टीबी-मुक्त भारत अभियान: कर्नाटक-केरल सांसदों ने दिखाई राजनीतिक प्रतिबद्धता

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ चर्चा की अध्यक्षता की, जिससे टीबी-मुक् — concept mind map

टीबी-मुक्त भारत अभियान: कर्नाटक-केरल सांसदों ने दिखाई राजनीतिक प्रतिबद्धता

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टीबी-मुक्त भारत अभियान

✎ टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत से क्षय रोग का उन्मूलन करना है, जिसमें जनभागीदारी, नवाचार और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति पर विशेष जोर दिया गया है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
  • Prelims: टीबी-मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), क्षय रोग (Tuberculosis), प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान
  • Essay: स्वास्थ्य सेवाएँ और जनभागीदारी: टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत के प्रयास, भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ और उनके समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत से क्षय रोग का उन्मूलन करना है, जिसमें जनभागीदारी, नवाचार और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति पर विशेष जोर दिया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ के प्रयासों को गति देना था, जिसमें सांसदों से सक्रिय और प्रभावी भागीदारी का आह्वान किया गया। यह बैठक देश के विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ आयोजित किए जा रहे जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा थी, जो टीबी उन्मूलन की दिशा में राजनीतिक स्तर पर एकजुट संकल्प को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश से क्षय रोग (Tuberculosis – TB) को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से पाँच वर्ष पहले है।
  • टीबी-मुक्त भारत अभियान को भारत में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को गति देने के लिए दो चरणों में लागू किया गया है। इसका पहला चरण 7 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ और 24 मार्च 2025 को समाप्त हुआ, जबकि दूसरा चरण 24 मार्च 2026 को शुरू होकर जुलाई 2026 में समाप्त हुआ।
  • वर्ष 2015 से 2024 के बीच देश में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक गति से लगभग दोगुनी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर भी हासिल की है।
  • सरकार ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ (Whole-of-Government Approach) के तहत टीबी उन्मूलन के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर रही है।

टीबी-मुक्त भारत अभियान क्या है?

  • टीबी-मुक्त भारत अभियान, जिसे प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के रूप में भी जाना जाता है, भारत सरकार की एक पहल है जिसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक देश से क्षय रोग (टीबी) का उन्मूलन करना है।
  • यह अभियान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme – NTEP) के तहत संचालित होता है, जो देश में टीबी नियंत्रण गतिविधियों का मुख्य स्तंभ है।
  • अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी रोगियों की पहचान, उपचार और देखभाल तक पहुंच का विस्तार करना है, विशेषकर उच्च जोखिम वाले और कमजोर समुदायों में।
  • इसमें अभिनव रोगी-पहचान रणनीतियों, मरीज-केंद्रित देखभाल और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया जाता है।
  • अभियान के तहत ‘निक्षय पोषण योजना’ जैसी पहलें भी शामिल हैं, जो टीबी रोगियों को पोषण संबंधी सहायता प्रदान करती हैं।
  • यह अभियान जन आंदोलन के रूप में समुदायों को शामिल करने और टीबी के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।
  • सांसदों, जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय के माध्यम से निगरानी और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की सुनिश्चितता पर बल दिया जाता है।
  • इसका उद्देश्य टीबी के मामलों में कमी लाना, उपचार कवरेज बढ़ाना और टीबी से होने वाली मौतों को कम करना है, जिससे भारत वैश्विक टीबी उन्मूलन प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सांसदों के साथ परामर्श टीबी उन्मूलन के प्रयासों में राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन-प्रतिनिधित्व को शामिल करना।
समग्र सरकारी दृष्टिकोण टीबी उन्मूलन के लिए विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना।
अभिनव रोगी-पहचान रणनीतियाँ टीबी के मामलों का सक्रिय रूप से पता लगाना और उपचार की पहुँच बढ़ाना।
मरीज-केंद्रित देखभाल मरीजों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार देखभाल सुनिश्चित करना, जिससे उपचार की सफलता दर बढ़े।
100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में गहन जांच और नए मामलों की पहचान कर उन्मूलन की गति बढ़ाना।
समुदाय की भागीदारी टीबी उन्मूलन को जन आंदोलन बनाना, जिसमें समुदाय सक्रिय रूप से शामिल हों।

महत्व

स्वास्थ्य एवं सामाजिक महत्व

  • टीबी के मामलों में कमी: वर्ष 2015 से 2024 के बीच टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है।
  • उपचार कवरेज दर में वृद्धि: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार: टीबी उन्मूलन से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा और स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ कम होगा।

शासन एवं नीतिगत महत्व

  • राजनीतिक प्रतिबद्धता: सांसदों के साथ परामर्श टीबी उन्मूलन के प्रति उच्च-स्तरीय राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण: जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय पर जोर स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है।
  • बहु-क्षेत्रीय सहयोग: ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

अंतर्राष्ट्रीय महत्व

  • वैश्विक टीबी उन्मूलन में योगदान: भारत, एक उच्च-भार वाले देश के रूप में, टीबी उन्मूलन में अपनी प्रगति से वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
  • सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन: भारत की अभिनव रणनीतियाँ और अभियान अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं।

चुनौतियाँ

1. टीबी का पता लगाने में चुनौतियाँ

  • दूरदराज के क्षेत्रों में पहुँच का अभाव: ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में टीबी की जांच और निदान सुविधाओं की कमी।
  • कलंक और जागरूकता की कमी: टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण लोग जांच कराने से कतराते हैं, और बीमारी के लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव है।

