26 Oct आईआईटी मद्रास का अध्ययन: एआई नौकरियां नहीं छिनेगी, पर शुरुआती कर्मचारियों को खतरा
✎ कृत्रिम बुद्धिमत्ता मुख्यतः पद के भीतर के कार्यों को बदलती है, पूरे पद को नहीं; प्रवेश-स्तरीय कामगार सर्वाधिक जोखिम में हैं, क्योंकि दोहराव वाले कार्य ही उनके अनुभव और कैरियर-सीढ़ी का आधार होते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (रोजगार, कौशल विकास, औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र का विकास) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव) | GS Paper II — शासन (श्रम कानून, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास से संबंधित नीतियाँ)
- Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), स्वचालन (Automation) और संवर्धन (Augmentation) में अंतर, बीपीओ (BPO) उद्योग और उसकी रोजगार-संरचना, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) का उत्तरदायी AI केंद्र (CeRAI), सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020), पुनर्कौशलन (Reskilling) और कौशल भारत मिशन (Skill India Mission), इंडिया एआई मिशन (IndiaAI Mission), डिजिटल इंडिया (Digital India)
- Essay: तकनीकी परिवर्तन में रोजगार का भविष्य: कार्य का विलोपन या रूपांतरण?, स्वचालन के युग में कौशल, अनुभव और सामाजिक सुरक्षा का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता मुख्यतः पद के भीतर के कार्यों को बदलती है, पूरे पद को नहीं; प्रवेश-स्तरीय कामगार सर्वाधिक जोखिम में हैं, क्योंकि दोहराव वाले कार्य ही उनके अनुभव और कैरियर-सीढ़ी का आधार होते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
IIT Madras के उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र (Centre for Responsible AI, CeRAI) ने श्वेतपत्र ‘How AI Is Reconfiguring Work in India’ जारी किया है। इसका केंद्रीय निष्कर्ष यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सामान्यतः किसी पूरे पद या व्यवसाय को एकाएक समाप्त नहीं करती, बल्कि उस पद के भीतर के अलग-अलग कार्यों को बदलती है। पत्र के अनुसार प्रवेश-स्तर के कामगार सबसे अधिक जोखिम में हैं, क्योंकि उनके दोहराव वाले कार्य ही वह प्रशिक्षण-आधार हैं जिससे आगे चलकर अनुभव और निर्णय-क्षमता विकसित होती है। पत्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाते रहने, भारत-विशिष्ट श्रम-बाज़ार अनुसंधान बढ़ाने, प्रभावित कामगारों के लिए संरचित संक्रमण-मार्ग बनाने तथा पुनर्कौशलन को वास्तविक वैकल्पिक भूमिकाओं से जोड़ने की सिफारिश की है, साथ ही यह स्पष्ट करने पर बल दिया है कि पुनर्कौशलन का व्यय कौन वहन करेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत का सेवा क्षेत्र, विशेषकर बीपीओ और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ, बड़ी संख्या में युवाओं को प्रवेश-स्तर का रोजगार देता है, इसलिए वहाँ के कार्यों में बदलाव का सीधा प्रभाव श्रम-बाज़ार पर पड़ता है।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अंतर्गत चालान-प्रसंस्करण और लेखा-कार्य में स्वचालन के उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहाँ कम लागत वाले, कार्य-विशिष्ट (task-specific) सिस्टम प्रयोग किए जा सकते हैं।
- डिजिटल इंडिया (2015) और कौशल भारत मिशन (2015) जैसी पहलों ने डिजिटल अवसंरचना और कौशल-प्रशिक्षण का आधार तैयार किया है, जबकि इंडिया एआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के स्वदेशी इकोसिस्टम पर केंद्रित है।
- श्रम संहिताओं (2020) में चार संहिताओं के अंतर्गत पूर्ववर्ती 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित किया गया, और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में असंगठित, गिग तथा प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे संक्रमण के दौरान सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न प्रासंगिक हो जाता है।
- सेवा-क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का अनुभव यह बताता है कि किसी भी कार्य का स्वचालन, उसके लागत-लाभ, नियामक ढाँचे और तकनीक के उपयोग-मूल्य पर निर्भर करता है, न कि केवल तकनीकी क्षमता पर।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कार्य-संरचना में बदलाव क्या है?
