संयुक्त राष्ट्र सीईआरडी रिपोर्ट: भारत में जाति एवं धर्म आधारित भेदभाव पर गंभीर चिंता

State of exception: On India, the UN CERD report — diagram

संयुक्त राष्ट्र सीईआरडी रिपोर्ट: भारत में जाति एवं धर्म आधारित भेदभाव पर गंभीर चिंता

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UN CERD concerns on India

✎ संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) के कार्यान्वयन की निगरानी करती है और सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा करती है, जिसमें भारत में…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय  |  GS Paper I — भारतीय समाज
  • Prelims: CERD, नस्लीय भेदभाव उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD), मानवाधिकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA)
  • Essay: भारत में मानवाधिकारों की स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही, विविधतापूर्ण समाज में भेदभाव का उन्मूलन: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) के कार्यान्वयन की निगरानी करती है और सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा करती है, जिसमें भारत में जातिगत भेदभाव और अन्य मानवाधिकार संबंधी चिंताएं शामिल हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (UN CERD) ने 2007 के बाद भारत की पहली समीक्षा में, अल्पसंख्यक जातीय और धार्मिक समूहों, दलितों तथा गैर-नागरिकों के खिलाफ कानून प्रवर्तन तंत्र द्वारा हिंसा की रिपोर्टों पर ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की है। समिति ने भारत सरकार से इन आरोपों पर विस्तृत जानकारी और की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने 1968 में नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (International Convention on the Elimination of All Forms of Racial Discrimination – ICERD) की पुष्टि की थी।
  • CERD ने भारत सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया है कि जातिगत भेदभाव अभिसमय के अनुच्छेद 1 के दायरे से बाहर है, क्योंकि समिति वंशानुगत स्थिति पर आधारित सभी प्रकार के भेदभाव को शामिल मानती है।
  • रिपोर्ट में हाथ से मैला ढोने की प्रथा, रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति व्यवहार, नागरिकता से वंचित करने के प्रयास (जैसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर – NRC), चुनावी सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाना, और नागरिक समाज संगठनों के काम में बाधा डालने के लिए विभिन्न कानूनों (FCRA, UAPA, AFSPA, PMLA) के उपयोग पर चिंता व्यक्त की गई है।
  • समिति ने भारतीय न्याय संहिता में नस्लीय घृणास्पद भाषण को स्पष्ट रूप से अपराधी न बनाने और वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ परियोजनाओं को परामर्श प्रक्रिया से छूट देने पर भी ध्यान दिलाया है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्वतंत्रता को कमजोर करने की सिफारिशों और अपर्याप्त डेटा उपलब्धता को भी रिपोर्ट में उजागर किया गया है, जिससे भेदभाव के खिलाफ भारत के दावों की स्वतंत्र जांच बाधित होती है।

संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) क्या है?

  • CERD संयुक्त राष्ट्र की एक संधि निकाय है जो नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) के कार्यान्वयन की निगरानी करती है।
  • यह समिति 18 विशेषज्ञों से बनी है जो सदस्य देशों द्वारा अभिसमय के प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा करते हैं।
  • समिति सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों की जांच करती है और अपनी टिप्पणियां तथा सिफारिशें जारी करती है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों के प्रयासों को बढ़ावा देना और मानवाधिकारों की रक्षा करना है।
  • CERD नस्लीय भेदभाव की व्यापक परिभाषा को अपनाती है, जिसमें वंशानुगत स्थिति के आधार पर भेदभाव भी शामिल है, भले ही कोई देश इसे ‘नस्ल’ के रूप में वर्गीकृत न करे।
  • समिति सदस्य देशों को आवधिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहती है, जिसमें वे नस्लीय भेदभाव को रोकने और समाप्त करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हैं।
  • यह उन व्यक्तियों या समूहों से शिकायतें भी प्राप्त कर सकती है जो मानते हैं कि उनके अधिकारों का उल्लंघन किया गया है, बशर्ते संबंधित देश ने इस प्रक्रिया को मान्यता दी हो।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (UN CERD) यह एक संधि निकाय है जो नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
भारत द्वारा अभिसमय का अनुसमर्थन भारत ने 1968 में ICERD का अनुसमर्थन किया, जो नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जातिगत भेदभाव पर CERD का रुख समिति जातिगत भेदभाव को ‘विरासत में मिली स्थिति’ के आधार पर भेदभाव के रूप में मानती है, भले ही भारत इसे नस्ल के दायरे से बाहर मानता हो।
नागरिक समाज संगठनों पर प्रभाव FCRA, UAPA, AFSPA, और PMLA जैसे कानूनों का उपयोग नागरिक समाज संगठनों के काम में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है।
डेटा की कमी जनगणना में देरी और NCRB डेटा के धीमी गति से जारी होने के कारण वंचित समुदायों पर खंडित डेटा की कमी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थिति NHRC की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए गए हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

