तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

T.N. govt orders that English version of Part I of Union-State Relations report be put in public domain — concept mind map

तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

Report release processForm committeeApr 15 2025Submit Part-IFeb 16 2026Present in assemblyFeb 18 2026Release English versioPublic domainRevoke copyrightTransparency
Report release process

✎ केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को नियंत्रित करते हैं और सहकारी संघवाद के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देते हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
  • Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, पुंछी आयोग, सरकारिया आयोग, राजमन्नार समिति, अनुच्छेद 245, अनुच्छेद 246, सातवीं अनुसूची
  • Essay: भारत में सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, केंद्र-राज्य संबंधों का विकास और भारतीय संघवाद का भविष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को नियंत्रित करते हैं और सहकारी संघवाद के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित अपनी उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) को रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि रिपोर्ट का तमिल संस्करण पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • तमिलनाडु सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
  • इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन सदस्य के रूप में शामिल थे।
  • समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I 16 फरवरी, 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को प्रस्तुत किया था।
  • मुख्यमंत्री ने 18 फरवरी, 2026 को इस रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया था।
  • भारत में केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को नियंत्रित करते हैं।
  • इन संबंधों की प्रकृति को समझने और उनमें सुधार के लिए अतीत में कई आयोगों और समितियों का गठन किया गया है, जैसे सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission)।

भारत में केंद्र-राज्य संबंध

  • भारत का संविधान एक संघीय प्रणाली स्थापित करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है, लेकिन यह एकात्मक विशेषताओं के साथ एक ‘अर्ध-संघीय’ (Quasi-federal) प्रणाली है।
  • विधायी संबंध (Legislative Relations): संविधान के भाग XI में अनुच्छेद 245 से 255 तक विधायी संबंधों का वर्णन है। सातवीं अनुसूची संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के माध्यम से विधायी शक्तियों का वितरण करती है।
  • प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations): भाग XI में अनुच्छेद 256 से 263 तक प्रशासनिक संबंधों का उल्लेख है। इसमें राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण, अखिल भारतीय सेवाएँ (All India Services) और अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) जैसे प्रावधान शामिल हैं।
  • वित्तीय संबंध (Financial Relations): भाग XII में अनुच्छेद 268 से 293 तक वित्तीय संबंधों का वर्णन है। इसमें करों का वितरण, वित्त आयोग (Finance Commission) की भूमिका और केंद्र तथा राज्यों के बीच अनुदान (Grants) शामिल हैं।
  • अतीत में, केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण आयोग और समितियाँ गठित की गई हैं, जिनमें राजमन्नार समिति (Rajamannar Committee) (1969), सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) प्रमुख हैं।
  • इन आयोगों ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने और राज्यों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने के संबंध में कई सिफारिशें की हैं, जैसे राज्यपाल की भूमिका, अनुच्छेद 356 का उपयोग, और वित्तीय हस्तांतरण।
  • सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) भारतीय संघवाद के महत्वपूर्ण आयाम हैं, जहाँ केंद्र और राज्य सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों के माध्यम से विकास को बढ़ावा देते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
संघ-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित, यह समिति संघ और राज्य के बीच संबंधों की समीक्षा करती है, विशेषकर वित्तीय, विधायी और प्रशासनिक क्षेत्रों में।
रिपोर्ट का सार्वजनिक डोमेन में होना यह पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और जनता तथा हितधारकों को समिति की सिफारिशों तक पहुँच प्रदान करता है।
कॉपीराइट रद्द करना रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण पर विशेष कॉपीराइट रद्द करने से इसकी व्यापक पहुँच और उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता समिति की विश्वसनीयता और सिफारिशों की निष्पक्षता को बढ़ाती है।
द्विभाषी उपलब्धता (तमिल और अंग्रेजी) यह सुनिश्चित करता है कि रिपोर्ट व्यापक दर्शकों तक पहुँचे, जिसमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नीति-निर्माता शामिल हैं।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने और कॉपीराइट रद्द करने का निर्णय शासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के सिद्धांतों को दर्शाता है।
  • यह कदम जनता को संघ-राज्य संबंधों से संबंधित महत्वपूर्ण सिफारिशों तक पहुँचने और समझने में सक्षम बनाता है, जिससे सूचित सार्वजनिक बहस को बढ़ावा मिलता है।

