15 Sep मिशन LiFE: एकल-उपयोग प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध की पुकार, जानिए UPSC दृष्टिकोण
✎ मिशन LiFE व्यक्तियों और समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने और एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने के लिए प्रेरित करने वाली एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: मिशन LiFE, एकल-उपयोग प्लास्टिक, प्लास्टिक प्रदूषण, सतत जीवन शैली, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, अपशिष्ट प्रबंधन
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या और उसके निवारण के उपाय
त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन LiFE व्यक्तियों और समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने और एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने के लिए प्रेरित करने वाली एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, पुरी के समुद्री तट पर मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) के तहत एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastics) के विरुद्ध एक विशाल जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान में पर्यटकों, छात्रों और स्थानीय निवासियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना था।
पृष्ठभूमि
- प्लास्टिक प्रदूषण वैश्विक स्तर पर एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गया है, जो समुद्री जीवन, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक वे प्लास्टिक उत्पाद हैं जिन्हें केवल एक बार उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और फिर फेंक दिया जाता है, जैसे प्लास्टिक की बोतलें, कैरी बैग, स्ट्रॉ और पैकेजिंग सामग्री।
- WWF-इंडिया के ‘टेक फॉर कंजर्वेशन’ कार्यक्रम के निष्कर्षों ने महानदी नदी प्रणाली के माध्यम से ओडिशा तट तक प्लास्टिक कचरे के प्रवाह को उजागर किया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
- जागरूकता अभियानों के माध्यम से ‘मिशन LiFE ग्रीन प्लेज’ लिया जा रहा है, जिसमें एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने, ‘कम करें, पुन: उपयोग करें और रीसायकल करें’ (Reduce, Reuse and Recycle) के सिद्धांतों का पालन करने और अपशिष्ट पृथक्करण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता शामिल है।
मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) क्या है?
- मिशन LiFE एक भारत-नेतृत्व वाली वैश्विक पहल है जो व्यक्तियों और समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ‘उपयोग और निपटान’ (use and dispose) की मानसिकता से हटकर ‘सचेत और जानबूझकर उपयोग’ (mindful and deliberate utilisation) की ओर बढ़ना है।
- यह मिशन ‘P3 मॉडल’ (प्रो-प्लैनेट पीपल) पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि लोग जो ग्रह के अनुकूल जीवन शैली जीते हैं।
- यह मिशन पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित है, जिसमें संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी और ऊर्जा संरक्षण शामिल है।
- यह व्यक्तियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाता है, जिससे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण से निपटने में मदद मिलती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) | पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा देने और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने हेतु एक वैश्विक पहल। |
| एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastics) पर प्रतिबंध | प्लास्टिक कचरे को कम करने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके हानिकारक प्रभावों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम। |
| जागरूकता अभियान | पर्यटकों, छात्रों और स्थानीय निवासियों को स्थायी प्रथाओं को अपनाने और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना। |
| मिशन LiFE ग्रीन प्लेज | व्यक्तियों को एकल-उपयोग प्लास्टिक कम करने, ‘कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों का पालन करने और सामुदायिक स्वच्छता में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध करना। |
| महानदी नदी प्रणाली अध्ययन | नदी प्रणालियों के माध्यम से समुद्री वातावरण में प्लास्टिक कचरे के संचलन और संचय के पैमाने और मार्गों को उजागर करना। |
महत्व
पर्यावरणिक महत्व
- एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करके प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जो समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
- समुद्र तटों और नदी डेल्टाओं सहित तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा में सहायक, जो प्लास्टिक कचरे से गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं।
- स्थायी जीवन शैली को बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान।
- अपशिष्ट पृथक्करण (waste segregation) और जल तथा ऊर्जा संरक्षण जैसी प्रथाओं को प्रोत्साहित करके समग्र पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार।
सामाजिक महत्व
- जागरूकता अभियानों के माध्यम से नागरिकों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्थायी उपभोग की आदतों को बढ़ावा देना।
- समुदाय के सदस्यों, छात्रों और पर्यटकों को प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रेरित करना, जिससे सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा मिलता है।
- स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने के अधिकार को सुनिश्चित करने में मदद, विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए।
वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व
- WWF-इंडिया के ‘टेक फॉर कंजर्वेशन’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी और विश्लेषण के लिए उपग्रह रिमोट सेंसिंग (satellite remote sensing), मशीन लर्निंग (machine learning) और वेब GIS (Web GIS) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग।
