ग्रीन हाईवे परियोजनाओं से राष्ट्रीय राजमार्गों पर हरियाली बढ़ाने की पहल

ग्रीन हाईवे परियोजनाओं से राष्ट्रीय राजमार्गों पर हरियाली बढ़ाने की पहल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना (Infrastructure)  |  GS Paper III — संरक्षण (Conservation)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
  • Prelims: हरित राजमार्ग नीति 2015, मियावाकी पद्धति, क्षतिपूरक वनीकरण, पुनर्नवीनीकृत सामग्री, सड़क निर्माण में अपशिष्ट उपयोग, कार्बन ऑफसेटिंग
  • Essay: भारत में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण, अवसंरचना विकास में पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: हरित राजमार्ग परियोजनाएँ भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास को पर्यावरण संरक्षण और सतत निर्माण प्रथाओं के साथ एकीकृत करती हैं, जिससे हरित अवसंरचना का निर्माण होता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 के तहत देश में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर किए गए वृक्षारोपण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं पर जानकारी साझा की है। पिछले पाँच वर्षों में 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3.61 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जो सतत अवसंरचना विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में तीव्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए मजबूत और कुशल परिवहन अवसंरचना आवश्यक है।
  • सड़क निर्माण से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों, जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण और प्राकृतिक आवासों के नुकसान को कम करना एक बड़ी चुनौती है।
  • हरित राजमार्ग नीति 2015 का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।
  • यह नीति सड़क निर्माण में टिकाऊ और पुनर्नवीनीकृत (Recycled) सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित है।
  • सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में कार्बन ऑफसेटिंग (Carbon Offsetting) उपायों और वृक्षारोपण को अनिवार्य रूप से शामिल किया है।
  • पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने और सड़क की मजबूती में सुधार के लिए प्लास्टिक कचरे, फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग किया जा रहा है।

हरित राजमार्ग परियोजनाएँ क्या हैं?

  • हरित राजमार्ग परियोजनाएँ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव पर केंद्रित हैं, जिसका उद्देश्य सड़कों को हरा-भरा बनाना और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करना है।
  • ये परियोजनाएँ राष्ट्रीय राजमार्गों के ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way – RoW) की उपलब्ध अतिरिक्त मीडियन और सड़क किनारे की भूमि पर वृक्षारोपण करती हैं।
  • इनमें सड़क निर्माण में पुनर्नवीनीकृत सामग्रियों, अपशिष्ट उत्पादों और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग शामिल है, जैसे फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरा, रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP) आदि।
  • मियावाकी पद्धति (Miyawaki Method) जैसी उन्नत वृक्षारोपण तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जो घने और तेजी से बढ़ने वाले वनों के निर्माण में सहायक है।
  • ड्रोन द्वारा पौधों की निगरानी और क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) एवं पेड़ों का प्रत्यारोपण (Transplantation) भी इन परियोजनाओं का अभिन्न अंग है।
  • इन परियोजनाओं का वित्तपोषण सामान्यतः संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की कुल लागत में शामिल होता है, या फिर राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों के लिए आवंटित समग्र कोष से किया जाता है।
  • इनका लक्ष्य सड़क निर्माण के दौरान उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को न्यूनतम करना है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
ग्रीन हाईवे (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 राष्ट्रीय राजमार्गों पर वृक्षारोपण और पर्यावरण शमन गतिविधियों के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है।
पुनर्चक्रित सामग्री और अपशिष्ट उत्पादों का उपयोग सड़क निर्माण में टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है और अपशिष्ट कम होता है।
मियावाकी पद्धति और ड्रोन द्वारा निगरानी वृक्षारोपण की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है, जिससे हरित आवरण में तेजी से वृद्धि होती है।
क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और वृक्ष प्रत्यारोपण सड़क विकास के लिए पेड़ों की कटाई के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है, जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करता है।
कार्बन ऑफसेटिंग उपाय राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान करते हैं, जलवायु परिवर्तन शमन में सहायक।
ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकें निर्माण प्रक्रिया के दौरान उत्सर्जन को कम करती हैं और ऊर्जा खपत को अनुकूलित करती हैं।

