‘विशेष अभियान 6.0’: अल्पसंख्यक मंत्रालय की स्वच्छता एवं दक्षता बढ़ाने की मुहिम

'विशेष अभियान 6.0': अल्पसंख्यक मंत्रालय की स्वच्छता एवं दक्षता बढ़ाने की मुहिम

‘विशेष अभियान 6.0’: अल्पसंख्यक मंत्रालय की स्वच्छता एवं दक्षता बढ़ाने की मुहिम

विशेष अभियान 6.0 प्रक्रियाअभियान शुरुआत2 अक्टूबर 2026स्वच्छता अभियानकार्यालयों मेंलंबित मामलों का निपटानसमयबद्धई-अपशिष्ट निपटानपर्यावरण-अनुकूलकार्यालय स्थान उपयोगबेहतरपौधारोपणकार्यक्रम
विशेष अभियान 6.0 प्रक्रिया

✎ विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026), जिसका समन्वय DARPG करता है, स्वच्छता का संस्थागतकरण, लंबित मामलों की कमी, अभिलेख प्रबंधन और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप निपटान पर केंद्रित है; अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इसे…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन: सरकारी कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन  |  GS Paper II — शासन: शिकायत निवारण तंत्र और ई-गवर्नेंस  |  GS Paper III — पर्यावरण: ई-अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण और सतत विकास  |  GS Paper II — कल्याणकारी विषय: अल्पसंख्यकों के लिए संस्थाएँ और तंत्र
  • Prelims: विशेष अभियान 6.0 (2 से 31 अक्टूबर 2026), कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूची, लोक अभिलेख अधिनियम, 1993, ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), स्वच्छ भारत मिशन (2 अक्टूबर 2014), CPGRAMS, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (स्थापना 2006), राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992
  • Essay: स्वच्छ कार्यालय, सक्षम प्रशासन: शासन की गुणवत्ता में कार्यस्थल प्रबंधन की भूमिका, विलंबित निपटारा, जनता के विश्वास में कमी: समयबद्ध प्रशासन की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026), जिसका समन्वय DARPG करता है, स्वच्छता का संस्थागतकरण, लंबित मामलों की कमी, अभिलेख प्रबंधन और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप निपटान पर केंद्रित है; अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इसे अपने कार्यालयों में लागू किया है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक ‘विशेष अभियान 6.0’ चलाया है, जिसकी जानकारी PIB ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति में दी। यह अभियान मंत्रालय और उससे संबद्ध संगठनों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने, लंबित संदर्भों और मामलों की समीक्षा कर उनका समयबद्ध निपटारा करने, अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूचियों के अनुसार अभिलेखों का प्रबंधन करने, ई-अपशिष्ट का पर्यावरण-अनुकूल निपटान करने और खाली हुए कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग करने पर केंद्रित है। अभियान के दौरान पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

पृष्ठभूमि

  • केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में पहली बार सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों को कम करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान प्रतिवर्ष अक्टूबर माह में चलाया जाता है और अब इसका छठा संस्करण (6.0) चल रहा है।
  • अभियान का समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) करता है। विभाग इसके लिए दिशा-निर्देश जारी करता है और प्रगति की निगरानी एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से करता है। सभी मंत्रालय और विभाग अपनी प्रगति इसी पोर्टल पर दर्ज करते हैं।
  • अभियान की अवधि 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से शुरू होती है। यह तिथि स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) की शुरुआत (2 अक्टूबर 2014) से भी जुड़ी है, जो स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का राष्ट्रीय प्रयास है।
  • सरकारी कार्यालयों में फाइलों और अभिलेखों का अनावश्यक भंडारण स्थान की कमी और सूचना तक पहुँचने में कठिनाई पैदा करता है। इसी कारण लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और लोक अभिलेख नियम, 1997 के ढांचे में अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूचियाँ बनाई गई हैं, जो तय करती हैं कि किस श्रेणी का अभिलेख कितने समय तक रखा जाए।
  • भारत में ई-अपशिष्ट का प्रबंधन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बने ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 से नियंत्रित होता है। ये नियम 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हैं और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) पर आधारित हैं।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की स्थापना जनवरी 2006 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से अलग करके की गई थी। यह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कल्याण और विकास कार्यक्रमों का नोडल मंत्रालय है।

विशेष अभियान क्या है?

