22 Jul नारी शक्ति का नया इतिहास: 314 दिन में पूरी हुई पहली सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — समाज और महिला सशक्तिकरण | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: समुद्र प्रदक्षिणा अभियान, आईएएसवी त्रिवेणी, केप हॉर्नर्स समुदाय, ड्रेक जलडमरूमध्य, त्रि-सेवा संयुक्तता, नारी शक्ति
- Essay: नारी शक्ति: नए भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका, भारत की रक्षा क्षमताओं में त्रि-सेवा समन्वय का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: समुद्र प्रदक्षिणा अभियान भारत का पहला त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान है, जिसने नारी शक्ति, त्रि-सेवा संयुक्तता और स्वदेशी इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 22 जुलाई, 2026 को पहली बार आयोजित त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ की सफल वापसी पर दल का औपचारिक स्वागत किया। भारतीय सेना के नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों ने 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए यह ऐतिहासिक यात्रा पूरी की, जो भारत की नारी शक्ति, दृढ़ संकल्प और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है।
पृष्ठभूमि
- यह अभियान 11 सितंबर, 2025 को मुंबई से वर्चुअल माध्यम से रक्षा मंत्री द्वारा शुरू किया गया था।
- इस अभियान में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की नौ महिला अधिकारियों ने भाग लिया, जो त्रि-सेवा संयुक्तता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- दल ने देशांतर की सभी मध्यान्ह रेखाओं को, भूमध्य रेखा को दो बार और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया।
- अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें तीन प्रमुख अंतरीपों—केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप—का चक्कर लगाना शामिल है।
- भीषण ड्रेक जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करने और केप हॉर्न का चक्कर लगाने के बाद दल को प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स समुदाय’ की सदस्यता प्राप्त हुई।
- यह अभियान सैन्य कूटनीति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बना, जिसने विभिन्न बंदरगाहों पर ठहराव के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सैन्य पेशेवर दक्षता का परिचय कराया।
समुद्र प्रदक्षिणा अभियान क्या है?
- यह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा आयोजित पहला त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान है।
- इसका उद्देश्य भारत की नारी शक्ति, सैन्य क्षमता और स्वदेशी इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रदर्शन करना है।
- अभियान में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने भाग लिया, जो तीनों सेवाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को दर्शाता है।
- इसने लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए 314 दिनों में चार महासागरों को पार किया।
- अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानदंडों को पूरा किया, जिसमें भूमध्य रेखा को दो बार पार करना और केप हॉर्न जैसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों से गुजरना शामिल है।
- यह मिशन सूक्ष्म योजना, गहन प्रशिक्षण और चौबीसों घंटे समर्पित तटीय सहायता नेटवर्क का परिणाम था।
- इस अभियान की सफलता ने यह सिद्ध किया है कि मानव का साहस किसी भी समुद्री तूफान से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है और महिलाएँ हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| त्रि-सेवा सर्व-महिला अभियान | भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों की संयुक्त भागीदारी, नारी शक्ति का प्रतीक। |
| विश्व परिक्रमा (समुद्र प्रदक्षिणा) | चार महासागरों में 25,500 समुद्री मील की दूरी तय करना, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को पूरा करना। |
| IASV त्रिवेणी पोत | भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमता और सामरिक आत्मविश्वास का प्रमाण। |
| 314 दिनों की यात्रा | सूक्ष्म योजना, गहन प्रशिक्षण और चौबीसों घंटे तटीय सहायता नेटवर्क का परिणाम। |
| केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता | विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक को सफलतापूर्वक पार करने का सम्मान। |
| सैन्य कूटनीति का माध्यम | विभिन्न बंदरगाहों पर ठहराव के दौरान भारत की संस्कृति और सैन्य दक्षता का प्रदर्शन। |
महत्व
नारी शक्ति एवं सशक्तिकरण
- यह अभियान भारत की नारी शक्ति का प्रमाण है, जो महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
- यह देश की महिलाओं को अवसरों का सृजन करने, अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व करने और इतिहास रचने के लिए प्रेरित करता है।
रक्षा एवं सामरिक महत्व
- यह त्रि-सेवा समन्वय और संयुक्तता की प्रभावशीलता का साक्ष्य है, जो एकीकृत योजना और निर्बाध अंतरसंचालनीयता को प्रदर्शित करता है।
- IASV त्रिवेणी की सफलता भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमता और सामरिक आत्मविश्वास को रेखांकित करती है।
- यह अभियान सैन्य कूटनीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बना, जिसने मित्र देशों के साथ सद्भावना को प्रोत्साहित किया।
राष्ट्रीय गौरव एवं दृढ़ संकल्प
- यह ‘नए भारत’ के दृढ़ संकल्प शक्ति और चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर इतिहास रचने की क्षमता का प्रतीक है।
- यह वैश्विक संदेश देता है कि भारत की शक्ति उसकी एकता में निहित है, विशेषकर ऐसे समय में जब विश्व संयुक्त अभियानों और एकीकृत कमानों की चर्चा कर रहा है।
चुनौतियाँ
1. समुद्री यात्रा की चुनौतियाँ
- चार महासागरों में लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय करना एक अत्यंत कठिन और जोखिम भरा कार्य है।
- भीषण ड्रेक जलडमरूमध्य और केप हॉर्न जैसे विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों को पार करना।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: विश्व के महासागर और जलमार्ग
2. मानसिक एवं शारीरिक दृढ़ता
- 314 दिनों तक सीमित स्थान में रहते हुए लगातार समुद्री परिस्थितियों का सामना करना मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