2. उपचार पालन और प्रतिरोध

  • उपचार छोड़ने की प्रवृत्ति: लंबे उपचार अवधि के कारण कई मरीज बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं, जिससे मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (MDR-TB) का खतरा बढ़ जाता है।
  • दवा प्रतिरोध: टीबी बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होना, जिससे उपचार अधिक जटिल और महंगा हो जाता है।

3. संसाधन और क्षमता

  • स्वास्थ्य कर्मियों की कमी: टीबी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की अपर्याप्त संख्या।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: निदान प्रयोगशालाओं, उपचार केंद्रों और दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की आवश्यकता।

4. सामाजिक-आर्थिक कारक

  • गरीबी और कुपोषण: कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले गरीब और कुपोषित व्यक्ति टीबी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • स्वच्छता और भीड़भाड़: खराब स्वच्छता और भीड़भाड़ वाले आवास टीबी के प्रसार को बढ़ावा देते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
टीबी के मामलों की पहचान विशेषकर शहरी मलिन बस्तियों और दूरदराज के क्षेत्रों में सभी मामलों का पता लगाने में कठिनाई।
उपचार का पालन लंबे उपचार regimen के कारण मरीजों द्वारा उपचार बीच में छोड़ने से MDR-TB का खतरा।
जागरूकता और कलंक टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक और बीमारी के बारे में अपर्याप्त जागरूकता, जिससे जांच में देरी होती है।
स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, विशेषकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में।
निजी क्षेत्र की भागीदारी टीबी उन्मूलन प्रयासों में निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रभावी ढंग से शामिल करने में चुनौतियाँ।
वित्तपोषण और संसाधन टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • टीबी-मुक्त भारत अभियान
  • राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Elimination Programme – NTEP)

आगे की राह

  • टीबी के मामलों की सक्रिय पहचान के लिए समुदाय-आधारित जांच और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का विस्तार करना।
  • टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक कलंक को कम करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना।
  • मरीजों के लिए उपचार पालन सुनिश्चित करने हेतु प्रत्यक्ष प्रेक्षित उपचार (DOTS) और पोषण संबंधी सहायता को मजबूत करना।
  • टीबी निदान और उपचार के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना, विशेषकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर।
  • निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को टीबी उन्मूलन प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए प्रोत्साहन और नियामक ढाँचा विकसित करना।
  • टीबी अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना, जिसमें नए निदान उपकरण, दवाएँ और टीके शामिल हों।
  • सांसदों और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से टीबी उन्मूलन को जन आंदोलन बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

टीबी-मुक्त भारत अभियान · निक्षय पोषण योजना · सामुदायिक भागीदारी · स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण · सतत विकास लक्ष्य · बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण · रोग निगरानी · राजनीतिक इच्छाशक्ति · रोगी-केंद्रित देखभाल · जागरूकता अभियान

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वस्थ जीवन के अधिकार का निहितार्थ)
  • अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

उच्च-स्तरीय राजनीतिक इच्छाशक्ति (सांसदों का परामर्श)  →  टीबी-मुक्त भारत अभियान का कार्यान्वयन (जांच, पहचान, उपचार)  →  समुदाय की सक्रिय भागीदारी (जन आंदोलन)  →  टीबी के मामलों में कमी और उपचार कवरेज में वृद्धि  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और टीबी उन्मूलन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत से तपेदिक (TB) का उन्मूलन करना है।
2. विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है।
3. निक्षय पोषण योजना टीबी रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य भारत से वर्ष 2025 तक टीबी का उन्मूलन करना है। कथन 2 सही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है। कथन 3 सही है। निक्षय पोषण योजना (Nikshay Poshan Yojana) टीबी रोगियों को पोषण संबंधी सहायता के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।

Q2. अभिकथन (A): भारत में टीबी उन्मूलन के प्रयासों में सांसदों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कारण (R): सांसद जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करके जमीनी स्तर पर निगरानी और जागरूकता बढ़ा सकते हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि टीबी उन्मूलन जैसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान में राजनीतिक नेतृत्व और सामुदायिक जुड़ाव आवश्यक है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण समन्वय और निगरानी भूमिका निभा सकते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर जागरूकता और पहुंच बढ़ती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ टीबी-मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों और प्रमुख रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। भारत में तपेदिक उन्मूलन के प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत टीबी-मुक्त भारत अभियान (TB-Mukt Bharat Abhiyaan) के प्रमुख उद्देश्यों (2025 तक उन्मूलन) और इसकी पृष्ठभूमि से करें। अभियान की प्रमुख रणनीतियों, जैसे रोगी-पहचान, उपचार कवरेज, निक्षय पोषण योजना, और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण का उल्लेख करें। इसके बाद, सामुदायिक भागीदारी (जन आंदोलन, जागरूकता अभियान) और राजनीतिक इच्छाशक्ति (सांसदों की बैठकें, सरकारी दृष्टिकोण) की भूमिका का विश्लेषण करें। समालोचनात्मक परीक्षण में इन कारकों की सफलताओं और चुनौतियों, जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, सामाजिक कलंक और निरंतर वित्तपोषण की आवश्यकता, पर प्रकाश डालें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टों और भारत की प्रगति के आंकड़ों का संदर्भ दें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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