संघवाद (Federalism)

  • यह पहल भारत के संघीय ढांचे के भीतर राज्यों की स्वायत्तता और अधिकारों पर जोर देती है।
  • संघ-राज्य संबंधों की समीक्षा और सिफारिशें सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) दोनों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती हैं।

नीति निर्माण

  • समिति की सिफारिशें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्ति, वित्त और प्रशासन के वितरण से संबंधित भविष्य की नीतियों और सुधारों को प्रभावित कर सकती हैं।
  • यह विभिन्न राज्यों द्वारा इसी तरह की समितियों के गठन के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे संघवाद पर एक व्यापक राष्ट्रीय संवाद हो सकता है।

चुनौतियाँ

1. संघ-राज्य संबंधों में असंतुलन

  • राज्यों द्वारा अक्सर वित्तीय संसाधनों, विधायी शक्तियों और प्रशासनिक स्वायत्तता के संबंध में केंद्र के पक्ष में असंतुलन की शिकायत की जाती है।
  • यह असंतुलन राज्यों की विकासात्मक प्राथमिकताओं को पूरा करने की क्षमता को बाधित कर सकता है।

2. राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism)

  • राज्यों के राजस्व स्रोतों पर केंद्र की निर्भरता और केंद्रीय अनुदानों पर राज्यों की निर्भरता राजकोषीय स्वायत्तता के लिए एक चुनौती है।
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कार्यान्वयन के बाद राज्यों की राजस्व जुटाने की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है।

3. प्रशासनिक संबंध

  • अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों की तैनाती और नियंत्रण को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर तनाव रहता है।
  • कानून और व्यवस्था जैसे राज्य सूची के विषयों में केंद्र के हस्तक्षेप की धारणा भी एक चुनौती है।

4. विधायी संबंध

  • समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर केंद्र द्वारा कानून बनाने और राज्यपाल की भूमिका को लेकर राज्यों द्वारा चिंता व्यक्त की जाती है।
  • राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति में देरी भी एक मुद्दा है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वित्तीय स्वायत्तता राज्यों के राजस्व स्रोतों पर केंद्र की निर्भरता और केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता।
विधायी शक्ति का वितरण समवर्ती सूची पर केंद्र का प्रभुत्व और राज्य के विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति में देरी।
राज्यपाल की भूमिका राज्यपाल के कार्यालय का राजनीतिकरण और केंद्र के एजेंट के रूप में कार्य करने की धारणा।
अखिल भारतीय सेवाएँ अधिकारियों की तैनाती और नियंत्रण को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच तनाव।
योजना और विकास केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से राज्यों की प्राथमिकताओं में हस्तक्षेप।

आगे की राह

  • राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए राजस्व साझाकरण तंत्र की समीक्षा की जाए।
  • अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council) जैसे मंचों को सक्रिय कर सहकारी संघवाद को बढ़ावा दिया जाए।
  • राज्यपाल के कार्यालय की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) की सिफारिशों को लागू किया जाए।
  • केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण पर स्पष्टता और परामर्श प्रक्रिया को बढ़ाया जाए।
  • अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की तैनाती और नियंत्रण के संबंध में राज्यों की चिंताओं को दूर किया जाए।
  • संघ-राज्य संबंधों पर नियमित समीक्षा और संवाद के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · राज्यों की स्वायत्तता · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · अनुच्छेद 245 · अनुच्छेद 246 · विधायी संबंध · प्रशासनिक संबंध · वित्तीय संबंध · सहकारी संघवाद · टकरावपूर्ण संघवाद