- महानदी लिटर डिटेक्शन डैशबोर्ड (Mahanadi Litter Detection Dashboard) जैसे उपकरण अपशिष्ट संचय क्षेत्रों और मौसमी हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे लक्षित अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों को विकसित किया जा सकता है।
चुनौतियाँ
1. एकल-उपयोग प्लास्टिक का व्यापक उपयोग
- दैनिक जीवन में एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पादों की गहरी पैठ, जिससे उनके उपयोग को पूरी तरह से समाप्त करना मुश्किल हो जाता है।
- उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए किफायती और व्यावहारिक विकल्पों की उपलब्धता की कमी एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और संरक्षण
2. व्यवहार परिवर्तन में बाधाएँ
- लोगों की आदतों और उपभोग पैटर्न को बदलना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है।
- जागरूकता के बावजूद, कई बार सुविधा और लागत के कारण स्थायी विकल्पों को अपनाने में झिझक देखी जाती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे और व्यवहार परिवर्तन
3. अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना की कमी
- कई क्षेत्रों में प्रभावी अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण (recycling) सुविधाओं की कमी, जिससे प्लास्टिक कचरा पर्यावरण में लीक होता रहता है।
- विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का अभाव।
यूपीएससी लिंक: शहरीकरण और अपशिष्ट प्रबंधन
4. नदी प्रणालियों के माध्यम से प्रदूषण
- नदियों द्वारा बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरे को समुद्र तक ले जाना, जिससे समुद्री प्रदूषण में वृद्धि होती है।
- नदी बेसिनों में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना और उन्हें नियंत्रित करना एक जटिल कार्य है, जिसमें कई राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: नदी प्रदूषण और जल संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| एकल-उपयोग प्लास्टिक का उत्पादन और खपत | पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे का भारी संचय, विशेषकर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में। |
| पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की उपलब्धता | लागत प्रभावी और आसानी से उपलब्ध विकल्पों की कमी, जिससे एकल-उपयोग प्लास्टिक से दूर हटना मुश्किल होता है। |
| अपशिष्ट पृथक्करण और पुनर्चक्रण | प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की कमी के कारण प्लास्टिक कचरे का अनुचित निपटान और पर्यावरण में रिसाव। |
| नदी प्रणालियों द्वारा प्लास्टिक का परिवहन | नदियों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे का समुद्र तक पहुंचना, जिससे तटीय और समुद्री प्रदूषण में वृद्धि होती है। |
| जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन | पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार व्यवहार को अपनाने के लिए जनता को प्रेरित करने और उनकी आदतों को बदलने में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment)
आगे की राह
- एकल-उपयोग प्लास्टिक के उत्पादन, वितरण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध को चरणबद्ध तरीके से लागू करना और निगरानी करना।
- प्लास्टिक के स्थायी और किफायती विकल्पों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा उनके उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और निपटान के लिए एक मजबूत और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना का निर्माण और उन्नयन करना।
- जन जागरूकता अभियानों को निरंतर जारी रखना और उन्हें स्कूलों, कॉलेजों तथा स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना ताकि व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा मिल सके।
- नदी बेसिनों में प्लास्टिक प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए अंतर-राज्यीय और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों और प्रथाओं को अपनाने वाले व्यवसायों और व्यक्तियों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
- प्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी और विश्लेषण के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपकरणों का उपयोग जारी रखना तथा नीति निर्माण में उनके निष्कर्षों को शामिल करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मिशन LiFE · एकल-उपयोग प्लास्टिक · पर्यावरण संरक्षण · सतत जीवन शैली · प्लास्टिक प्रदूषण · अपशिष्ट प्रबंधन · चक्रीय अर्थव्यवस्था · जलवायु परिवर्तन · समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र · पर्यावरण शिक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
एकल-उपयोग प्लास्टिक का अत्यधिक उत्पादन और खपत → अनुचित निपटान और अपशिष्ट प्रबंधन की कमी → नदियों और अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्लास्टिक का रिसाव → समुद्री और स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्रों का प्रदूषण → मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव → मिशन LiFE जैसे अभियानों के माध्यम से जागरूकता और कार्रवाई
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य व्यक्तियों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
2. यह ‘कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों पर केंद्रित है।
3. यह केवल शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को संबोधित करने पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। मिशन LiFE का उद्देश्य व्यक्तियों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है और यह ‘कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ के सिद्धांतों पर केंद्रित है। कथन 3 गलत है क्योंकि मिशन LiFE का दायरा व्यापक है और यह केवल शहरी क्षेत्रों या प्लास्टिक प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक समग्र सतत जीवन शैली को बढ़ावा देता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastics) के संबंध में सही है?
