हरित राजमार्ग नीति 2015, मियावाकी पद्धति, कार्बन ऑफसेटिंग, पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग, क्षतिपूरक वनीकरण, भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC)
- Essay: सतत विकास और अवसंरचना: भारत के हरित भविष्य की ओर, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक संवृद्धि का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: हरित राजमार्ग परियोजनाएँ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण, पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों के माध्यम से सतत अवसंरचना विकास को बढ़ावा देती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 के तहत देश में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर किए गए वृक्षारोपण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं पर जानकारी साझा की है। पिछले पाँच वर्षों में लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3.61 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जो सतत अवसंरचना विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने ‘हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली को बढ़ावा देना और पर्यावरण पर सड़क निर्माण के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।
- इस नीति के तहत, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) में उपलब्ध अतिरिक्त मीडियन और सड़क किनारे की भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, जो भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC): SP:21 दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
- वृक्षारोपण और पर्यावरण शमन गतिविधियों की लागत को सामान्यतः संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की कुल परियोजना लागत में ही शामिल किया जाता है, जिससे इन पहलों के लिए निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित होता है।
- सरकार ने सड़क निर्माण और रखरखाव में पुनर्चक्रित सामग्रियों, अपशिष्ट उत्पादों और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार और पहल की हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए हरित पहलों, ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकों और उन्नत पर्यावरण प्रबंधन प्रथाओं को अपनाया जा रहा है।
- जहाँ भी राजमार्ग विकास के लिए पेड़ों को काटना आवश्यक होता है, वहाँ क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और पेड़ों का प्रत्यारोपण (Transplantation) किया जाता है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
हरित राजमार्ग परियोजनाएँ क्या हैं?
- हरित राजमार्ग परियोजनाएँ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली पहल हैं।
- इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सड़क निर्माण के पर्यावरणीय पदचिह्न (Environmental Footprint) को कम करना, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुखद वातावरण बनाना है।
- इसमें सड़क निर्माण में फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरा, रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP) और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट जैसी पुनर्चक्रित और टिकाऊ सामग्रियों का उपयोग शामिल है।
- मियावाकी पद्धति (Miyawaki Method) जैसी उन्नत वृक्षारोपण तकनीकों का उपयोग करके कम समय में घने जंगल विकसित किए जा रहे हैं, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
- ड्रोन का उपयोग करके पौधों की निगरानी की जाती है, जिससे वृक्षारोपण की सफलता दर में सुधार होता है और रखरखाव लागत कम होती है।
- कार्बन ऑफसेटिंग (Carbon Offsetting) उपायों को भी इन परियोजनाओं में एकीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है कि सड़क निर्माण से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की भरपाई वृक्षारोपण के माध्यम से की जाती है।
- बाँस क्रैश बैरियर (Bamboo Crash Barrier) और प्राकृतिक जियो-टेक्सटाइल्स (जैसे जूट/कोयर) जैसी अभिनव सामग्रियों का उपयोग सड़क सुरक्षा और पर्यावरण-मित्रता दोनों को बढ़ाता है।
- इन परियोजनाओं का वित्तपोषण राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए आवंटित समग्र कोष से किया जाता है, जिससे इन पहलों की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 | राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है। |
| पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग | सड़क निर्माण में फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरा, रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP) आदि का उपयोग करके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और संसाधनों का संरक्षण करना। |
| मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी | कम समय में सघन वनस्पति विकसित करने और वृक्षारोपण की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग। |
| क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और वृक्ष प्रत्यारोपण | सड़क परियोजनाओं के कारण पेड़ों की कटाई से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करना। |
| कार्बन ऑफसेटिंग उपाय | सड़क निर्माण से उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पहल। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाकर वायु प्रदूषण को कम करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में मदद करता है।
- पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में कमी आती है और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार होता है।
- कार्बन ऑफसेटिंग और वृक्षारोपण से जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों में योगदान मिलता है।
आर्थिक महत्व
- पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग निर्माण लागत को कम कर सकता है और संसाधनों की दक्षता बढ़ा सकता है।
- हरित राजमार्गों से सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर अनुभव और पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
- स्थानीय समुदायों के लिए वृक्षारोपण और रखरखाव गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
सामाजिक महत्व
- बेहतर सड़क किनारे के वातावरण से यात्रियों के लिए सौंदर्य और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान होता है।
- हरित बुनियादी ढाँचा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
- पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है और टिकाऊ विकास प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण और उपलब्धता
- वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में।
- विभिन्न हितधारकों से भूमि अधिग्रहण में देरी परियोजना कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, भूमि सुधार
2. वृक्षारोपण का रखरखाव और उत्तरजीविता
- रोपे गए पौधों की उच्च उत्तरजीविता दर सुनिश्चित करने के लिए उचित रखरखाव, पानी और सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
- जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पर्यावरणीय कारक पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन
3. तकनीकी और गुणवत्ता नियंत्रण
- पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग में गुणवत्ता मानकों और तकनीकी विशिष्टताओं का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- नई तकनीकों जैसे मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विशेषज्ञता और प्रशिक्षण की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अवसंरचना विकास
4. वित्तपोषण और संसाधन
- हरित पहलों के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करना, विशेषकर स्वतंत्र वृक्षारोपण परियोजनाओं के लिए।
- मानव संसाधन और विशेषज्ञता की कमी परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| दीर्घकालिक रखरखाव | रोपे गए पौधों की उत्तरजीविता और हरियाली सुनिश्चित करने के लिए निरंतर देखभाल और पर्याप्त जल आपूर्ति। |
| पुनर्चक्रित सामग्री की गुणवत्ता | सड़क निर्माण में उपयोग की जाने वाली पुनर्चक्रित सामग्री की गुणवत्ता और स्थायित्व मानकों को बनाए रखना। |
| भूमि की उपलब्धता | विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) भूमि प्राप्त करना। |
| प्रौद्योगिकी का एकीकरण | मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण। |
| अंतर-एजेंसी समन्वय | विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015
आगे की राह
- वृक्षारोपण के लिए ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) भूमि की पहचान और अधिग्रहण में तेजी लाना।
- रोपे गए पौधों की उत्तरजीविता दर बढ़ाने के लिए प्रभावी रखरखाव रणनीतियों और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
- पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग के लिए गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र और तकनीकी मानकों को और मजबूत करना।
- मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण प्रदान करना।
- हरित राजमार्ग परियोजनाओं के लिए समर्पित वित्तपोषण स्रोतों की खोज करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- सड़क निर्माण में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और सामग्रियों पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) को परियोजनाओं में और अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हरित राजमार्ग नीति 2015 · राष्ट्रीय राजमार्गों का हरित विकास · पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकें · पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग · मियावाकी पद्धति · कार्बन ऑफसेटिंग · क्षतिपूरक वनीकरण · वृक्षारोपण और प्रत्यारोपण · सतत सड़क निर्माण · अपशिष्ट प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
हरित राजमार्ग नीति 2015 का निर्माण → राष्ट्रीय राजमार्गों पर वृक्षारोपण और हरियाली को बढ़ावा देना → पुनर्चक्रित सामग्री और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग → कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण → पर्यावरणीय स्थिरता और टिकाऊ बुनियादी ढाँचा विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाना है।
2. इस नीति के तहत, वृक्षारोपण की लागत हमेशा संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की कुल लागत में शामिल होती है।
3. मियावाकी पद्धति और ड्रोन द्वारा पौधों की निगरानी जैसी पहलें राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए शुरू की गई हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि हरित राजमार्ग नीति 2015 का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (ROW) में वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव के माध्यम से हरियाली बढ़ाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि वृक्षारोपण की लागत सामान्यतः परियोजना लागत में शामिल होती है, लेकिन जब यह स्वतंत्र रूप से किया जाता है, तो इसे राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों के लिए आवंटित कुल कोष से पूरा किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों को हरियाली बढ़ाने के लिए अपनाया गया है।
Q2. राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित में से किन सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है?
1. फ्लाई ऐश / पॉन्ड ऐश
2. रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP)
3. प्लास्टिक कचरा
4. प्राकृतिक जियो-टेक्सटाइल्स (जैसे जूट/कोयर)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प (फ्लाई ऐश / पॉन्ड ऐश, रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP), प्लास्टिक कचरा, और प्राकृतिक जियो-टेक्सटाइल्स) राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए उपयोग की जा रही टिकाऊ और पुनर्चक्रित सामग्री हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के टिकाऊ विकास में ‘हरित राजमार्ग नीति 2015’ की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, सड़क निर्माण में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और पुनर्चक्रित सामग्रियों के उपयोग से संबंधित चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत हरित राजमार्ग नीति 2015 के उद्देश्यों और मुख्य प्रावधानों की संक्षिप्त व्याख्या से करें। इसके बाद, राष्ट्रीय राजमार्गों के टिकाऊ विकास में इसकी भूमिका का परीक्षण करें, जिसमें वृक्षारोपण, सौंदर्यकरण, कार्बन ऑफसेटिंग और क्षतिपूरक वनीकरण जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। दूसरे भाग में, सड़क निर्माण में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों (जैसे मियावाकी पद्धति, ड्रोन निगरानी) और पुनर्चक्रित सामग्रियों (जैसे फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरा, RAP) के उपयोग से जुड़े अवसरों (पर्यावरणीय लाभ, लागत बचत) और चुनौतियों (तकनीकी व्यवहार्यता, गुणवत्ता नियंत्रण, जागरूकता की कमी) पर विस्तार से चर्चा करें। निष्कर्ष में, इन पहलों के महत्व और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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