04 Sep नशा मुक्त भारत अभियान: राष्ट्रीय शपथ के साथ 6वीं वर्षगांठ का जश्न
✎ नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 2020 में शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और भारत को नशा मुक्त बनाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य और कल्याण | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR), नशा मुक्ति मित्र, राष्ट्रीय सामूहिक शपथ, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग
- Essay: नशा मुक्त समाज का निर्माण: चुनौतियाँ और समाधान, युवा और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग: एक सामाजिक समस्या
त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 2020 में शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और भारत को नशा मुक्त बनाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) की छठी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ एक राष्ट्रीय सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किया है। इस पहल का उद्देश्य प्रत्यक्ष और ऑनलाइन भागीदारी के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को अभियान से जोड़ना है, ताकि नशीले पदार्थों के सेवन के विरुद्ध व्यापक जागरूकता फैलाई जा सके और एक नशा मुक्त समाज के निर्माण में सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती है, जो व्यक्तियों, परिवारों और पूरे समाज को प्रभावित करती है।
- इस समस्या से निपटने के लिए, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) का शुभारंभ किया था।
- यह अभियान देश के सबसे अधिक प्रभावित जिलों पर ध्यान केंद्रित करता है और रोकथाम, आकलन, उपचार, पुनर्वास तथा सामुदायिक जागरूकता सहित विभिन्न पहलुओं पर कार्य करता है।
- मंत्रालय नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत एक व्यापक और साक्ष्य-आधारित रणनीति लागू कर रहा है।
- अभियान के तहत देशव्यापी जागरूकता अभियानों के माध्यम से अब तक 34.56 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच बनाई गई है, जिनमें 13.71 करोड़ से अधिक युवा और 10.65 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं।
- नशीले पदार्थों के सेवन की स्थिति और स्वरूप पर किए गए प्रथम राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों ने इस अभियान की नींव रखी।
नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) क्या है?
- नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त करना है।
- यह अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था और यह देश के उन जिलों पर केंद्रित है जो नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन के बारे में जागरूकता बढ़ाना, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के बीच।
- अभियान रोकथाम, आकलन, उपचार, पुनर्वास और उपचारोत्तर देखभाल सहित एक बहु-आयामी रणनीति अपनाता है।
- यह नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत एक व्यापक और साक्ष्य-आधारित रणनीति का हिस्सा है।
- अभियान में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और नागरिक समाज संगठनों की भागीदारी शामिल है।
- यह हेल्पलाइन नंबर-14446 के माध्यम से नशामुक्ति को बढ़ावा देता है और नागरिकों को ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में स्वयंसेवक बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- हाल ही में आयोजित ‘राष्ट्रीय सामूहिक शपथ’ कार्यक्रम का उद्देश्य 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ एकजुट करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान, जिसका उद्देश्य नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना और मांग को कम करना है। |
| छठी वर्षगांठ | अभियान की प्रगति और प्रभाव का आकलन करने तथा भविष्य की रणनीतियों को मजबूत करने का अवसर। |
| राष्ट्रीय सामूहिक शपथ | नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ नागरिकों को एकजुट करने और उनमें जागरूकता पैदा करने के लिए एक व्यापक पहल। |
| लक्ष्य समूह | युवा, महिलाएं, छात्र, अभिभावक, स्वयंसेवक और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के कर्मचारी। |
| नोडल मंत्रालय | केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, जो अभियान के समन्वय और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है। |
| विभिन्न मंत्रालयों की भागीदारी | रेलवे, रक्षा, शिक्षा, पुलिस, आयुष, ग्रामीण विकास आदि मंत्रालयों का सहयोग, जो अभियान की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- नशीली दवाओं के दुरुपयोग से उत्पन्न सामाजिक बुराइयों को कम करने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायक।
- युवाओं और महिलाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाने तथा उन्हें सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान।
- समुदाय आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, जिसमें नागरिक स्वयंसेवक के रूप में ‘नशा मुक्ति मित्र’ बनकर योगदान दे सकते हैं।
शासन और नीतिगत महत्व
- सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए एक बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपना रही है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करके एक एकीकृत रणनीति का कार्यान्वयन।
- नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत साक्ष्य-आधारित रणनीतियों का उपयोग।
जागरूकता और शिक्षा
- देशव्यापी जागरूकता अभियानों के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों तक पहुंच बनाना और उन्हें नशीले पदार्थों के खतरों के बारे में शिक्षित करना।
- ई-शपथ और हेल्पलाइन नंबर-14446 जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके अभियान की पहुंच को बढ़ाना।
- नशीले पदार्थों के सेवन से पीड़ित लोगों की मदद के लिए स्वेच्छा से आगे आने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना।
चुनौतियाँ
1. नशीली दवाओं की उपलब्धता और तस्करी
- सीमा पार से नशीली दवाओं की तस्करी और आंतरिक वितरण नेटवर्क को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है।
- नशीली दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के लिए मजबूत कानून प्रवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: सीमा प्रबंधन और संगठित अपराध
2. पुनर्वास और उपचार की कमी
