मुंबई जलमग्न होने की ओर? संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, जानें पूरा मामला

Mumbai heading underwater? UN flags city at risk of permanent inundation — diagram

मुंबई जलमग्न होने की ओर? संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, जानें पूरा मामला

Map of India, Bangladesh highlighted on the map of India — मुंबई जलमग्न होने का खतरा
मानचित्र व माइंड-मैप: दक्षिण एशिया के तटीय शहर: बढ़ता जलस्तर और खतरा

✎ समुद्र स्तर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर परिणाम है, जो तटीय शहरों को स्थायी जलमग्नता, मानवीय विस्थापन और अवसंरचनात्मक क्षति के जोखिम में डालता है, जिसके लिए तत्काल अनुकूलन और शमन रणनीतियों की आवश्यकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, मानव भूगोल)  |  GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन (जलवायु परिवर्तन, आपदाएँ और उनका प्रबंधन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (शहरीकरण, अवसंरचना)
  • Prelims: समुद्र स्तर में वृद्धि, तटीय अपरदन, जलवायु परिवर्तन, भूमि अवतलन, खारे पानी का अंतर्ग्रहण, तूफानी लहरें, मानव विस्थापन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM)
  • Essay: जलवायु परिवर्तन: एक वैश्विक चुनौती और भारत पर इसके प्रभाव, शहरीकरण और सतत विकास: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: समुद्र स्तर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर परिणाम है, जो तटीय शहरों को स्थायी जलमग्नता, मानवीय विस्थापन और अवसंरचनात्मक क्षति के जोखिम में डालता है, जिसके लिए तत्काल अनुकूलन और शमन रणनीतियों की आवश्यकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक समुद्र स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण मुंबई सहित दक्षिण एशिया के कई बड़े शहर स्थायी जलमग्नता के गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में 14 मिलियन से अधिक लोगों के विस्थापन की आशंका जताई गई है, जिससे इन तटीय क्षेत्रों में मानवीय और आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। मुंबई के लिए, भूमि अवतलन (land subsidence) और खारे पानी के अंतर्ग्रहण (saltwater intrusion) जैसे कारक इस जोखिम को और बढ़ा रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का एक महत्वपूर्ण परिणाम है, जो मुख्य रूप से ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों के पिघलने तथा समुद्री जल के तापीय विस्तार (thermal expansion) के कारण होता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘समुद्र स्तर में वृद्धि से संबंधित चुनौतियाँ और उनसे निपटने के तरीके’ (Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address) में मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों को विशेष रूप से जोखिम में बताया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर 5.9 मिमी की रिकॉर्ड दर से बढ़ा, जबकि 2014-2023 के बीच औसत वार्षिक वृद्धि 4.7 मिमी थी।
  • मुंबई के लिए, जोखिमों को भूमि अवतलन (जमीन का धँसना) और खारे पानी के अंतर्ग्रहण (मीठे पानी के जलभृतों और तटीय कुओं का दूषित होना) जैसे कारकों से और बढ़ा दिया गया है।
  • बृहन्मुंबई नगर निगम (Brihanmumbai Municipal Corporation – BMC) द्वारा 2021 में जारी मुंबई जलवायु कार्य योजना (Mumbai Climate Action Plan – MCAP) ने अनुमान लगाया था कि 2050 तक मुंबई का 80 प्रतिशत द्वीप शहर जलमग्न हो सकता है।
  • अरब सागर (Arabian Sea) का गर्म होना समुद्र सतह के तापमान में बदलाव ला रहा है और अत्यधिक वर्षा तथा गर्मी की घटनाओं को तीव्र कर रहा है, जिससे मुंबई में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
  • पिछले एक दशक में, मुंबई में चार घंटे या उससे अधिक समय तक चलने वाली 28 अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट जलवायु जोखिम आकलन में मानवीय विस्थापन और सामाजिक प्रभावों को अधिक महत्व देने का आह्वान करती है।