  • विशेष अभियान (Special Campaign) केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और उनसे संबद्ध, अधीनस्थ तथा स्वायत्त संगठनों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों को कम करने के लिए चलाया जाने वाला वार्षिक अभियान है। इसका समन्वय DARPG करता है।
  • इसके प्रमुख घटक हैं: लंबित मामलों का निपटारा (संसद सदस्यों के संदर्भ, राज्य सरकारों के संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ, लोक शिकायतें और अपील, तथा PMO के संदर्भ), अभिलेखों की समीक्षा और छँटाई, कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान, तथा कार्यालय स्थान का बेहतर प्रबंधन।
  • अभियान में लोक शिकायतों का निवारण भी शामिल है। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) नागरिकों की शिकायतें दर्ज करने और उनकी निगरानी का मुख्य मंच है।
  • अभिलेख प्रबंधन में अभिलेखों की श्रेणी तय की जाती है, अनुसूची के अनुसार उनकी समीक्षा होती है, अनावश्यक अभिलेखों को नियमानुसार हटाया जाता है और स्थायी महत्व के अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाता है। इससे जगह बचती है और सूचना की खोज आसान होती है, जो पारदर्शिता और सूचना का अधिकार (RTI) के अनुपालन में भी सहायक है।
  • ई-अपशिष्ट के निपटान में उपयोगी जीवनकाल पूरा कर चुके कंप्यूटर, प्रिंटर, बैटरी और अन्य विद्युत-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान, श्रेणीवार छँटाई, संग्रह और अधिकृत माध्यमों से निपटान किया जाता है। ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत यह कार्य पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं (Recyclers) के माध्यम से ही होना चाहिए, ताकि सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्वों से प्रदूषण न हो।
  • अभियान में पौधारोपण जैसी गतिविधियाँ हरित कार्यालय की अवधारणा को बल देती हैं और पर्यावरण के प्रति संस्थागत जिम्मेदारी का संदेश देती हैं।
  • इस अभियान का शासन-संबंधी महत्व यह है कि यह कार्यालय-स्तर के सुधारों के माध्यम से दक्षता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा-प्रदान को सुदृढ़ करता है। खाली हुआ स्थान उत्पादक कार्यों के लिए उपलब्ध होता है, जिससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होता है।
  • सीमा यह है कि अभियान-आधारित प्रयास मौसमी हो सकते हैं। इसलिए स्थायी परिणाम के लिए इन्हें e-Office, डिजिटल अभिलेखागार और निरंतर समीक्षा तंत्र से जोड़ना आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
अवधि और स्वरूप: 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला ‘विशेष अभियान 6.0’, जो अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उससे संबद्ध संगठनों में लागू है यह अभियान 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से शुरू होता है, इसलिए इसका संबंध स्वच्छता के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ता है। इसका दायरा केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं है, संबद्ध संगठन भी इसमें शामिल हैं
स्वच्छता का संस्थागतीकरण: कार्यस्थलों की सफाई, अनावश्यक वस्तुओं और कबाड़ की पहचान तथा उनका निपटान स्वच्छता को एक बार की गतिविधि के बजाय कार्यालय की नियमित कार्यसंस्कृति बनाने का प्रयास है
लंबित मामलों में कमी: लंबित संदर्भों और मामलों की व्यवस्थित समीक्षा तथा निर्धारित समय-सीमा में निपटारा शिकायत निवारण और फ़ाइलों के निपटारे की गति बढ़ने से नागरिकों के प्रति सरकार की जवाबदेही मजबूत होती है
अभिलेख प्रबंधन: अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूचियों के अनुसार अभिलेखों की समीक्षा और अनुपयोगी अभिलेखों को हटाना आवश्यक सूचना तक पहुंच आसान होती है, भंडारण का बोझ घटता है और पारदर्शिता तथा सूचना के अधिकार के अनुपालन में सहायता मिलती है
ई-अपशिष्ट का जिम्मेदारीपूर्ण निपटान: अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को छांटना, एकत्र करना और अधिकृत माध्यमों से निपटाना इससे ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन को बल मिलता है और विषैले पदार्थों से होने वाला प्रदूषण रुकता है
कार्यालय स्थान का इष्टतम उपयोग और पौधारोपण: खाली कराए गए स्थान को उत्पादक कार्यों में लगाना तथा हरित वातावरण को बढ़ावा देना सीमित संसाधनों का दक्ष उपयोग होता है और पर्यावरण के प्रति संस्थागत जिम्मेदारी का संदेश जाता है