- नशीले पदार्थों के आदी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त और सुलभ उपचार तथा पुनर्वास केंद्रों की कमी।
- उपचार के बाद पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण में आने वाली चुनौतियां, जिससे दोबारा नशा करने का जोखिम बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और मानव संसाधन
3. सामाजिक कलंक और जागरूकता का अभाव
- नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण पीड़ित व्यक्ति अक्सर मदद मांगने से हिचकिचाते हैं।
- समाज के कुछ वर्गों में नशीले पदार्थों के खतरों और उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
4. युवाओं में बढ़ती प्रवृत्ति
- युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति, विशेष रूप से सिंथेटिक दवाओं और इंटरनेट के माध्यम से उपलब्धता।
- शैक्षणिक संस्थानों और परिवारों में प्रभावी रोकथाम और परामर्श कार्यक्रमों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा और मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता | अवैध व्यापार और वितरण नेटवर्क को नियंत्रित करने में कठिनाई। |
| पुनर्वास सुविधाओं की कमी | आदी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त उपचार और सामाजिक एकीकरण की अनुपलब्धता। |
| सामाजिक कलंक | नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े सामाजिक भेदभाव के कारण मदद मांगने में झिझक। |
| जागरूकता का अभाव | नशीले पदार्थों के खतरों और सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी की कमी। |
| युवाओं में बढ़ती लत | शैक्षणिक संस्थानों और परिवारों में प्रभावी रोकथाम कार्यक्रमों की आवश्यकता। |
| डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग | ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नशीली दवाओं की जानकारी या खरीद की संभावना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA)
- नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)
आगे की राह
- नशीली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
- नशीले पदार्थों के आदी व्यक्तियों के लिए सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और व्यापक उपचार तथा पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना।
- स्कूलों और कॉलेजों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए प्रभावी शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम शुरू करना।
- समुदाय आधारित भागीदारी को बढ़ावा देना और ‘नशा मुक्ति मित्र’ जैसे स्वयंसेवकों के नेटवर्क का विस्तार करना।
- नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- नशीली दवाओं के दुरुपयोग के पैटर्न और प्रवृत्तियों पर नियमित सर्वेक्षण और अनुसंधान करना ताकि साक्ष्य-आधारित नीतियों का निर्माण हो सके।
- हेल्पलाइन नंबर-14446 और ई-शपथ जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त भारत अभियान · सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय · नशीली दवाओं की मांग में कमी · राष्ट्रीय कार्य योजना · सामुदायिक जागरूकता · युवा सशक्तिकरण · बहु-मंत्रालयी समन्वय · नशामुक्ति हेल्पलाइन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
नशीली दवाओं का दुरुपयोग → सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां → नशा मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ → जागरूकता, रोकथाम और उपचार → राष्ट्रीय सामूहिक शपथ और जनभागीदारी → नशा मुक्त समाज का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अभियान की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की गई थी।
2. यह अभियान मुख्य रूप से नशीली दवाओं की आपूर्ति पर अंकुश लगाने पर केंद्रित है।
3. NMBA ई-शपथ पहल का उद्देश्य लोगों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा की गई थी। कथन 2 गलत है। यह अभियान नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने और सामुदायिक जागरूकता पर केंद्रित है, न कि मुख्य रूप से आपूर्ति पर। कथन 3 सही है। NMBA ई-शपथ लोगों को नशीले पदार्थों से दूर रहने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के लिए नोडल मंत्रालय है?
- गृह मंत्रालय
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उत्तर: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय — नशा मुक्त भारत अभियान के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। यह मंत्रालय नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत विभिन्न पहलों का समन्वय करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीति पर चर्चा कीजिए। नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने में यह अभियान कितना सफल रहा है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) का संक्षिप्त परिचय और इसकी शुरुआत का वर्ष (15 अगस्त 2020) तथा नोडल मंत्रालय (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय) का उल्लेख।
मुख्य भाग 1: NMBA के उद्देश्य:
• नशीली दवाओं की मांग में कमी लाना।
• सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना।
• रोकथाम, आकलन, उपचार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करना।
• युवाओं और महिलाओं को अभियान से जोड़ना।
• नशामुक्त समाज के निर्माण में हितधारकों को सशक्त बनाना।
मुख्य भाग 2: कार्यान्वयन रणनीति:
• देशव्यापी जागरूकता अभियान (34.56 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच)।
• ई-शपथ पहल (https://nashamukt.dosje.gov.in/epledge)।
• बहु-मंत्रालयी समन्वय (रेलवे, रक्षा, शिक्षा, पुलिस आदि)।
• हेल्पलाइन नंबर-14446 का प्रचार।
• ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में स्वयंसेवकों का पंजीकरण।
• नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) का क्रियान्वयन।
मुख्य भाग 3: अभियान की सफलता का मूल्यांकन:
• जागरूकता प्रसार में सफलता (युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी)।
• विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों की भागीदारी से व्यापक पहुँच।
• जमीनी स्तर पर स्वयंसेवकों को जोड़ने का प्रयास।
• चुनौतियों का उल्लेख (जैसे नशीली दवाओं की तस्करी, नए पदार्थों का उदय, पुनर्वास की सीमित पहुँच)।
निष्कर्ष: नशामुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर सामूहिक प्रयासों और व्यापक रणनीति के महत्व पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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