01 Sep छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस: केआर मोहपात्रा की नियुक्ति पर क्या है अपडेट?
✎ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाली कॉलेजियम प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्वपूर्ण प्रावधान, न्यायपालिका की संरचना और कार्यप्रणाली | GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे
- Prelims: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम, अनुच्छेद 217, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, न्यायिक नियुक्तियाँ
- Essay: भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही, भारत में न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया का विकास और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाली कॉलेजियम प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के.आर. मोहपात्रा के नाम की सिफारिश की है। यह सिफारिश वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 4 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद की जाने वाली नियुक्ति के संबंध में है। यह घटना उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया और इसमें कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका को पुनः चर्चा में लाती है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के अलावा किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की जाती है।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए, राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करते हैं।
- कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित एक प्रणाली है, जो संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है।
- यह प्रणाली ‘तीन न्यायाधीशों के मामलों’ (First, Second, and Third Judges Cases) के माध्यम से विकसित हुई है, जिसने न्यायपालिका को न्यायिक नियुक्तियों में प्रमुख भूमिका दी है।
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए, सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम संबंधित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और अन्य उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के नामों पर विचार करता है।
- कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं, जो उन पर विचार करती है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति आदेश जारी करती है।
कॉलेजियम प्रणाली क्या है?
- कॉलेजियम प्रणाली भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की एक प्रणाली है, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई है।
- यह प्रणाली संविधान के किसी भी विशिष्ट अनुच्छेद में वर्णित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्याख्या का परिणाम है।
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- उच्च न्यायालयों के लिए, उच्च न्यायालय कॉलेजियम में संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम नामों की सिफारिश करता है।
- सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों पर आपत्ति उठा सकती है या स्पष्टीकरण मांग सकती है, लेकिन यदि कॉलेजियम उन्हीं नामों को दोहराता है, तो सरकार आमतौर पर उन पर बाध्य होती है।
- इस प्रणाली का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।
- न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था, कॉलेजियम प्रणाली के विकल्प के रूप में लाया गया था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति | यह न्यायिक प्रशासन की निरंतरता और उच्च न्यायालयों के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करता है। |
| सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश | यह भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए स्थापित प्रक्रिया है। |
| न्यायाधीशों का स्थानांतरण | यह न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने में मदद करता है, साथ ही न्यायिक अनुभव के व्यापक प्रसार को भी सुनिश्चित करता है। |
| वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति | यह रिक्ति को भरने और न्यायिक नेतृत्व में परिवर्तन को आवश्यक बनाता है। |
| न्यायाधीशों की योग्यता और अनुभव | न्यायाधीशों की नियुक्ति में उनके कानूनी ज्ञान, अनुभव और न्यायिक क्षमता को प्राथमिकता दी जाती है। |
महत्व
न्यायिक प्रशासन
- उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायिक प्रणाली की दक्षता और प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह सुनिश्चित करता है कि न्यायपालिका स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कार्य करती रहे, जिससे नागरिकों का न्याय प्रणाली में विश्वास बना रहे।
संघवाद और न्यायिक संतुलन
- विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों का स्थानांतरण और नियुक्ति संघवाद (Federalism) के सिद्धांत को मजबूत करता है, क्योंकि यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में न्यायिक अनुभव और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है।
- यह न्यायिक प्रणाली में एकरूपता और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
संस्थागत प्रक्रिया
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) द्वारा सिफारिश की प्रक्रिया न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक प्रयास है, हालांकि इसकी आलोचना भी की जाती रही है।
- यह प्रक्रिया संविधान द्वारा स्थापित शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
चुनौतियाँ
1. कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता
- कॉलेजियम प्रणाली में नियुक्तियों और तबादलों के लिए अपनाए जाने वाले मानदंडों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं।
- यह प्रणाली ‘अपारदर्शी’ होने के आरोपों का सामना करती है, जिससे जनता और कानूनी बिरादरी के बीच विश्वास की कमी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय न्यायपालिका, कॉलेजियम प्रणाली
2. न्यायिक नियुक्तियों में देरी
- उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्तियों में अक्सर अनावश्यक देरी होती है, जिससे बड़ी संख्या में मामले लंबित हो जाते हैं।
- यह देरी न्याय तक पहुंच को बाधित करती है और न्यायिक प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डालती है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक विलंब, न्यायपालिका की कार्यप्रणाली
3. कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच तनाव
- न्यायिक नियुक्तियों को लेकर कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका के बीच अक्सर मतभेद और तनाव देखा जाता है, खासकर कॉलेजियम की सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया के संबंध में।
- यह संवैधानिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और शासन में बाधा डाल सकता है।
यूपीएससी लिंक: शक्तियों का पृथक्करण, संवैधानिक संस्थाएँ
4. प्रतिनिधित्व का अभाव
- न्यायपालिका में विभिन्न सामाजिक समूहों, जैसे महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जातियों/जनजातियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होना एक चिंता का विषय है।
- यह न्यायिक प्रणाली की वैधता और समावेशिता पर सवाल उठाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, न्यायपालिका में विविधता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कॉलेजियम की कार्यप्रणाली | पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के आरोप। |
| न्यायिक रिक्तियाँ | न्यायाधीशों की कमी के कारण मामलों का लंबित होना। |
| कार्यपालिका-न्यायपालिका संबंध | नियुक्तियों को लेकर दोनों के बीच संभावित गतिरोध। |
| न्यायपालिका में विविधता | विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व का अभाव। |
आगे की राह
- कॉलेजियम प्रणाली में सुधार कर इसे अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, जिसमें नियुक्तियों के लिए स्पष्ट मानदंड और प्रक्रियाएं शामिल हों।
- न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए ताकि रिक्तियों को समय पर भरा जा सके और लंबित मामलों को कम किया जा सके।
- न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि संवैधानिक संतुलन बना रहे।
- न्यायपालिका में महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सक्रिय उपाय किए जाने चाहिए।
- न्यायिक सेवा आयोग (National Judicial Appointments Commission – NJAC) जैसे वैकल्पिक तंत्रों पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखें।
- न्यायाधीशों के प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए एक प्रभावी प्रणाली विकसित की जानी चाहिए ताकि उनकी दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति · सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम · न्यायिक नियुक्तियाँ · भारतीय संविधान · अनुच्छेद 217 · न्यायिक स्वतंत्रता · कार्यपालिका और न्यायपालिका · न्यायिक समीक्षा · संघवाद · न्यायाधीशों का स्थानांतरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 124’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 217’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 222’, ‘note’: ‘एक उच्च न्यायालय से दूसरे में न्यायाधीशों का स्थानांतरण’}
अवधारणा प्रवाह
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति → उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त होना → सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नाम की सिफारिश → केंद्र सरकार द्वारा सिफारिश पर विचार → राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की औपचारिक स्वीकृति → नए मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
2. कॉलेजियम प्रणाली का उल्लेख भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है।
3. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर हटाया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है। कथन 2 गलत है। कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई है, इसका संविधान में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कथन 3 सही है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान है, जिसमें संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव और राष्ट्रपति का आदेश शामिल होता है।
Q2. भारत में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद किया जाता है।
2. स्थानांतरण के लिए संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति आवश्यक है।
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद किया जाता है। कथन 2 गलत है। न्यायाधीश के स्थानांतरण के लिए उसकी सहमति आवश्यक नहीं है, हालांकि कॉलेजियम द्वारा स्थानांतरण से पहले उसकी राय ली जा सकती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण में सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के सिद्धांतों के साथ सामंजस्य स्थापित करती है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली का संक्षिप्त परिचय और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के संदर्भ में इसकी भूमिका।
कॉलेजियम की भूमिका: उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति (अनुच्छेद 217) और स्थानांतरण (अनुच्छेद 222) में कॉलेजियम की प्रक्रिया और निर्णय लेने की शक्ति का विस्तृत वर्णन।
न्यायिक स्वतंत्रता के साथ सामंजस्य: यह कैसे न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने में मदद करता है, कार्यपालिका के हस्तक्षेप को कम करता है, और न्यायपालिका की स्वायत्तता सुनिश्चित करता है।
जवाबदेही के साथ चुनौतियाँ: कॉलेजियम प्रणाली की आलोचनाएँ, जैसे कि पारदर्शिता की कमी, भाई-भतीजावाद के आरोप, जवाबदेही का अभाव, और ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (MoP) के कार्यान्वयन में देरी।
सुधारों के सुझाव: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) जैसे वैकल्पिक तंत्रों पर चर्चा और कॉलेजियम प्रणाली में सुधार के लिए दिए गए विभिन्न सुझाव।
निष्कर्ष: न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण।
स्रोत: amarujala.com
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में किसके नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई है?
- A. न्यायमूर्ति के. आर. मोहपात्रा
- B. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा
- C. न्यायमूर्ति अरूप कुमार गोस्वामी
- D. न्यायमूर्ति संजय कुमार सेठ
उत्तर: A. न्यायमूर्ति के. आर. मोहपात्रा — सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए न्यायमूर्ति के. आर. मोहपात्रा के नाम की सिफारिश की है।
Mains: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका एवं राज्य न्यायपालिका पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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