महत्व

पर्यावरण संबंधी

  • राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाकर वायु प्रदूषण को कम करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है और अपशिष्ट भराव क्षेत्रों पर दबाव कम होता है।
  • कार्बन ऑफसेटिंग और ऊर्जा-कुशल तकनीकों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान देता है।

आर्थिक

  • सड़क निर्माण में अपशिष्ट उत्पादों और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग करके परियोजना लागत को कम करने की क्षमता रखता है।
  • दीर्घकालिक रूप से सड़कों के रखरखाव की लागत को कम कर सकता है, क्योंकि टिकाऊ सामग्री सड़कों की मजबूती बढ़ाती है।
  • हरित प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं में नवाचार को बढ़ावा देता है, जिससे हरित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलता है।

सामाजिक

  • सड़क उपयोगकर्ताओं और आसपास के समुदायों के लिए बेहतर सौंदर्य और जीवन की गुणवत्ता प्रदान करता है।
  • हरित बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है।
  • स्थानीय समुदायों के लिए वृक्षारोपण और रखरखाव गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा करता है।

शासन

  • ग्रीन हाईवे नीति 2015 और IRC दिशा-निर्देशों के माध्यम से एक सुदृढ़ नीतिगत ढाँचा प्रदान करता है।
  • परियोजनाओं में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को एकीकृत करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है।
  • डिजिटल निगरानी प्रणालियों के माध्यम से परियोजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और उपलब्धता

  • वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में।
  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी से परियोजना के कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है।

2. तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण

  • पुनर्चक्रित सामग्री और नई तकनीकों (जैसे मियावाकी पद्धति) के प्रभावी उपयोग के लिए पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है।
  • निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के बीच इन प्रथाओं को अपनाने के लिए क्षमता निर्माण एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

3. निगरानी और रखरखाव

  • रोपे गए पौधों की दीर्घकालिक उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी और रखरखाव प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
  • ड्रोन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रारंभिक निवेश और तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है।

4. सामग्री की गुणवत्ता और मानकीकरण

  • पुनर्चक्रित सामग्री (जैसे प्लास्टिक कचरा, फ्लाई ऐश) के उपयोग में गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि सड़क की मजबूती और स्थायित्व प्रभावित न हो।
  • विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पादों के लिए उपयुक्त तकनीकी विशिष्टताएँ विकसित करना एक सतत प्रक्रिया है।

5. पर्याप्त वित्तपोषण

  • वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण और पर्यावरण शमन गतिविधियों के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • हालांकि लागत परियोजना का हिस्सा है, लेकिन बड़े पैमाने पर हरित पहलों के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पर्याप्त भूमि की उपलब्धता शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) भूमि की कमी।
तकनीकी ज्ञान और कौशल पुनर्चक्रित सामग्री और उन्नत वृक्षारोपण विधियों के प्रभावी उपयोग के लिए विशेषज्ञता का अभाव।
दीर्घकालिक रखरखाव रोपे गए पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने और हरित आवरण बनाए रखने के लिए सतत रखरखाव की आवश्यकता।
गुणवत्ता नियंत्रण सड़क निर्माण में पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग में गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करना।
समन्वय का अभाव विभिन्न सरकारी एजेंसियों और निजी ठेकेदारों के बीच प्रभावी समन्वय की चुनौती।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव बदलते मौसम पैटर्न और चरम मौसमी घटनाओं से वृक्षारोपण परियोजनाओं को होने वाला संभावित नुकसान।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ग्रीन हाईवे (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015

आगे की राह

  • वृक्षारोपण के लिए भूमि बैंक बनाने और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित करना।
  • सड़क निर्माण में पुनर्चक्रित सामग्री और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना।
  • पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं में श्रमिकों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करना।
  • वृक्षारोपण परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए डिजिटल उपकरणों और रिमोट सेंसिंग तकनीकों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
  • हरित राजमार्ग परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल और नवीन वित्तपोषण तंत्रों का पता लगाना।
  • स्थानीय समुदायों को वृक्षारोपण और रखरखाव गतिविधियों में शामिल करके स्वामित्व और दीर्घकालिक देखभाल को बढ़ावा देना।
  • सड़क निर्माण में उपयोग की जाने वाली पुनर्चक्रित सामग्री के लिए मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल को मजबूत करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