- कार्य (Task), पद (Job) और व्यवसाय (Occupation) अलग-अलग इकाइयाँ हैं। किसी पद में अनेक कार्य होते हैं; AI पहले कार्य-स्तर पर प्रभाव डालती है और उसके बाद पद या व्यवसाय तक पहुँचती है।
- पत्र के अनुसार प्रभाव चार स्तरों पर देखा जाता है: व्यक्तिगत कार्य, पद, व्यवसाय और समग्र श्रम-बाज़ार परिणाम।
- दो व्यापक प्रारूप हैं: (क) स्वचालन-प्रधान प्रारूप, जिसमें AI अधिकांश दोहराव वाले कार्य करती है और मनुष्य मुख्यतः उसके परिणाम की जाँच करते हैं या अपवादों को सँभालते हैं; (ख) संवर्धन-प्रधान प्रारूप, जिसमें मुख्य कार्य मनुष्य के पास रहता है और AI उत्पादकता बढ़ाने वाले उपकरण के रूप में काम करती है।
- कार्य का स्वचालन प्रायः लागत पर निर्भर करता है। जहाँ मानव श्रम की लागत और स्वचालित प्रणाली की लागत में अंतर निर्णायक हो, वहाँ अपनाना व्यावसायिक रूप से आकर्षक होता है, विशेषकर कम लाभ-मार्जिन वाले उद्योगों में।
- प्रवेश-स्तरीय पदों पर खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि वहाँ के दोहराव वाले कार्य ही अनुभव-निर्माण का माध्यम होते हैं। यदि ये कार्य स्वचालित हो जाएँ, तो संस्थाओं को निर्णय-क्षमता विकसित करने के नए तरीके खोजने होंगे, अन्यथा कैरियर की सीढ़ी में अंतराल बन सकता है।
- संक्रमण-नीति के प्रमुख प्रश्न हैं: पुनर्कौशलन का स्वरूप क्या हो, वह वास्तविक वैकल्पिक भूमिकाओं से कैसे जुड़े, और उसका व्यय नियोक्ता, सरकार या कामगार में से कौन वहन करे।
- तकनीक के प्रभाव को समझने के लिए भारत-विशिष्ट आँकड़े और अनुसंधान आवश्यक हैं, क्योंकि विकसित देशों के अध्ययन भारतीय सेवा-क्षेत्र की संरचना पर सीधे लागू नहीं होते।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चार स्तरीय विश्लेषण | रिपोर्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के प्रभाव को कार्य, नौकरी, पेशा और समग्र श्रम-बाज़ार परिणाम, इन चार स्तरों पर परखती है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी एक कार्य का स्वचालन अपने-आप पूरे पेशे को समाप्त नहीं करता। |
| दो प्रारूप | पहले प्रारूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अधिकांश नियमित कार्य करती है और मनुष्य उसके परिणाम की पुष्टि करते हैं या अपवाद सँभालते हैं। दूसरे प्रारूप में मुख्य कार्य मनुष्य के पास रहता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्पादकता बढ़ाने वाले उपकरण की भूमिका निभाती है। |
| सात मार्ग | ये दो प्रारूप सात मार्गों के भीतर फैले हैं, जो बताते हैं कि अलग-अलग उद्योगों में स्वचालन के परिणाम भिन्न क्यों होते हैं। |
| लागत-संवेदी सेवा अर्थव्यवस्था | नियमित बीपीओ (BPO) कॉल, वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़ी बहीखाता प्रविष्टि, बीजक प्रसंस्करण और विनिर्माण गुणवत्ता जाँच में कार्य-विशिष्ट प्रणालियाँ अपेक्षाकृत सस्ती होने के कारण अपनाई जा रही हैं। |
| प्रवेश-स्तरीय नौकरियों की संवेदनशीलता | इन पदों के नियमित कार्य ही अनुभवी पेशेवरों के प्रशिक्षण का आधार भी हैं, इसलिए इनका स्वचालन करियर की सीढ़ी के निचले पायदान को सबसे पहले प्रभावित करता है। |
महत्व
आर्थिक
- पतले लाभ-मार्जिन वाले व्यवसायों के लिए मानव श्रम और स्वचालित प्रणाली की लागत का अंतर अपनाने का प्रमुख कारण बनता है।
- सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में कार्य-स्तरीय स्वचालन से उत्पादकता बढ़ने की संभावना है, किंतु इसका लाभ किसे मिलेगा, यह वितरण पर निर्भर करेगा।
- आर्थिक संवृद्धि के साथ रोज़गार-सृजन का संबंध तभी बना रहेगा जब कार्य-संरचना के परिवर्तन को नीति से सहारा मिले।
