16 Sep विशेष स्वच्छता अभियान 6.0: केंद्र सरकार ने लॉन्च किया वेब पोर्टल, जानें मुख्य बिंदु
✎ विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 एक 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण राष्ट्र' का आंदोलन है, जो सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, कबाड़ निपटान, ई-कचरा प्रबंधन और लंबित मामलों को कम करके सुशासन और दक्षता को बढ़ावा देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
- Prelims: विशेष स्वच्छता अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, कचरा प्रबंधन, ई-कचरा निस्तारण, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG), जनभागीदारी, संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण, संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण
- Essay: स्वच्छता: एक जन आंदोलन के रूप में, शासन में जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 एक ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण राष्ट्र’ का आंदोलन है, जो सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, कबाड़ निपटान, ई-कचरा प्रबंधन और लंबित मामलों को कम करके सुशासन और दक्षता को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में विशेष स्वच्छता अभियान (Special Swachhta Abhiyan) 6.0 के लिए एक वेब पोर्टल का शुभारंभ किया है। उन्होंने इस अभियान को केवल एक सफाई पहल से आगे बढ़कर ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) और ‘संपूर्ण राष्ट्र’ (Whole of Nation) का आंदोलन बताया। यह अभियान सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, कबाड़ निपटान, लंबित मामलों को कम करने और ई-कचरा (e-waste) प्रबंधन पर केंद्रित है, जिसने अब तक कबाड़ निपटान के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छता अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में की गई थी, जिसका उद्देश्य देश भर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाना और व्यवहार में परिवर्तन लाना था।
- यह अभियान प्रारंभ में एक साधारण स्वच्छता पहल के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे इसने व्यापक जन आंदोलन का रूप ले लिया।
- अभियान का लक्ष्य केवल भौतिक सफाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ाना, लंबित मामलों को कम करना और कचरे से आर्थिक मूल्य सृजित करना भी शामिल था।
- पिछले पांच वर्षों में, इस अभियान के तहत 1,000 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय स्थान को मुक्त कराया गया है और लगभग 2 करोड़ फाइलों का निस्तारण किया गया है।
- प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) इस अभियान के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेष स्वच्छता अभियान क्या है?
- विशेष स्वच्छता अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता, सुशासन और दक्षता को बढ़ावा देना है।
- यह अभियान केवल भौतिक सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कबाड़ निपटान, अनावश्यक वस्तुओं को हटाना, अभिलेख प्रबंधन में सुधार और लंबित मामलों को कम करना भी शामिल है।
- अभियान का एक प्रमुख पहलू ‘कचरे से धन’ (Waste to Wealth) के सिद्धांत पर काम करना है, जिसके तहत कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं के निपटान से आर्थिक मूल्य सृजित किया जाता है।
- विशेष अभियान 6.0 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, ई-कचरा निस्तारण और सरकारी विभागों में लंबित मामलों को कम करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा।
- यह अभियान ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण राष्ट्र’ के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसमें सरकार के सभी मंत्रालय, विभाग और नागरिक मिलकर काम करते हैं।
- यह जनभागीदारी (Public Participation) और व्यवहार परिवर्तन (Behavioral Change) को बढ़ावा देता है, जिससे स्वच्छता एक सामूहिक जिम्मेदारी बन सके।
- अभियान का उद्देश्य सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना, सार्वजनिक स्थानों को अधिक सुलभ बनाना और कार्यस्थल के माहौल को बेहतर बनाना है।
- यह पहल सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को मजबूत करती है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का शुभारंभ | सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु एक संगठित प्रयास। |
| वेब पोर्टल का लॉन्च | अभियान की प्रगति की निगरानी, पारदर्शिता और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच समन्वय को सुगम बनाना। |
| संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-राष्ट्र का आंदोलन | यह दर्शाता है कि स्वच्छता अब केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि व्यापक जनभागीदारी और सभी हितधारकों की जिम्मेदारी बन गई है। |
| वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और ई-कचरा निस्तारण पर ध्यान | आधुनिक चुनौतियों का समाधान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता। |
