28 Oct उत्तराखंड विधानसभा: अनुपूरक बजट समेत 10 विधेयक पारित, सदन स्थगित
✎ विनियोग विधेयक पारित हुए बिना समेकित निधि से कोई राशि नहीं निकाली जा सकती (अनुच्छेद 204), और अनिश्चितकाल के लिए स्थगन सदन की बैठकें रोकता है, जबकि सत्र का औपचारिक अंत राज्यपाल के सत्रावसान से होता है (अनुच्छेद 174)।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — राजव्यवस्था (राज्य विधानमंडल, वित्तीय विधान, सदन की प्रक्रिया) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (राज्य बजट और राजकोषीय प्रबंधन) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण (मानव-वन्यजीव संघर्ष और उसका प्रबंधन)
- Prelims: अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grant), अनुच्छेद 205, विनियोग विधेयक (Appropriation Bill), अनुच्छेद 204, समेकित निधि (Consolidated Fund of State), अनुच्छेद 266, आकस्मिक निधि (Contingency Fund of State), अनुच्छेद 267, धन विधेयक (Money Bill), अनुच्छेद 199 और 207, सत्रावसान और अनिश्चितकाल के लिए स्थगन में अंतर, अनुच्छेद 174, एकसदनीय विधानमंडल वाले राज्य (उत्तराखंड सहित), विधानमंडल की कार्यवाही पर न्यायालय की सीमित भूमिका, अनुच्छेद 212
- Essay: सार्वजनिक धन पर विधायी नियंत्रण: बजट की पारदर्शिता और जवाबदेही, लोकतांत्रिक सदनों में वाद-विवाद बनाम व्यवधान: संसदीय संस्थाओं की गरिमा
त्वरित पुनरावृत्ति: विनियोग विधेयक पारित हुए बिना समेकित निधि से कोई राशि नहीं निकाली जा सकती (अनुच्छेद 204), और अनिश्चितकाल के लिए स्थगन सदन की बैठकें रोकता है, जबकि सत्र का औपचारिक अंत राज्यपाल के सत्रावसान से होता है (अनुच्छेद 174)।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आयोजित हुआ, जिसके अंतिम दिन 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) सदन में पारित किया गया। इसके साथ विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) भी पारित हुआ, जो समेकित निधि से इस अतिरिक्त व्यय को विधिक आधार देता है। सत्र में कुल 10 विधेयक पारित हुए। सदन में विपक्षी विधायकों के विरोध और शोर-शराबे के बीच यह कार्यवाही पूरी हुई, और इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस घटनाक्रम में राज्य के वित्तीय विधान, विधायी प्रक्रिया और सदन-संचालन के नियम, तीनों का व्यावहारिक रूप दिखाई देता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में राज्य बजट का वार्षिक चक्र अनुच्छेद 202 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) से शुरू होता है, और अनुच्छेद 203 के तहत विधानसभा अनुदान की मांगों पर मतदान करती है।
- जब मूल बजट में स्वीकृत राशि चालू वर्ष की आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त पड़ती है, या वर्ष के बीच नई आवश्यकताएं उभरती हैं, तब अनुपूरक अनुदान की आवश्यकता होती है; इसकी व्यवस्था अनुच्छेद 205 में है।
- उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत हुआ। राज्य में एकसदनीय विधानमंडल है।
- गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में जाना जाता है, और वहां सत्र आयोजित करना राज्य में प्रशासनिक और भौगोलिक विकेंद्रीकरण की बहस से भी जुड़ा है।
- पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष वन विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच प्रमुख विषय है। इसका मूल विधिक ढांचा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 है।
अनुपूरक बजट और विनियोग विधेयक क्या है?
- अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) वह वित्तीय विवरण है जो चालू वित्तीय वर्ष में पहले से स्वीकृत राशि से अधिक व्यय के लिए विधानमंडल से धन की मांग करता है।
- अनुच्छेद 205 राज्य विधानमंडल को अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान की व्यवस्था देता है।
- अनुच्छेद 204 के अनुसार विनियोग विधेयक पारित हुए बिना समेकित निधि (Consolidated Fund of State, अनुच्छेद 266) से कोई राशि नहीं निकाली जा सकती। यह संसदीय वित्तीय नियंत्रण का मूल सिद्धांत है।
- आकस्मिक निधि (Contingency Fund of State, अनुच्छेद 267) से अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम धन लिया जाता है, जिसकी पूर्ति बाद में विधानमंडल की स्वीकृति से की जाती है।
- धन विधेयक (Money Bill) की परिभाषा अनुच्छेद 199 में दी गई है। विनियोग विधेयक प्रायः धन विधेयक होता है, और अनुच्छेद 207 के अनुसार इसके प्रस्ताव के लिए राज्यपाल की संस्तुति आवश्यक होती है।
- एकसदनीय विधानमंडल वाले राज्य में धन विधेयक पर अंतिम निर्णय विधानसभा का ही होता है, क्योंकि विधानपरिषद का अस्तित्व ही नहीं है।
- अनिश्चितकाल के लिए स्थगन में सदन की बैठकें रुकती हैं, जबकि सत्रावसान (Prorogation) राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 174 के अंतर्गत किया जाता है। सत्र का औपचारिक अंत सत्रावसान से होता है।
- अनुच्छेद 212 के अनुसार विधानमंडल की कार्यवाही में हुई प्रक्रियागत अनियमितता के आधार पर न्यायालय जांच नहीं कर सकते, हालांकि सदन के भीतर अनुशासन और नियम-पालन का दायित्व अध्यक्ष के पास रहता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) | चालू वित्तीय वर्ष में बजट प्रावधान से अधिक व्यय के लिए अतिरिक्त धनराशि की स्वीकृति; इस सत्र में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित |
| विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) | संचित निधि (Consolidated Fund) से धन निकालने का विधिक प्राधिकार देता है; अनुपूरक अनुदानों को कानूनी रूप से प्रभावी बनाता है |
| सत्र का समापन | गैरसैंण के भराड़ीसैंण में दो दिन के सत्र में सभी 10 विधेयक पारित; इसके बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित |
| सदन में व्यवधान | भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी, कागज फेंकना और काले झंडे दिखाना; व्यवधान के बीच भी विधायी कार्य पूरा किया गया |
| नियम-58 के अंतर्गत मामला | बाढ़ सुरक्षा का विषय उठाया गया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री ने उत्तर दिया; सदन में सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने की प्रक्रियागत व्यवस्था का उपयोग |
महत्व
वित्तीय (Financial)
- अनुपूरक बजट से विकास कार्यों और जनकल्याण की योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं, बशर्ते उनका व्यय संसदीय स्वीकृति से हो।
- विनियोग विधेयक के बिना संचित निधि से कोई भी व्यय विधिसम्मत नहीं होता, इसलिए यह विधेयक वित्तीय अनुशासन की मूल कड़ी है।
- वार्षिक बजट के बाद आने वाला अनुपूरक बजट राज्य के वित्तीय प्रबंधन और अनुमान-निर्धारण की सटीकता पर भी प्रकाश डालता है।
संवैधानिक-संघीय (Constitutional-Federal)
- राज्य विधानमंडल को अनुच्छेद 202 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण और अनुच्छेद 204-205 के अंतर्गत विनियोग तथा अनुपूरक अनुदान पर अधिकार प्राप्त है।
- राज्य के स्तर पर विधायी वित्तीय प्रक्रिया का यह उदाहरण संघीय ढांचे में राज्य विधानमंडल की संप्रभु वित्तीय शक्ति को दर्शाता है।
विधायी और प्रक्रियात्मक (Legislative and Procedural)
- सदन में शोर-शराबे के बीच भी सभी 10 विधेयक पारित होने से विधायी कार्य की समय-सीमा और सदन के नियमों के बीच संतुलन का प्रश्न सामने आता है।
- सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना सत्र के समापन की प्रक्रिया है, जो राज्यपाल द्वारा सत्रावसान (Prorogation) से भिन्न है।
- नियम-58 जैसी प्रक्रियाएं सार्वजनिक महत्व के मामलों को सदन में उठाने का मंच देती हैं, जिससे कार्यकारी जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
शासन और जनहित (Governance and Public Interest)
- कोटद्वार में मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के लिए दीवार निर्माण का मामला वन प्रभाग के स्तर पर स्थानीय सहभागिता और भुगतान की पारदर्शिता का प्रश्न उठाता है।
- विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्थानीय लोगों का पैसा लौटाने के निर्देश देना सदन की निगरानी भूमिका का व्यावहारिक उदाहरण है।
चुनौतियाँ
1. विधायी व्यवधान और चर्चा की गुणवत्ता
- सदन में हंगामे के बीच विधेयक पारित होने से उन पर सार्थक बहस और परीक्षण सीमित हो जाता है।
- बिना पर्याप्त चर्चा के पारित विधेयकों की विधिक गुणवत्ता और जनहित पर प्रभाव को लेकर प्रश्न उठते हैं।
