02 Oct ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ से सरकारी कार्यालयों में क्रांतिकारी बदलाव
✎ विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 सुशासन, दक्षता और संसाधन प्रबंधन के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जो केवल साफ-सफाई से आगे बढ़कर ई-कचरा निपटान और कार्यालय स्थान के अनुकूलन पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
- Prelims: विशेष स्वच्छता अभियान, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), ई-कचरा प्रबंधन, कचरे से संपदा (Waste to Wealth), राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG), स्वच्छ भारत अभियान
- Essay: स्वच्छता से सुशासन: एक समग्र दृष्टिकोण, संसाधन प्रबंधन और सतत विकास में सरकारी अभियानों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 सुशासन, दक्षता और संसाधन प्रबंधन के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जो केवल साफ-सफाई से आगे बढ़कर ई-कचरा निपटान और कार्यालय स्थान के अनुकूलन पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्मिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों में ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ का शुभारंभ किया। यह अभियान अब केवल साफ-सफाई तक सीमित न रहकर दक्षता, संसाधन प्रबंधन, लंबित मामलों में कमी और ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान जैसे व्यापक उद्देश्यों को समाहित कर रहा है, जिससे सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में लाल किले से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के आह्वान के साथ स्वच्छता एक जन-आंदोलन के रूप में उभरी।
- यह अभियान धीरे-धीरे सरकारी कार्यालयों में एक संस्थागत प्रक्रिया में बदल गया, जिसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर स्वच्छता और दक्षता सुनिश्चित करना था।
- पिछले पांच वर्षों में, इस अभियान के तहत ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये की आय हुई है और 1,049 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालय स्थान खाली कराया गया है।
- प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) इस विशेष अभियान के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करता है।
- अभियान के शुरुआती चरणों में शौचालयों और साफ-सफाई पर ध्यान केंद्रित किया गया था, लेकिन बाद में इसमें पुरानी फाइलों, बेकार फर्नीचर और ई-कचरे का निपटान भी शामिल किया गया।
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 एक व्यापक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य मंत्रालयों और विभागों में स्वच्छता, सुशासन, सार्वजनिक संसाधनों का कुशल उपयोग और लंबित मामलों में कमी लाना है।
- यह अभियान केवल भौतिक साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पुराने रिकॉर्ड, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का व्यवस्थित निपटान भी शामिल है।
- इसका लक्ष्य कार्यालयों के भीतर अनुपयोगी वस्तुओं को हटाकर मूल्यवान स्थान को खाली कराना और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना है।
- यह अभियान ‘कचरे से संपदा’ (Waste to Wealth) की अवधारणा पर भी जोर देता है, जिसके तहत कचरा प्रबंधन को केवल निपटान से आगे ले जाकर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, नवाचार और मूल्य सृजन तक पहुंचाया जाता है।
- अभियान में ‘जन भागीदारी’ पर विशेष जोर दिया जाता है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों और सफाई मित्रों को शामिल करके एक स्थायी स्वच्छता संस्कृति का निर्माण किया जाता है।
- यह पहल सरकारी कार्यालयों के बदलते स्वरूप और इलेक्ट्रॉनिक परिसंपत्तियों के जिम्मेदार प्रबंधन की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाती है।
- प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) इस अभियान के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी है।
- सीएसआईआर (CSIR) जैसे वैज्ञानिक संस्थान भी इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, अपनी ‘कचरे से संपदा’ तकनीकों के माध्यम से योगदान दे रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वच्छता से सुशासन की ओर | अभियान का दायरा केवल साफ-सफाई तक सीमित न रहकर प्रशासनिक दक्षता, संसाधन प्रबंधन और जन-सेवा की स्थायी संस्कृति को बढ़ावा देना है। |
| ई-कचरा और कबाड़ निपटान | पुराने रिकॉर्ड, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये की आय हुई और कार्यालयों में 1,049 लाख वर्ग फीट से अधिक जगह खाली हुई। |
| संसाधन पुनर्प्राप्ति और नवाचार | CSIR की ‘कचरे से संपदा’ तकनीकें कचरा प्रबंधन को केवल निपटान से आगे ले जाकर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, नवाचार और मूल्य सृजन तक पहुंचा रही हैं। |
| जन-भागीदारी और संस्थागत प्रक्रिया | यह अभियान 2014 में प्रधानमंत्री के आह्वान से शुरू होकर जन-आंदोलन बना और अब सरकारी कार्यालयों में एक संस्थागत वार्षिक प्रक्रिया बन गया है। |
| बहु-मंत्रालयीय भागीदारी | कार्मिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों सहित 100 से अधिक विज्ञान संस्थान इस अभियान में शामिल हुए हैं। |
महत्व
प्रशासनिक दक्षता
- सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक फाइलों और कबाड़ के निपटान से कार्यस्थल में सुधार होता है, जिससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ती है।
- ई-फाइलों और ई-कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन डिजिटल युग में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करता है।
संसाधन प्रबंधन
- कबाड़ और ई-कचरे के निपटान से प्राप्त आय सरकारी राजस्व में योगदान करती है।
- खाली हुई कार्यालयी जगह का बेहतर उपयोग किया जा सकता है, जिससे नए निर्माण की आवश्यकता कम होती है और लागत बचती है।
पर्यावरण संरक्षण
- ई-कचरे और अन्य कबाड़ का उचित निपटान पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायक है।
- CSIR जैसी संस्थाओं द्वारा ‘कचरे से संपदा’ तकनीकों का उपयोग चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है।
