पंजाब में ईवी अपनाने में 16वां स्थान: नीति आयोग रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने

पंजाबियों को नहीं बहा रहे इलेक्ट्रिक वाहन: नीति आयोग की रिपोर्ट में मिला 16वां पायदान, जानें चंडीगढ़ का स्थान — diagram

पंजाब में ईवी अपनाने में 16वां स्थान: नीति आयोग रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने

पंजाब में ईवी अपनाने में 16वां स्थान: नीति आयोग रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने — राज्यों में ईवी अपनाने का इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स 2025 (36 राज्यों/केंद्
आरेख: राज्यों में ईवी अपनाने का इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स 2025 (36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में)

✎ नीति आयोग का इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स देश में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है, जिसका उद्देश्य सतत गतिशीलता को बढ़ावा देना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper II — शासन
  • Prelims: नीति आयोग, इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन नीति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, FAME इंडिया योजना
  • Essay: सतत विकास और भारत का हरित संक्रमण, तकनीकी नवाचार और आर्थिक संवृद्धि में राज्यों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: नीति आयोग का इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स देश में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है, जिसका उद्देश्य सतत गतिशीलता को बढ़ावा देना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

नीति आयोग (NITI Aayog) की ‘इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने और आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करने के मामले में पंजाब 17 बड़े राज्यों में से 16वें स्थान पर है। वहीं, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की समग्र रैंकिंग में भी इसकी स्थिति में गिरावट आई है। इसके विपरीत, चंडीगढ़ ने 71 अंकों के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया है, जो इस क्षेत्र में विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण अंतर को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, वायु प्रदूषण कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने हेतु कई पहल की हैं।
  • नीति आयोग देश में सतत गतिशीलता (Sustainable Mobility) को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल संस्था है और विभिन्न रिपोर्टों व सूचकांकों के माध्यम से राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है।
  • FAME इंडिया योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) चरण-I और चरण-II के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन (Incentives) और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।
  • राज्यों द्वारा भी अपनी-अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां बनाई गई हैं, जिनमें खरीद पर सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और प्रारंभिक खरीद लागत अधिक होना भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की राह में प्रमुख चुनौतियां हैं।

इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स क्या है?

  • इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट है जो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।
  • यह सूचकांक विभिन्न मापदंडों पर राज्यों को अंक प्रदान करता है, जिनमें निजी ईवी पंजीकरण, व्यावसायिक ईवी पंजीकरण, सरकारी प्रयास और वाहन व चार्जर का अनुपात शामिल हैं।
  • इसका उद्देश्य राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रिक गतिशीलता (Electric Mobility) को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना है।
  • रिपोर्ट में अक्सर ईवी को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सिफारिशें शामिल होती हैं, जैसे पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर विशेष प्रोत्साहन, व्यावसायिक ईवी के लिए परमिट में छूट और चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली दरों में कमी।
  • यह चार्जिंग सुविधाओं के लिए आसान मंजूरी प्रक्रिया और पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) को प्राथमिकता देकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर देती है।
  • सूचकांक इलेक्ट्रिक गतिशीलता क्षेत्र में कौशल विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित करने का सुझाव भी देता है, ताकि इस उभरते क्षेत्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।
  • यह रिपोर्ट देश के समग्र ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) प्राप्त करने की प्रतिबद्धता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स 2025 नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास का आकलन करती है।
पंजाब की रैंकिंग 17 बड़े राज्यों में 16वां स्थान, कुल 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में समग्र रैंकिंग में गिरावट।
चंडीगढ़ की रैंकिंग 71 अंकों के साथ चौथे स्थान पर, जो छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
निजी ईवी पंजीकरण में अंक पंजाब को 49 अंक मिले, जो निजी उपयोग के लिए ईवी अपनाने की मध्यम गति को दर्शाता है।
व्यावसायिक ईवी पंजीकरण में अंक पंजाब को केवल 15 अंक मिले, जो व्यावसायिक उपयोग में ईवी अपनाने की धीमी गति को दर्शाता है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वाहन और चार्जर के अनुपात में पंजाब को 40 अंक मिले, जो चार्जिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
  • यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आर्थिक महत्व

  • ईवी क्षेत्र में निवेश और विनिर्माण से रोजगार सृजन होता है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • ईंधन आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।

सामाजिक महत्व

  • शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार से नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • ईवी प्रौद्योगिकी में कौशल विकास (Skill Development) से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।

शासन और नीतिगत महत्व

  • राज्यों द्वारा ईवी नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नीति आयोग की रिपोर्टें राज्यों को अपनी नीतियों का मूल्यांकन करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती हैं।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढाँचे का अभाव

  • चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या और उनकी पहुंच एक बड़ी बाधा है।
  • ईवी चार्जिंग के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और ग्रिड क्षमता का विकास आवश्यक है।

2. उच्च प्रारंभिक लागत

  • पेट्रोल/डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद लागत अधिक होती है।
  • बैटरी बदलने की लागत और उसकी उपलब्धता भी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है।

3. उपभोक्ता जागरूकता और स्वीकार्यता

  • ईवी प्रौद्योगिकी, रेंज चिंता (Range Anxiety) और रखरखाव के बारे में जानकारी का अभाव।
  • पुराने वाहनों को स्क्रैप करने और नए ईवी खरीदने के लिए प्रोत्साहन की कमी।

4. कौशल विकास की कमी

  • ईवी विनिर्माण, रखरखाव और चार्जिंग बुनियादी ढांचे के संचालन के लिए प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव।
  • तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ईवी-विशिष्ट पाठ्यक्रमों की आवश्यकता।