श्रम-बाज़ार और सामाजिक
- प्रवेश-स्तरीय कर्मचारियों पर सबसे अधिक दबाव है, जिससे युवाओं के पहले रोज़गार का अवसर प्रभावित हो सकता है।
- यदि अनुभव अर्जित करने वाले नियमित कार्य घट जाएँ, तो भविष्य में वरिष्ठ पदों के लिए आवश्यक निर्णय-क्षमता विकसित होना कठिन होगा।
- नौकरी का स्वरूप बदलने से कर्मचारियों की कौशल-आवश्यकताएँ बदलती हैं, जिसके लिए संक्रमण-व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
नीति-निर्माण और शोध
- भारत की सेवा-प्रधान और लागत-संवेदी अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारत-विशिष्ट श्रम-बाज़ार अनुसंधान आवश्यक है।
- कार्य-स्तरीय विश्लेषण नीति को अधिक लक्षित बनाता है, क्योंकि पूरे पेशे को एक इकाई मानने से वास्तविक जोखिम छिप सकता है।
- शैक्षणिक संस्थानों की शोध-रिपोर्टें नीति-विमर्श के लिए साक्ष्य उपलब्ध कराती हैं।
चुनौतियाँ
1. प्रवेश-स्तरीय सीढ़ी का टूटना
- नियमित कार्यों का स्वचालन उन्हीं अवसरों को कम करता है जिनसे नए कर्मचारी व्यावहारिक अनुभव लेते हैं।
- यदि संगठन मूल कार्य स्वचालित कर दें और अनुभव-निर्माण के वैकल्पिक तरीके न बनाएँ, तो विशेषज्ञता की आपूर्ति कमज़ोर पड़ सकती है।
- इसका प्रभाव तत्काल बेरोज़गारी से अधिक, दीर्घकालिक कौशल-अंतर के रूप में दिखेगा।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रोज़गार, समावेशी विकास और युवा बेरोज़गारी
2. पुनः कौशल प्रशिक्षण की लागत का प्रश्न
- रिपोर्ट के अनुसार प्रशिक्षण को वास्तविक वैकल्पिक भूमिकाओं से जोड़ना और यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रशिक्षण का खर्च कौन उठाएगा।
- नियोक्ता, सरकार और कर्मचारी के बीच दायित्वों का स्पष्ट बँटवारा न होने पर प्रशिक्षण अधूरा रह सकता है।
- सीमित वेतन वाले कर्मचारियों के लिए स्वयं प्रशिक्षण का खर्च उठाना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2 और GS-3: कौशल विकास तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी
3. संक्रमण-पथों का अभाव
- विस्थापित या प्रभावित कर्मचारियों के लिए संरचित संक्रमण-पथ अभी स्पष्ट नहीं हैं।
- एक पेशे से दूसरे पेशे में जाने के लिए आवश्यक कौशल और सहायता की व्यवस्था करना चुनौती है।
- कार्य-परिवर्तन का सामाजिक प्रभाव विशेषकर कम आय वर्ग पर अधिक पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय और कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याण योजनाएँ
4. भारत-विशिष्ट आँकड़ों की कमी
- विदेशी अध्ययनों के निष्कर्ष भारतीय उद्योगों, भाषाओं और नियमों पर सीधे लागू नहीं हो सकते।
- कार्य-स्तरीय आँकड़ों के अभाव में यह आकलन कठिन है कि किस क्षेत्र में कितना परिवर्तन होगा।
- नीति-निर्माण के लिए निरंतर और विश्वसनीय श्रम-बाज़ार डेटा आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: डेटा, अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण
5. क्षेत्रीय और उद्योगवार असमान प्रभाव
- बीपीओ, लेखा-सेवा और विनिर्माण जैसे क्षेत्र अलग-अलग गति से प्रभावित होते हैं, इसलिए एक समान नीति पर्याप्त नहीं है।
- बड़े शहरों के केंद्रों पर सेवा-कार्य का संकेंद्रण होने से उन क्षेत्रों के श्रमिकों पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है।
- कार्य, उद्योग, नियम और लागत, इन चारों कारकों के संयोजन से परिणाम तय होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: औद्योगिक नीति और क्षेत्रीय असंतुलन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| प्रवेश-स्तरीय अनुभव का क्षय | नियमित कार्यों के स्वचालन से वरिष्ठ पदों के लिए आवश्यक अनुभव-आधारित विशेषज्ञता का निर्माण बाधित हो सकता है। |