महत्व

प्रशासनिक और शासन-संबंधी महत्त्व

  • लंबित मामलों की समयबद्ध समीक्षा से सुशासन के मूल तत्त्व, यानी दक्षता, उत्तरदायित्व और प्रतिक्रियाशीलता, मजबूत होते हैं।
  • अभिलेखों का व्यवस्थित प्रबंधन निर्णय-प्रक्रिया की निरंतरता और संस्थागत स्मृति को सुरक्षित रखता है।
  • शिकायतों का प्रभावी निवारण नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक कदम है।
  • अभियान का सालाना चक्र (अक्टूबर 2021 से अब तक) दर्शाता है कि कार्यालय सुधारों को एक अभियान-आधारित संस्थागत व्यवस्था का रूप दिया जा रहा है।

पर्यावरणीय महत्त्व

  • ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले पदार्थ होते हैं। इनका अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से निपटान मृदा, जल और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
  • सरकारी कार्यालय बड़े उपभोक्ता होने के नाते ई-अपशिष्ट के जिम्मेदारीपूर्ण निपटान में आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
  • पौधारोपण से हरित आवरण बढ़ता है और पर्यावरण-संरक्षण के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता झलकती है।

आर्थिक और संसाधन-प्रबंधन संबंधी महत्त्व

  • कबाड़ हटाने से खाली हुआ स्थान बैठक-कक्ष, कार्य-स्थल या अभिलेख-कक्ष के रूप में काम आ सकता है, जिससे नए किराये या निर्माण पर होने वाला व्यय बच सकता है।
  • अनुपयोगी वस्तुओं के निपटान से सरकारी राजस्व की प्राप्ति भी संभव है।
  • व्यवस्थित अभिलेख और डिजिटल सूचना से फ़ाइल खोजने में लगने वाला समय और श्रम घटता है, जिससे कार्य-उत्पादकता बढ़ती है।

सामाजिक-संस्थागत महत्त्व

  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की योजनाओं का लाभ ऐसे लाभार्थियों तक पहुंचता है जो अक्सर शिकायत-निवारण पर निर्भर होते हैं। इसलिए मंत्रालय की कार्य-कुशलता सीधे सेवा-वितरण को प्रभावित करती है।
  • स्वच्छता और अनुशासन की कार्यसंस्कृति कर्मचारियों के मनोबल और कार्य-वातावरण में सुधार लाती है।

चुनौतियाँ

1. अभियान-आधारित सुधार की निरंतरता

  • एक माह के अभियान में हुई प्रगति अभियान समाप्त होने के बाद बनी रहे, यह सुनिश्चित करना कठिन है।
  • ‘अभियान’ की अवधारणा कभी-कभी औपचारिकता या आंकड़े दिखाने की कवायद बन जाती है।

2. लंबित मामलों की जटिल प्रकृति

  • कई मामले अंतर-मंत्रालयी परामर्श, राज्य सरकारों की रिपोर्ट या विधिक प्रक्रियाओं पर निर्भर होते हैं। इनका निपटारा केवल मंत्रालय के प्रयास से तेज नहीं हो सकता।
  • समय-सीमा के दबाव में गुणवत्ता से समझौता होने या मामलों को केवल औपचारिक रूप से बंद कर देने का जोखिम रहता है।