5. नीतिगत क्रियान्वयन में असमानता

  • राज्यों के बीच ईवी नीतियों के क्रियान्वयन और प्रोत्साहन में भिन्नता।
  • व्यावसायिक ईवी क्षेत्र में कम पंजीकरण दरें, जो इस खंड के लिए विशिष्ट चुनौतियों का संकेत देती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चार्जिंग स्टेशनों की कमी ईवी अपनाने की दर को धीमा करता है, विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा के लिए।
ईवी की उच्च लागत आम उपभोक्ताओं के लिए पहुंच को सीमित करता है, सब्सिडी की आवश्यकता को बढ़ाता है।
बैटरी प्रौद्योगिकी बैटरी का जीवनकाल, चार्जिंग समय और प्रतिस्थापन लागत उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है।
कौशल अंतराल ईवी उद्योग के विकास के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कार्यबल की कमी।
पुराने वाहनों को स्क्रैप करने में हिचकिचाहट नए ईवी अपनाने के लिए एक बाधा, विशेषकर जब पर्याप्त प्रोत्साहन न हो।
व्यावसायिक ईवी का धीमा पंजीकरण परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में ईवी अपनाने की गति को प्रभावित करता है।

आगे की राह

  • चार्जिंग बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया जाए, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
  • ईवी की खरीद पर अधिक प्रभावी प्रोत्साहन (Incentives) दिए जाएं, विशेषकर व्यावसायिक वाहनों के लिए।
  • पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जाएं ताकि नए ईवी अपनाने को बढ़ावा मिले।
  • चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली की दरों को कम किया जाए और अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में कौशल विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित किए जाएं।
  • ईवी प्रौद्योगिकी और इसके लाभों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • बैटरी विनिर्माण और रीसाइक्लिंग क्षमताओं को मजबूत किया जाए ताकि लागत कम हो और आत्मनिर्भरता बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

इलेक्ट्रिक वाहन · ईवी नीति · चार्जिंग अवसंरचना · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · नीति आयोग · इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स · पर्यावरण संरक्षण · ऊर्जा सुरक्षा · जीवाश्म ईंधन · कौशल विकास

अवधारणा प्रवाह

नीति आयोग की रिपोर्ट जारी  →  राज्यों द्वारा ईवी अपनाने का मूल्यांकन  →  पंजाब का निचला स्थान  →  बुनियादी ढांचे और नीतिगत कमियों की पहचान  →  ईवी को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें  →  स्वच्छ परिवहन और सतत विकास की दिशा में प्रयास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग द्वारा जारी इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स 2025 राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की स्थिति का आकलन करता है।
2. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर विशेष प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई है।
3. भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को अनिवार्य किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि नीति आयोग इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स जारी करता है जो ईवी अपनाने का आकलन करता है। कथन 2 भी सही है, रिपोर्ट में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन की सिफारिश की गई है। कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध हरित हाइड्रोजन उत्पादन से है, न कि सीधे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को अनिवार्य करने से।

Q2. इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) योजना लागू की गई है।
2. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी सबसे आम प्रकार की बैटरी है।
3. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण केवल दोपहिया और चार पहिया वाहनों तक ही सीमित है।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। FAME योजना भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। कथन 2 भी सही है। लिथियम-आयन बैटरी अपनी उच्च ऊर्जा घनत्व और लंबी आयु के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। कथन 3 गलत है। इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण विभिन्न श्रेणियों में होता है, जिसमें तिपहिया वाहन, बसें और अन्य वाणिज्यिक वाहन भी शामिल हैं, न कि केवल दोपहिया और चार पहिया वाहन।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इन चुनौतियों का समाधान करने और देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग द्वारा सुझाई गई सिफारिशों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के महत्व और वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में चुनौतियाँ:
– चार्जिंग अवसंरचना की कमी: अपर्याप्त चार्जिंग स्टेशन, धीमी चार्जिंग गति।
– उच्च प्रारंभिक लागत: पेट्रोल/डीजल वाहनों की तुलना में ईवी की खरीद लागत अधिक।
– बैटरी प्रौद्योगिकी और रेंज की चिंता: बैटरी जीवनकाल, सीमित रेंज और प्रतिस्थापन लागत।
– कौशल विकास की कमी: ईवी मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव।
– उपभोक्ता जागरूकता और स्वीकृति: ईवी के लाभों और उपयोग के बारे में जानकारी का अभाव।
– वित्तपोषण विकल्प: ईवी खरीद के लिए आसान ऋण और बीमा विकल्पों की कमी।
2. नीति आयोग की सिफारिशें (इंडिया मोबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट के आधार पर):
– पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर विशेष प्रोत्साहन: ईवी खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए।
– व्यावसायिक ईवी के लिए परमिट में छूट: वाणिज्यिक बेड़े में ईवी को बढ़ावा देना।
– चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली की दरें कम करना: चार्जिंग लागत को कम करना।
– आसान मंजूरी प्रक्रिया और कैपिटल सब्सिडी: चार्जिंग अवसंरचना के विकास को गति देना।
– इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में कौशल विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र: प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना।
निष्कर्ष: इन चुनौतियों का समाधान करने और नीति आयोग की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना, जिससे भारत में स्थायी गतिशीलता को बढ़ावा मिल सके।

स्रोत: amarujala.com

Punjab PCS (PPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: नीति आयोग की ‘ई-गतिशीलता रैंकिंग 2023’ में पंजाब को कौन सा स्थान प्राप्त हुआ है?

  1. 15वां
  2. 16वां
  3. 17वां
  4. 18वां

उत्तर: 16वां — नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब को ई-गतिशीलता अपनाने में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि चंडीगढ़ 10वें स्थान पर रहा।

Mains: नीति आयोग की ‘ई-गतिशीलता रैंकिंग 2023’ में पंजाब के 16वें स्थान पर रहने के कारणों का विश्लेषण करते हुए, राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत सुधारों पर चर्चा करें।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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