- एकल-उपयोग प्लास्टिक को आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सकता है और यह पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग केवल एक बार किया जाता है या थोड़े समय के लिए किया जाता है, जिसके बाद उन्हें फेंक दिया जाता है।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक केवल पैकेजिंग उद्योग में उपयोग किए जाते हैं।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक का उत्पादन प्राकृतिक रूप से होता है और इसमें कोई रासायनिक घटक नहीं होते।
उत्तर: एकल-उपयोग प्लास्टिक वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग केवल एक बार किया जाता है या थोड़े समय के लिए किया जाता है, जिसके बाद उन्हें फेंक दिया जाता है। — एकल-उपयोग प्लास्टिक वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग केवल एक बार किया जाता है या थोड़े समय के लिए किया जाता है, जिसके बाद उन्हें फेंक दिया जाता है। ये पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक होते हैं क्योंकि इनका अपघटन बहुत धीमा होता है और ये प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) के प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए और भारत में एकल-उपयोग प्लास्टिक के उन्मूलन में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) का संक्षिप्त परिचय दें, इसके वैश्विक संदर्भ और भारत के नेतृत्व पर प्रकाश डालें।
मिशन LiFE के प्रमुख उद्देश्य: इसके मुख्य लक्ष्यों को सूचीबद्ध करें, जैसे कि:
* पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली को बढ़ावा देना।
* ‘कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करना।
* सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देना।
* व्यक्तिगत व्यवहार परिवर्तनों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण का मुकाबला करना।
एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastics) के उन्मूलन में भूमिका:
* जागरूकता अभियान: मिशन LiFE के तहत चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का उल्लेख करें, जैसे कि पुरी में आयोजित कार्यक्रम, जो एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
* व्यवहार परिवर्तन: यह कैसे व्यक्तियों को प्लास्टिक के विकल्पों को अपनाने और जिम्मेदार अपशिष्ट निपटान के लिए प्रोत्साहित करता है।
* ‘ग्रीन प्लेज’: ‘मिशन LiFE ग्रीन प्लेज’ जैसी पहलों का उल्लेख करें जो एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती हैं।
* तकनीकी हस्तक्षेप: WWF-India के ‘टेक फॉर कंजर्वेशन’ कार्यक्रम जैसे उदाहरण दें, जो प्लास्टिक कचरे की निगरानी और प्रबंधन में मदद करते हैं।
आलोचनात्मक परीक्षण (चुनौतियाँ और सीमाएँ):
* कार्यान्वयन की चुनौतियाँ: बड़े पैमाने पर व्यवहार परिवर्तन लाने में आने वाली कठिनाइयाँ।
* वैकल्पिक सामग्री की उपलब्धता और सामर्थ्य: पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की लागत और पहुंच।
* प्रवर्तन और निगरानी: एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंधों के प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता।
* जन जागरूकता का स्तर: विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता।
* उद्योग की भागीदारी: प्लास्टिक उत्पादकों और उपभोक्ताओं को शामिल करने की चुनौती।
निष्कर्ष: मिशन LiFE की क्षमता को दोहराएं, यह बताते हुए कि यह एक व्यापक और सतत दृष्टिकोण के साथ एकल-उपयोग प्लास्टिक के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए सरकारी प्रयासों, नागरिक समाज और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के बीच समन्वय आवश्यक है।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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