3. अभिलेख प्रबंधन में विधिक और तकनीकी सावधानी

  • अभिलेखों को हटाते समय लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूचियों का पालन आवश्यक है, अन्यथा महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों के नष्ट होने का खतरा रहता है।
  • कागज़ी अभिलेखों के डिजिटलीकरण में डेटा-सुरक्षा, दीर्घकालिक संरक्षण और प्रारूप की अप्रचलितता की समस्याएं आती हैं।

4. ई-अपशिष्ट निपटान का कमजोर पारिस्थितिकी तंत्र

  • देश में ई-अपशिष्ट का बड़ा भाग अनौपचारिक क्षेत्र में संसाधित होता है, जहां सुरक्षा और पर्यावरण-मानकों की अनदेखी होती है।
  • अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं की उपलब्धता, संग्रहण की सुविधा और निपटान का पता लगाने की व्यवस्था (ट्रेसेबिलिटी) सभी स्थानों पर समान रूप से सुदृढ़ नहीं है।
  • उपकरणों के छोटे जीवनकाल और बढ़ते डिजिटलीकरण से ई-अपशिष्ट की मात्रा बढ़ती जा रही है।

5. प्रभाव-मापन और व्यवहारगत परिवर्तन

  • अभियान के परिणामों का मूल्यांकन अक्सर निपटाई गई फ़ाइलों, मुक्त स्थान या कबाड़ की मात्रा जैसे संख्यात्मक संकेतकों पर होता है, जो सेवा की गुणवत्ता का पूरा चित्र नहीं देते।
  • कर्मचारियों में स्वच्छता और अभिलेख-अनुशासन की आदत विकसित करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और नेतृत्व की भागीदारी चाहिए।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अभियान की निरंतरता अवधि समाप्त होने पर पुरानी स्थिति लौटने का जोखिम
लंबित मामले जटिल और बहु-हितधारक मामलों का वास्तविक निपटारा बनाम औपचारिक समापन
अभिलेख हटाना प्रतिधारण अनुसूची के उल्लंघन से महत्त्वपूर्ण अभिलेखों की क्षति की आशंका
ई-अपशिष्ट अधिकृत पुनर्चक्रण-सुविधाओं की कमी और अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व
मापन संख्यात्मक लक्ष्य पर अत्यधिक ध्यान, सेवा-गुणवत्ता की उपेक्षा
डिजिटलीकरण डेटा-सुरक्षा और दीर्घकालिक डिजिटल संरक्षण की चुनौती

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विशेष अभियान (स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटारे के लिए): अक्टूबर 2021 से प्रतिवर्ष चल रहा अभियान, जिसका समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है; 6.0 इसी की अगली कड़ी है
  • स्वच्छ भारत मिशन: 2 अक्टूबर 2014 को आरंभ, स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का राष्ट्रीय कार्यक्रम, जिसकी भावना यह अभियान संस्थागत कार्यालयों में आगे बढ़ाता है
  • केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS): शिकायतों के ऑनलाइन निपटारे का मंच, जो लंबित मामलों में कमी के लक्ष्य से सीधे जुड़ा है
  • ई-ऑफिस: कागज़ी फ़ाइलों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फ़ाइल-प्रबंधन की प्रणाली, जो अभिलेख प्रबंधन और फ़ाइल-निपटारे की गति से संबंधित है

