14 Oct विधायी विभाग ने विशेष अभियान 6 के तहत अभिलेख प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की
✎ विशेष अभियान (DARPG समन्वित) में स्वच्छता, छंटाई और लंबित मामलों का निपटान शामिल है; अभिलेख प्रबंधन का कानूनी आधार लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 तथा RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) है, और इसका सूत्र है— वर्गीकरण, अनुक्रमणिका…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): पारदर्शिता, जवाबदेही और ई-गवर्नेंस | GS Paper II — सरकारी नीतियाँ, प्रशासनिक सुधार तथा संस्थागत तंत्र | GS Paper II — नागरिक-केंद्रित प्रशासन, लोक शिकायत निवारण और सूचना का अधिकार
- Prelims: विशेष अभियान (Special Campaign) — लंबित मामलों के निपटान हेतु, अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची (Record Retention Schedule), छंटाई (Weeding Out), लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India), केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली (Central Secretariat Manual of Office Procedure), सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क), प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), ई-ऑफिस (e-Office), विधायी विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय
- Essay: पारदर्शी और जवाबदेह शासन में अभिलेख की भूमिका: फाइलों से डिजिटल अभिलेखागार तक, प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत स्मृति: सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और निपटान की संस्कृति
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान (DARPG समन्वित) में स्वच्छता, छंटाई और लंबित मामलों का निपटान शामिल है; अभिलेख प्रबंधन का कानूनी आधार लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 तथा RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) है, और इसका सूत्र है— वर्गीकरण, अनुक्रमणिका, प्रतिधारण अनुसूची, समीक्षा, छंटाई।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन 2 में ‘विशेष अभियान 6’ के अंतर्गत ‘अभिलेख प्रबंधन’ (Records Management) पर कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि के मार्गदर्शन में हुई और इसका नेतृत्व जेएस एवं एलसी श्री जी. पनमेई ने किया। इसमें विभाग के साथ-साथ राजभाषा खंड तथा विधि साहित्य प्रकाशन के कर्मियों ने भाग लिया। सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान के पूर्व संकाय सदस्य श्री रंजन कुमार रिसोर्स पर्सन थे। उन्होंने सरकारी फाइलों के वर्गीकरण, अनुक्रमणिका-निर्माण (Indexing), समय पर समीक्षा, अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची के पालन और निर्धारित नियमों के अनुसार छंटाई एवं निपटान पर बल दिया। कार्यशाला का संदेश यह रहा कि प्रभावी अभिलेख प्रबंधन प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही की पूर्व-शर्त है।
पृष्ठभूमि
- विशेष अभियान का आरंभ केंद्र सरकार ने 2021 में ‘लंबित मामलों के निपटान हेतु विशेष अभियान’ के रूप में किया था। तब से इसके कई संस्करण हो चुके हैं। इसका समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) करता है।
- अभियान के प्रमुख घटक हैं: कार्यालयों में स्वच्छता, अनावश्यक अभिलेखों की छंटाई, कार्यालय-स्थान का बेहतर उपयोग तथा सांसदों के संदर्भ, राज्य सरकारों के संदर्भ, अंतर-मंत्रालयीन संदर्भ, संसदीय आश्वासन और लोक शिकायतों जैसे लंबित मामलों का निपटान।
- केंद्र सरकार के कार्यालयों में फाइलों के संचालन की प्रक्रिया केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली (Central Secretariat Manual of Office Procedure) में निर्धारित है। इसमें फाइलों के वर्गीकरण, अभिलेख कक्ष में भेजने, समीक्षा और छंटाई की व्यवस्था दी गई है।
- लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) और लोक अभिलेख नियम, 1997 केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन, संरक्षण और अनधिकृत नष्टीकरण पर रोक का कानूनी ढाँचा देते हैं। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) संस्कृति मंत्रालय के अधीन इस अधिनियम के क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी पर अपने अभिलेखों को सूचीबद्ध और अनुक्रमित रूप में रखने का दायित्व डालती है। जहाँ संभव हो, उन्हें कंप्यूटरीकृत करना भी आवश्यक है। इस प्रकार अभिलेख प्रबंधन पारदर्शिता के कानूनी दायित्व से जुड़ा है।
- ई-ऑफिस और डिजिटल अभिलेखों के प्रसार से अभिलेख प्रबंधन का स्वरूप बदल रहा है। इसमें भौतिक फाइलों की छंटाई के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का संरक्षण, सुरक्षा और प्रतिधारण भी शामिल हो गया है।
अभिलेख प्रबंधन (Records Management) क्या है?
