पीएलआई-ऑटो योजना: 25,938 करोड़ रुपये के बजट से आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

पीएलआई-ऑटो योजना: 25,938 करोड़ रुपये के बजट से आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम — PLI-Auto Scheme Budget vs Investments

पीएलआई-ऑटो योजना: 25,938 करोड़ रुपये के बजट से आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। सरकारी बजट। विनिर्माण क्षेत्र में सुधार।  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
  • Prelims: PLI-ऑटो योजना, उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (AAT), भारी उद्योग मंत्रालय, सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट, पीएम ई-ड्राइव योजना, विनिर्माण प्रोत्साहन
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत और विनिर्माण क्षेत्र का सशक्तिकरण, भारत में औद्योगिक विकास और नवाचार की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: PLI-ऑटो योजना भारत में उन्नत ऑटोमोटive उत्पादों के विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ₹25,938 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (PLI-ऑटो) को ₹25,938 करोड़ के बजटीय व्यय के साथ मंजूरी दी थी। हाल ही में, इस योजना के तहत स्वीकृत आवेदकों ने मार्च 2027 तक के ₹42,500 करोड़ के निवेश लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2026 तक ₹44,326 करोड़ के निवेश की सूचना दी है, जो इस योजना की सफलता और देश में विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में इसकी भूमिका को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की है।
  • PLI-ऑटो योजना को 23 सितंबर 2021 को उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से मंजूरी दी गई थी।
  • यह योजना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने और ऑटोमोबाइल तथा ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
  • योजना का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे देश में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का विकास हो सके।
  • भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • इस योजना के तहत, सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी पहल की जा रही है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य उच्च-तकनीकी उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं।

PLI-ऑटो योजना क्या है?

  • PLI-ऑटो योजना भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए एक उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है।
  • योजना के तहत ₹25,938 करोड़ का बजटीय व्यय निर्धारित किया गया है, जिसे पात्र निर्माताओं को प्रोत्साहन के रूप में वितरित किया जाएगा।
  • यह योजना उन कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है जो भारत में निर्मित उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों की बिक्री में वृद्धि करती हैं।
  • इसका लक्ष्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
  • योजना में दो घटक शामिल हैं: ‘चैंपियन OEM प्रोत्साहन योजना’ और ‘घटक चैंपियन प्रोत्साहन योजना’, जो क्रमशः वाहन निर्माताओं और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को लक्षित करती हैं।
  • यह योजना भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों सहित भविष्य की गतिशीलता प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पीएलआई-ऑटो योजना यह योजना उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन है।
बजटीय व्यय ₹25,938 करोड़ का बजटीय व्यय ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निवेश लक्ष्य और उपलब्धि ₹42,500 करोड़ के निवेश लक्ष्य के मुकाबले ₹44,326 करोड़ का निवेश प्राप्त करना योजना की सफलता और उद्योग के विश्वास को दर्शाता है।
सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इन मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना यह योजना ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान प्रदान करती है, जो उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे को मजबूत करती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर और नए रोजगार के अवसर सृजित करके आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति देती है।
  • उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के उत्पादन से निर्यात में वृद्धि होगी और व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने में मदद मिलेगी।
  • बढ़े हुए निवेश से अनुसंधान और विकास (Research and Development) को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उद्योग में नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

रणनीतिक महत्व

  • सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन से रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) बढ़ेगी।
  • उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों में भारत की विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को बेहतर बनाएगा।
  • परीक्षण बुनियादी ढाँचे का उन्नयन सुनिश्चित करता है कि भारत में निर्मित उत्पाद वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं, जिससे उनकी स्वीकार्यता बढ़ती है।

सामाजिक महत्व

  • ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग में निवेश से कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • तकनीकी उन्नयन और नवाचार से उच्च-कौशल वाले रोजगारों का सृजन होगा, जिससे कार्यबल का कौशल विकास होगा।

चुनौतियाँ

1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • भारतीय ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिनके पास अक्सर बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं (Economies of Scale) और उन्नत प्रौद्योगिकियाँ होती हैं।
  • गुणवत्ता और लागत के मामले में वैश्विक मानकों को पूरा करना एक चुनौती है।