महत्व

अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं मानवाधिकार

  • यह रिपोर्ट भारत की मानवाधिकार स्थिति पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंता को दर्शाती है।
  • यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाती है।
  • यह भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी मानवाधिकार नीतियों का बचाव करने के लिए दबाव डालती है।

शासन एवं विधि

  • यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ हिंसा के आरोपों को उजागर करती है।
  • यह नागरिकता, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक समाज संगठनों पर लागू होने वाले कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करती है।
  • यह घृणास्पद भाषण और मैनुअल मैला ढोने जैसी प्रथाओं को संबोधित करने में कानूनी ढांचे की कमियों को इंगित करती है।

सामाजिक न्याय एवं समावेश

  • यह दलितों, जातीय-धार्मिक समूहों और गैर-नागरिकों के खिलाफ भेदभाव की व्यापकता को रेखांकित करती है।
  • यह वंचित समुदायों के सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में सटीक डेटा की कमी पर प्रकाश डालती है।
  • यह हाशिए पर पड़े समूहों के लिए न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देती है।

चुनौतियाँ

1. भेदभाव और हिंसा

  • अल्पसंख्यक जातीय और जातीय-धार्मिक समूहों, दलितों और गैर-नागरिकों के खिलाफ हिंसा की रिपोर्टें।
  • घृणास्पद भाषण और मैनुअल मैला ढोने जैसी प्रथाओं का जारी रहना।

2. कानूनी और संस्थागत चुनौतियाँ

  • नागरिक समाज संगठनों के काम में बाधा डालने के लिए कानूनों (FCRA, UAPA, AFSPA, PMLA) का उपयोग।
  • भारतीय न्याय संहिता में नस्लीय घृणास्पद भाषण को स्पष्ट रूप से अपराधी न बनाना।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्वतंत्रता और बहुलवाद की कमी।

3. डेटा और पारदर्शिता

  • जनगणना में देरी और NCRB डेटा के धीमी गति से जारी होने के कारण खंडित डेटा की कमी।
  • निर्वाचक नामावली के विशेष गहन संशोधन से बड़े पैमाने पर विलोपन।

4. नागरिकता और शरणार्थी मुद्दे

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के माध्यम से बड़े पैमाने पर नागरिकता से वंचित करना।
  • रोहिंग्या मुसलमानों का बड़े पैमाने पर प्रत्यावर्तन (refoulement)।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
कानून प्रवर्तन द्वारा हिंसा अल्पसंख्यक जातीय, जातीय-धार्मिक समूहों, दलितों और गैर-नागरिकों के खिलाफ हिंसा की रिपोर्टें।
जातिगत भेदभाव भारत द्वारा इसे नस्ल से अलग मानने के बावजूद CERD द्वारा ‘विरासत में मिली स्थिति’ के आधार पर भेदभाव के रूप में मान्यता।
मैनुअल मैला ढोना कानून द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद इस प्रथा का जारी रहना।
नागरिक समाज संगठनों पर प्रतिबंध FCRA, UAPA, AFSPA, PMLA जैसे कानूनों का उपयोग करके उनके काम में बाधा डालना।
घृणास्पद भाषण भारतीय न्याय संहिता में नस्लीय घृणास्पद भाषण को स्पष्ट रूप से अपराधी न बनाना।
डेटा की कमी और पारदर्शिता का अभाव जनगणना में देरी, NCRB डेटा का धीमा जारी होना और निर्वाचक नामावली में बड़े पैमाने पर विलोपन।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्वतंत्रता और बहुलवाद को बहाल करना।
  • घृणास्पद भाषण को अपराधी बनाने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करना।
  • सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) उपायों को सहायक बनाना और उनका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • वंचित समुदायों पर खंडित डेटा एकत्र करना और प्रकाशित करना।
  • निर्वाचक नामावली के संशोधनों में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करना।
  • भेदभाव विरोधी कानूनों और नीतियों के प्रवर्तन को मजबूत करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना और CERD की सिफारिशों पर विचार करना।
  • नागरिक समाज संगठनों के लिए अनुकूल वातावरण बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जातिगत भेदभाव · नस्लीय भेदभाव · संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) · मानवाधिकार · अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही · नागरिक समाज संगठन · राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) · घृणास्पद भाषण · भेदभाव-विरोधी कानून · संघवाद

