14 Oct ब्लूमबर्ग के भारत विस्तार पर पीएम मोदी की स्वीकृति: अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
✎ भारत में ब्लूमबर्ग के 30 वर्ष (13 अक्टूबर 2026) वैश्विक वित्तीय सूचना-तंत्र और भारतीय बाज़ारों के बढ़ते एकीकरण के प्रतीक हैं। इसके पीछे FAR के माध्यम से बॉण्ड सूचकांकों में भारत का समावेशन, FDI नियम (समाचार माध्यमों में 26% / TV…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), पूँजी बाज़ार, सेवा क्षेत्र और निवेश-प्रवाह | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: बॉण्ड बाज़ार, वैश्विक सूचकांकों में समावेशन और बाज़ार-सुधार | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: आर्थिक कूटनीति और भारत की वैश्विक आर्थिक छवि
- Prelims: ब्लूमबर्ग टर्मिनल (Bloomberg Terminal), विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) — स्वचालित मार्ग और सरकारी अनुमोदन मार्ग, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI), पूर्णतः सुलभ मार्ग (Fully Accessible Route – FAR), उभरते बाज़ार स्थानीय मुद्रा सरकारी बॉण्ड सूचकांक, GIFT सिटी और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC), SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, समाचार माध्यमों में FDI की सीमा, बेंचमार्क सूचकांक
- Essay: सूचना बाज़ार की बुनियादी संरचना है: पारदर्शी आँकड़े और वैश्विक पूँजी का भरोसा, भारत की विकास गाथा और वैश्विक निवेशकों का विश्वास: अवसर तथा जोखिम
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में ब्लूमबर्ग के 30 वर्ष (13 अक्टूबर 2026) वैश्विक वित्तीय सूचना-तंत्र और भारतीय बाज़ारों के बढ़ते एकीकरण के प्रतीक हैं। इसके पीछे FAR के माध्यम से बॉण्ड सूचकांकों में भारत का समावेशन, FDI नियम (समाचार माध्यमों में 26% / TV समाचार में 49%) और SEBI-RBI-IFSCA का नियामक ढाँचा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक वित्तीय सूचना और मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइक ब्लूमबर्ग से भेंट की। इसके बाद उन्होंने X पर भारत में ब्लूमबर्ग के 30 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने कंपनी की उस योजना का भी स्वागत किया जिसके अंतर्गत वह भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी और देश की अर्थव्यवस्था, बाज़ारों तथा लोगों के साथ जुड़ाव को और गहरा करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास गाथा विभिन्न क्षेत्रों में अपार अवसर उपलब्ध करा रही है। माइक ब्लूमबर्ग ने भी भारत की तेज़ आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक भूमिका की ओर बढ़ते कदमों की सराहना की। परीक्षा की दृष्टि से इस समाचार का महत्त्व किसी व्यक्ति-विशेष में नहीं है। इसका महत्त्व इस बात में है कि वैश्विक वित्तीय सूचना-तंत्र, विदेशी निवेश और बाज़ार-एकीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था से कैसे जुड़ते हैं।
पृष्ठभूमि
- ब्लूमबर्ग एल.पी. की स्थापना 1981 में माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका प्रमुख उत्पाद ब्लूमबर्ग टर्मिनल है, जो वित्तीय बाज़ारों के रीयल-टाइम आँकड़े, विश्लेषण और व्यापार-संचार की सुविधा देता है। इसके अलावा कंपनी समाचार, मीडिया और सूचकांक सेवाएँ भी संचालित करती है।
