सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना को किया अधिसूचित, चिप पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा बढ़ावा

Govt notifies Rs 1.27 lakh crore Semicon 2.0 scheme to boost chip ecosystem — diagram

सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना को किया अधिसूचित, चिप पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा बढ़ावा

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✎ सेमीकॉन 2.0 योजना 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास
  • Prelims: सेमीकंडक्टर, सेमीकॉन 2.0 योजना, चिप विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आत्मनिर्भर भारत, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
  • Essay: भारत की आर्थिक संवृद्धि में प्रौद्योगिकी की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वदेशी विनिर्माण का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: सेमीकॉन 2.0 योजना 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने देश में चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (chip manufacturing ecosystem) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को अधिसूचित किया है। इस योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है, जिसका लक्ष्य सेमीकंडक्टर उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (value chain) में विभिन्न क्षेत्रों को राजकोषीय सहायता प्रदान करना है। यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के मूलभूत घटक हैं और इनका उपयोग स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है।
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में व्यवधानों ने विभिन्न उद्योगों पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे देशों को घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई है।
  • भारत सरकार ने पहले भी सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजनाएं शामिल हैं।
  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना (critical infrastructure) के लिए आवश्यक है।
  • भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रतिभा का एक मजबूत आधार है, लेकिन विनिर्माण क्षमता का अभाव रहा है, जिसे यह योजना संबोधित करना चाहती है।

सेमीकॉन 2.0 योजना क्या है?

  • सेमीकॉन 2.0 योजना भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित एक व्यापक पहल है।
  • इस योजना का कुल परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग के विभिन्न ऊर्ध्वाधर (verticals) को राजकोषीय सहायता प्रदान करना है।
  • योजना को छह खंडों में विभाजित किया गया है, जिनमें भारतीय फर्मों द्वारा चिप्स का डिजाइन, चिप उत्पादन के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरणों की इकाइयों की स्थापना, सेमीकंडक्टर फैब्स (fabs), चिप असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण शामिल हैं।
  • इसका लक्ष्य राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए लक्षित खंड प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और परिनियोजन (deployment) पर ध्यान केंद्रित करके सुदृढ़, विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का निर्माण करना है।
  • यह योजना सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP) कोर, चिप्स, सिस्टम-ऑन-चिप्स (System-on-Chips – SoCs) और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए मॉड्यूल के स्थानीय विकास को लक्षित करेगी।
  • योजना के तहत विभिन्न प्रकार के कंप्यूट, मेमोरी, RF, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर आदि के लिए मानक IP सहित बिल्डिंग ब्लॉक्स विकसित किए जाएंगे।
  • इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परिव्यय सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए १.२७ लाख करोड़ रुपये का वित्तीय समर्थन।
छह खंड चिप डिजाइन, पूंजीगत उपकरण, सेमीकंडक्टर फैब, चिप असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करता है।
नीतिगत समर्थन भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए निरंतर और स्थायी नीतिगत सहायता प्रदान करने का लक्ष्य।
आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए लचीली, विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित।
बौद्धिक संपदा (IP) विकास सेमीकंडक्टर IP कोर, चिप्स, सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoCs) और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए मॉड्यूल के स्थानीय विकास को लक्षित करता है।
बिल्डिंग ब्लॉक्स विभिन्न प्रकार के कंप्यूट, मेमोरी, RF, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर के लिए मानक IP विकसित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, विशेषकर उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में।
  • यह योजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic growth) को गति मिलेगी।

रणनीतिक महत्व

  • सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में संप्रभुता (Sovereignty) राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए आवश्यक है, क्योंकि ये आधुनिक रक्षा प्रणालियों और संचार नेटवर्क का आधार हैं।
  • घरेलू स्तर पर चिप डिजाइन और विनिर्माण क्षमता विकसित करने से भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति भारत की भेद्यता (Vulnerability) कम होगी।
  • यह योजना भारत को एक विश्वसनीय प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में स्थापित करेगी, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी हस्तांतरण के अवसर बढ़ेंगे।

तकनीकी महत्व

  • चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग सहित संपूर्ण सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • स्थानीय रूप से बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP) के विकास पर ध्यान केंद्रित करने से भारत तकनीकी नवाचार का केंद्र बन सकता है।
  • यह योजना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things) और 5G/6G संचार के विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

चुनौतियाँ

1. उच्च पूंजीगत निवेश

  • सेमीकंडक्टर फैब (Fab) स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर का भारी निवेश आवश्यक होता है, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक चुनौती है।
  • इस क्षेत्र में निवेश पर प्रतिफल (Return on investment) की अवधि लंबी होती है, जिससे निजी निवेशकों को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

2. तकनीकी विशेषज्ञता की कमी

  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जिसकी भारत में कमी है।
  • उन्नत अनुसंधान और विकास तथा कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • सेमीकंडक्टर उद्योग पर कुछ प्रमुख वैश्विक खिलाड़ियों का प्रभुत्व है, जिनके पास दशकों का अनुभव और स्थापित पारिस्थितिकी तंत्र है।
  • भारत को इन स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