- अकेलेपन, थकान और अप्रत्याशित मौसम परिवर्तनों से निपटना।
यूपीएससी लिंक: मानव भूगोल: आपदा प्रबंधन
3. तकनीकी एवं इंजीनियरिंग चुनौतियाँ
- नौकायन पोत के रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी समस्याओं का समाधान करना, विशेषकर लंबी यात्रा के दौरान।
- संचार और नेविगेशन प्रणालियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: रक्षा प्रौद्योगिकी
4. त्रि-सेवा समन्वय
- थल सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारियों के बीच निर्बाध समन्वय और टीम वर्क सुनिश्चित करना।
- विभिन्न पृष्ठभूमि के अधिकारियों को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट करना।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: रक्षा संगठन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| लंबी समुद्री यात्रा | अप्रत्याशित मौसम, तूफान और समुद्री खतरों का सामना करना। |
| मानसिक और शारीरिक तनाव | लंबे समय तक सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में रहना। |
| तकनीकी खराबी | पोत में किसी भी तकनीकी समस्या का दूरदराज के इलाकों में समाधान करना। |
| अंतर-सेवा समन्वय | विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों के बीच प्रभावी संचार और टीम वर्क बनाए रखना। |
| सुरक्षा जोखिम | समुद्री डकैती या अन्य सुरक्षा खतरों की संभावना। |
आगे की राह
- महिला अधिकारियों के लिए रक्षा बलों में अधिक नेतृत्वकारी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ खोलना।
- त्रि-सेवा संयुक्तता और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाने के लिए ऐसे और अभियानों को बढ़ावा देना।
- स्वदेशी रक्षा इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमताओं में निवेश जारी रखना।
- समुद्री कूटनीति के माध्यम से मित्र देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना।
- युवाओं, विशेषकर लड़कियों को साहसिक खेलों और रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करना।
- समुद्री सुरक्षा और बचाव प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करना।
- रक्षा बलों में लैंगिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान · समुद्र प्रदक्षिणा · नारी शक्ति · त्रि-सेवा संयुक्तता · सैन्य कूटनीति · आत्मनिर्भर भारत · आईएएसवी त्रिवेणी · केप हॉर्नर्स समुदाय · भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता · राष्ट्रीय सामर्थ्य
अवधारणा प्रवाह
रक्षा मंत्री द्वारा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ का वर्चुअल शुभारंभ (11 सितंबर, 2025) → IASV त्रिवेणी पर नौ महिला अधिकारियों द्वारा 314 दिनों की विश्व परिक्रमा → चार महासागरों, भूमध्य रेखा, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और तीन प्रमुख अंतरीपों को पार करना → अभियान द्वारा विश्व परिक्रमा के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करना → रक्षा मंत्री द्वारा दल का स्वागत और अभियान की सफलता का उत्सव (22 जुलाई, 2026) → नारी शक्ति, त्रि-सेवा संयुक्तता और ‘नए भारत’ के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनना → सैन्य कूटनीति और राष्ट्रीय गौरव का प्रदर्शन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित पहला त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान था।
2. इस अभियान में भारतीय सेना के नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेणी का उपयोग किया गया था।
3. दल ने ड्रेक जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करके केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता प्राप्त की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि यह भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना का एक त्रि-सेवा अभियान था, न कि केवल भारतीय नौसेना का। कथन 2 सही है, अभियान में आईएएसवी त्रिवेणी का उपयोग किया गया था। कथन 3 भी सही है, ड्रेक जलडमरूमध्य को पार करने और केप हॉर्न का चक्कर लगाने के बाद दल को केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता मिली।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान के महत्व को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
- यह केवल भारत की समुद्री शक्ति का प्रदर्शन था।
- यह भारत की नारी शक्ति, त्रि-सेवा संयुक्तता और स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है।
- यह केवल सैन्य कूटनीति पर केंद्रित एक अभियान था।
- यह भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का एक नियमित हिस्सा है।
उत्तर: यह भारत की नारी शक्ति, त्रि-सेवा संयुक्तता और स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है। — ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान को भारत की नारी शक्ति, तीनों सेनाओं के समन्वय (त्रि-सेवा संयुक्तता) और स्वदेशी रूप से निर्मित पोत (आईएएसवी त्रिवेणी) के माध्यम से भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता व सामरिक आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में वर्णित किया गया है। यह केवल समुद्री शक्ति या सैन्य कूटनीति तक सीमित नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ जैसे त्रि-सेवा सर्व-महिला अभियान भारत की ‘नारी शक्ति’ और ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ के प्रतीक के रूप में किस प्रकार उभरते हैं? चर्चा कीजिए कि ऐसे अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य कूटनीति में किस प्रकार योगदान करते हैं। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान को ‘नारी शक्ति’ और ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ के प्रतीक के रूप में समझाना होगा। इसमें महिला अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय पर प्रकाश डाला जा सकता है। दूसरे भाग में, ऐसे अभियानों के राष्ट्रीय सुरक्षा (परिचालन प्रभावशीलता, एकीकृत योजना) और सैन्य कूटनीति (मित्र देशों के साथ सद्भावना, भारत की छवि) में योगदान पर चर्चा करनी होगी। निष्कर्ष में, ऐसे अभियानों के व्यापक महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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