- बार-बार व्यवधान से सदन का समय और विधायी संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संसद और राज्य विधानमंडल की कार्यप्रणाली; विधायी प्रक्रिया
2. अनुपूरक बजट पर निर्भरता
- बार-बार अनुपूरक बजट की आवश्यकता बजट अनुमानों की यथार्थता और प्रारंभिक आवंटन की योजना पर प्रश्न उठाती है।
- अतिरिक्त व्यय से राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और ऋण भार पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए निगरानी आवश्यक है।
- व्यय की गुणवत्ता और उपयोगिता का मूल्यांकन पूरक धनराशि की सार्थकता तय करता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: राजकोषीय नीति; राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण प्रबंधन
3. वन्यजीव संघर्ष और सार्वजनिक धन का उपयोग
- मानव-वन्यजीव संघर्ष के निवारण हेतु बनाई जाने वाली संरचनाओं में स्थानीय धन लगाने और उसके प्रतिफल को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
- वन क्षेत्र से सटे नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों की योजना और क्रियान्वयन में समन्वय की कमी दिखती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण और जैव विविधता; मानव-वन्यजीव संघर्ष
4. वित्तीय निगरानी और जवाबदेही
- विनियोग और अनुपूरक धनराशि के व्यय पर विधायी समितियों की समीक्षा का महत्व बढ़ जाता है।
- सदन में व्यवधान के कारण व्यय के विस्तृत विश्लेषण पर चर्चा सीमित रह सकती है, जिससे जवाबदेही कमजोर होती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन में जवाबदेही; संसदीय वित्तीय समितियों की भूमिका
5. सत्र की समय-सीमा और कार्य-संचालन
- कम अवधि के सत्र में अधिक विधायी कार्य निपटाने का दबाव रहता है, जिससे प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं प्रभावित हो सकती हैं।
- सत्र के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगन से अगले सत्र तक कार्यकारी उत्तरदायित्व की निगरानी का अंतराल बन जाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: विधानमंडल का कार्यकाल, सत्र और संसदीय प्रक्रिया
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| विधेयकों का त्वरित पारण | सदन में व्यवधान के बीच पारित विधेयकों पर सार्थक बहस और परीक्षण सीमित होना |
| अनुपूरक बजट की मात्रा | बजट अनुमानों की यथार्थता और राजकोषीय घाटे पर दबाव |
| वन्यजीव संघर्ष निवारण | स्थानीय धन के उपयोग, भुगतान और कार्य-प्रतिफल में पारदर्शिता की कमी का आरोप |
| वित्तीय निगरानी | व्यय की उपयोगिता का विस्तृत मूल्यांकन सदन की चर्चा में न हो पाना |
| सदन का नियमित कार्य | बार-बार व्यवधान से प्रश्नकाल और चर्चा के अवसर घटना |
आगे की राह
- अनुपूरक अनुदानों के प्रस्ताव के साथ व्यय की आवश्यकता और विभागवार औचित्य का विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखा जाए।
- विनियोग और अनुपूरक धनराशि के व्यय की समीक्षा विधायी वित्तीय समितियों द्वारा नियमित रूप से की जाए।
- सदन में व्यवधान की स्थिति में भी विधेयकों पर संक्षिप्त किंतु सार्थक चर्चा के लिए कार्य-संचालन नियमों का स्पष्ट पालन सुनिश्चित हो।
- वन्यजीव संघर्ष निवारण संरचनाओं के निर्माण से पूर्व स्थानीय समुदायों से परामर्श और भुगतान-प्रणाली में पारदर्शिता अपनाई जाए।
- बजट अनुमान तैयार करते समय वास्तविक व्यय प्रवृत्तियों का विश्लेषण कर अनुपूरक बजट की आवश्यकता को न्यूनतम रखा जाए।
- व्यय की भौतिक प्रगति और परिणामों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग से जवाबदेही और विश्वास को सुदृढ़ किया जाए।
- सदन के बाहर विधायी कार्य-सूची और सत्र-पूर्व विचार-विमर्श की व्यवस्था से सत्र के दौरान सहमति का दायरा बढ़ाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राज्य विधानमंडल · विधानसभा सत्र · अनुपूरक बजट · विनियोग विधेयक · विधायी प्रक्रिया · संसदीय कार्यप्रणाली · विपक्ष की भूमिका · राज्य वित्त · गैरसैंण · सदन का स्थगन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 202: राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना
- अनुच्छेद 204: राज्य विधानमंडल में विनियोग विधेयक
- अनुच्छेद 205: पूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
- अनुच्छेद 208: विधानमंडल की प्रक्रिया के नियम
- अनुच्छेद 212: विधानमंडल की कार्यवाही पर न्यायालय की सीमा
- अनुच्छेद 174: सत्र आहूत, सत्रावसान और विघटन
अवधारणा प्रवाह
