भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: 12 वर्षों में 7 गुना वृद्धि, निर्यात 11 गुना बढ़ा

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: 12 वर्षों में 7 गुना वृद्धि, निर्यात 11 गुना बढ़ा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — अवसंरचना
  • Prelims: उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाओं की भूमिका, भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पुनरुत्थान: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने, निर्यात बढ़ाने और रोजगार सृजित करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने हाल ही में बताया है कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ईकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं। इन योजनाओं के परिणामस्वरूप, पिछले 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में सात गुना और निर्यात में ग्यारह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे घरेलू उत्पादन, निर्यात और मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिला है। यह भारत को एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक संपूर्ण ईकोसिस्टम विकसित करने हेतु कई नीतिगत पहल की हैं।
  • रणनीति के तहत, तैयार उत्पादों के निर्माण से शुरुआत की गई, जिसके बाद सब-असेंबली, पुर्जे और अंततः मशीनरी व औजारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को समर्थन देने के लिए आवश्यक अवसंरचना (Infrastructure) के निर्माण पर भी जोर दिया है।
  • इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
  • इसी अवधि में, इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात लगभग 38 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
  • मोबाइल फोन का उत्पादन 18 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और मोबाइल फोन का निर्यात 15 सौ करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • यह योजना विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर कंपनियों को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनाना और भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (LSEM) के लिए PLI योजना 2020 में शुरू की गई थी, विशेष रूप से मोबाइल फोन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए।
  • इस योजना के तहत, पात्र कंपनियों को भारत में निर्मित वस्तुओं की वृद्धिशील बिक्री पर 4% से 6% तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • PLI-LSEM योजना के तहत मार्च 2026 तक 20,587 करोड़ रुपये का निवेश, 11,61,581 करोड़ रुपये का उत्पादन और 6,43,323 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया है, जो निर्धारित लक्ष्यों से काफी अधिक है।
  • अन्य प्रमुख पहलों में आईटी हार्डवेयर के लिए PLI योजना 2.0, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और इलेक्ट्रॉनिक घटकों व अर्धचालकों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना (SPECS) शामिल हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में वृद्धि पिछले 12 वर्षों में 7 गुना वृद्धि, 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक
इलेक्ट्रॉनिक निर्यात में वृद्धि पिछले 12 वर्षों में 11 गुना वृद्धि, 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक
मोबाइल फोन उत्पादन में वृद्धि पिछले 12 वर्षों में 33 गुना वृद्धि, 6.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक
मोबाइल फोन निर्यात में वृद्धि पिछले 12 वर्षों में 165 गुना वृद्धि, 2.59 लाख करोड़ रुपये से अधिक
रोजगार सृजन इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगभग 25 लाख नौकरियां, मोबाइल विनिर्माण में 12 लाख
घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन भारत में उपयोग होने वाले 99.2% मोबाइल फोन का निर्माण देश में ही

महत्व

आर्थिक महत्व

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था को गति मिली है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • निर्यात में भारी वृद्धि से व्यापार घाटा कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिली है, जिससे भारत एक शुद्ध आयातक से शुद्ध निर्यातक बन गया है।
  • उच्च मूल्यवर्धित विनिर्माण को बढ़ावा मिलने से देश में तकनीकी कौशल और नवाचार में वृद्धि हुई है, जो दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक महत्व

  • घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच देश की आर्थिक संप्रभुता मजबूत हुई है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मामले में।

सामाजिक महत्व

  • इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है, जिसमें लगभग 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जिससे आय स्तर में सुधार और गरीबी उन्मूलन में मदद मिली है।
  • उच्च परिशुद्धता विनिर्माण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 70 प्रतिशत है, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

तकनीकी महत्व

  • सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण जैसे उन्नत क्षेत्रों में निवेश और प्रोत्साहन से भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिला है।
  • घरेलू विनिर्माण से नवीनतम तकनीकों तक पहुंच और उनके अनुकूलन की क्षमता बढ़ी है, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा है।

चुनौतियाँ

1. घटक विनिर्माण में आत्मनिर्भरता का अभाव

  • यद्यपि तैयार उत्पादों का उत्पादन बढ़ा है, कई महत्वपूर्ण घटक अभी भी आयात किए जाते हैं, जिससे मूल्य श्रृंखला में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो पाई है।
  • उच्च मूल्य वाले घटकों जैसे सेमीकंडक्टर चिप्स, डिस्प्ले पैनल और उन्नत बैटरी के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

2. अनुसंधान एवं विकास में निवेश की कमी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए पर्याप्त अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) निवेश की आवश्यकता है, जिसमें अभी भी कमी है।
  • घरेलू कंपनियों द्वारा पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों के सृजन में धीमी प्रगति।

3. कुशल कार्यबल की कमी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, विशेषकर उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में, कुशल और प्रशिक्षित कार्यबल की कमी एक चुनौती है।
  • उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अभाव।