- भारत में ब्लूमबर्ग की उपस्थिति के 30 वर्ष 1990 के दशक के मध्य से शुरू हुए हैं। यही वह दौर है जब 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद पूँजी बाज़ार खुल रहे थे। उसी समय SEBI को 1992 में वैधानिक दर्जा मिला और विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारतीय बाज़ार में प्रवेश की अनुमति मिली।
- पिछले तीन दशकों में भारत में शेयर बाज़ार का पूँजीकरण, म्यूचुअल फंड तथा डिमैट खातों की संख्या और विदेशी निवेशकों की भागीदारी बहुत बढ़ी है। इस विस्तार के साथ विश्वसनीय बाज़ार-आँकड़ों और विश्लेषण की माँग भी बढ़ी है।
- भारतीय सरकारी बॉण्ड 2024-25 में वैश्विक सूचकांकों में शामिल हुए। JP Morgan के GBI-EM सूचकांक में समावेशन जून 2024 से चरणबद्ध ढंग से शुरू हुआ और ब्लूमबर्ग के उभरते बाज़ार स्थानीय मुद्रा सरकारी बॉण्ड सूचकांक में जनवरी 2025 से। ये बॉण्ड RBI द्वारा 2020 में शुरू की गई पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की संभावना बढ़ी।
- भारत ने GIFT सिटी में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के माध्यम से वैश्विक वित्तीय सेवाओं को आकर्षित करने की व्यवस्था बनाई है। साथ ही सेवा निर्यात और वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के विस्तार से भारत की वैश्विक सेवा-अर्थव्यवस्था में भूमिका बढ़ी है।
ब्लूमबर्ग और वैश्विक वित्तीय सूचना-तंत्र क्या है?
- वित्तीय सूचना सेवाएँ निवेशकों, बैंकों, नियामकों और नीति-निर्माताओं को मूल्य, प्रतिफल, मुद्रा-दर, कंपनी-आँकड़े और समाचार उपलब्ध कराती हैं। ब्लूमबर्ग टर्मिनल इस क्षेत्र का प्रमुख वैश्विक मंच है। इसकी उपलब्धता और बाज़ार-आँकड़ों की पारदर्शिता सीधे पूँजी के प्रवाह को प्रभावित करती है।
- बेंचमार्क सूचकांक वे मानक हैं जिनके आधार पर वैश्विक निधि प्रबंधक अपने निवेश का वितरण तय करते हैं। किसी देश के बॉण्ड या शेयर सूचकांक में शामिल होने पर उस देश में निष्क्रिय (पैसिव) विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है। भारत के लिए यह कम लागत पर पूँजी जुटाने का अवसर है।
- विदेशी निवेश का नियमन: भारत में समाचार और समसामयिक विषयों की सामग्री पर FDI की सीमा तय है। प्रिंट मीडिया और डिजिटल समाचार माध्यम में यह 26 प्रतिशत है (सरकारी अनुमोदन मार्ग से), जबकि टेलीविज़न समाचार चैनलों में 49 प्रतिशत। इसलिए ब्लूमबर्ग जैसी कंपनी के समाचार-संबंधी विस्तार पर ये सीमाएँ लागू होती हैं। इसके विपरीत, विशुद्ध वित्तीय आँकड़ा और विश्लेषण सेवाओं पर ऐसी समाचार-संबंधी सीमाएँ नहीं लगतीं।
- FDI की नीति: भारत में FDI स्वचालित मार्ग और सरकारी अनुमोदन मार्ग से आता है। नीति-निर्धारण का दायित्व उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) का है, जबकि विदेशी मुद्रा लेन-देन का नियमन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के अंतर्गत होता है।
- बाज़ार-नियमन: प्रतिभूति बाज़ार SEBI द्वारा, बॉण्ड और मुद्रा बाज़ार RBI द्वारा, और GIFT सिटी की वित्तीय गतिविधियाँ IFSCA द्वारा नियमित की जाती हैं। इन नियामकों का कार्य निवेशक-संरक्षण और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।
- डेटा-शासन: वित्तीय आँकड़ों और डिजिटल सेवाओं में व्यक्तिगत आँकड़ों का संग्रह होता है। इस पर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 लागू होता है, जो आँकड़ों के प्रसंस्करण के लिए सहमति और सुरक्षा की व्यवस्था करता है।
