तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

T.N. govt orders that English version of Part I of Union-State Relations report be put in public domain — concept mind map

तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

T.N. report releaseReport Part IEnglish versionPublic domainCopyrightCancelledFor Part ICommitteeHigh-LevelUnion-State RelationsChairJustice Kurien JosephRetired SC judgeSubmissionFeb 16, 2026To CM StalinAssemblyFeb 18, 2026Report presented
T.N. report release

✎ केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का एक मूलभूत पहलू हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण और समन्वय को परिभाषित करते हैं, और समय-समय पर विभिन्न आयोगों द्वारा इनकी समीक्षा की जाती है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
  • Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद, सरकारी आयोग, पुंछी आयोग, राजमन्नार समिति, अनुच्छेद 245, अनुच्छेद 256, अनुच्छेद 263
  • Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का एक मूलभूत पहलू हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण और समन्वय को परिभाषित करते हैं, और समय-समय पर विभिन्न आयोगों द्वारा इनकी समीक्षा की जाती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित अपनी उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) की रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट को आम जनता के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जैसा कि इसके तमिल संस्करण के साथ किया गया था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • तमिलनाडु सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
  • इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन सदस्य के रूप में शामिल थे।
  • समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 16 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत किया था।
  • मुख्यमंत्री स्टालिन ने 18 फरवरी, 2026 को इस रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया था।
  • केंद्र-राज्य संबंधों का मुद्दा भारतीय संघवाद की आधारशिला है और समय-समय पर विभिन्न समितियों द्वारा इसकी समीक्षा की गई है।
  • भारत में केंद्र-राज्य संबंधों को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: विधायी संबंध, प्रशासनिक संबंध और वित्तीय संबंध।

भारत में केंद्र-राज्य संबंध

  • भारतीय संविधान के भाग XI और XII में केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
  • विधायी संबंध (Legislative Relations) अनुच्छेद 245 से 255 तक वर्णित हैं, जो संसद और राज्य विधानमंडलों की कानून बनाने की शक्तियों का सीमांकन करते हैं।
  • प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations) अनुच्छेद 256 से 263 तक वर्णित हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच कार्यकारी शक्तियों के समन्वय और सहयोग को नियंत्रित करते हैं।
  • वित्तीय संबंध (Financial Relations) अनुच्छेद 268 से 293 तक वर्णित हैं, जो करों के वितरण, अनुदान और ऋण संबंधी प्रावधानों को निर्धारित करते हैं।
  • भारतीय संविधान एक मजबूत केंद्र के साथ एक संघीय प्रणाली (Federal System) की स्थापना करता है, जहाँ केंद्र सरकार को कुछ मामलों में राज्यों पर अधिक शक्ति प्राप्त है।
  • केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए कई आयोग और समितियाँ गठित की गई हैं, जिनमें सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) (1983) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) (2007) प्रमुख हैं, जिन्होंने संघवाद को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।
  • तमिलनाडु ने पहले भी केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए राजमन्नार समिति (Rajamannar Committee) (1969) का गठन किया था, जिसने राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता की वकालत की थी।
  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने भी केंद्र-राज्य संबंधों की व्याख्या और संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) जैसे मामलों में।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रिपोर्ट का सार्वजनिक डोमेन में होना केंद्र-राज्य संबंधों पर पारदर्शिता और सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देता है।
अंग्रेजी संस्करण का विमोचन तमिलनाडु के बाहर व्यापक पहुंच और समझ सुनिश्चित करता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा संभव होती है।
समिति का गठन केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए राज्यों की चिंताओं को आधिकारिक मंच पर रखने का अवसर प्रदान करता है।
कॉपीराइट रद्द करना रिपोर्ट की सामग्री के मुफ्त उपयोग और प्रसार को सक्षम बनाता है, जिससे ज्ञान का लोकतंत्रीकरण होता है।
उच्च-स्तरीय समिति सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अधिकारियों की विशेषज्ञता का उपयोग करके गहन विश्लेषण और सिफारिशें सुनिश्चित करती है।

