वीबी-जी राम-जी योजना: ग्रामीण रोजगार गारंटी मिशन की शुरुआत, जानें पूरी प्रक्रिया

वीबी-जी राम-जी योजना: ग्रामीण रोजगार गारंटी मिशन की शुरुआत, जानें पूरी प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे  |  GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय; सरकारी बजट
  • Prelims: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रोजगार गारंटी योजनाएँ, आजीविका मिशन, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, विकसित भारत
  • Essay: ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका के अवसर: चुनौतियाँ और समाधान, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण विकास की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: वीबी-जी राम-जी योजना, विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत 01 जुलाई, 2026 से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की गारंटी प्रदान करने वाली एक राष्ट्रव्यापी पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में जानकारी दी कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 के अनुपालन में अपनी-अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है। इस योजना का कार्यान्वयन 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया है, और केंद्र सरकार इसके सफल कार्यान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना एक प्रमुख विकासात्मक चुनौती रही है।
  • पूर्व में, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी योजनाओं ने ग्रामीण रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और ग्रामीण आबादी को सशक्त बनाना आवश्यक माना गया है।
  • वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की गारंटी प्रदान करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा स्थापित करता है।
  • यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग पर आधारित है, जहाँ राज्य अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएँ अधिसूचित करते हैं।
  • योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के लिए आय सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थायी आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है।

वीबी-जी राम-जी योजना क्या है?

  • वीबी-जी राम-जी का पूर्ण रूप ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ है।
  • यह योजना वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के तहत संचालित होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की कानूनी गारंटी प्रदान करती है।
  • इसका कार्यान्वयन 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया है।
  • यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित है और केंद्र सरकार तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कार्यान्वित की जाती है।
  • योजना का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को निश्चित दिनों का रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करके उनकी आय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के अनुपालन में अपनी-अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित किया है, जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन की अनुमति देता है।
  • केंद्र सरकार योजना के सफल और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार मदद और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
  • निधियों का आवंटन और जारी करना उपस्थिति रजिस्‍टर (मस्टर रोल्स) के समापन और बाद में एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) तैयार करने के बाद किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अधिनियम आधारित योजना यह योजना विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 पर आधारित है, जो इसके कार्यान्वयन को कानूनी वैधता और स्थिरता प्रदान करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित योजना का उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वयन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित किया है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन को दर्शाता है।
केंद्र सरकार का समर्थन केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रही है और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है, जिससे योजना का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन यह ग्रामीण आबादी को रोजगार की गारंटी और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करके गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास में योगदान देगा।
नियमित समीक्षा और परामर्श मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखता है, जिससे जमीनी स्तर की चुनौतियों का समाधान किया जा सके और योजना को प्रभावी बनाया जा सके।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि होगी और क्रय शक्ति बढ़ेगी।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जिससे समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान होगा।
  • प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से शहरी क्षेत्रों पर दबाव कम होगा।

सामाजिक महत्व

  • गरीबी और असमानता को कम करने में सहायक, विशेषकर ग्रामीण परिवारों के लिए।
  • ग्रामीण आबादी के जीवन स्तर में सुधार होगा, जिससे सामाजिक स्थिरता और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
  • महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों को रोजगार के अवसर प्रदान कर सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को मजबूत करेगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • अधिनियम आधारित होने के कारण योजना को कानूनी ढाँचा मिलता है, जिससे इसकी जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है।
  • केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ केंद्र सहायता प्रदान करता है और राज्य कार्यान्वयन करते हैं।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नियमित समीक्षा और तकनीकी सहायता, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करती है।

विकास संबंधी महत्व

  • विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के माध्यम से।
  • ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विकास में योगदान दे सकता है, यदि योजना के तहत सृजित रोजगार कार्यों में इसका समावेश हो।
  • स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थानीय कौशल विकास को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. धनराशि का प्रभावी उपयोग

  • योजना के तहत आवंटित धनराशि का समय पर और उचित उपयोग सुनिश्चित करना।
  • राज्यों द्वारा मस्टर रोल और एफटीओ (Fund Transfer Order) तैयार करने में देरी से भुगतान में विलंब हो सकता है।

2. कार्यान्वयन में राज्यों की क्षमता

  • सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समान प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता का अभाव।
  • जमीनी स्तर पर कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता।

3. निगरानी और मूल्यांकन

  • योजना के तहत सृजित रोजगारों की गुणवत्ता और स्थायित्व की निगरानी करना।
  • योजना के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए मजबूत तंत्र का अभाव।