- लाभ: बेहतर बाज़ार-पारदर्शिता, उच्च कौशल वाले रोज़गार, सेवा निर्यात और वैश्विक निवेशकों से संवाद। चुनौतियाँ: विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह की अस्थिरता, डेटा-संप्रभुता, मीडिया में विदेशी स्वामित्व की संवेदनशीलता और घरेलू सूचना-प्रदाताओं के लिए प्रतिस्पर्धा।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| घटना का स्वरूप | प्रधानमंत्री ने X पर ब्लूमबर्ग की भारत में विस्तार-योजनाओं का स्वागत किया। यह नीतिगत घोषणा नहीं है। यह सरकार की ओर से विदेशी वित्तीय सूचना कंपनी को दिया गया खुला संकेत है। |
| भारत में 30 वर्ष | ब्लूमबर्ग ने भारत में 30 वर्ष पूरे किए हैं। यह उदारीकरण के बाद खुले बाज़ार में विदेशी सूचना-सेवा प्रदाताओं की दीर्घकालिक उपस्थिति का उदाहरण है। |
| विस्तार का क्षेत्र | विज्ञप्ति के अनुसार योजना अर्थव्यवस्था, बाज़ारों और लोगों से जुड़ाव गहरा करने की है। इसका अर्थ वित्तीय आँकड़ों, विश्लेषण और समाचार सेवाओं का विस्तार हो सकता है। विस्तार की सटीक रूपरेखा विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। |
| निवेश-अनुकूल संदेश | सरकार ने ‘विकास गाथा से अपार अवसर’ का संदेश दिया। यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी संस्थागत भागीदारी को आकर्षित करने की कूटनीति का हिस्सा है। |
| वित्तीय सूचना का महत्त्व | निवेशकों के निर्णय विश्वसनीय आँकड़ों और बाज़ार-समाचारों पर टिके होते हैं। इसलिए ऐसी वैश्विक सेवाओं की मौजूदगी भारत की बाज़ार-पारदर्शिता और वैश्विक दृश्यता को प्रभावित करती है। |
| विनियमन का पक्ष | विदेशी सूचना कंपनियों को भारत के विधि-ढाँचे के भीतर काम करना होता है। इसमें FDI नीति, आँकड़ा-संरक्षण, प्रतिभूति बाज़ार के नियम और मीडिया संबंधी प्रावधान आते हैं। |
महत्व
आर्थिक आयाम
- वैश्विक वित्तीय सूचना कंपनियों की उपस्थिति भारतीय पूँजी बाज़ार में विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ाती है।
- बेहतर आँकड़े और विश्लेषण से मूल्य-निर्धारण अधिक कुशल होता है और सूचना-विषमता घटती है।
- विस्तार से वित्तीय विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और पत्रकारिता में उच्च-कौशल रोज़गार बन सकते हैं।
- यह सेवा-क्षेत्र के निर्यात और वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) की प्रवृत्ति से भी जुड़ता है।
सामरिक एवं कूटनीतिक आयाम
- निजी विदेशी संस्थाओं के साथ उच्च-स्तरीय संवाद भारत की निवेश-गंतव्य के रूप में छवि को मज़बूत करता है।
- वैश्विक वित्तीय मंचों पर भारत की आर्थिक संवृद्धि की चर्चा से उसकी ‘सॉफ़्ट पावर’ और आर्थिक कूटनीति को बल मिलता है।
- वैश्विक सूचना-नेटवर्क में भारतीय आँकड़ों की उपस्थिति सूचकांकों और रेटिंग-धारणा को प्रभावित करती है।
वित्तीय बाज़ार एवं संस्थागत आयाम
- GIFT सिटी स्थित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) जैसे केंद्रों को वैश्विक सूचना और विश्लेषण सेवाओं से जुड़ाव का लाभ मिल सकता है।
- भारतीय बाज़ार-आँकड़ों की गुणवत्ता और मानकीकरण में सुधार की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
- खुदरा और संस्थागत निवेशकों में वित्तीय साक्षरता तथा बाज़ार-जागरूकता बढ़ने की संभावना रहती है।
सूचना एवं मीडिया आयाम
- विविध स्रोतों से आर्थिक समाचार और विश्लेषण उपलब्ध होने से सूचना का बहुलवाद बढ़ता है।
- घरेलू वित्तीय पत्रकारिता को गुणवत्ता-मानकों की प्रतिस्पर्धा और सहयोग के अवसर मिलते हैं।
चुनौतियाँ
1. आँकड़ा-संप्रभुता और गोपनीयता