| कबाड़ निपटान से 5,000 करोड़ रुपये की आय | अपशिष्ट को आर्थिक मूल्य में बदलने और सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग का उदाहरण। |
महत्व
शासनिक महत्व
- यह अभियान सरकारी कामकाज में दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, जिससे सुशासन (Good Governance) सुनिश्चित होता है।
- लंबित मामलों में कमी और फाइलों के बेहतर प्रबंधन से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आती है।
- यह जन-केंद्रित शासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ नागरिकों की भागीदारी से नीतियों को प्रभावी बनाया जाता है।
आर्थिक महत्व
- कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं के निपटान से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है, जो कचरे से धन (Waste to Wealth) सृजन का मॉडल प्रस्तुत करता है।
- कार्यालय स्थान को मुक्त करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और परिचालन लागत में कमी आती है।
- यह अभियान चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है, जहाँ संसाधनों का अधिकतम पुनर्चक्रण और पुन:उपयोग किया जाता है।
सामाजिक महत्व
- स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने से नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आया है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- विशेष रूप से महिलाओं और स्कूली छात्राओं के लिए शौचालयों के निर्माण पर जोर देने से लैंगिक समानता और शिक्षा तक पहुँच में सुधार हुआ है।
- यह अभियान नागरिकों में जिम्मेदारी और सामूहिक भागीदारी की भावना को मजबूत करता है।
पर्यावरणीय महत्व
- वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और ई-कचरा निस्तारण पर ध्यान देने से पर्यावरण प्रदूषण कम होता है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है।
- अपशिष्ट पदार्थों के उचित निपटान से भूमि और जल प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन की निरंतरता
- जन आंदोलन के रूप में शुरू हुए इस अभियान की निरंतरता बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर जब प्रारंभिक उत्साह कम हो जाता है।
- व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर स्वच्छता को एक आदत के रूप में स्थापित करना समय लेने वाली प्रक्रिया है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, सुशासन
2. वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की अवसंरचना
- देशव्यापी स्तर पर वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, विशेषकर ई-कचरा और प्लास्टिक कचरा, के लिए पर्याप्त अवसंरचना (Infrastructure) और विशेषज्ञता का अभाव है।
- कचरा पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अवसंरचना
3. संसाधनों का कुशल उपयोग
- सरकारी विभागों में कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान तथा उनके समयबद्ध निपटान के लिए निरंतर प्रयासों और निगरानी की आवश्यकता है।
- मुक्त किए गए कार्यालय स्थान का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सुशासन, सार्वजनिक प्रशासन
4. निगरानी और जवाबदेही
- अभियान की प्रगति की प्रभावी निगरानी और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
- जवाबदेही तय करना और प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सुशासन, पारदर्शिता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जनभागीदारी की निरंतरता | प्रारंभिक उत्साह के बाद जनभागीदारी को बनाए रखना और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना। |
| ई-कचरा प्रबंधन | बढ़ते ई-कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान के लिए पर्याप्त सुविधाओं और जागरूकता का अभाव। |
| लंबित मामलों का निपटान | सरकारी कार्यालयों में फाइलों के अंबार और निर्णय लेने में देरी को पूरी तरह समाप्त करना। |
| संसाधन आवंटन | स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक वित्तीय और मानव संसाधनों का पर्याप्त आवंटन। |
| प्रौद्योगिकी का उपयोग | कचरा प्रबंधन और निगरानी में आधुनिक प्रौद्योगिकी (जैसे AI, IoT) के प्रभावी एकीकरण की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)
आगे की राह
- स्वच्छता अभियान को एक सतत प्रक्रिया के रूप में बढ़ावा देना, न कि केवल एक सामयिक पहल के रूप में।
- वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, विशेषकर ई-कचरा और प्लास्टिक कचरा, के लिए आधुनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाना।
- सरकारी विभागों में लंबित मामलों को कम करने और फाइलों के डिजिटल प्रबंधन को प्राथमिकता देना।
- नागरिकों, विशेषकर युवाओं और स्कूली बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षा और संचार अभियानों को मजबूत करना।
- कचरे से धन सृजन के मॉडल को बढ़ावा देना और चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को विभिन्न क्षेत्रों में लागू करना।
- स्वच्छता अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय और राज्यों के साथ सहयोग को और मजबूत करना।