महत्व

संघवाद और शासन

  • यह कदम सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को मजबूत करता है, जहां राज्य अपनी चिंताओं को खुले तौर पर व्यक्त कर सकते हैं और केंद्र के साथ संवाद स्थापित कर सकते हैं।
  • रिपोर्ट का सार्वजनिक होना केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा, जिससे नीति निर्माताओं और जनता दोनों को लाभ होगा।
  • यह राज्यों की स्वायत्तता (Autonomy) और अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा देगा, जो भारतीय संघवाद की एक मूलभूत विशेषता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही

  • रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में लाने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता (Transparency) बढ़ती है और जनता को महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों तक पहुंच मिलती है।
  • कॉपीराइट रद्द करने का निर्णय रिपोर्ट की सामग्री के व्यापक प्रसार को सुनिश्चित करता है, जिससे इसकी पहुंच और प्रभाव में वृद्धि होती है।
  • यह कदम सरकार की जवाबदेही (Accountability) को भी दर्शाता है, क्योंकि यह जनता को केंद्र-राज्य संबंधों पर समिति की सिफारिशों का मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करता है।

सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव

  • यह रिपोर्ट केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव के क्षेत्रों को उजागर कर सकती है, जैसे कि वित्तीय हस्तांतरण, विधायी शक्तियों का वितरण और प्रशासनिक नियंत्रण।
  • सार्वजनिक चर्चा से विभिन्न राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी, जिससे अधिक समावेशी (Inclusive) नीतियां बनेंगी।
  • यह भारतीय संघवाद की गतिशील प्रकृति को दर्शाता है, जहां राज्य अपने अधिकारों और हितों की वकालत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

चुनौतियाँ

1. केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव

  • राज्यों द्वारा अधिक वित्तीय स्वायत्तता और संसाधनों के हस्तांतरण की मांग।
  • केंद्र द्वारा राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने या हस्तक्षेप करने की प्रवृत्ति।

2. राज्यों की स्वायत्तता का मुद्दा

  • राज्यपाल की भूमिका और केंद्र के एजेंट के रूप में उनकी कथित भूमिका पर विवाद।
  • कानून और व्यवस्था जैसे राज्य विषयों में केंद्र का हस्तक्षेप।

3. वित्तीय संबंध

  • राज्यों के लिए राजस्व के स्रोतों की कमी और केंद्र पर निर्भरता।
  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) में राज्यों की सीमित भूमिका और वित्तीय बोझ।

4. विधायी और प्रशासनिक संबंध

  • समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर केंद्र और राज्य के कानूनों के बीच टकराव।
  • अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों पर नियंत्रण को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
रिपोर्ट की सिफारिशों का कार्यान्वयन केंद्र सरकार द्वारा राज्यों की सिफारिशों को स्वीकार करने और लागू करने में अनिच्छा।
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण सुधारों को आगे बढ़ाने में बाधा।
वित्तीय निहितार्थ राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने से केंद्र के राजस्व पर संभावित प्रभाव।
संघीय संतुलन राज्यों को अधिक शक्तियां देने से केंद्र की समग्र शक्ति और राष्ट्रीय एकता पर संभावित प्रभाव।
विभिन्न राज्यों की विविधता सभी राज्यों के लिए एक समान समाधान खोजना मुश्किल, क्योंकि उनकी आवश्यकताएं और मुद्दे भिन्न होते हैं।

आगे की राह

  • केंद्र-राज्य संबंधों पर विभिन्न आयोगों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
  • राज्यों को वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने और राजस्व के अधिक स्रोतों तक पहुंच प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
  • अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) जैसी संस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि केंद्र और राज्यों के बीच संवाद और समन्वय को बढ़ावा मिल सके।
  • राज्यपाल की भूमिका को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप और अधिक निष्पक्ष बनाने के लिए सुधार किए जाने चाहिए।
  • समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाते समय केंद्र को राज्यों के साथ अधिक परामर्श करना चाहिए।
  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या को युक्तिसंगत बनाया जाना चाहिए और राज्यों को उनके कार्यान्वयन में अधिक लचीलापन दिया जाना चाहिए।
  • सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल बनाना महत्वपूर्ण है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · राजमन्नार समिति · न्यायिक समीक्षा · अनुच्छेद 246 · सातवीं अनुसूची · वित्तीय संघवाद · सहकारी संघवाद · प्रतिस्पर्धी संघवाद · विधायी संबंध

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 245-255’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी संबंधों का विवरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 256-263’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों का विवरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का विवरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 356’, ‘note’: ‘राज्यों में राष्ट्रपति शासन से संबंधित’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची का निर्धारण’}