समुद्र स्तर में वृद्धि और इसके प्रभाव

  • समुद्र स्तर में वृद्धि (Sea Level Rise) से तात्पर्य वैश्विक औसत समुद्र स्तर में दीर्घकालिक वृद्धि से है, जो मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण होता है।
  • इसके प्राथमिक कारण आर्कटिक और अंटार्कटिक जैसे क्षेत्रों में ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों का पिघलना, तथा महासागरों के गर्म होने से जल का तापीय विस्तार है।
  • तटीय शहरों पर इसके प्रभावों में स्थायी जलमग्नता, तटीय अपरदन (coastal erosion), खारे पानी का अंतर्ग्रहण (मीठे पानी के स्रोतों का दूषित होना) और तूफानी लहरों (storm surges) से बाढ़ का बढ़ना शामिल है।
  • मानवीय विस्थापन (human displacement) एक गंभीर सामाजिक परिणाम है, क्योंकि लाखों लोग अपने घरों और आजीविका से वंचित हो सकते हैं, जिससे शहरीकरण और अवसंरचना पर दबाव बढ़ सकता है।
  • भारत में, तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone – CRZ) अधिसूचनाएँ तटीय क्षेत्रों में विकास को विनियमित करती हैं ताकि पारिस्थितिक संतुलन और तटीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) जैसी संस्थाओं के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण (disaster risk reduction) और अनुकूलन रणनीतियों (adaptation strategies) पर काम कर रही है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन (carbon emissions) को कम करना, जैसे कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के माध्यम से, दीर्घकालिक रूप से समुद्र स्तर में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • शहरी नियोजन में जलवायु-लचीली अवसंरचना (climate-resilient infrastructure) और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (early warning systems) को शामिल करना तटीय शहरों के लिए आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वैश्विक समुद्री जलस्तर में वृद्धि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक समुद्री जलस्तर में 5.9 मिमी की रिकॉर्ड वृद्धि हुई, जो 2014-2023 के औसत 4.7 मिमी से अधिक है। यह तटीय शहरों के लिए गंभीर खतरा है।
मुंबई का अद्वितीय जोखिम मुंबई अरब सागर से तीन तरफ से घिरा हुआ है, जिससे यह समुद्री जलस्तर वृद्धि, भूमि अवतलन (land subsidence) और खारे पानी के अंतर्ग्रहण (saltwater intrusion) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। यह मीठे पानी के स्रोतों को दूषित कर सकता है।
मानव विस्थापन का खतरा रिपोर्ट में मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे दक्षिण एशियाई मेगासिटीज़ में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के स्थायी जलमग्नता के कारण विस्थापित होने का तत्काल जोखिम बताया गया है।
तूफानी लहरें और बुनियादी ढांचा तूफानी लहरें (storm surges) स्वच्छता, आवास और परिवहन बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं, जिससे शहरी व्यवस्था चरमरा सकती है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अरब सागर का गर्म होना समुद्री सतह के तापमान में बदलाव ला रहा है, जिससे अत्यधिक वर्षा और गर्मी की घटनाएं तेज हो रही हैं। मुंबई में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष और गंभीर परिणामों को उजागर करती है, विशेष रूप से तटीय पारिस्थितिक तंत्रों और शहरी क्षेत्रों पर इसके प्रभावों को।
  • समुद्री जलस्तर में वृद्धि, भूमि अवतलन और खारे पानी का अंतर्ग्रहण तटीय जैव विविधता और मीठे पानी के संसाधनों के लिए दीर्घकालिक खतरे पैदा करते हैं।

सामाजिक महत्व

  • तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मानव विस्थापन का खतरा सामाजिक स्थिरता, आजीविका और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
  • बुनियादी ढांचे पर दबाव से स्वच्छता, आवास और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

आर्थिक महत्व

  • तटीय शहरों में संपत्ति, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को स्थायी जलमग्नता और तूफानी लहरों से भारी नुकसान हो सकता है, जिससे अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होगा।
  • खारे पानी के अंतर्ग्रहण से कृषि और मत्स्य पालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह रिपोर्ट जलवायु जोखिम आकलन में मानव विस्थापन और सामाजिक प्रभावों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता पर बल देती है, जिससे आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन नीतियों में बदलाव की मांग होती है।
  • तटीय क्षेत्रों के लिए अनुकूलन (adaptation) और शमन (mitigation) रणनीतियों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (Integrated Coastal Zone Management) और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।

चुनौतियाँ

1. समुद्री जलस्तर में वृद्धि

  • वैश्विक समुद्री जलस्तर में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है, जिससे मुंबई जैसे तटीय शहर स्थायी जलमग्नता के जोखिम में हैं।
  • यह तटीय क्षेत्रों में भूमि के नुकसान, खारे पानी के अंतर्ग्रहण और तूफानी लहरों की आवृत्ति में वृद्धि का कारण बनता है।

2. मानव विस्थापन और आजीविका का नुकसान

  • रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से अधिक लोग अपने घरों को खोने के तत्काल जोखिम में हैं, जिससे बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन होगा।
  • विस्थापन से आजीविका, सामाजिक ताना-बाना और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