4. भ्रष्टाचार और लीकेज

  • धनराशि के आवंटन और भुगतान में संभावित भ्रष्टाचार को रोकना।
  • फर्जी लाभार्थियों को रोकने और वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुँचाना।

5. स्थायी आजीविका के अवसर

  • केवल मजदूरी आधारित रोजगार के बजाय स्थायी और कौशल-आधारित आजीविका के अवसर प्रदान करना।
  • ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता और कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
धनराशि का उपयोग योजना के शुरुआती चरण में भुगतान और उपयोग में देरी की संभावना।
राज्यों की तैयारी सभी राज्यों में समान स्तर की प्रशासनिक और तकनीकी तैयारी का अभाव।
रोजगार की गुणवत्ता केवल अस्थायी मजदूरी के बजाय स्थायी और कौशल-आधारित रोजगार सृजन की चुनौती।
भ्रष्टाचार की रोकथाम धनराशि के दुरुपयोग और लीकेज को रोकने के लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता।
निगरानी तंत्र योजना के प्रभाव और परिणामों का प्रभावी ढंग से मूल्यांकन करने में चुनौतियाँ।
समन्वय का अभाव केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी।

आगे की राह

  • योजना के तहत धनराशि के उपयोग और भुगतान प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँ।
  • सृजित रोजगारों की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए कौशल विकास (Skill Development) और उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा दिया जाए।
  • योजना के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत, डेटा-संचालित तंत्र स्थापित किया जाए।
  • भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए।
  • केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर समन्वय और परामर्श सुनिश्चित किया जाए, ताकि जमीनी स्तर की चुनौतियों का समय पर समाधान हो सके।
  • योजना के तहत ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विकास को प्राथमिकता दी जाए, जिससे दीर्घकालिक परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके।
  • योजना के तहत महिलाओं, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) · वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 · ग्रामीण विकास मंत्रालय · ग्रामीण रोजगार गारंटी · आजीविका संवर्धन · केंद्र-राज्य सहयोग · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · सामाजिक सुरक्षा · कौशल विकास · विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘Article 41’: ‘काम पाने का अधिकार’}
  • {‘Article 43’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी’}
  • {‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’: ‘ग्रामीण विकास, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य’}
  • {‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’: ‘सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा’}

अवधारणा प्रवाह

अधिनियम (वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025) का अधिनियमन  →  राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा राज्य योजनाओं की अधिसूचना  →  ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का कार्यान्वयन (01.07.2026 से)  →  केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को धनराशि का आवंटन और जारी करना  →  राज्यों द्वारा मस्टर रोल और एफटीओ के माध्यम से भुगतान  →  ग्रामीण आबादी को रोजगार गारंटी और आजीविका के अवसर  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण और विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
2. वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित किया है।
3. योजना का कार्यान्वयन 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के अनुपालन में अपनी-अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित किया है, और इसका कार्यान्वयन 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो गया है।

Q2. भारत में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. ऐसी योजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  2. इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के लिए पूरक रोजगार के अवसर सृजित करना है।
  3. इन योजनाओं के तहत मजदूरी का भुगतान केवल केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
  4. केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर इन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए समन्वय करती है।

उत्तर: इन योजनाओं के तहत मजदूरी का भुगतान केवल केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। — ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं में मजदूरी का भुगतान केंद्र और राज्य सरकारों दोनों द्वारा साझा किया जाता है, न कि केवल केंद्र सरकार द्वारा। केंद्र सरकार इन योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025, ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कथन के आलोक में, योजना के उद्देश्यों, प्रमुख विशेषताओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें। साथ ही, इसके सफल कार्यान्वयन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग की भूमिका पर भी प्रकाश डालें। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के उत्तर में सबसे पहले वीबी-जी राम-जी योजना के उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जैसे ग्रामीण रोजगार गारंटी और आजीविका संवर्धन। फिर इसकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें, जिसमें अधिनियम का अनुपालन, पूरे देश में कार्यान्वयन और केंद्र-राज्य समन्वय शामिल हो सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें, जैसे गरीबी उन्मूलन, क्रय शक्ति में वृद्धि, पलायन में कमी और स्थानीय बुनियादी ढांचे का विकास। अंत में, योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निरंतर समीक्षा, परामर्श और तकनीकी सहायता जैसे सहयोग के महत्व पर विस्तार से चर्चा करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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