4. बुनियादी ढांचा और आपूर्ति श्रृंखला

  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति, स्वच्छ जल और विशेष रसायनों जैसे मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
  • एक विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखला (Supply chain) विकसित करना आवश्यक है, जो वैश्विक व्यवधानों से अप्रभावित रहे।

5. अनुसंधान एवं विकास (R&D)

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में निरंतर नवाचार और R&D महत्वपूर्ण है, जिसके लिए पर्याप्त निवेश और एक मजबूत अकादमिक-उद्योग इंटरफेस की आवश्यकता है।
  • भारत में R&D व्यय अभी भी वैश्विक मानकों से कम है, जिससे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास में बाधा आ सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च पूंजीगत लागत सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना में भारी निवेश और लंबी प्रतिफल अवधि।
कुशल कार्यबल की कमी विशेषज्ञता और तकनीकी कौशल वाले इंजीनियरों तथा वैज्ञानिकों की अपर्याप्त उपलब्धता।
वैश्विक बाजार प्रभुत्व स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा और बाजार में प्रवेश की बाधाएँ।
बुनियादी ढाँचागत आवश्यकताएँ निर्बाध बिजली, जल और विशेष रसायनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
अनुसंधान एवं विकास निवेश नवाचार और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकास के लिए पर्याप्त R&D व्यय की आवश्यकता।
भू-राजनीतिक जोखिम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता और संभावित व्यापार युद्धों का प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme)

आगे की राह

  • सरकार को वित्तीय प्रोत्साहन के साथ-साथ ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ जैसी नियामक सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए ताकि निवेश को आकर्षित किया जा सके।
  • सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण में विशेषज्ञता वाले कुशल कार्यबल को विकसित करने के लिए अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी और संयुक्त उद्यमों (Joint ventures) को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विशेषज्ञता प्राप्त की जा सके।
  • अनुसंधान और विकास (R&D) में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ाना चाहिए, विशेष रूप से अगली पीढ़ी की चिप प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक विश्वसनीय और लचीले बुनियादी ढांचे, जैसे निर्बाध बिजली और जल आपूर्ति, का विकास सुनिश्चित करना चाहिए।
  • एक मजबूत बौद्धिक संपदा (IP) व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए जो नवाचार को प्रोत्साहित करे और घरेलू डिजाइन क्षमताओं को सुरक्षित रखे।
  • घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को प्रोत्साहन देना चाहिए, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्मित चिप्स के लिए बाजार तैयार हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सेमीकंडक्टर विनिर्माण · सेमीकॉन 2.0 योजना · चिप इकोसिस्टम · आत्मनिर्भर भारत · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · राजकोषीय सहायता · डिजाइन से पैकेजिंग · राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताएँ · बौद्धिक संपदा · आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा सेमीकॉन २.० योजना की अधिसूचना  →  १.२७ लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय  →  चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग में निवेश  →  घरेलू सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास  →  आयात निर्भरता में कमी और आत्मनिर्भरता  →  आर्थिक संवृद्धि और रणनीतिक स्वायत्तता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सेमीकॉन 2.0 योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का उद्देश्य भारत में चिप विनिर्माण इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।
2. यह योजना केवल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
3. इसका कुल परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में चिप विनिर्माण इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण सहित सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला को कवर करती है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का कुल परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से सेमीकॉन 2.0 योजना का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. भारतीय फर्मों द्वारा चिप डिजाइनिंग को बढ़ावा देना।
2. चिप उत्पादन के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरणों की इकाइयों की स्थापना।
3. सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP) कोर का स्थानीय विकास।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सेमीकॉन 2.0 योजना का लक्ष्य चिप डिजाइनिंग, पूंजीगत उपकरणों की स्थापना और सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP) कोर के स्थानीय विकास सहित सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं को बढ़ावा देना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन 2.0 योजना के उद्देश्यों और प्रमुख घटकों की विवेचना कीजिए। यह योजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार बनाने में कैसे सहायक हो सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सेमीकंडक्टर के महत्व और भारत की वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख।
2. सेमीकॉन 2.0 योजना के उद्देश्य: योजना के मुख्य लक्ष्यों को सूचीबद्ध करें, जैसे आत्मनिर्भरता, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, रणनीतिक महत्व।
3. प्रमुख घटक: योजना के छह खंडों का विस्तार से वर्णन करें, जिनमें चिप डिजाइन, पूंजीगत उपकरण, सेमीकंडक्टर फैब्स, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण शामिल हैं।
4. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका: चर्चा करें कि यह योजना भारत को कैसे एक विश्वसनीय भागीदार बना सकती है (जैसे स्थानीय IP विकास, विनिर्माण क्षमता, भू-राजनीतिक स्थिरता)।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: संभावित चुनौतियों (जैसे उच्च पूंजी निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी) और उन्हें दूर करने के उपायों का संक्षिप्त उल्लेख।
6. निष्कर्ष: भारत के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए योजना के महत्व को रेखांकित करें।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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