| प्रशिक्षण-लागत का वहन | यह स्पष्ट न होना कि पुनः कौशल प्रशिक्षण का खर्च नियोक्ता, सरकार या कर्मचारी उठाएँगे, नीति के क्रियान्वयन को कमज़ोर कर सकता है। |
| संक्रमण-पथों की अनुपस्थिति | प्रभावित कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक भूमिकाओं तक पहुँच का स्पष्ट मार्ग न होने से बेरोज़गारी या कम उत्पादक कार्य में फँसने का जोखिम है। |
| आँकड़ों की सीमा | भारत-विशिष्ट श्रम-बाज़ार अनुसंधान की कमी से नीति-निर्माण सामान्यीकरण पर आधारित हो सकता है। |
| असमान सामाजिक प्रभाव | कम कौशल और कम आय वाले कर्मचारियों पर परिवर्तन का बोझ अधिक पड़ने से आय-असमानता बढ़ सकती है। |
आगे की राह
- प्रवेश-स्तरीय पदों का पुनर्गठन किया जाए, ताकि स्वचालन के बावजूद मार्गदर्शन, निगरानी और अनुभव-निर्माण के अवसर बने रहें।
- पुनः कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक वैकल्पिक भूमिकाओं और रोज़गार-मार्गों से जोड़ा जाए।
- प्रशिक्षण के वित्तपोषण का दायित्व नियोक्ता, सरकार और कर्मचारी के बीच स्पष्ट रूप से तय किया जाए।
- भारत-विशिष्ट श्रम-बाज़ार अनुसंधान में निवेश किया जाए और कार्य-स्तरीय आँकड़ों का नियमित संग्रह हो।
- प्रभावित कर्मचारियों के लिए संरचित संक्रमण-पथ तैयार किए जाएँ, जिनमें कौशल-मूल्यांकन और पुनर्नियोजन की व्यवस्था हो।
- शिक्षा और प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम को बदलती कार्य-संरचना के अनुरूप अद्यतन किया जाए।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उत्पादकता-वृद्धि के उपकरण के रूप में अपनाते हुए मनुष्य और प्रणाली के सहयोगी मॉडल को प्रोत्साहित किया जाए।
- नीति-निर्माण में शोध संस्थानों, उद्योग और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद की व्यवस्था बनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) · श्रम बाजार (Labour Market) · प्रवेश-स्तरीय रोजगार (Entry-level Employment) · कार्य और रोजगार का अंतर (Task-Job Distinction) · कौशल पुनर्प्रशिक्षण (Reskilling) · संक्रमण पथ (Transition Pathways) · कौशल विकास (Skill Development) · इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) · चार श्रम संहिताएँ (Four Labour Codes) · सामाजिक सुरक्षा (Social Security) · रचनात्मक विनाश (Creative Destruction) · कौशल-पक्षपाती तकनीकी परिवर्तन (Skill-biased Technological Change)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 39(क): पर्याप्त जीविका के साधन की राज्य-नीति निर्देशक तत्त्व से संबंध।
- अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और कुछ मामलों में सार्वजनिक सहायता के अधिकार से संबंध।
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची: रोज़गार, बेरोज़गारी और श्रमिकों के व्यावसायिक प्रशिक्षण से संबंध।
अवधारणा प्रवाह
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता बढ़ने से कार्य-स्तर पर नियमित गतिविधियों का स्वचालन संभव हुआ। → लागत-संवेदी उद्योगों में सस्ती और कार्य-विशिष्ट प्रणालियाँ अपनाई जा रही हैं। → नियमित कार्य घटने से मनुष्यों की भूमिका अपवाद-प्रबंधन, निगरानी और रणनीतिक कार्य तक सीमित हो रही है। → प्रवेश-स्तरीय पद, जो प्रशिक्षण का आधार थे, सबसे पहले प्रभावित हो रहे हैं। → अनुभव-निर्माण की सीढ़ी कमज़ोर होने से भविष्य में वरिष्ठ पदों के लिए आवश्यक विशेषज्ञता की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। → पुनः कौशल प्रशिक्षण, संक्रमण-पथ और लागत-वहन की स्पष्ट नीति से इस अंतर का समाधान संभव है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रभावित होने का आकलन प्रायः पूरे रोजगार के बजाय उसके अलग-अलग कार्यों (tasks) के स्तर पर करना अधिक उपयुक्त होता है।