3. बुनियादी ढांचे पर दबाव

  • समुद्री जलस्तर में वृद्धि और तूफानी लहरें स्वच्छता, आवास और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव डालती हैं।
  • इससे शहरी सेवाओं की निरंतरता और गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता गिरती है।

4. जल संसाधनों का दूषित होना

  • भूमि अवतलन और खारे पानी का अंतर्ग्रहण मीठे पानी के जलभृतों (aquifers) और तटीय कुओं को दूषित कर सकता है।
  • यह पीने के पानी की उपलब्धता को कम करता है और कृषि तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।

5. अत्यधिक मौसमी घटनाओं में वृद्धि

  • अरब सागर के गर्म होने से अत्यधिक वर्षा और गर्मी की घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे तटीय बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
  • मुंबई में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है, जो शहरी बाढ़ को और गंभीर बनाती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक समुद्री जलस्तर वृद्धि रिकॉर्ड गति से बढ़ रहा समुद्री जलस्तर तटीय शहरों के लिए स्थायी जलमग्नता का खतरा पैदा कर रहा है।
मुंबई की भौगोलिक संवेदनशीलता तीन तरफ से समुद्र से घिरा होने और भूमि अवतलन के कारण मुंबई अत्यधिक जोखिम में है।
मानव विस्थापन का जोखिम दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घर खोने का खतरा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां बढ़ेंगी।
बुनियादी ढांचे पर दबाव तूफानी लहरें और बाढ़ स्वच्छता, आवास और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को बाधित कर सकती हैं।
मीठे पानी का दूषित होना खारे पानी के अंतर्ग्रहण से मीठे पानी के स्रोत दूषित हो सकते हैं, जिससे जल सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होगा।
अत्यधिक वर्षा की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे शहरी बाढ़ और गंभीर हो रही है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)

आगे की राह

  • जलवायु-लचीले शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे का विकास करना, जिसमें जल निकासी प्रणालियों का उन्नयन और तटीय सुरक्षा उपायों को मजबूत करना शामिल है।
  • समुद्री जलस्तर वृद्धि और अत्यधिक मौसमी घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन (adaptation) रणनीतियों को प्राथमिकता देना।
  • खारे पानी के अंतर्ग्रहण को रोकने और मीठे पानी के संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रभावी जल प्रबंधन नीतियां लागू करना।
  • जलवायु जोखिम आकलन में मानव विस्थापन और सामाजिक प्रभावों को अधिक महत्व देना, जिससे विस्थापित आबादी के लिए पुनर्वास योजनाएं तैयार की जा सकें।
  • समुद्री जलस्तर वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी को मजबूत करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना और वित्तीय संसाधनों को जुटाना।
  • समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और बहाली पर ध्यान केंद्रित करना, जैसे मैंग्रोव वनों का संरक्षण, जो तटीय क्षेत्रों को तूफानी लहरों से बचाने में मदद करते हैं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

समुद्र स्तर में वृद्धि · तटीय शहर · जलवायु परिवर्तन · मानव विस्थापन · शहरी नियोजन · आपदा प्रबंधन · लघुगणकीय अवतलन · खारे पानी का अंतर्ग्रहण · तूफानी लहरें · जलवायु अनुकूलन · शमन रणनीतियाँ · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार की सुरक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियां, प्राधिकरण और उत्तरदायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान वृद्धि  →  ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियरों का पिघलना  →  समुद्री जलस्तर में रिकॉर्ड वृद्धि  →  तटीय शहरों (जैसे मुंबई) में जलमग्नता का खतरा  →  मानव विस्थापन और बुनियादी ढांचे पर दबाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक समुद्र स्तर 2024 में रिकॉर्ड 5.9 मिमी की दर से बढ़ा।
2. मुंबई का जलवायु कार्य योजना (MCAP) 2021 में जारी किया गया था।
3. पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर की अस्थिरता से समुद्र स्तर में 2100 तक दो मीटर तक की वृद्धि हो सकती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक समुद्र स्तर 2024 में 5.9 मिमी की रिकॉर्ड दर से बढ़ा। कथन 2 सही है। मुंबई का जलवायु कार्य योजना (MCAP) बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा 2021 में जारी किया गया था। कथन 3 सही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे खराब स्थिति में, पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर की अस्थिरता के कारण समुद्र स्तर में दो मीटर तक की वृद्धि हो सकती है।