- अभिलेख प्रबंधन किसी संगठन के अभिलेखों के सृजन, वर्गीकरण, भंडारण, उपयोग, समीक्षा, संरक्षण और अंततः निपटान की व्यवस्थित प्रक्रिया है। इसे अभिलेख के ‘जीवन-चक्र’ का प्रबंधन भी कहा जाता है।
- वर्गीकरण और अनुक्रमणिका-निर्माण: फाइलों को विषय और शीर्षक के अनुसार वर्गीकृत कर अनुक्रमित करने से वांछित दस्तावेज़ शीघ्र मिलता है। यही RTI अधिनियम की धारा 4(1)(क) की अपेक्षा भी है।
- अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची (Record Retention Schedule): इसमें तय होता है कि किस प्रकार की फाइल कितने समय तक रखी जाएगी। केंद्रीय सचिवालय की नियमावली में फाइलों को श्रेणियों में बाँटा गया है। श्रेणी ‘क’ की फाइलें स्थायी रूप से रखी जाती हैं, जबकि अन्य श्रेणियों की फाइलें निर्धारित अवधि के लिए रखी जाती हैं।
- समीक्षा और छंटाई (Weeding Out): निर्धारित अवधि पूरी होने पर फाइलों की समीक्षा की जाती है। जिनका स्थायी मूल्य नहीं है, उन्हें सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति और नियमों के अनुसार नष्ट किया जाता है। जिनका ऐतिहासिक या स्थायी महत्व है, उन्हें सुरक्षित रखा जाता है। अनधिकृत नष्टीकरण दंडनीय है।
- राष्ट्रीय अभिलेखागार को अंतरण: लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुसार स्थायी महत्व के अभिलेख, जो 25 वर्ष से पुराने हों, मूल्यांकन के बाद अभिलेखागार को सौंपे जाते हैं। वर्गीकृत (Classified) अभिलेखों के लिए अलग प्रावधान हैं।
- शासन में महत्त्व: सुव्यवस्थित अभिलेख निर्णयों का प्रमाण होते हैं और संस्थागत स्मृति बनाए रखते हैं। इनसे जवाबदेही तय करना, लेखा-परीक्षा और न्यायिक या संसदीय जाँच में सहयोग तथा RTI अनुरोधों का समय पर निपटान संभव होता है। साथ ही स्थान और समय की बचत होती है।
- चुनौतियाँ: नियमों के पालन में असमानता, अभिलेख कक्षों में स्थान की कमी, प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव, डिजिटल अभिलेखों के दीर्घकालिक संरक्षण की समस्या और डेटा सुरक्षा।
- आगे की राह: ई-ऑफिस का व्यापक उपयोग, अभिलेखों का डिजिटलीकरण, कर्मियों का नियमित प्रशिक्षण (जैसे कार्यशालाएँ), प्रतिधारण अनुसूची का समय पर पालन और डिजिटल अभिलेखों के लिए स्पष्ट संरक्षण मानक।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत आयोजन | विशेष अभियान का समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना और लंबित मामलों का निपटान करना है। अभिलेख प्रबंधन इस अभियान का मुख्य घटक है, क्योंकि पुरानी फाइलों की छंटाई से कार्यालय का स्थान खाली होता है और काम की गति बढ़ती है। |
| विषय: अभिलेख प्रबंधन (Records Management) | इसमें अभिलेख के सृजन से लेकर उपयोग, रखरखाव, समीक्षा और अंतिम निपटान तक का पूरा जीवन-चक्र आता है। यह केवल फाइलें सँभालना नहीं है। यह सुशासन की आधारभूत प्रक्रिया है। |
| वर्गीकरण और अनुक्रमण पर बल | फाइलों का सही वर्गीकरण और अनुक्रमण (Indexing) होने पर आवश्यक दस्तावेज़ तत्काल मिल जाता है। इससे निर्णय में विलंब घटता है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) भी अभिलेखों को सूचीबद्ध और अनुक्रमित रखने का दायित्व डालती है। |
| अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची (Record Retention Schedule) और छंटाई (Weeding) | इसके अनुसार हर फाइल को एक निर्धारित अवधि तक रखा जाता है। स्थायी महत्त्व की फाइलें सदा के लिए संरक्षित होती हैं, शेष अवधि पूरी होने पर निर्धारित प्रक्रिया से नष्ट की जाती हैं। इससे अनावश्यक संग्रह रुकता है और ऐतिहासिक अभिलेख सुरक्षित रहते हैं। |
| सहभागिता का दायरा | विधायी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ राजभाषा खंड और विधि साहित्य प्रकाशन के कर्मियों ने भी भाग लिया। इससे संस्थागत प्रशिक्षण पूरे विभाग तक पहुँचा। विधायी विभाग के लिए यह इसलिए भी प्रासंगिक है कि उसके पास विधि-निर्माण और विधायी प्रारूपण से जुड़े अभिलेख रहते हैं। |