2. दोहराव वाले प्रवेश-स्तरीय कार्यों का स्वचालन उस व्यावहारिक प्रशिक्षण मार्ग को कमजोर कर सकता है, जिससे कर्मचारी आगे चलकर अनुभव और निर्णय-क्षमता विकसित करते हैं।
3. आईआईटी मद्रास के सीईआरएआई (CeRAI) के श्वेत-पत्र के अनुसार पुनर्प्रशिक्षण का खर्च किसे उठाना है, इस पर पहले से पूर्ण सहमति बन चुकी है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश रोजगार कार्यों के समूह होते हैं और AI उनमें से कुछ ही कार्य कर सकती है। कथन 2 सही है: प्रवेश-स्तरीय भूमिकाएँ अक्सर प्रशिक्षण-भूमि का काम करती हैं, इसलिए उनका स्वचालन ‘करियर सीढ़ी’ को प्रभावित करता है। कथन 3 गलत है: रिपोर्ट स्वयं यह स्पष्टता माँगती है कि पुनर्प्रशिक्षण का खर्च कौन उठाएगा, अर्थात् यह प्रश्न अभी अनसुलझा है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव आकलित करते समय ‘कार्य’ (task) का स्तर ‘रोजगार’ (job) के स्तर से अधिक सटीक विश्लेषण देता है।
कारण (R): अधिकांश रोजगार विभिन्न कार्यों का समूह होते हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रायः उनमें से केवल कुछ कार्यों को ही स्वचालित कर पाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- (c) A सही है, किंतु R गलत है।
- (d) A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — A और R दोनों सही हैं। रिपोर्ट चार स्तरों (कार्य, रोजगार, व्यवसाय और समग्र श्रम-बाजार परिणाम) का भेद करती है। चूँकि रोजगार कार्यों का समूह है और AI सभी कार्य नहीं करती, इसलिए कार्य-स्तर का विश्लेषण अधिक उपयोगी है। R इसी कारण को स्पष्ट करता है।
Q3. सूची-I (योजना/अधिनियम/मिशन) को सूची-II (कार्य/विषय-क्षेत्र) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
1. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
2. इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission)
3. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
4. कर्मचारी भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1952
सूची-II
i. सेवानिवृत्ति-बचत और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि का प्रबंधन
ii. प्रमाणित अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण, जिसे कौशल एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) से जोड़ा जाता है
iii. कम्प्यूटिंग अवसंरचना, डेटासेट और AI-क्षमता निर्माण, जिसका समन्वय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) करता है
iv. डिजिटल रूप में संसाधित व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण का विनियमन
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-i, 2-ii, 3-iii, 4-iv
- 1-ii, 2-iii, 3-iv, 4-i
- 1-iii, 2-iv, 3-i, 4-ii
- 1-iv, 2-i, 3-ii, 4-iii
उत्तर: 1-ii, 2-iii, 3-iv, 4-i — PMKVY कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन की प्रमुख योजना है, जिसे MSDE लागू करता है (1-ii)। इंडियाएआई मिशन का मुख्य घटक MeitY के अधीन AI-कम्प्यूटिंग, डेटासेट और क्षमता निर्माण है (2-iii)। DPDP अधिनियम, 2023 डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को विनियमित करता है (3-iv)। कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 के अंतर्गत भविष्य निधि का प्रबंधन होता है (4-i)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिबल एआई (CeRAI) के हालिया श्वेत-पत्र के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत में रोजगार को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उसके स्वरूप को बदल रही है, परंतु प्रवेश-स्तरीय कामगार सर्वाधिक जोखिम में हैं। इस स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि कौशल पुनर्प्रशिक्षण की लागत का वहन कौन करे, इस प्रश्न पर राज्य, नियोक्ता और कामगार की भूमिकाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर-संरचना (मॉडल उत्तर के बिंदु):
1. भूमिका: CeRAI (IIT मद्रास) के श्वेत-पत्र ‘How AI Is Reconfiguring Work in India’ का संदर्भ दीजिए। रोजगार को ‘समाप्ति’ के बजाय ‘पुनर्गठन’ के रूप में देखने का तर्क स्पष्ट कीजिए। BPO में वॉइस बॉट द्वारा पासवर्ड रीसेट और खाता-शेष की सूचना संभालना, जबकि जटिल शिकायतें मानव एजेंट के पास रहना, इसका उदाहरण दीजिए।
2. विश्लेषणात्मक ढाँचा: चार स्तर (कार्य, रोजगार, व्यवसाय, समग्र श्रम-बाजार परिणाम) और दो प्रतिरूप (AI द्वारा अधिकांश दिनचर्या कार्य करना और मानव मूल्यांकन/अपवाद-प्रबंधन; मानव का मूल कार्य करना और AI को उत्पादकता-उपकरण मानना)। रिपोर्ट में वर्णित सात मार्ग भी इन्हीं प्रतिरूपों में बाँटे गए हैं।
3. प्रवेश-स्तरीय जोखिम: दोहराव वाले कार्य प्रशिक्षण-भूमि का काम करते हैं, इसलिए ‘करियर सीढ़ी’ का टूटना। सॉफ्टवेयर में कोड-सहायक उपकरण, विधि-क्षेत्र में AI-आधारित दस्तावेज-समीक्षा के उदाहरण लें। रचनात्मक विनाश (Schumpeter) और कौशल-पक्षपाती तकनीकी परिवर्तन (David Autor) की अवधारणाओं से तुलना कीजिए।
4. संस्थागत और संवैधानिक संदर्भ: अनुच्छेद 41 (कार्य का अधिकार, आर्थिक क्षमता की सीमा में) और अनुच्छेद 43 (निर्वाह मजदूरी, सम्मानजनक कार्य-दशाएँ) के नीति-निर्देशक तत्त्व। कौशल विकास के ढाँचे में कौशल एवं उद्यमिता मंत्रालय, PMKVY, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और क्षेत्रीय कौशल परिषदें। इंडियाएआई मिशन (MeitY) का कौशल और क्षमता-निर्माण पक्ष। अपप्रेंटिसशिप अधिनियम, 1961 (संशोधित 2014) के अंतर्गत प्रशिक्षुता मॉडल। चार श्रम संहिताएँ (2020) में सामाजिक सुरक्षा संहिता द्वारा गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों की मान्यता।
5. पुनर्प्रशिक्षण के वित्तपोषण पर संतुलित दृष्टि: (क) नियोक्ता-वित्तपोषित मॉडल, जहाँ उत्पादकता-लाभ निजी होते हैं; (ग) राज्य-वित्तपोषित मॉडल, जहाँ सार्वजनिक संसाधन उपयोग होते हैं; (ग) कर्मचारी-योगदान या सामूहिक निधि (जैसे उद्योग-सहभागिता वाले प्रशिक्षण कोष)। प्रत्येक के फायदे-नुकसान और ‘निश्चित वैकल्पिक भूमिकाओं’ से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दें।
6. निष्कर्ष: AI-अपनाने की उत्पादकता-वृद्धि और कामगार-संरक्षण के बीच संतुलन। संस्थागत सुझाव: श्रम-बाजार पर भारत-विशिष्ट शोध, संरचित संक्रमण पथ, और प्रशिक्षण को वास्तविक वैकल्पिक भूमिकाओं से जोड़ना। अंत में स्पष्ट मत दीजिए कि लागत-वहन का प्रश्न नीति का केंद्रीय प्रश्न क्यों है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best economics services coaching
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Piyush Goyal urges Telangana to leverage FTAs for growth - October 30, 2026
- वित्तीय सेवा विभाग ने विशेष अभियान 6 के तहत 7 लाख वर्ग फुट स्थान खाली किया, 4.12 करोड़ रुपये राजस्व अर्जित - October 30, 2026
- RBI Auctions State Government Securities: ₹29,900 Crore Bonds on Nov 3 - October 30, 2026

No Comments