Q2. अभिकथन (A): मुंबई जैसे तटीय शहरों में समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण बड़े पैमाने पर मानव विस्थापन का खतरा है।
कारण (R): भूमि अवतलन और खारे पानी का अंतर्ग्रहण समुद्र स्तर में वृद्धि के प्रभावों को और बढ़ा देता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट मुंबई जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर मानव विस्थापन की चेतावनी देती है। कारण (R) भी सही है क्योंकि भूमि अवतलन (land subsidence) और खारे पानी का अंतर्ग्रहण (saltwater intrusion) मुंबई के लिए जोखिमों को बढ़ाते हैं, जिससे समुद्र स्तर में वृद्धि के प्रभाव और गंभीर हो जाते हैं। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि ये कारक विस्थापन के खतरे को बढ़ाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण मुंबई जैसे भारतीय तटीय शहरों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत द्वारा अपनाई जा सकने वाली अनुकूलन और शमन रणनीतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: समुद्र स्तर में वृद्धि की वैश्विक प्रवृत्ति और मुंबई जैसे भारतीय तटीय शहरों पर इसके विशिष्ट प्रभावों का संक्षिप्त परिचय। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट का उल्लेख करें।
2. मुंबई के समक्ष चुनौतियाँ:
* स्थायी जलमग्नता और मानव विस्थापन का खतरा (14 मिलियन से अधिक लोग)।
* भूमि अवतलन (land subsidence) और खारे पानी का अंतर्ग्रहण (saltwater intrusion) से ताजे पानी के स्रोतों का दूषित होना।
* तूफानी लहरों (storm surges) से स्वच्छता, आवास और परिवहन बुनियादी ढांचे पर दबाव।
* जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि और अरब सागर का गर्म होना।
* आर्थिक नुकसान और सामाजिक प्रभाव।
3. अनुकूलन रणनीतियाँ (Adaptation Strategies):
* तटीय बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण (जैसे तटबंध, समुद्री दीवारें)।
* जल निकासी प्रणालियों का उन्नयन।
* खारे पानी के अंतर्ग्रहण को रोकने के उपाय (जैसे मीठे पानी के एक्वीफरों का पुनर्भरण)।
* प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का विकास।
* शहरी नियोजन में जलवायु जोखिमों का समावेश (जैसे मुंबई का जलवायु कार्य योजना – MCAP)।
* आपदा प्रबंधन और पुनर्वास योजनाएँ।
4. शमन रणनीतियाँ (Mitigation Strategies):
* ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे प्रयासों को बढ़ावा देना।
* नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना।
* ऊर्जा दक्षता में सुधार।
* कार्बन सिंक (carbon sinks) को बढ़ाना (जैसे मैंग्रोव वन)।
5. निष्कर्ष: इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक समन्वित, बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हो।

स्रोत: The Indian Express

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: मुंबई शहराच्या जलमग्न होण्याच्या धोक्याबाबत संयुक्त राष्ट्रांनी (UN) दिलेल्या इशाऱ्याचे प्रमुख कारण कोणते आहे?

  1. मुंबईच्या किनारपट्टीवरील भूजल उपसा आणि जमिनीच्या पातळीत होणारी घट
  2. जागतिक तापमानवाढीमुळे समुद्र पातळीत होणारी वाढ आणि तीव्र चक्रीवादळांची वाढती तीव्रता
  3. मुंबईतील अतिक्रमण आणि बांधकामांमुळे नद्यांच्या प्रवाहात होणारा अडथळा
  4. मुंबईच्या किनारपट्टीवरील औद्योगिक प्रदूषणामुळे निर्माण होणारे जमिनीचे क्षरण

उत्तर: जागतिक तापमानवाढीमुळे समुद्र पातळीत होणारी वाढ आणि तीव्र चक्रीवादळांची वाढती तीव्रता — UNच्या अहवालानुसार, मुंबईच्या जलमग्न होण्याच्या मुख्य कारणांमध्ये समुद्र पातळीत होणारी वाढ आणि तीव्र चक्रीवादळांची तीव्रता यांचा समावेश आहे.

Mains: मुंबई शहराच्या जलमग्न होण्याच्या धोक्याच्या पार्श्वभूमीवर, महाराष्ट्र राज्याने या समस्येवर उपाययोजना करण्यासाठी कोणत्या धोरणात्मक आणि प्रशासकीय उपायांची अंमलबजावणी करणे आवश्यक आहे? आपल्या उत्तरात महाराष्ट्र राज्याच्या संदर्भातील विशिष्ट उपायांचा समावेश करा.


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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