- वित्तीय सेवाओं में उपयोगकर्ताओं और बाज़ार संबंधी बड़े पैमाने के आँकड़े संसाधित होते हैं।
- डिजिटल व्यक्तिगत आँकड़ा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुपालन और सीमा-पार आँकड़ा अंतरण के नियम चुनौती हैं।
- संवेदनशील आर्थिक आँकड़ों का नियंत्रण विदेशी प्लेटफ़ॉर्मों के हाथ में रहने की आशंका बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा; GS-2: शासन
2. विदेशी स्वामित्व और मीडिया विनियमन
- समाचार और सामयिक विषयों वाले डिजिटल मीडिया तथा प्रिंट में FDI पर सीमा और सरकारी अनुमोदन की शर्तें हैं।
- वित्तीय आँकड़े देने वाली सेवा और समाचार देने वाली सेवा में अंतर करना विनियामकों के लिए कठिन होता है।
- समाचार सामग्री में संपादकीय स्वतंत्रता और विदेशी स्वामित्व के बीच संतुलन आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: विनियामक ढाँचा; GS-3: FDI नीति
3. घरेलू सूचना-उद्योग से प्रतिस्पर्धा
- वैश्विक कंपनियों के पास पूँजी, प्रौद्योगिकी और ब्रांड का बड़ा लाभ होता है।
- घरेलू आँकड़ा-प्रदाता और वित्तीय मीडिया संस्थान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।
- बाज़ार-आँकड़ों के लिए महँगे सदस्यता-शुल्क छोटे निवेशकों और संस्थानों की पहुँच सीमित करते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: समावेशी संवृद्धि, प्रतिस्पर्धा नीति
4. बाज़ार की अस्थिरता और विदेशी पूँजी पर निर्भरता
- अनुकूल वैश्विक धारणा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को बढ़ाती है, जो अचानक बाहर भी जा सकता है।
- बाहरी धारणा पर अत्यधिक निर्भरता से रुपये और शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है।
- केवल सकारात्मक प्रचार ठोस निवेश में परिवर्तित हो, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था, पूँजी बाज़ार, भुगतान संतुलन
5. विनियामक स्पष्टता और अनुपालन का बोझ
- सूचना सेवाओं पर कई प्राधिकरणों का क्षेत्राधिकार होता है, जैसे SEBI, RBI, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा आँकड़ा संरक्षण प्राधिकरण।
- नियमों का अतिव्याप्ति या अस्पष्टता निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है।
- निष्पक्ष, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नीति-प्रक्रिया का अभाव निवेश-निर्णयों को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: नियामक संस्थाएँ; GS-3: कारोबार सुगमता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आँकड़ा-संरक्षण | सीमा-पार आँकड़ा अंतरण और उपयोगकर्ता-गोपनीयता के नियमों का अनुपालन |
| FDI सीमा | समाचार-प्रकृति की सेवाओं में विदेशी स्वामित्व की सीमा और अनुमोदन-प्रक्रिया |
| प्रतिस्पर्धा | घरेलू सूचना-प्रदाताओं पर वैश्विक कंपनियों के दबाव का जोखिम |
| पहुँच एवं लागत | उच्च सदस्यता-शुल्क के कारण छोटे निवेशकों की सीमित पहुँच |
| पूँजी-प्रवाह | FPI में अचानक उलटाव से वित्तीय अस्थिरता |
| विनियामक समन्वय | अनेक नियामकों के बीच भूमिकाओं का अतिव्याप्ति और अस्पष्टता |
आगे की राह
- FDI नीति के अंतर्गत वित्तीय आँकड़ा-सेवाओं और समाचार-सेवाओं का स्पष्ट वर्गीकरण किया जाए, ताकि निवेशकों को पूर्वानुमेयता मिले।
- डिजिटल व्यक्तिगत आँकड़ा संरक्षण अधिनियम, 2023 के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और सीमा-पार आँकड़ा अंतरण के मानक स्पष्ट किए जाएँ।
- SEBI, RBI और अन्य नियामकों के बीच समन्वय के लिए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