- स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचार (Innovation) और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना।
- अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता अभियान · जन आंदोलन · व्यवहार परिवर्तन · कचरा प्रबंधन · ई-कचरा निस्तारण · सरकारी दक्षता · संसाधन उपयोग · लंबित मामलों में कमी · संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण · संपूर्ण राष्ट्र आंदोलन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर, जीवन स्तर में सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘शहरी स्थानीय निकायों के कार्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों के कार्य और शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री द्वारा 2014 में स्वच्छता पर जोर → स्वच्छता अभियान का जन आंदोलन बनना → व्यवहार परिवर्तन और सरकारी दक्षता में वृद्धि → कबाड़ निपटान से आर्थिक मूल्य सृजन → वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन पर ध्यान → स्वच्छता को संपूर्ण सरकार/राष्ट्र का आंदोलन बनाना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अभियान 2014 में ‘स्वच्छता अभियान’ के रूप में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य केवल सफाई था।
2. विशेष अभियान 6.0 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और ई-कचरा निस्तारण पर केंद्रित है।
3. इस अभियान के तहत अब तक कबाड़ निस्तारण से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान 2014 में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह केवल सफाई से आगे बढ़कर ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन’ बन गया है। कथन 2 सही है क्योंकि विशेष अभियान 6.0 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, ई-कचरा निस्तारण और लंबित मामलों को कम करने पर केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कबाड़ निस्तारण से 5,000 करोड़ रुपये अर्जित किए गए हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘स्वच्छता अभियान’ के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है/हैं?
1. सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ाना।
2. कचरे से आर्थिक मूल्य सृजित करना।
3. सार्वजनिक स्थानों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल सफाई नहीं है, बल्कि यह सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ाने, कचरे से आर्थिक मूल्य सृजित करने और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये सभी उद्देश्य अभियान की व्यापकता को दर्शाते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छता अभियान को ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन’ क्यों कहा जा रहा है? इस अभियान ने सरकारी कामकाज की दक्षता और संसाधन प्रबंधन में किस प्रकार योगदान दिया है, उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्वच्छता अभियान (Swachhta Abhiyan) की शुरुआत (2014) और इसके विकास का संक्षिप्त परिचय, इसे केवल एक सफाई पहल से ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन’ के रूप में परिभाषित करना।
2. **’संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन’ की व्याख्या:**
* **संपूर्ण सरकार:** विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सरकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी, नीति निर्माण और कार्यान्वयन में समन्वय।
* **संपूर्ण राष्ट्र:** जनभागीदारी, व्यवहार परिवर्तन (शौचालय उपयोग, कचरा प्रबंधन), नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और स्थानीय निकायों की भूमिका।
* प्रधानमंत्री के 2014 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का संदर्भ।
3. **सरकारी कामकाज की दक्षता में योगदान:**
* **लंबित मामलों में कमी:** फाइलों के निस्तारण (लगभग 2 करोड़ फाइलों का निस्तारण)।
* **बेहतर अभिलेख प्रबंधन:** व्यवस्थित रिकॉर्ड-कीपिंग और डिजिटलकरण की दिशा में प्रयास।
* **कार्यस्थल का अनुकूलन:** कार्यालय स्थान का मुक्त होना (1,000 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान मुक्त)।
4. **संसाधन प्रबंधन में योगदान:**
* **कचरे से संपदा:** कबाड़ निस्तारण से आर्थिक मूल्य सृजन (5,000 करोड़ रुपये की आय)।
* **वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन:** ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ई-कचरा निस्तारण पर ध्यान।
* **सार्वजनिक स्थानों का बेहतर उपयोग:** स्वच्छता से सार्वजनिक स्थलों की उपयोगिता में वृद्धि।
5. **निष्कर्ष:** अभियान की सफलता, जन-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) के मॉडल के रूप में इसकी भूमिका और भविष्य की चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- पेयजल विभाग का विशेष अभियान 6.0: स्वच्छता और लंबित मामलों पर फोकस - September 16, 2026
- UPSC: Special Campaign 6.0 by DDWS to Focus on Sanitation & Pending Cases - September 16, 2026
- विशेष स्वच्छता अभियान 6.0: केंद्र सरकार ने लॉन्च किया वेब पोर्टल, जानें मुख्य बिंदु - September 16, 2026

No Comments