रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारत के पास ‘तर्क की शक्ति’ और ‘शक्ति का तर्क’ दोनों

'जरूरत पर देंगे जवाब': राजनाथ बोले- तर्क की शक्ति और शक्ति का तर्क दोनों हमारे पास; सुरक्षा नीति पर क्या कहा? — diagram

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारत के पास ‘तर्क की शक्ति’ और ‘शक्ति का तर्क’ दोनों

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भारत की सुरक्षा नीति

✎ भारत की सुरक्षा नीति कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच एक गतिशील संतुलन पर आधारित है, जो बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय खतरों का सामना करने के लिए 'तर्क की शक्ति' और 'शक्ति का तर्क' दोनों का उपयोग करती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति, सैन्य क्षमता, साइबर सुरक्षा, सॉफ्ट पावर, हार्ड पावर
  • Essay: बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीतियाँ, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीति और सैन्य शक्ति का सह-अस्तित्व

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की सुरक्षा नीति कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच एक गतिशील संतुलन पर आधारित है, जो बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय खतरों का सामना करने के लिए ‘तर्क की शक्ति’ और ‘शक्ति का तर्क’ दोनों का उपयोग करती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भारत की सुरक्षा नीति पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास ‘तर्क की शक्ति’ (power of argument) और ‘शक्ति का तर्क’ (argument of power) दोनों हैं, और देश आवश्यकतानुसार किसी भी भाषा का उपयोग करने में सक्षम है जिसे दूसरा पक्ष समझता है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया, साथ ही बदलते सुरक्षा खतरों पर भी प्रकाश डाला।

पृष्ठभूमि

  • भारत की सुरक्षा नीति ऐतिहासिक रूप से ‘गुटनिरपेक्षता’ और ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व’ के सिद्धांतों पर आधारित रही है।
  • शीत युद्ध के बाद और विशेषकर 21वीं सदी में, भारत ने अपनी सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और सक्रिय कूटनीति को अपनाना शामिल है।
  • आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों ने भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार उन्नत करने के लिए प्रेरित किया है।
  • वर्ष 2016 की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और 2019 की ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ जैसी घटनाओं ने भारत की निर्णायक कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति और क्षमता को प्रदर्शित किया है।
  • आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा में अब केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा ही नहीं, बल्कि साइबर हमले, ड्रोन, दुष्प्रचार और आर्थिक व ऊर्जा सुरक्षा जैसे गैर-पारंपरिक खतरे भी शामिल हो गए हैं।
  • भारत ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रभाव) और ‘हार्ड पावर’ (सैन्य और आर्थिक शक्ति) दोनों के महत्व को स्वीकार करता है, और मानता है कि ये एक-दूसरे के पूरक हैं, विकल्प नहीं।
  • भारत लोकतंत्र और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का प्रबल समर्थक रहा है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता भी रखता है।

भारत की सुरक्षा नीति के प्रमुख आयाम

  • भारत की सुरक्षा नीति कूटनीति और सैन्य शक्ति के बीच एक रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। इसका अर्थ है कि देश शांतिपूर्ण समाधानों को प्राथमिकता देता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सैन्य बल का प्रयोग करने में भी सक्षम है।
  • यह नीति ‘तर्क की शक्ति’ (कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन) और ‘शक्ति का तर्क’ (आवश्यकता पड़ने पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन) दोनों को समाहित करती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा अब केवल भौतिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे आयाम भी शामिल हैं।
  • भारत ‘नो फर्स्ट यूज़’ (No First Use) की परमाणु नीति का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि वह पहले परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेगा, लेकिन किसी भी परमाणु हमले की स्थिति में बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
  • भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र (UN), शंघाई सहयोग संगठन (SCO), ब्रिक्स (BRICS) और क्वाड (QUAD) के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देता है।
  • देश अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है, जिसमें स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों का अधिग्रहण करना शामिल है।
  • भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाता है और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाता है।
  • यह नीति ‘सॉफ्ट पावर’ के महत्व को भी स्वीकार करती है, जिसके तहत भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास साझेदारी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सद्भावना और प्रभाव का निर्माण करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
तर्क की शक्ति और शक्ति का तर्क यह भारत की सुरक्षा नीति के दोहरे दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें कूटनीति और सैन्य क्षमता दोनों का समावेश है।
सॉफ्ट पावर और हार्ड पावर का संतुलन रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सॉफ्ट पावर (कूटनीति) हार्ड पावर (सैन्य क्षमता) की पूरक है, न कि उसका विकल्प।
बदलते सुरक्षा खतरे राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर हमले, ड्रोन, दुष्प्रचार और आर्थिक व ऊर्जा सुरक्षा जैसे आयाम भी शामिल हैं।
निर्णायक कार्रवाई की क्षमता भारत विवादों के समाधान के लिए लोकतंत्र और कूटनीति का समर्थन करता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने में भी सक्षम है।
राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक परिभाषा 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल भौतिक सीमाओं की रक्षा के नजरिए से देखना अपर्याप्त है, इसे ‘पेरिमीटर फॉलसी’ कहा गया।