हरित राजमार्ग नीति 2015 · राष्ट्रीय राजमार्ग · वृक्षारोपण · पर्यावरण शमन गतिविधियाँ · पुनर्चक्रित सामग्री · अपशिष्ट उत्पाद · पर्यावरण-अनुकूल तकनीकें · मियावाकी पद्धति · कार्बन ऑफसेटिंग · टिकाऊ निर्माण प्रथाएँ · जियो-टेक्सटाइल्स · क्षतिपूरक वनीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

सड़क निर्माण से पर्यावरणीय प्रभाव  →  ग्रीन हाईवे नीति का निर्माण  →  वृक्षारोपण और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग  →  कार्बन उत्सर्जन में कमी और संसाधन संरक्षण  →  टिकाऊ बुनियादी ढाँचा विकास  →  पर्यावरण और सामाजिक लाभ

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव) नीति 2015 का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है।
2. इस नीति के तहत, वृक्षारोपण की लागत हमेशा संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की कुल परियोजना लागत में शामिल होती है।
3. राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में फ्लाई ऐश और प्लास्टिक कचरे जैसी पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि हरित राजमार्ग नीति 2015 का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यकरण और रखरखाव को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि वृक्षारोपण की लागत सामान्यतः परियोजना लागत में शामिल होती है, लेकिन जब यह स्वतंत्र रूप से किया जाता है, तो इसे राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों के लिए आवंटित कुल कोष से पूरा किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि फ्लाई ऐश और प्लास्टिक कचरे जैसी पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग टिकाऊ निर्माण प्रथाओं और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देता है।

Q2. राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरण-टिकाऊ विकास के लिए अपनाई जाने वाली निम्नलिखित में से कौन सी पहलें हैं?
1. मियावाकी पद्धति से वृक्षारोपण
2. ड्रोन द्वारा पौधों की निगरानी
3. कंपंसेटरी एफॉरेस्टेशन और पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन
4. बिटुमिनस परतों में रिक्लेम्ड डामर पेवमेंट (RAP) का उपयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरण-टिकाऊ विकास के लिए अपनाई जाने वाली पहलें हैं। मियावाकी पद्धति और ड्रोन निगरानी वृक्षारोपण से संबंधित हैं, जबकि कंपंसेटरी एफॉरेस्टेशन पेड़ों के कटने पर क्षतिपूर्ति के लिए है। RAP का उपयोग पुनर्चक्रित सामग्री के रूप में टिकाऊ निर्माण का हिस्सा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हरित राजमार्ग नीति 2015 के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देने में यह नीति कितनी सफल रही है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर को दो मुख्य भागों में संरचित करें। पहले भाग में, हरित राजमार्ग नीति 2015 के प्रमुख उद्देश्यों (वृक्षारोपण, सौंदर्यकरण, रखरखाव) और कार्यान्वयन रणनीतियों (IRC दिशा-निर्देश, परियोजना लागत में शामिल करना, स्वतंत्र कार्य) का विस्तृत वर्णन करें। दूसरे भाग में, नीति की सफलता का मूल्यांकन करें, जिसमें पिछले पाँच वर्षों के दौरान किए गए वृक्षारोपण के आंकड़े (3.61 करोड़ से अधिक पौधे, 1.32 लाख किमी NH), पुनर्चक्रित सामग्रियों (फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरा, RAP, C&D अपशिष्ट) के उपयोग, मियावाकी पद्धति, ड्रोन निगरानी, कार्बन ऑफसेटिंग, और क्षतिपूरक वनीकरण जैसी पहलों का उल्लेख करें। नीति के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और संसाधनों को बचाने में मिली सफलता पर प्रकाश डालें। नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए चुनौतियों और आगे की राह पर भी संक्षिप्त चर्चा की जा सकती है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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