4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और व्यापार बाधाएं

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीन और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो बड़े पैमाने पर और कम लागत पर उत्पादन करते हैं।
  • कुछ देशों द्वारा लगाए गए गैर-टैरिफ बाधाएं और व्यापार नीतियां भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकती हैं।

5. पर्याप्त अवसंरचना का अभाव

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए आवश्यक गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और परीक्षण सुविधाओं जैसी अवसंरचना में अभी भी सुधार की गुंजाइश है।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) और औद्योगिक क्लस्टरों में विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास अभी भी प्रगति पर है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
घटक आयात पर निर्भरता मूल्य श्रृंखला में पूर्ण आत्मनिर्भरता का अभाव, विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह
अनुसंधान एवं विकास में कम निवेश नवाचार की धीमी गति, वैश्विक तकनीकी दौड़ में पिछड़ने का जोखिम
कुशल कार्यबल की कमी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव, उद्योग की मांग पूरी करने में अक्षमता
वैश्विक प्रतिस्पर्धा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ाने में कठिनाई, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता का दबाव
अवसंरचनात्मक बाधाएं उच्च उत्पादन लागत, लॉजिस्टिक्स में अक्षमता, निवेश आकर्षित करने में चुनौती

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
  • आईटी हार्डवेयर के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना 2.0
  • सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम
  • संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना
  • इलेक्ट्रॉनिक घटकों और अर्धचालकों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना (SPECS)
  • भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए संशोधित कार्यक्रम

आगे की राह

  • घटक विनिर्माण, विशेषकर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले पैनल के लिए, लक्षित प्रोत्साहन और निवेश को बढ़ावा देना।
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ाना तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना।
  • विश्व स्तरीय अवसंरचना, जैसे लॉजिस्टिक्स, बिजली आपूर्ति और परीक्षण सुविधाओं का विकास करना।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘सार्वजनिक खरीद (भारत में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता) आदेश’ का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और व्यापार समझौतों का लाभ उठाना।
  • पर्यावरण अनुकूल और सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 19(1)(g)’: ‘व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता’}
  • {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
  • {‘अनुच्छेद 39(b)’: ‘संसाधनों का समान वितरण’}
  • {‘अनुच्छेद 39(c)’: ‘धन के संकेंद्रण को रोकना’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार की नीतिगत पहल (जैसे PLI योजनाएं)  →  घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  उत्पादन और निर्यात में वृद्धि  →  मूल्यवर्धन और रोजगार सृजन  →  आत्मनिर्भरता और वैश्विक विनिर्माण केंद्र

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना केवल बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए शुरू की गई थी।
2. इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
3. PLI योजना के तहत, सरकार कंपनियों को उनके वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि PLI योजना कई क्षेत्रों में लागू की गई है, न कि केवल बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि PLI योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और कंपनियों को उनके वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन देना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ईकोसिस्टम को मजबूत करने से संबंधित हैं?
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
2. सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम
3. संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना
4. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: केवल 2, 3 और 4 — राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का संबंध ऊर्जा क्षेत्र से है, न कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से। सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना और इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) सभी भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ईकोसिस्टम को मजबूत करने से संबंधित हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के विकास में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसकी सफलता और चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और पिछले दशक में इसकी वृद्धि का संक्षिप्त उल्लेख।
PLI योजनाओं की भूमिका: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए PLI योजना, आईटी हार्डवेयर के लिए PLI योजना 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) जैसी प्रमुख PLI योजनाओं का उल्लेख। इन योजनाओं के माध्यम से निवेश, उत्पादन, निर्यात और मूल्यवर्धन में हुई वृद्धि के आंकड़े (जैसे 13 लाख करोड़ से अधिक उत्पादन, 4 लाख करोड़ से अधिक निर्यात) प्रस्तुत करें। मोबाइल फोन विनिर्माण में भारत की स्थिति (दूसरा सबसे बड़ा निर्माता, शुद्ध निर्यातक) का उल्लेख।
सफलताएं: घरेलू उत्पादन में वृद्धि, आयात निर्भरता में कमी, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि (स्मार्टफोन का शीर्ष निर्यातित वस्तु बनना), रोजगार सृजन (लगभग 25 लाख नौकरियां), उच्च परिशुद्धता विनिर्माण में महिला कार्यबल की भागीदारी, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत का उभरना। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति।
चुनौतियाँ: अभी भी कुछ क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता (जैसे सेमीकंडक्टर, उन्नत घटक), अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश की कमी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का जोखिम, कुशल कार्यबल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे की कमी और नीतिगत स्थिरता की आवश्यकता।
निष्कर्ष: PLI योजनाओं की सकारात्मक भूमिका को स्वीकार करते हुए, आगे की चुनौतियों का समाधान करने और भारत को एक पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शक्ति बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर सुझाव।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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