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 245’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानून’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियाँ’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 248’, ‘note’: ‘अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 356’, ‘note’: ‘राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषद के संबंध में प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ’}

अवधारणा प्रवाह

तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया।  →  समिति ने अपनी रिपोर्ट का पहला भाग प्रस्तुत किया।  →  सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया।  →  रिपोर्ट पर विशेष कॉपीराइट रद्द कर दिया गया।  →  यह कदम पारदर्शिता और संघीय ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान में ‘संघवाद’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
2. केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित सरकारी आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1988 में प्रस्तुत की थी।
3. अनुच्छेद 246 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत के संविधान में ‘संघवाद’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि भारत को ‘राज्यों का संघ’ कहा गया है। कथन 2 गलत है। सरकारी आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1988 में प्रस्तुत की थी, लेकिन यह 1983 में गठित हुआ था। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 246 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का प्रावधान है।

Q2. कथन (A): तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर अपनी उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्देश दिया है।
कारण (R): यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है, जैसा कि खबर में बताया गया है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जैसा कि तमिलनाडु सरकार के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, राज्यों की स्वायत्तता की बढ़ती मांगों और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारत में केंद्र-राज्य संबंधों के संवैधानिक ढाँचे (अनुच्छेद 245-293, सातवीं अनुसूची) के संक्षिप्त परिचय से करें।

**भाग 1: केंद्र-राज्य संबंधों की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण**
* **विधायी संबंध:** संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची पर चर्चा। राज्यों की विधायी स्वायत्तता पर केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप (जैसे समवर्ती सूची में कानून, राज्यपाल की भूमिका) का आलोचनात्मक विश्लेषण।
* **प्रशासनिक संबंध:** अखिल भारतीय सेवाओं, अंतर-राज्यीय परिषदों, राज्यपाल की भूमिका (विशेषकर राज्य सरकारों को बर्खास्त करने या विधेयक आरक्षित करने में) पर प्रकाश डालें। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों पर वित्तीय और नीतिगत दबाव।
* **वित्तीय संबंध:** वित्त आयोग की सिफारिशें, करों का बँटवारा, GST परिषद की भूमिका। राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर निर्भरता और केंद्र से अनुदान पर निर्भरता की चर्चा। राजकोषीय संघवाद में असंतुलन।
* **राजनीतिक आयाम:** विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारों के बीच केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव, विशेषकर गैर-NDA शासित राज्यों में।

**भाग 2: राज्यों की स्वायत्तता की बढ़ती मांगों और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियाँ**
* **राज्यों की स्वायत्तता की मांगें:** भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बाद से स्वायत्तता की मांगें, क्षेत्रीय दलों का उदय, सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण, संसाधनों पर नियंत्रण। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल जैसे राज्यों के उदाहरण।
* **सहकारी संघवाद:** नीति आयोग, GST परिषद, अंतर-राज्यीय परिषद के माध्यम से सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के प्रयास। ‘एक राष्ट्र, एक कर’ जैसे कदमों का विश्लेषण।
* **संतुलन स्थापित करने की चुनौतियाँ:**
* केंद्र की ओर झुकाव वाले संघवाद (Quasi-federalism) की प्रकृति।
* राज्यपाल के पद का राजनीतिकरण।
* राज्यों के लिए राजस्व के सीमित स्रोत और केंद्र पर बढ़ती वित्तीय निर्भरता।
* केंद्र द्वारा राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की प्रवृत्ति (जैसे शिक्षा, वन)।
* क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन।
* **सुझाव/आगे की राह:** सरकारी आयोग, पुंछी आयोग की सिफारिशों का उल्लेख। अंतर-राज्यीय परिषद को मजबूत करना, राजकोषीय संघवाद में राज्यों को अधिक शक्ति देना, राज्यपाल की भूमिका में सुधार।

निष्कर्ष में, एक मजबूत केंद्र और स्वायत्त राज्यों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध भारत की संघीय व्यवस्था की सफलता के लिए आवश्यक है।

स्रोत: The Hindu


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