पीएम मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानकों की कोई जगह नहीं’

‘No place for double standards on terrorism’: PM Modi at SCO Summit — diagram

पीएम मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानकों की कोई जगह नहीं’

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✎ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जहाँ भारत आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट कार्रवाई, कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर देता है, साथ ही संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर बल…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (SCO), आतंकवाद, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, संवाद और कूटनीति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता
  • Essay: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की भूमिका, आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में बहुपक्षीय मंचों का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जहाँ भारत आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट कार्रवाई, कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर देता है, साथ ही संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर बल देता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरता और सुरक्षित पनाहगाहों सहित इसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद पर ‘दोहरे मापदंड’ के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है और सभी सदस्य देशों को एक स्वर में बात करनी चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है।
  • भारत 2017 में पाकिस्तान के साथ SCO का पूर्ण सदस्य बना, जिससे संगठन में इसकी रणनीतिक भूमिका बढ़ गई।
  • भारत ने SCO के भीतर ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ के तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित अपनी दृष्टि को रेखांकित किया है।
  • भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि सभी युद्धों और संघर्षों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, क्योंकि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं है।
  • आतंकवाद भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय रहा है, और भारत विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसके खिलाफ एकजुट कार्रवाई का आह्वान करता रहा है।
  • भारत ने SCO के भीतर स्टार्टअप फोरम, युवा लेखक सम्मेलन और युवा वैज्ञानिक फोरम जैसी कई पहलें की हैं, साथ ही SCO सभ्यताओं के संवाद फोरम का भी प्रस्ताव रखा है।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?

  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दस सदस्य देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसमें चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं।
  • इसकी स्थापना 2001 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विश्वास और सद्भाव को मजबूत करना, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
  • SCO के प्रमुख कार्यों में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करना, क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है।
  • संगठन के दो स्थायी निकाय हैं: बीजिंग में SCO सचिवालय और ताशकंद में क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति।
  • SCO शिखर सम्मेलन राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की बैठक होती है, जो संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, और यह प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।
  • भारत ने कनेक्टिविटी प्रयासों का समर्थन किया है, लेकिन इस बात पर जोर दिया है कि इन प्रयासों को सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
  • SCO में दो पर्यवेक्षक राज्य (अज़रबैजान और आर्मेनिया) और 15 संवाद भागीदार (जैसे मिस्र, कंबोडिया, कतर, सऊदी अरब) भी शामिल हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आतंकवाद पर दोहरे मापदंडों का खंडन आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरता और सुरक्षित पनाहगाहों सहित पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सुरक्षा, संपर्क और अवसर SCO के लिए भारत के दृष्टिकोण के तीन मुख्य स्तंभ, जो क्षेत्र में स्थिरता, व्यापार और विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
संवाद और कूटनीति पर जोर संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की दीर्घकालिक नीति को रेखांकित करता है, जो युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देती है।
संपर्क का सम्मान बाजारों को जोड़ने और व्यापार को सुविधाजनक बनाने के प्रयासों में राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भारत का जोर।
जन-केंद्रित सहयोग SCO के भीतर लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें स्टार्टअप फोरम और युवा लेखकों का सम्मेलन जैसी पहल शामिल हैं।
SCO सभ्यतागत संवाद मंच संस्कृति और विचारों के संगम के रूप में SCO के भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, जिसका पहला सत्र भारत में आयोजित किया जाएगा।

महत्व

अंतर्राष्ट्रीय संबंध और कूटनीति

  • भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के साथ SCO की भूमिका को सुदृढ़ करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की मुखर स्थिति को दर्शाता है, जिसमें आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की गई है।
  • बहुपक्षीय मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक मुद्दों पर उसके नेतृत्व की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी

  • आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ एक समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देता है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद और कट्टरता का मुकाबला करने में SCO के महत्व को रेखांकित करता है।

आर्थिक और क्षेत्रीय संपर्क

  • बाजारों को जोड़ने और व्यापार को सुविधाजनक बनाने के प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और विकास को बढ़ावा देता है।
  • संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर, जो भारत के भू-राजनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

सांस्कृतिक और जन-केंद्रित आदान-प्रदान

  • SCO सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समझ और लोगों से लोगों के संबंधों को गहरा करने की क्षमता रखता है।
  • युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मंच प्रदान करता है, जो भविष्य के क्षेत्रीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. आतंकवाद की परिभाषा और दोहरे मापदंड

  • आतंकवाद की सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा का अभाव, जिससे कुछ देशों द्वारा आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों को ‘अच्छे’ या ‘बुरे’ के रूप में वर्गीकृत करने के दोहरे मापदंड सामने आते हैं।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए सदस्य देशों के बीच आम सहमति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी।

2. क्षेत्रीय संपर्क और संप्रभुता

  • क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में सदस्य देशों के बीच संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को लेकर मतभेद।
  • कुछ देशों द्वारा एकतरफा परियोजनाओं को बढ़ावा देना जो अन्य सदस्यों की चिंताओं का समाधान नहीं करते हैं।

3. भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

  • SCO के भीतर प्रमुख शक्तियों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, जो संगठन के भीतर आम सहमति और प्रभावी निर्णय लेने में बाधा डाल सकती है।
  • सदस्य देशों के विभिन्न राष्ट्रीय हित और प्राथमिकताएं, जो सहयोग को जटिल बना सकती हैं।

4. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

  • SCO द्वारा घोषित विभिन्न पहलों और प्रस्तावों के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधाएँ।
  • सदस्य देशों के बीच संसाधनों और क्षमताओं में असमानता, जो संयुक्त परियोजनाओं को प्रभावित कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आतंकवाद पर आम सहमति का अभाव आतंकवाद की परिभाषा और उसके खिलाफ कार्रवाई पर सदस्य देशों के बीच मतभेद, जिससे प्रभावी क्षेत्रीय प्रतिक्रिया बाधित होती है।
संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता का सम्मान कुछ क्षेत्रीय संपर्क पहलों में राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की चिंताएँ।
भू-राजनीतिक हित और प्रतिद्वंद्विता SCO के भीतर प्रमुख शक्तियों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित, जो संगठन के भीतर सहयोग और आम सहमति को कमजोर करते हैं।
कार्यान्वयन और प्रभावी कार्रवाई आतंकवाद-रोधी और क्षेत्रीय विकास पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • आतंकवाद की सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा विकसित करने और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ बिना किसी दोहरे मापदंड के कार्रवाई करने के लिए सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाना।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने के लिए SCO के भीतर खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वित प्रवर्तन प्रयासों को मजबूत करना।
  • क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को बढ़ावा देना जो सभी सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हैं, और समावेशी विकास सुनिश्चित करती हैं।
  • SCO के भीतर संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों और विवादों को हल करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
  • युवाओं, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करना, ताकि क्षेत्रीय समझ और सद्भाव को बढ़ावा मिल सके।
  • SCO के भीतर आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते तलाशना, जिसमें स्टार्टअप और नवाचार को समर्थन देना शामिल है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

आतंकवाद पर प्रधानमंत्री का बयान  →  आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरता और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर जोर  →  SCO के लिए भारत के दृष्टिकोण के तीन स्तंभ: सुरक्षा, संपर्क और अवसर  →  संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के समाधान पर भारत का जोर  →  संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर बल  →  SCO के भीतर जन-केंद्रित सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SCO में वर्तमान में 10 सदस्य देश हैं।
2. भारत SCO का संस्थापक सदस्य है।
3. SCO का मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। SCO में वर्तमान में 10 सदस्य देश हैं: बेलारूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। कथन 2 गलत है। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना, यह इसका संस्थापक सदस्य नहीं है। कथन 3 सही है। SCO का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है, जिसमें मध्य एशिया में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना एक महत्वपूर्ण पहलू है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पर्यवेक्षक देश नहीं है?

  1. अज़रबैजान
  2. आर्मेनिया
  3. ईरान
  4. बेलारूस

उत्तर: ईरान — ईरान और बेलारूस दोनों SCO के सदस्य देश हैं, जबकि अज़रबैजान और आर्मेनिया पर्यवेक्षक देश हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संदर्भ में, आतंकवाद के विरुद्ध भारत के रुख और क्षेत्रीय संपर्क के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का संक्षिप्त परिचय और भारत के लिए इसका महत्व।
2. **आतंकवाद पर भारत का रुख:**
* ‘आतंकवाद पर दोहरे मापदंड’ के खिलाफ भारत की स्पष्ट स्थिति।
* आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरता, सुरक्षित पनाहगाह) को ध्वस्त करने की आवश्यकता पर जोर।
* अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की लगातार मांग कि सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की जाए।
* SCO के भीतर आतंकवाद विरोधी तंत्रों (जैसे RATS) में भारत का योगदान।
3. **क्षेत्रीय संपर्क के प्रति भारत की प्रतिबद्धता:**
* भारत के ‘सुरक्षा, संपर्क और अवसर’ के तीन स्तंभों का उल्लेख।
* बाजारों को जोड़ने, व्यापार को सुगम बनाने और विकास के नए रास्ते खोलने के प्रयासों का समर्थन।
* संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भारत का जोर (उदाहरण के लिए, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर भारत की स्थिति)।
* लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहलें (स्टार्ट-अप फोरम, युवा लेखक सम्मेलन, युवा वैज्ञानिक फोरम, सभ्यतागत संवाद फोरम)।
4. **चुनौतियाँ और आलोचनात्मक विश्लेषण:**
* SCO के भीतर कुछ सदस्य देशों के बीच आतंकवाद की परिभाषा और दृष्टिकोण में भिन्नता।
* क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को लेकर सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और मतभेद।
* चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसे मुद्दों पर भारत की संप्रभुता संबंधी चिंताएँ।
* SCO के भीतर भारत के हितों को साधने में आने वाली चुनौतियाँ।
5. **निष्कर्ष:** SCO में भारत की भूमिका का सारांश और आतंकवाद तथा संपर्क के मुद्दों पर इसके संतुलित दृष्टिकोण का महत्व।

स्रोत: orissapost.com


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