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 14’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
  • {‘अनुच्छेद 15’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध’}
  • {‘अनुच्छेद 17’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन’}
  • {‘अनुच्छेद 21’: ‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण’}
  • {‘अनुच्छेद 23’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध’}

अवधारणा प्रवाह

भेदभाव के आरोप  →  संयुक्त राष्ट्र CERD की समीक्षा  →  चिंताओं का व्यक्त होना  →  भारत की प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण  →  आगे की राह और सिफारिशें

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के तहत एक संधि निकाय है।
2. भारत ने नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) का अनुसमर्थन 1968 में किया था।
3. CERD की रिपोर्टें सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। CERD संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तहत नहीं, बल्कि नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) के तहत स्थापित एक संधि निकाय है। कथन 2 सही है। भारत ने 1968 में ICERD का अनुसमर्थन किया था। कथन 3 गलत है। CERD की रिपोर्टें और सिफारिशें सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती हैं, बल्कि वे मार्गदर्शन और निगरानी प्रदान करती हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम भारत में नागरिक समाज संगठनों (CSOs) के कार्य को प्रभावित करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसा कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है?
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA)
2. गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA)
3. सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA)
4. धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1, 2 और 3
  3. केवल 1, 2 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — CERD ने अपनी रिपोर्ट में FCRA, UAPA, AFSPA और PMLA जैसे कानूनों का उल्लेख किया है, जिनका उपयोग नागरिक समाज संगठनों के काम में बाधा डालने के लिए किया जा सकता है। इसलिए, सभी चारों विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) की हालिया रिपोर्ट में भारत में भेदभाव के विभिन्न रूपों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इस संदर्भ में, भारत में जातिगत भेदभाव और नस्लीय भेदभाव के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए, इन चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक संवैधानिक और विधायी उपायों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** CERD की रिपोर्ट और भारत पर उसके निष्कर्षों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **जातिगत भेदभाव बनाम नस्लीय भेदभाव:**
* भारत सरकार का दृष्टिकोण (जाति नस्ल नहीं है)।
* CERD का दृष्टिकोण (विरासत में मिली स्थिति के आधार पर भेदभाव को शामिल करना)।
* दोनों के बीच सैद्धांतिक और व्यावहारिक अंतर।
3. **CERD द्वारा उठाई गई प्रमुख चिंताएँ:**
* कानून प्रवर्तन द्वारा हिंसा।
* सफाई कर्मचारियों की स्थिति।
* घृणास्पद भाषण और रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा।
* नागरिकता से वंचित करना (NRC)।
* नागरिक समाज संगठनों पर कानूनों का प्रभाव (FCRA, UAPA, AFSPA, PMLA)।
* राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्वतंत्रता पर चिंताएँ।
* डेटा की कमी।
4. **संवैधानिक और विधायी उपाय:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 21, 23, 46, 330, 332, 335।
* **विधायी उपाय:** नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955; अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989; हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अधिनियम, 1993।
* **सुधारों की आवश्यकता:** घृणास्पद भाषण को अपराधीकरण, NHRC की स्वतंत्रता बहाल करना, विखंडित डेटा एकत्र करना और प्रकाशित करना, चुनावी रोल संशोधन में पारदर्शिता।
5. **आलोचनात्मक परीक्षण:**
* मौजूदा कानूनों और प्रावधानों की प्रभावशीलता।
* कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और कमियाँ।
* अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही से बचने के प्रयास।
* नागरिक समाज की भूमिका।
6. **निष्कर्ष:** समावेशी समाज के निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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