महत्व

सामरिक महत्व

  • यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहाँ शांति और शक्ति को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाता।
  • यह नीतिगत बयान क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती सामरिक स्थिति और निर्णायक कार्रवाई करने की उसकी इच्छाशक्ति को रेखांकित करता है।
  • यह भारत की रक्षा तैयारियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच समन्वय स्थापित करने के महत्व पर बल देता है, जिससे एक मजबूत और विश्वसनीय सुरक्षा ढाँचा तैयार होता है।

कूटनीतिक महत्व

  • यह भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को प्रदर्शित करता है, जहाँ वह अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता है।
  • यह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को भारत की सुरक्षा नीति की स्पष्टता प्रदान करता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की भूमिका को समझा जा सकता है।
  • यह कूटनीति को सैन्य क्षमता के समर्थन से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देता है, जिससे भारत की बातचीत की स्थिति मजबूत होती है।

आंतरिक सुरक्षा महत्व

  • यह देश के भीतर सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाता है और उन्हें आधुनिक खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने का संदेश देता है।
  • यह साइबर सुरक्षा, ड्रोन हमलों और दुष्प्रचार जैसे नए खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • यह राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल भौतिक सीमाओं से परे देखने की आवश्यकता पर बल देता है, जिसमें आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे पहलू भी शामिल हैं।

चुनौतियाँ

1. बदलते सुरक्षा परिदृश्य

  • साइबर हमले, ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रसार और सूचना युद्ध (दुष्प्रचार) जैसे गैर-पारंपरिक खतरे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौतियाँ पेश करते हैं।
  • इन खतरों की प्रकृति भौगोलिक सीमाओं से परे है, जिससे पारंपरिक रक्षा रणनीतियाँ अपर्याप्त हो जाती हैं।

2. सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता

  • आधुनिक खतरों से निपटने के लिए उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी और उपकरणों की आवश्यकता है, जिसके लिए निरंतर आधुनिकीकरण और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश तथा स्वदेशी क्षमताओं का विकास एक बड़ी चुनौती है।

3. कूटनीति और सैन्य शक्ति का संतुलन

  • राष्ट्रीय हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा के लिए कूटनीतिक समाधानों और सैन्य शक्ति के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
  • अत्यधिक सैन्यीकरण से टकराव बढ़ सकता है, जबकि केवल कूटनीति पर निर्भरता सुरक्षा को कमजोर कर सकती है।

4. आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता और आर्थिक अस्थिरता राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है।
  • इन क्षेत्रों में लचीलापन और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
साइबर हमले महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे, सरकारी प्रणालियों और डेटा की सुरक्षा।
ड्रोन प्रौद्योगिकी सीमा पार घुसपैठ, निगरानी और आतंकवादी हमलों का खतरा।
दुष्प्रचार और सूचना युद्ध सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना, सार्वजनिक राय को प्रभावित करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करना।
भौगोलिक सीमाओं से परे खतरे राष्ट्रीय सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा का विस्तार और नए सुरक्षा आयामों को संबोधित करना।
सैन्य आधुनिकीकरण बदलते खतरों से निपटने के लिए अत्याधुनिक रक्षा क्षमताओं का अधिग्रहण और विकास।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक परिभाषा को अपनाना, जिसमें साइबर, अंतरिक्ष, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे आयाम शामिल हों।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  • कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना ताकि साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
  • साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना और साइबर हमलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय क्षमताओं का विकास करना।
  • ड्रोन और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने के लिए प्रभावी नीतियाँ और तकनीकी समाधान विकसित करना।
  • जन जागरूकता बढ़ाना और दुष्प्रचार तथा सूचना युद्ध का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
  • सैन्य बलों के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना ताकि वे भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय सुरक्षा · कूटनीति · सैन्य क्षमता · सॉफ्ट पावर · हार्ड पावर · साइबर सुरक्षा · भू-राजनीति · सामरिक स्वायत्तता · रक्षा नीति · आतंकवाद