अवधारणा प्रवाह

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट का अंग्रेजी संस्करण सार्वजनिक किया।  →  यह कदम रिपोर्ट की पारदर्शिता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करता है।  →  रिपोर्ट में केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए सिफारिशें शामिल हैं।  →  इन सिफारिशों पर सार्वजनिक बहस और चर्चा को बढ़ावा मिलेगा।  →  यह भारतीय संघवाद की प्रकृति और राज्यों की स्वायत्तता पर प्रकाश डालेगा।  →  अंततः, यह केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए नीतिगत परिवर्तनों को प्रेरित कर सकता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण के लिए तीन सूचियाँ प्रदान करता है, जैसा कि सातवीं अनुसूची में उल्लिखित है।
2. अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary powers) राज्यों के पास होती हैं।
3. अनुच्छेद 246 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंधों से संबंधित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। कथन 2 गलत है। भारतीय संविधान के तहत अवशिष्ट शक्तियाँ (वे शक्तियाँ जो किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं) केंद्र सरकार के पास होती हैं। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 246 संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंधों से संबंधित है, जो विभिन्न सूचियों में शामिल विषयों पर कानून बनाने की शक्तियों का निर्धारण करता है।

Q2. कथन (A): तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्देश दिया है।
कारण (R): यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट तक व्यापक पहुंच प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सत्य है क्योंकि समाचार के अनुसार तमिलनाडु सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्देश दिया है। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और रिपोर्ट को अधिक सुलभ बनाना है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का मुख्य कारण पारदर्शिता और पहुंच सुनिश्चित करना ही है।

Q3. निम्नलिखित समितियों को उनके गठन के कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:
1. सरकारी आयोग
2. राजमन्नार समिति
3. पुंछी आयोग
सही विकल्प चुनें:

  1. 1-2-3
  2. 2-1-3
  3. 3-1-2
  4. 1-3-2

उत्तर: 2-1-3 — राजमन्नार समिति का गठन 1969 में तमिलनाडु सरकार द्वारा किया गया था। सरकारी आयोग का गठन 1983 में केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। पुंछी आयोग का गठन 2007 में केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। अतः सही कालानुक्रमिक क्रम 2-1-3 है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों के विकास में विभिन्न समितियों के योगदान का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या आपको लगता है कि हाल के वर्षों में केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ा है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की प्रकृति और संघवाद के सिद्धांतों का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग:
1. केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रमुख समितियों का योगदान:
क. राजमन्नार समिति (1969): तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित, विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों में राज्य स्वायत्तता पर जोर।
ख. सरकारी आयोग (1983): केंद्र सरकार द्वारा गठित, मजबूत केंद्र की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए राज्यों की स्वायत्तता के लिए सिफारिशें (जैसे अंतर-राज्यीय परिषद, अनुच्छेद 356 का संयमित उपयोग)।
ग. पुंछी आयोग (2007): केंद्र सरकार द्वारा गठित, सहकारी संघवाद को मजबूत करने, राज्यपाल की भूमिका, आपातकालीन प्रावधानों और स्थानीय स्वशासन पर सिफारिशें।
घ. अन्य समितियाँ/आयोग (जैसे प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट)।
इन समितियों की प्रमुख सिफारिशों और उनके प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
2. हाल के वर्षों में केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव:
क. वित्तीय संबंध: राज्यों के राजस्व स्रोतों पर केंद्र का बढ़ता नियंत्रण (GST, उपकर और अधिभार), वित्त आयोग की सिफारिशें।
ख. विधायी और प्रशासनिक संबंध: समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र का बढ़ता हस्तक्षेप, राज्यपाल की भूमिका, केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग।
ग. राजनीतिक कारक: विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारों के बीच टकराव, क्षेत्रीय आकांक्षाएँ।
घ. न्यायिक हस्तक्षेप: केंद्र-राज्य विवादों में न्यायपालिका की भूमिका।
इन बिंदुओं को समकालीन उदाहरणों और घटनाओं से जोड़ें।
निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के महत्व पर जोर देते हुए केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे की राह सुझाएँ, जिसमें संवाद और समन्वय तंत्र को बढ़ावा देना शामिल हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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