01 Sep पीएम मोदी-शी जिनपिंग ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन में एक साथ चलते हुए किया हाथ मिलाया
✎ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख यूरेशियाई संगठन है जो क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर केंद्रित है, जिसमें भारत 2017 से एक सक्रिय सदस्य है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (SCO), भारत-चीन संबंध, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS), मध्य एशिया, बहुपक्षीय कूटनीति, कनेक्टिविटी परियोजनाएं
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की विदेश नीति, क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख यूरेशियाई संगठन है जो क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर केंद्रित है, जिसमें भारत 2017 से एक सक्रिय सदस्य है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत मध्य एशिया के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करने और SCO ढांचे के भीतर सहयोग बढ़ाने के प्रयासों में लगा हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत 2017 से SCO का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर केंद्रित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है।
पृष्ठभूमि
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। यह दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है, जो यूरेशिया के लगभग 60% क्षेत्र, दुनिया की आबादी के 40% और वैश्विक GDP के 30% से अधिक को कवर करता है।
- भारत 2017 में पाकिस्तान के साथ SCO का पूर्ण सदस्य बना। इससे पहले, भारत 2005 से एक पर्यवेक्षक राज्य था।
- SCO का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विश्वास और सद्भाव को मजबूत करना, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना तथा आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना है।
- SCO के भीतर भारत का दृष्टिकोण ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र बनाना है।
- SCO के सदस्य देशों में बेलारूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसके दो पर्यवेक्षक राज्य (अज़रबैजान और आर्मेनिया) और 14 संवाद भागीदार हैं।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?
- SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने।
- यह संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर केंद्रित है।
- SCO का एक महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने में सहयोग करना है।
- SCO सदस्य देशों के बीच सैन्य अभ्यास भी आयोजित करता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करता है।
- यह संगठन मध्य एशिया में स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्र में बाहरी शक्तियों के प्रभाव को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारत के लिए, SCO मध्य एशियाई देशों के साथ संपर्क बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
- SCO के भीतर कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी जोर दिया जाता है, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), जो भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| SCO शिखर सम्मेलन में नेताओं की उपस्थिति | यह क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| भारत की सक्रिय सदस्यता (2017 से) | भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। |
| आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र का दृष्टिकोण | यह क्षेत्र में स्थिरता और शांति सुनिश्चित करने के लिए साझा लक्ष्यों को रेखांकित करता है। |
| मध्य एशिया के साथ निरंतर जुड़ाव | भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाता है। |
| बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय बातचीत | यह विभिन्न सदस्य देशों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। |
महत्व
भू-राजनीतिक महत्व
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जो यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है। भारत की सक्रिय भागीदारी इस क्षेत्र में अपनी भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करती है।
- SCO शिखर सम्मेलन में नेताओं की उपस्थिति भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए एक मंच प्रदान करती है, जिससे बहुपक्षीय कूटनीति में इसकी भूमिका बढ़ती है।
- चीन के साथ बातचीत, भले ही अनौपचारिक हो, दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर सीमा विवादों और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के संदर्भ में।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
- SCO सदस्य देशों के साथ व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करता है। भारत का ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का दृष्टिकोण आर्थिक एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- मध्य एशिया के साथ भारत का जुड़ाव ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्गों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। SCO इस जुड़ाव को मजबूत करने का एक माध्यम है।
- आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और उग्रवाद जैसी क्षेत्रीय चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- SCO में भारत की भागीदारी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसकी विश्वसनीयता और प्रभाव को बढ़ाती है, जिससे यह वैश्विक शासन में एक महत्वपूर्ण हितधारक बन जाता है।
- यह भारत को विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है, जैसा कि शिखर सम्मेलन के दौरान विभिन्न नेताओं के साथ प्रधान मंत्री की बैठकों से स्पष्ट है।
- SCO एक ऐसा मंच है जहाँ भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अपने दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है, जहाँ विभिन्न शक्तियाँ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करती हैं।
चुनौतियाँ
1. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ
- आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी चुनौतियाँ SCO क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा बनी हुई हैं, जिनके लिए सदस्य देशों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता है।
- अफगानिस्तान में अस्थिरता और इसके क्षेत्रीय प्रभाव SCO सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चिंता बने हुए हैं, जिससे सीमा पार अपराध और कट्टरपंथ का खतरा बढ़ रहा है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आंतरिक सुरक्षा
2. सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव
- कुछ सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय विवाद और ऐतिहासिक तनाव क्षेत्रीय सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सर्वसम्मत निर्णय लेने में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