आगे की राह

  • अभियान की उपलब्धियों को वर्ष भर की नियमित कार्यप्रणाली बनाने के लिए मासिक या तिमाही आंतरिक समीक्षा की व्यवस्था की जाए।
  • लंबित मामलों को आयु और प्रकृति के अनुसार वर्गीकृत किया जाए तथा सबसे पुराने और संवेदनशील मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
  • अभिलेख हटाने से पहले प्रतिधारण अनुसूची और लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुपालन की जांच अनिवार्य हो, और ऐतिहासिक महत्त्व के अभिलेख राष्ट्रीय अभिलेखागार को भेजे जाएं।
  • ई-ऑफिस के विस्तार और अभिलेखों के डिजिटलीकरण को डेटा-सुरक्षा तथा दीर्घकालिक संरक्षण के मानकों के साथ जोड़ा जाए।
  • ई-अपशिष्ट केवल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं को सौंपा जाए और निपटान का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए।
  • मूल्यांकन में केवल संख्यात्मक संकेतक नहीं, बल्कि शिकायत-निपटारे की गुणवत्ता, औसत निपटारा-समय और नागरिक-संतुष्टि को भी शामिल किया जाए।
  • कर्मचारियों के लिए अभिलेख-प्रबंधन, स्वच्छता और पर्यावरण-जागरूकता पर नियमित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • संबद्ध संगठनों और क्षेत्रीय कार्यालयों में भी समान मानकों के साथ अभियान की निगरानी की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विशेष अभियान (Special Campaign) और संस्थागत स्वच्छता · लंबित मामलों का निपटान और सुशासन · अभिलेख प्रबंधन एवं अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूची · ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 · विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) · चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी खनन · कार्यालय स्थान का इष्टतम उपयोग · शिकायत निवारण (CPGRAMS) · सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 · संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण और प्रशासनिक सुधार · अनुच्छेद 51क(छ) और अनुच्छेद 48क (पर्यावरण संरक्षण) · अभियान-आधारित शासन की सीमाएँ और निरंतरता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: राज्य द्वारा पर्यावरण संरक्षण का निदेश
  • अनुच्छेद 51A(छ): नागरिकों का पर्यावरण-संरक्षण कर्तव्य
  • अनुच्छेद 77(3): भारत सरकार के कार्य-संचालन के नियम

अवधारणा प्रवाह

2 अक्टूबर 2026 से ‘विशेष अभियान 6.0’ का आरंभ  →  कार्यस्थलों की सफाई, कबाड़ की पहचान और ई-अपशिष्ट की छंटाई तथा अधिकृत निपटान  →  अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूची के अनुसार अभिलेखों की समीक्षा और अनुपयोगी अभिलेखों का निपटान  →  लंबित संदर्भों, मामलों और शिकायतों की समयबद्ध समीक्षा और निपटारा  →  कार्यालय स्थान की मुक्ति और उसका उत्पादक उपयोग  →  कार्य-कुशलता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में सुधार  →  सुशासन की दिशा में स्वच्छ, दक्ष और उत्तरदायी कार्यस्थल की संस्कृति का संस्थागतीकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
2. इनमें विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) के अंतर्गत प्रमाणपत्र आधारित व्यवस्था का प्रावधान है।
3. ये नियम केवल सरकारी कार्यालयों में उपयोग किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर लागू होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित हैं। कथन 2 सही है: निर्माता, उत्पादक, नवीनीकरणकर्ता और पुनर्चक्रणकर्ता पंजीकृत होते हैं तथा EPR प्रमाणपत्र की व्यवस्था है। कथन 3 गलत है: ये नियम निर्माताओं, उत्पादकों, नवीनीकरणकर्ताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और उपभोक्ताओं सहित सभी संबंधित पक्षों पर लागू होते हैं, केवल सरकारी कार्यालयों पर नहीं।

Q2. अभिकथन (A): ई-अपशिष्ट का असंगठित क्षेत्र में असुरक्षित पुनर्चक्रण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
कारण (R): ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले पदार्थ होते हैं, जो अनियंत्रित तरीके से तोड़ने या जलाने पर मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित करते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, किंतु R गलत है
  4. A गलत है, किंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा, कैडमियम जैसी भारी धातुएँ और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं। असुरक्षित तरीके से तोड़ने या जलाने पर ये विषैले तत्व मुक्त होकर प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा करते हैं। इसलिए R, A की सही व्याख्या है।

Q3. भारत सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय किस वर्ष अस्तित्व में आया, जब इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से अलग किया गया?