अवधारणा प्रवाह

बदलते सुरक्षा परिदृश्य (साइबर, ड्रोन, दुष्प्रचार)  →  राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक अवधारणा की आवश्यकता  →  कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच संतुलन  →  निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन  →  राष्ट्रीय हितों की प्रभावी रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा अब केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है।
2. साइबर हमले और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े खतरे 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा के नए आयाम हैं।
3. भारत की रक्षा नीति में कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा बढ़ा है और इसमें साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा जैसे गैर-पारंपरिक खतरे शामिल हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि भारत की वर्तमान रक्षा नीति कूटनीति और सैन्य शक्ति दोनों के समन्वय पर आधारित है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?

  1. यह किसी देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है।
  2. यह आर्थिक प्रतिबंधों के माध्यम से दूसरे देशों को प्रभावित करने की क्षमता है।
  3. यह सांस्कृतिक आकर्षण, राजनीतिक मूल्यों और विदेश नीति के माध्यम से दूसरों को आकर्षित करने और प्रभावित करने की क्षमता है।
  4. यह केवल संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में वीटो शक्ति का उपयोग है।

उत्तर: यह सांस्कृतिक आकर्षण, राजनीतिक मूल्यों और विदेश नीति के माध्यम से दूसरों को आकर्षित करने और प्रभावित करने की क्षमता है। — सॉफ्ट पावर एक देश की क्षमता है जो दूसरों को आकर्षित करके और सह-विकल्प के माध्यम से प्रभावित करती है, न कि बल या धन के माध्यम से। इसमें संस्कृति, राजनीतिक मूल्य और विदेश नीतियां शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती प्रकृति पर चर्चा कीजिए। भारत की वर्तमान रक्षा नीति में कूटनीति और सैन्य क्षमता के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया गया है, विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय सुरक्षा की पारंपरिक और आधुनिक अवधारणा का संक्षिप्त परिचय। (21वीं सदी में भौगोलिक सीमाओं से परे खतरों का उल्लेख)।
2. **राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती प्रकृति:**
* **गैर-पारंपरिक खतरे:** साइबर हमले, ड्रोन, दुष्प्रचार, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महामारी।
* **’पेरिमीटर फॉलसी’ (Perimeter Fallacy):** केवल भौतिक सीमाओं की सुरक्षा पर केंद्रित दृष्टिकोण की अपर्याप्तता।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** वैश्विक खतरों से निपटने में बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता।
3. **भारत की रक्षा नीति में संतुलन:**
* **’तर्क की शक्ति’ (Power of Argument) और ‘शक्ति का तर्क’ (Argument of Power):** कूटनीति और सैन्य शक्ति के सह-अस्तित्व पर जोर।
* **सॉफ्ट पावर और हार्ड पावर:** सॉफ्ट पावर को हार्ड पावर का पूरक मानना, विकल्प नहीं।
* **उदाहरण:** सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) और ऑपरेशन सिंदूर जैसे निर्णायक सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख।
* **उद्देश्य:** लोकतंत्र और कूटनीति के माध्यम से विवादों का समाधान, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई की क्षमता बनाए रखना।
* **ऐतिहासिक संदर्भ:** आजादी के बाद की सुरक्षा रणनीति में ‘फॉल्स कंसेंसस इफेक्ट’ से वर्तमान यथार्थवादी दृष्टिकोण की ओर बदलाव।
4. **निष्कर्ष:** एक मजबूत और संतुलित रक्षा नीति का महत्व जो बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और खतरों का सामना करने में सक्षम हो।

स्रोत: amarujala.com


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