| बाह्य विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षण | सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान (ISTM) के पूर्व संकाय सदस्य को संसाधन व्यक्ति के रूप में बुलाया गया। यह क्षमता निर्माण का एक तरीका है। नियम-आधारित प्रक्रियाओं की जानकारी व्यावहारिक अनुभव वाले प्रशिक्षक से अधिक प्रभावी ढंग से मिलती है। |
महत्व
प्रशासनिक दक्षता
- व्यवस्थित अभिलेखों से फाइल खोजने में लगने वाला समय घटता है। इससे निर्णय-प्रक्रिया तेज़ होती है और लंबित मामलों में कमी आती है।
- अनावश्यक फाइलें हटने से कार्यालय का भौतिक स्थान खाली होता है। इस स्थान का बेहतर उपयोग हो सकता है और भंडारण की लागत घटती है।
- अभिलेखों में निरंतरता बनी रहने से अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी संस्थागत स्मृति सुरक्षित रहती है। नया अधिकारी पुराने निर्णयों का आधार समझ पाता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभिलेखों का सुव्यवस्थित होना पहली शर्त है। जो अभिलेख खोजा ही न जा सके, उसकी सूचना नागरिक को नहीं दी जा सकती।
- फाइलों में निर्णय के कारण और जिम्मेदार अधिकारी का स्पष्ट उल्लेख होने से लेखा-परीक्षा, संसदीय समितियों और न्यायिक समीक्षा में जवाबदेही तय करना आसान होता है।
- निर्धारित नियमों के अनुसार निपटान होने से अभिलेखों के अनधिकृत विनाश या छेड़छाड़ की आशंका घटती है।
विधिक और ऐतिहासिक महत्त्व
- विधायी विभाग के अभिलेख विधि-निर्माण की प्रक्रिया, प्रारूपण और विधायी मंशा को समझने में काम आते हैं। न्यायालय और शोधकर्ता भविष्य में इनका उपयोग कर सकते हैं।
- सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुसार स्थायी महत्त्व के अभिलेख राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) को सौंपे जाते हैं। इससे राष्ट्रीय स्मृति और इतिहास का संरक्षण होता है।
संस्थागत सुधार और क्षमता निर्माण
- विशेष अभियान के माध्यम से स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन नियमित कार्य-संस्कृति का हिस्सा बन रहे हैं। इस दिशा में कार्यशालाएँ कर्मचारियों में नियमों की समझ बढ़ाती हैं।
- ई-ऑफिस और डिजिटल अभिलेखों की ओर बढ़ते कदम के साथ, भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के अभिलेखों के लिए मानक प्रक्रिया की आवश्यकता है। ऐसी कार्यशालाएँ उस आवश्यकता की पूर्ति करती हैं।
चुनौतियाँ
1. अभियान-आधारित दृष्टिकोण की सीमा
- विशेष अभियान कुछ सप्ताहों तक चलते हैं। अभियान समाप्त होने के बाद सफ़ाई और छंटाई की गति धीमी पड़ने का जोखिम रहता है।
- लक्ष्य पूरे करने की होड़ में गुणवत्ता की जगह संख्या पर ध्यान जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि फाइलें हटाई तो जाती हैं, पर उनकी समीक्षा ठीक से नहीं होती।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन, सुधार और संस्थागत क्षमता
2. भौतिक और डिजिटल अभिलेखों का दोहरा बोझ
- अनेक कार्यालयों में अभी भी कागज़ी फाइलें और ई-ऑफिस की डिजिटल फाइलें साथ-साथ चलती हैं। दोनों के प्रतिधारण और निपटान के नियम समान रूप से लागू करना कठिन है।
- डिजिटल अभिलेखों के लिए प्रारूप का अप्रचलित होना, भंडारण की लागत और साइबर सुरक्षा जैसी नई समस्याएँ हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2/3: ई-शासन, सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा
3. प्रशिक्षण और मानव संसाधन की कमी
- अभिलेख अधिकारी और कर्मचारी प्रायः अन्य कार्यों के साथ यह जिम्मेदारी निभाते हैं। उनके पास विशेष प्रशिक्षण और समय का अभाव रहता है।