- चीन और पाकिस्तान की उपस्थिति भारत के लिए कुछ रणनीतिक चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है, खासकर सीमा विवादों और क्षेत्रीय प्रभाव के संदर्भ में।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत और उसके पड़ोसी
3. आर्थिक एकीकरण की चुनौतियाँ
- सदस्य देशों के बीच आर्थिक विकास के स्तर और व्यापार नीतियों में अंतर पूर्ण आर्थिक एकीकरण और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
- बुनियादी ढाँचे की कमी और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए धन की व्यवस्था भी एक चुनौती है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश और समन्वय की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
4. बहुपक्षीय मंचों पर प्रभाव
- SCO में चीन और रूस जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति भारत के लिए अपने हितों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय एजेंडा को प्रभावित करने में चुनौतियाँ पेश कर सकती है।
- संगठन के भीतर विभिन्न सदस्यों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित और प्राथमिकताएँ सर्वसम्मत निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने में बाधा डाल सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अंतर्राष्ट्रीय संगठन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आतंकवाद और उग्रवाद | क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए निरंतर खतरा। |
| भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता | सदस्य देशों के बीच हितों का टकराव क्षेत्रीय सहयोग को बाधित कर सकता है। |
| कनेक्टिविटी परियोजनाएँ | बुनियादी ढाँचे की कमी और वित्तपोषण की चुनौतियाँ परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा डालती हैं। |
| सीमा विवाद | भारत और चीन जैसे देशों के बीच सीमा विवाद क्षेत्रीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। |
| ऊर्जा सुरक्षा | मध्य एशियाई ऊर्जा संसाधनों तक पहुँच और परिवहन मार्ग सुनिश्चित करना। |
| व्यापार असंतुलन | सदस्य देशों के बीच व्यापार असंतुलन आर्थिक एकीकरण में बाधा डाल सकता है। |
आगे की राह
- आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझाकरण और संयुक्त अभ्यास को मजबूत करना।
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), को बढ़ावा देना और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाना।
- व्यापार बाधाओं को कम करके और निवेश को बढ़ावा देकर SCO क्षेत्र के भीतर आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ाना।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना ताकि सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का निर्माण हो सके।
- SCO मंच का उपयोग द्विपक्षीय मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए करना, विशेष रूप से भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने के लिए।
- क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए साझा चुनौतियों का समाधान करने के लिए अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ SCO के सहयोग को मजबूत करना।
- पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर सहयोग बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) · भारत की विदेश नीति · मध्य एशिया से संबंध · क्षेत्रीय सुरक्षा · आतंकवाद विरोधी सहयोग · बहुपक्षीय कूटनीति · भारत-चीन संबंध · कनेक्टिविटी परियोजनाएँ · आर्थिक सहयोग · भू-राजनीतिक महत्व
अवधारणा प्रवाह
SCO शिखर सम्मेलन में नेताओं की उपस्थिति → क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति का प्रदर्शन → भारत का ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का दृष्टिकोण → क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना → आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना।
2. SCO के सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं।
3. SCO का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना था। कथन 2 सही है। SCO के सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। कथन 3 भी सही है। SCO का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटना तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पर्यवेक्षक (Observer) देश है?
- ईरान
- बेलारूस
- अज़रबैजान
- उज़्बेकिस्तान
उत्तर: अज़रबैजान — अज़रबैजान SCO का एक पर्यवेक्षक देश है, जबकि ईरान, बेलारूस और उज़्बेकिस्तान पूर्ण सदस्य देश हैं।
Q3. अभिकथन (A): भारत मध्य एशिया के साथ अपनी कनेक्टिविटी और सहयोग को मजबूत करने के लिए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है।
कारण (R): SCO भारत को ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ के अपने क्षेत्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मदद करता है, जिसमें आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र का निर्माण शामिल है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। भारत SCO के माध्यम से मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है, और यह संगठन भारत को ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ के अपने दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करता है, जिसमें क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त करना भी शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संदर्भ में भारत के ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ के दृष्टिकोण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत के क्षेत्रीय हितों को साधने में SCO की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत SCO के संक्षिप्त परिचय और भारत के लिए इसके महत्व से करें। भारत के ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ (Security, Connectivity and Opportunity) के दृष्टिकोण को विस्तार से समझाएं, जिसमें प्रत्येक घटक के निहितार्थों को स्पष्ट करें। सुरक्षा के तहत आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने पर जोर दें। कनेक्टिविटी में चाबहार बंदरगाह, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करें। अवसर में व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को शामिल करें। इसके बाद, भारत के क्षेत्रीय हितों, विशेषकर मध्य एशिया से संबंधों और चीन-पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करने में SCO की भूमिका का मूल्यांकन करें। SCO की सीमाओं और चुनौतियों, जैसे सर्वसम्मति-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया और सदस्य देशों के बीच मतभेदों पर भी प्रकाश डालें। निष्कर्ष में, भारत के लिए SCO के रणनीतिक महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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