  1. 1992
  2. 2006
  3. 2011
  4. 2014

उत्तर: 2006 — अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का गठन जनवरी 2006 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से अलग करके किया गया। 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम पारित हुआ था, मंत्रालय का गठन उसके बाद 2006 में हुआ।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विशेष अभियान 6.0 जैसे समयबद्ध अभियान सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन, लंबित मामलों के निपटान और ई-अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से संस्थागत कार्यकुशलता बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इनके महत्त्व का परीक्षण कीजिए तथा चर्चा कीजिए कि ऐसे अभियानों को स्थायी प्रशासनिक सुधार में बदलने के लिए किन उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: भूमिका (2-3 पंक्तियाँ): अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा विशेष अभियान 6.0। यह श्रृंखला 2021 में शुरू हुई थी और इसका समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है।

भाग 1, महत्त्व और उपलब्धियाँ:
(क) लंबित मामले: संदर्भों और शिकायतों के समयबद्ध निपटान से नागरिक-केंद्रित सेवा-प्रदायगी में सुधार होता है। इसे CPGRAMS से जोड़ा जा सकता है।
(ख) अभिलेख प्रबंधन: अभिलेख-प्रतिधारण अनुसूचियों के अनुसार समीक्षा और अनुपयोगी अभिलेखों को हटाना। सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 और RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) के अनुरूप अभिलेखों का सूचीकरण और अनुक्रमण। पारदर्शिता और सूचना-पहुँच में वृद्धि।
(ग) ई-अपशिष्ट: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 और EPR के अनुरूप अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से निपटान। चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी खनन की दिशा में कदम। अनुच्छेद 51क(छ) और अनुच्छेद 48क की भावना के अनुरूप सरकार द्वारा आदर्श प्रस्तुत करना।
(घ) कार्यालय स्थान का इष्टतम उपयोग और स्वच्छता: स्वच्छ भारत मिशन (2014) की संस्थागत निरंतरता, कार्यसंस्कृति और कर्मचारियों के मनोबल में सुधार, पौधारोपण द्वारा हरित संदेश।

भाग 2, सीमाएँ:
(क) अभियान-आधारित मानसिकता में काम एक माह के लिए तेज़ होता है, फिर शिथिल पड़ जाता है।
(ख) संख्यात्मक लक्ष्यों पर अत्यधिक बल से गुणवत्ता की उपेक्षा, यानी ‘लक्ष्य ही माप बन जाने’ की समस्या। मामले केवल बंद दिखाए जा सकते हैं, वास्तविक समाधान नहीं होता।
(ग) अभिलेख हटाने में जल्दबाज़ी से ऐतिहासिक या विधिक महत्त्व के अभिलेख खोने का जोखिम।
(घ) ई-अपशिष्ट के निपटान में अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं की उपलब्धता और निगरानी की कमी।
(ङ) पेंडेंसी के मूल कारण, जैसे रिक्तियाँ, जटिल प्रक्रियाएँ और स्तरों की अधिकता, अभियान से हल नहीं होते।

भाग 3, आगे की राह:
(क) ई-ऑफिस और डिजिटल अभिलेखन से भौतिक अभिलेखों का बोझ घटाना।
(ख) पेंडेंसी की निरंतर निगरानी के लिए डैशबोर्ड और नियमित समीक्षा।
(ग) मिशन कर्मयोगी के माध्यम से क्षमता निर्माण।
(घ) द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की अभिलेख प्रबंधन संबंधी अनुशंसाओं (RTI पर पहली रिपोर्ट) का क्रियान्वयन।
(ङ) हरित क्रय और ई-अपशिष्ट का प्रमाणित निपटान।
(च) परिणाम-आधारित और गुणवत्ता-आधारित मूल्यांकन।

निष्कर्ष: अभियान शुरुआत का माध्यम है, स्थायी सुधार के लिए प्रक्रियागत और संस्थागत परिवर्तन आवश्यक है। संतुलित निष्कर्ष के साथ उत्तर समाप्त करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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