- एकदिवसीय कार्यशालाएँ जागरूकता तो बढ़ाती हैं, पर कौशल का स्थायी विकास नहीं कर पातीं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लोक सेवा, क्षमता निर्माण (Mission Karmayogi)
4. संरक्षण और विनाश के बीच संतुलन
- किसी अभिलेख को समय से पहले नष्ट करने पर भविष्य में विधिक विवाद या जाँच में आवश्यक प्रमाण उपलब्ध नहीं रहते। अधिक समय तक रखने पर स्थान और लागत का बोझ बढ़ता है।
- व्यक्तिगत डेटा वाले अभिलेखों में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के सिद्धांत भी लागू होते हैं। प्रयोजन पूरा होने पर डेटा हटाने का दायित्व प्रतिधारण अनुसूची के साथ सामंजस्य माँगता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: पारदर्शिता, निजता और विधिक ढाँचा
5. राज्यों और स्थानीय निकायों में असमान क्षमता
- सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र सरकार और संघ राज्य क्षेत्रों के अभिलेखों पर लागू है। राज्यों के अपने अभिलेख कानून और नियम हैं, जिनकी गुणवत्ता और क्रियान्वयन में अंतर है।
- जिला और स्थानीय स्तर पर अभिलेख कक्ष की स्थिति कमज़ोर है। इससे भूमि, नागरिक सेवाओं और कल्याण योजनाओं के अभिलेखों में विवाद बढ़ते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अभियान की निरंतरता | अभियान के बाद अभिलेख प्रबंधन फिर उपेक्षित हो सकता है। इसके लिए नियमित वार्षिक समीक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था चाहिए। |
| डिजिटल अभिलेखों का संरक्षण | प्रारूप का अप्रचलित होना, डेटा हानि और साइबर हमले का खतरा। डिजिटल संरक्षण की स्पष्ट मानक प्रणाली आवश्यक है। |
| अनधिकृत या जल्दबाज़ी में विनाश | बिना समीक्षा के हटाई गई फाइलों से भविष्य में विधिक और ऐतिहासिक नुकसान। छंटाई के लिए अनुमोदन और अभिलेख-सूची अनिवार्य हो। |
| कौशल की कमी | अभिलेख रखरखाव में तकनीकी प्रशिक्षण का अभाव। नियमित प्रशिक्षण और प्रमाणन की आवश्यकता है। |
| सूचना के अधिकार का अनुपालन | अभिलेख खोजने में विलंब से सूचना देने में देरी होती है और अपील बढ़ती हैं। अनुक्रमण की गुणवत्ता से इसका सीधा संबंध है। |
| राज्य स्तर पर असमानता | राज्यों में अभिलेख कानून और अभिलेखागार की क्षमता असमान है। केंद्र के मानकों का अनुकरण और तकनीकी सहायता अपेक्षित है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विशेष अभियान (Special Campaign) — DARPG के समन्वय में, सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाने और लंबित मामलों के निपटान का वार्षिक अभियान; अभिलेख प्रबंधन इसका प्रमुख घटक है
- ई-ऑफिस (e-Office) मिशन मोड परियोजना — सरकारी कार्यालयों में फाइलों के डिजिटल संचालन की प्रणाली, जो भौतिक अभिलेखों का बोझ घटाती है
- केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) — विशेष अभियान में लोक शिकायतों के निपटान का भी लक्ष्य होता है
- मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) — सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण की राष्ट्रीय पहल; अभिलेख प्रबंधन जैसे प्रशिक्षण इसी भावना के अनुरूप हैं
- अभिलेख पटल (Abhilekh Patal) — राष्ट्रीय अभिलेखागार का डिजिटल पोर्टल, जिस पर अभिलेखों के डिजिटल संग्रह की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है
आगे की राह
- अभिलेख प्रबंधन को केवल अभियान तक सीमित न रखकर वर्ष भर की नियमित प्रक्रिया बनाया जाए। प्रत्येक शाखा में निर्धारित अंतराल पर समीक्षा और छंटाई हो।
- अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची का समय-समय पर पुनर्निरीक्षण किया जाए, ताकि वह डिजिटल अभिलेखों और नई विधिक आवश्यकताओं के अनुरूप रहे।
- ई-ऑफिस के अंतर्गत डिजिटल अभिलेखों के लिए अनुक्रमण, मेटाडेटा, बैकअप और दीर्घकालिक संरक्षण के मानक स्पष्ट किए जाएँ।
- सभी मंत्रालयों और विभागों में नामित अभिलेख अधिकारी को पर्याप्त प्रशिक्षण और अधिकार दिए जाएँ, और उनका प्रशिक्षण मिशन कर्मयोगी के iGOT मंच से जोड़ा जाए।