- घरेलू आँकड़ा-प्रदाताओं और वित्तीय मीडिया की क्षमता निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी और कौशल में निवेश को प्रोत्साहन दिया जाए।
- सार्वजनिक बाज़ार-आँकड़ों की उपलब्धता बढ़ाई जाए, ताकि छोटे निवेशकों को सस्ती और विश्वसनीय सूचना मिल सके।
- GIFT सिटी जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों को वित्तीय सूचना और विश्लेषण सेवाओं के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
- निवेश-संवर्धन के संदेशों को ठोस निवेश-प्रतिबद्धताओं और रोज़गार-परिणामों से जोड़कर उनकी निगरानी की जाए।
- संपादकीय स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मानकों को विदेशी तथा घरेलू, दोनों मीडिया संस्थानों पर समान रूप से लागू किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) · समेकित FDI नीति · वित्तीय सूचना एवं डेटा सेवाएँ · पूँजी बाज़ार की गहराई · GIFT सिटी और IFSCA · अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र · सेवा क्षेत्र का निर्यात · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण · डेटा संप्रभुता · मीडिया में विदेशी स्वामित्व की सीमा · अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(2) · निवेशक विश्वास और बाज़ार पारदर्शिता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(क) – वाक्-अभिव्यक्ति और सूचना की स्वतंत्रता
- अनुच्छेद 19(2) – अभिव्यक्ति पर युक्तियुक्त निर्बंधन
- अनुच्छेद 246, संघ सूची प्रविष्टि 41 – विदेशी व्यापार-वाणिज्य पर संसद
- अनुच्छेद 246, संघ सूची प्रविष्टि 48 – स्टॉक एक्सचेंज और वायदा बाज़ार
अवधारणा प्रवाह
भारत की आर्थिक संवृद्धि और खुले बाज़ार से वैश्विक निवेशकों की रुचि बढ़ती है → निवेशकों को विश्वसनीय आँकड़ों, विश्लेषण और समाचार की माँग होती है → वैश्विक वित्तीय सूचना कंपनियाँ (जैसे ब्लूमबर्ग) भारत में उपस्थिति का विस्तार करती हैं → सरकार सार्वजनिक रूप से स्वागत करके निवेश-अनुकूल संदेश देती है → FDI नीति, आँकड़ा-संरक्षण और बाज़ार-नियमों के अनुपालन के भीतर विस्तार होता है → बेहतर सूचना से बाज़ार-पारदर्शिता, रोज़गार और विदेशी भागीदारी बढ़ती है → आँकड़ा-संप्रभुता, प्रतिस्पर्धा और पूँजी-प्रवाह की अस्थिरता के जोखिमों के प्रबंधन की आवश्यकता उठती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समेकित FDI नीति का निर्माण वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) करता है।
2. FDI से जुड़े विदेशी मुद्रा लेन-देन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के ढाँचे के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं।
3. डिजिटल मीडिया के समाचार एवं सामयिक विषय क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी तीन
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: FDI नीति DPIIT बनाता है। कथन 2 सही है: FDI लेन-देन FEMA, 1999 और उसके अंतर्गत बने नियमों से शासित होते हैं। कथन 3 गलत है: डिजिटल मीडिया के समाचार एवं सामयिक विषय क्षेत्र में FDI की सीमा 26 प्रतिशत है और यह सरकारी अनुमोदन मार्ग से है।
Q2. अभिकथन (A): GIFT सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में वित्तीय सेवाओं का विनियमन एक एकीकृत प्राधिकरण द्वारा किया जाता है।
कारण (R): अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) की स्थापना IFSCA अधिनियम, 2019 के अंतर्गत की गई है।