2. तकनीकी उन्नयन

  • इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles) और स्वायत्त ड्राइविंग (Autonomous Driving) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास में भारी निवेश की आवश्यकता है।
  • घरेलू उद्योग के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाना और उनमें महारत हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

3. बुनियादी ढाँचा और आपूर्ति श्रृंखला

  • उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के विनिर्माण के लिए एक मजबूत और कुशल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की आवश्यकता होती है, जिसमें लॉजिस्टिक्स और घटक उपलब्धता शामिल है।
  • गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

4. कौशल विकास

  • उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों के लिए विशेष कौशल वाले कार्यबल की आवश्यकता होती है, जिसकी भारत में कमी हो सकती है।
  • उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल को प्रशिक्षित और कुशल बनाना एक सतत चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कच्चे माल की उपलब्धता सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे विशिष्ट घटकों के लिए आवश्यक दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) की उपलब्धता और उनकी आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता एक चिंता का विषय है।
पर्यावरणीय अनुपालन ऑटोमोबाइल विनिर्माण से जुड़े प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कड़े पर्यावरणीय नियमों का पालन करना एक चुनौती हो सकती है।
निवेश का वितरण यह सुनिश्चित करना कि पीएलआई योजना के तहत निवेश देश के विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से वितरित हो, ताकि क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके।
योजना का दीर्घकालिक प्रभाव योजना की समाप्ति के बाद भी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और आत्मनिर्भरता को बनाए रखने के लिए स्थायी रणनीतियों की आवश्यकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीएलआई-ऑटो योजना (PLI-Auto Scheme)
  • पीएम ई-ड्राइव योजना (PM e-Drive Scheme)

आगे की राह

  • घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में और सुधार करना।
  • उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) को मजबूत करना।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों के लिए एक मजबूत चार्जिंग और ईंधन भरने के बुनियादी ढाँचे का विकास करना।
  • उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल के कौशल को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना।
  • घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने पर ध्यान केंद्रित करना।
  • योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना ताकि इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके और आवश्यक समायोजन किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · ऑटोमोबाइल उद्योग · ऑटो कंपोनेंट उद्योग · उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (AAT) · विनिर्माण क्षमताएँ · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · राजकोषीय प्रोत्साहन · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) · रोजगार सृजन · निर्यात प्रोत्साहन · आर्थिक संवृद्धि

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा पीएलआई-ऑटो योजना को मंजूरी  →  ₹25,938 करोड़ का बजटीय व्यय और निवेश लक्ष्य  →  उद्योग द्वारा निवेश और विनिर्माण क्षमता में वृद्धि  →  उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों का घरेलू उत्पादन  →  निर्यात में वृद्धि और आर्थिक संवृद्धि  →  आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना-ऑटो के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना को भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य भारत में उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
3. योजना के तहत स्वीकृत आवेदकों ने निर्धारित निवेश लक्ष्य को पार कर लिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि PLI-ऑटो योजना भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के विनिर्माण को बढ़ाना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि 31.03.2026 तक, स्वीकृत आवेदकों ने ₹42,500 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹44,326 करोड़ का निवेश किया है।

Q2. पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत, निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिए प्रावधान किया गया है?

  1. इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी प्रदान करना।
  2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देना।
  3. ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अनुदान प्रदान करना।
  4. इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी के अनुसंधान और विकास को वित्तपोषित करना।

उत्तर: ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अनुदान प्रदान करना। — पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत, ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान के रूप में ₹780 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के प्रमुख उद्देश्यों और महत्व का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक है? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, PLI-ऑटो योजना के प्रमुख उद्देश्यों, जैसे उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और निर्यात बढ़ाना, पर चर्चा करें। इसके महत्व को रेखांकित करें, जिसमें रोजगार सृजन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण और तकनीकी उन्नयन शामिल हैं। दूसरे भाग में, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदर्भ में योजना की भूमिका का विश्लेषण करें, यह बताते हुए कि कैसे यह घरेलू विनिर्माण को मजबूत करती है, आयात पर निर्भरता कम करती है और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करती है। अंत में, योजना की सफलताओं और संभावित चुनौतियों का संक्षिप्त मूल्यांकन करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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