- छंटाई और निपटान की प्रक्रिया पारदर्शी बने। हर नष्ट की गई फाइल की सूची और अनुमोदन का अभिलेख रखा जाए, ताकि अनधिकृत विनाश रोका जा सके।
- स्थायी महत्त्व के अभिलेखों को सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुसार समय पर राष्ट्रीय अभिलेखागार को हस्तांतरित किया जाए और उनके डिजिटलीकरण को गति दी जाए।
- राज्यों को तकनीकी सहायता और साझा मानक देकर उनके अभिलेख कानूनों और अभिलेखागारों को सशक्त किया जाए।
- अभिलेख प्रबंधन के परिणामों का आकलन करने के लिए मापन योग्य संकेतक तय किए जाएँ, जैसे फाइल खोजने का औसत समय और सूचना के अधिकार के आवेदनों के निपटान की अवधि।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अभिलेख प्रबंधन (Records Management) · अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची (Record Retention Schedule) · लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 · राष्ट्रीय अभिलेखागार · छंटाई (Weeding) · वर्गीकरण एवं सूचीकरण (Classification and Indexing) · पारदर्शिता एवं जवाबदेही · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) · ई-ऑफिस एवं अभिलेखों का डिजिटलीकरण · विशेष अभियान (स्वच्छता एवं लंबित मामलों का निपटान) · संस्थागत स्मृति (Institutional Memory) · केंद्रीय सचिवालय कार्यविधि नियम पुस्तिका
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 77 — भारत सरकार के कार्य-संचालन की प्रक्रिया
- अनुच्छेद 19(1)(क) — सूचना का अधिकार, अभिव्यक्ति से संबद्ध
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 67 — राष्ट्रीय महत्त्व के ऐतिहासिक अभिलेख
अवधारणा प्रवाह
सरकारी कार्य के दौरान फाइलों और दस्तावेज़ों का सृजन → वर्गीकरण और अनुक्रमण से अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव → निर्धारित अंतराल पर अभिलेखों की समीक्षा → अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची के अनुसार संरक्षण या छंटाई का निर्णय → स्थायी महत्त्व के अभिलेखों का राष्ट्रीय अभिलेखागार में हस्तांतरण और शेष का विधिसम्मत निपटान → कार्यालय का स्थान खाली होना, खोज में सुगमता और निर्णय-प्रक्रिया में तेज़ी → पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अधिनियम केंद्र सरकार, संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासनों तथा केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों और वैधानिक निकायों के अभिलेखों पर लागू होता है।
2. यह अधिनियम सभी राज्य सरकारों के अभिलेखों के प्रबंधन को भी सीधे नियंत्रित करता है।
3. राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अधिनियम केंद्र सरकार के अभिलेखों पर लागू है। कथन 2 गलत है: राज्य सरकारों के अभिलेखों के लिए राज्यों के अपने अभिलेख कानून और अभिलेखागार हैं। कथन 3 सही है: राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय का संबद्ध कार्यालय है। अतः केवल दो कथन सही हैं।
Q2. अभिकथन (A): सरकारी कार्यालयों में अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची का पालन प्रशासनिक जवाबदेही के लिए आवश्यक है।
कारण (R): यह अनुसूची प्रत्येक श्रेणी की फाइलों को कितने समय तक रखा जाए और उनका निपटान कैसे हो, यह निर्धारित करती है। इससे अभिलेखों का समय से पहले नष्ट होना और अनावश्यक संचय, दोनों रुकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — प्रतिधारण अनुसूची से तय होता है कि कौन-सा अभिलेख स्थायी रूप से रखा जाए और कौन-सा समीक्षा के बाद छांटा जाए। इसी से आवश्यक अभिलेख उपलब्ध रहते हैं और जवाबदेही बनी रहती है। अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) के अंतर्गत प्रत्येक लोक प्राधिकारी का दायित्व क्या है?