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, परंतु R गलत है
- A गलत है, परंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — IFSCA की स्थापना IFSCA अधिनियम, 2019 से हुई और इसका मुख्यालय गांधीनगर के GIFT सिटी में है। यह IFSC में बैंकिंग, पूँजी बाज़ार, बीमा आदि के लिए पहले अलग-अलग रहे नियामकों की जगह एकीकृत नियामक है। अतः R ही A का आधार है।
Q3. संस्थाओं (स्तंभ I) का उनके कार्य (स्तंभ II) से मिलान कीजिए:
स्तंभ I: (a) DPIIT (b) SEBI (c) IFSCA (d) RBI
स्तंभ II: 1. समेकित FDI नीति का निर्माण 2. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का विनियमन 3. IFSC में वित्तीय सेवाओं का एकीकृत नियमन 4. विदेशी मुद्रा लेन-देन से जुड़े FEMA के अंतर्गत नियम व रिपोर्टिंग ढाँचा
सही मिलान चुनिए:
- a-2, b-1, c-3, d-4
- a-1, b-3, c-2, d-4
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-1, b-2, c-4, d-3
उत्तर: a-1, b-2, c-3, d-4 — DPIIT FDI नीति बनाता है; SEBI क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को विनियमित करता है; IFSCA, IFSC का एकीकृत नियामक है; RBI विदेशी मुद्रा लेन-देन के FEMA-आधारित नियम व रिपोर्टिंग ढाँचे का संचालन करता है। इसलिए a-1, b-2, c-3, d-4 सही है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वैश्विक वित्तीय सूचना एवं मीडिया कंपनियों का भारत में विस्तार देश की पूँजी बाज़ार-व्यवस्था के लिए अवसर भी है और नियामकीय चुनौती भी। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही बताइए कि भारत का वर्तमान विनियामक ढाँचा खुलेपन और सूचना-संप्रभुता के बीच संतुलन बनाने में कितना सफल रहा है। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: Bloomberg के भारत में 30 वर्ष पूरे होने और विस्तार की योजनाओं (अक्टूबर 2026) का संदर्भ दें। वित्तीय डेटा, विश्लेषण और समाचार सेवाओं की भूमिका बताइए। अवसर: (1) बाज़ार पारदर्शिता, मूल्य-निर्धारण और निवेशक विश्वास में वृद्धि; (2) भारतीय पूँजी बाज़ार का वैश्विक सूचकांकों और निवेशकों से जुड़ाव; (3) GIFT सिटी और IFSCA के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की महत्त्वाकांक्षा; (4) सेवा क्षेत्र में रोज़गार और सेवा निर्यात। चुनौतियाँ: (1) डेटा-संप्रभुता और सीमा-पार डेटा प्रवाह; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000; (2) बाज़ार-संवेदनशील सूचना, अफ़वाह और बाज़ार-हेरफेर का जोखिम, जिस पर SEBI की निगरानी; (3) समाचार माध्यमों में विदेशी स्वामित्व की सीमा, जैसे डिजिटल मीडिया के समाचार एवं सामयिक विषय क्षेत्र में 26 प्रतिशत FDI की सीमा (सरकारी मार्ग, 2019) और संपादकीय स्वतंत्रता का प्रश्न; (5) अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत वाक्-स्वातंत्र्य और अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत युक्तियुक्त निर्बंधन का संतुलन। मूल्यांकन: समेकित FDI नीति (DPIIT), FEMA, SEBI और IFSCA का बहु-नियामक ढाँचा खुलेपन का आधार देता है, पर समाचार एवं गैर-समाचार सेवाओं के बीच भेद, डेटा-स्थानीयकरण और नियामकीय समन्वय में स्पष्टता की आवश्यकता है। निष्कर्ष: पारदर्शी, जोखिम-आधारित और प्रौद्योगिकी-तटस्थ विनियमन अपनाया जाए, जिससे निवेशक विश्वास के साथ सूचना-संप्रभुता भी सुरक्षित रहे।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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