सुशासन और जन-सेवा
- स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थल नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में सहायक होते हैं।
- लंबित मामलों में कमी लाने और संसाधनों के कुशल उपयोग से सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन
- सरकारी कर्मचारियों और विभागों में स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना एक चुनौती है।
- पुरानी आदतों और मानसिकता को बदलना समय लेने वाली प्रक्रिया है।
यूपीएससी लिंक: लोक प्रशासन, नैतिकता
2. प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचा
- ई-कचरा और अन्य जटिल अपशिष्टों के सुरक्षित और प्रभावी निपटान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और पर्याप्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।
- छोटे कार्यालयों और दूरदराज के क्षेत्रों तक इन सुविधाओं का विस्तार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अवसंरचना
3. निगरानी और मूल्यांकन
- अभियान की प्रगति और प्रभावशीलता की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- परिणामों को मापने और जवाबदेही तय करने के लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति निर्माण
4. संसाधनों का आवंटन
- अभियान के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना।
- विशेष रूप से ‘कचरे से संपदा’ जैसी नवाचारी तकनीकों के लिए निवेश की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्थायी व्यवहार परिवर्तन | केवल अभियान अवधि तक सीमित न रहकर, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को दैनिक कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना। |
| ई-कचरा प्रबंधन | बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य तरीके से निपटान। |
| प्रौद्योगिकी का उपयोग | ‘कचरे से संपदा’ जैसी तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने और उनके लिए आवश्यक निवेश सुनिश्चित करना। |
| निगरानी और जवाबदेही | अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति और आवंटित संसाधनों के कुशल उपयोग की प्रभावी निगरानी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विशेष स्वच्छता अभियान
आगे की राह
- स्वच्छता अभियान को एक स्थायी संस्थागत प्रक्रिया के रूप में मजबूत करना, जिसमें सभी सरकारी विभाग सक्रिय रूप से भाग लें।
- ई-कचरा और अन्य अपशिष्टों के वैज्ञानिक निपटान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना।
- CSIR जैसी अनुसंधान संस्थाओं द्वारा विकसित ‘कचरे से संपदा’ तकनीकों को व्यापक रूप से लागू करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा मिल सके।
- अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र स्थापित करना, जिसमें नियमित रिपोर्टिंग और मूल्यांकन शामिल हो।
- जन-भागीदारी को और अधिक प्रोत्साहित करना, विशेषकर ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विशेष स्वच्छता अभियान · सुशासन · संसाधन प्रबंधन · ई-कचरा निपटान · प्रशासनिक दक्षता · जन भागीदारी · कचरे से संपदा · सतत विकास · सार्वजनिक सेवा · डिजिटल इंडिया
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री का स्वच्छता आह्वान (2014) → जन-आंदोलन और सरकारी कार्यालयों में विस्तार → विशेष स्वच्छता अभियान का वार्षिक संस्थागतकरण → दायरे का विस्तार: फाइलों, कबाड़ से ई-कचरा प्रबंधन तक → प्रशासनिक दक्षता, संसाधन प्रबंधन और सुशासन में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान केवल सरकारी कार्यालयों में साफ-सफाई तक सीमित है।
2. प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) इस अभियान के लिए नोडल विभाग है।
3. इस अभियान में ई-कचरे और पुराने रिकॉर्ड के निपटान पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान का दायरा साफ-सफाई से आगे बढ़कर दक्षता और संसाधन प्रबंधन तक फैल गया है। कथन 2 सही है, DARPG नोडल विभाग है। कथन 3 भी सही है, इसमें ई-कचरा और पुराने रिकॉर्ड का निपटान शामिल है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 से संबंधित नहीं है?
- कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- रक्षा मंत्रालय
उत्तर: रक्षा मंत्रालय — डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्मिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों में इस अभियान का शुभारंभ किया। रक्षा मंत्रालय का इसमें उल्लेख नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विशेष स्वच्छता अभियान जैसे सरकारी पहलें किस प्रकार प्रशासनिक दक्षता और सुशासन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होती हैं? ‘कचरे से संपदा’ की अवधारणा के संदर्भ में इसके व्यापक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य।
2. प्रशासनिक दक्षता में योगदान: लंबित मामलों में कमी, कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग, संसाधन प्रबंधन, ई-कचरा निपटान, डिजिटल फाइलिंग को प्रोत्साहन।
3. सुशासन को बढ़ावा: पारदर्शिता, जवाबदेही, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नागरिक-केंद्रित प्रशासन।
4. ‘कचरे से संपदा’ (Waste to Wealth) अवधारणा: CSIR की भूमिका, नवाचार और मूल्य सृजन, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांत।
5. व्यापक सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव: राजस्व सृजन (5,102.91 करोड़ रुपये का उल्लेख), स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण, जन भागीदारी का महत्व।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: निरंतरता सुनिश्चित करना, प्रौद्योगिकी का उपयोग, जागरूकता बढ़ाना।
7. निष्कर्ष: अभियान की सफलता और भविष्य की संभावनाओं का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- Sharam Samvad: Govt’s PR Campaign for Labour Codes in Delhi-NCR & Uttarakhand - October 2, 2026
- खादी उत्पादों पर 20% तक छूट: गांधी जयंती पर KVIC की पहल - October 2, 2026
- DoT Launches Special Campaign 6: Key Goals for UPSC & State PCS - October 2, 2026

No Comments