- सभी अभिलेखों को 5 वर्ष बाद अनिवार्य रूप से नष्ट करना
- अपने सभी अभिलेखों को सुव्यवस्थित सूचीबद्ध एवं अनुक्रमित रूप में रखना तथा समुचित अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण करना
- सभी अभिलेख एक वर्ष के भीतर राष्ट्रीय अभिलेखागार को भेजना
- अभिलेखों को केवल संबंधित मंत्री की अनुमति से रखना
उत्तर: अपने सभी अभिलेखों को सुव्यवस्थित सूचीबद्ध एवं अनुक्रमित रूप में रखना तथा समुचित अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण करना — धारा 4(1)(क) लोक प्राधिकारी को निर्देश देती है कि वह सूचना का अधिकार सुगम बनाने के लिए अभिलेखों को विधिवत सूचीबद्ध और अनुक्रमित रखे तथा उपयुक्त अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण करे। अन्य विकल्पों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ “प्रभावी अभिलेख प्रबंधन पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की आधारशिला है।” लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। अभिलेखों के डिजिटलीकरण जैसी पहलें इस क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने में कहाँ तक सफल रही हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: विधायी विभाग की ‘अभिलेख प्रबंधन’ कार्यशाला (13 अक्टूबर 2026) और विशेष अभियान (स्वच्छता एवं लंबित मामलों का निपटान) का संदर्भ दें। अभिलेख प्रबंधन का अर्थ बताएँ: सृजन, वर्गीकरण, सूचीकरण, समीक्षा, संरक्षण, छंटाई और निपटान।
भाग 1 – कथन का परीक्षण:
(क) प्रशासनिक दक्षता: फाइलों की त्वरित उपलब्धता, संस्थागत स्मृति, निर्णयों की निरंतरता और लंबित मामलों में कमी।
(ख) पारदर्शिता: RTI अधिनियम की धारा 4(1)(क) के अनुसार अभिलेख सूचीबद्ध, अनुक्रमित और यथासंभव कंप्यूटरीकृत हों। अभिलेख न मिलना (‘फाइल गुम’) सूचना के अधिकार को निष्फल करता है।
(ग) जवाबदेही: लेखा-परीक्षण, न्यायिक समीक्षा और जाँच के लिए अभिलेख साक्ष्य हैं। निर्णय-प्रक्रिया का अभिलेख ही उत्तरदायित्व तय करने का आधार है।
(घ) विधिक ढाँचा: लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और लोक अभिलेख नियम, 1997 केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन का ढाँचा देते हैं। सामान्यतः 25 वर्ष पुराने अभिलेखों का मूल्यांकन और राष्ट्रीय अभिलेखागार को अंतरण होता है, गोपनीय अभिलेख अपवाद हैं। अभिलेखों का अनधिकृत विनाश दंडनीय है। केंद्रीय सचिवालय कार्यविधि नियम पुस्तिका अभिलेखों की श्रेणियाँ (स्थायी संरक्षण से लेकर अल्पावधि तक), समीक्षा और छंटाई की व्यवस्था देती है। राज्यों के अपने अभिलेख कानून हैं।
भाग 2 – डिजिटलीकरण का मूल्यांकन:
उपलब्धियाँ: ई-ऑफिस से फाइल का इलेक्ट्रॉनिक प्रवाह और ऑडिट ट्रेल, स्थान की बचत, खोज की सुगमता, राष्ट्रीय अभिलेखागार का ‘अभिलेख पटल’ पोर्टल, विशेष अभियानों से कार्यालयों की सफाई और पुराने अभिलेखों की छंटाई।
चुनौतियाँ: विरासत में मिले कागजी अभिलेखों का अंतराल, मेटाडेटा और मानकों का अभाव, प्रशिक्षित अभिलेख कर्मियों की कमी, डिजिटल संरक्षण की लागत, साइबर सुरक्षा, राज्य स्तर पर असमान क्षमता, और अत्यधिक छंटाई से ऐतिहासिक सामग्री खोने का जोखिम। संतुलन: गोपनीयता और प्रकटीकरण के बीच संतुलन तथा निजता का प्रश्न।
आगे की राह: डिजिटल अभिलेख संरक्षण के राष्ट्रीय मानक, प्रतिधारण अनुसूची का नियमित अद्यतन, अभिलेख सृजन के समय ही डिजिटल अभिलेख रखना, सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान (ISTM) जैसे संस्थानों के माध्यम से क्षमता निर्माण, दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की RTI पर रिपोर्ट के अभिलेख प्रबंधन संबंधी सुझावों का क्रियान्वयन, और सुधार का सतत अनुश्रवण।
निष्कर्ष: अभिलेख प्रबंधन केवल कार्यालयी स्वच्छता नहीं, बल्कि सुशासन का आधारभूत संस्थागत ढाँचा है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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