विभिन्न विभागों की अतिरिक्त व्यय आवश्यकताएं सामने आती हैं और वित्त विभाग उन्हें अनुपूरक अनुमान के रूप में संकलित करता है। → राज्य सरकार अनुपूरक बजट को अनुच्छेद 205 के अंतर्गत विधानसभा के समक्ष रखती है। → सदन अनुपूरक बजट पर चर्चा और मतदान करता है, और उसके बाद विनियोग विधेयक को पारित किया जाता है। → विनियोग विधेयक पारित होने के बाद संचित निधि से निर्धारित धनराशि के व्यय का विधिक प्राधिकार प्राप्त होता है। → सत्र के अन्य विधेयक भी पारित होते हैं; व्यवधान के बीच भी विधायी कार्य पूरा होता है। → विधानसभा अध्यक्ष सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हैं, जिससे सत्र की कार्यवाही समाप्त होती है। → सत्र के बाद व्यय की प्रगति की निगरानी विधायी समितियों और कार्यकारी रिपोर्टिंग के माध्यम से होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राज्य विधानसभा का सत्र राज्यपाल द्वारा आहूत किया जाता है।
2. अनुपूरक बजट केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
3. विनियोग विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति प्राप्त करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के अनुसार, राज्यपाल समय-समय पर राज्य विधानमंडल के सदन या प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर आहूत करेगा, जैसा वह ठीक समझे। कथन 2 गलत है। अनुपूरक बजट केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर प्रस्तुत किया जा सकता है, जब किसी वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित राशि अपर्याप्त हो जाती है। कथन 3 गलत है। विनियोग विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति प्राप्त करना है, लेकिन यह केंद्र सरकार के संदर्भ में है। राज्यों के लिए, यह राज्य की संचित निधि से संबंधित होता है।
Q2. राज्य विधानसभा में ‘अनुपूरक बजट’ प्रस्तुत करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- नए वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना।
- किसी वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अतिरिक्त धन की मांग करना।
- सरकार की राजस्व प्राप्तियों का अनुमान लगाना।
- राज्य के सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन करना।
उत्तर: किसी वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अतिरिक्त धन की मांग करना। — अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) तब प्रस्तुत किया जाता है जब किसी विशेष वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित धन किसी विशेष सेवा या परियोजना के लिए अपर्याप्त सिद्ध होता है, या जब वर्ष के दौरान किसी नई सेवा के लिए धन की आवश्यकता होती है जिसका अनुमान मूल बजट में नहीं लगाया गया था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्य विधानमंडलों में विधायी प्रक्रिया और बजट पारित करने में विपक्ष की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या विपक्ष का हंगामा संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करता है या कमजोर करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राज्य विधानमंडल में विधायी प्रक्रिया और बजट पारित करने की संक्षिप्त व्याख्या।
2. **विधायी प्रक्रिया:** विधेयक प्रस्तुत करने, चर्चा, समितियों की भूमिका और मतदान सहित सामान्य विधायी प्रक्रिया का वर्णन।
3. **बजट पारित करने की प्रक्रिया:** वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुदानों की मांग, विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक की भूमिका।
4. **विपक्ष की भूमिका:**
* सरकार को जवाबदेह ठहराना।
* नीतियों और विधेयकों की जांच करना।
* जनता के मुद्दों को उठाना।
* वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना।
* सदन में चर्चा और बहस को बढ़ावा देना।
5. **विपक्ष के हंगामे का प्रभाव:**
* **सकारात्मक पहलू (मजबूत करना):** सरकार का ध्यान आकर्षित करना, जनता के मुद्दों पर दबाव डालना, असंतोष व्यक्त करना, लोकतंत्र में विरोध के अधिकार का प्रदर्शन।
* **नकारात्मक पहलू (कमजोर करना):** विधायी कार्य में बाधा, महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा का अभाव, सार्वजनिक धन और समय की बर्बादी, सदन की गरिमा को ठेस, जनता का विश्वास कम होना।
6. **निष्कर्ष:** संसदीय लोकतंत्र में रचनात्मक विपक्ष की आवश्यकता और हंगामे तथा सार्थक बहस के बीच संतुलन स्थापित करने का महत्व। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड विधानसभा में अनुपूरक बजट पारित होने के दौरान विपक्ष का हंगामा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत विधायकों को प्राप्त विशेषाधिकारों का उल्लेख।
स्रोत: amarujala.com
Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तराखंड विधानसभा के हालिया सत्र में पारित किए गए 10 विधेयकों में से कौन सा विधेयक राज्य के बजट से संबंधित था?
- A. उत्तराखंड राज्य भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक, 2023
- B. उत्तराखंड अनुपूरक बजट विधेयक, 2023
- C. उत्तराखंड वन अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2023
- D. उत्तराखंड शिक्षा सेवा (संशोधन) विधेयक, 2023
उत्तर: B. उत्तराखंड अनुपूरक बजट विधेयक, 2023 — विधानसभा सत्र में पारित सभी 10 विधेयकों में ‘उत्तराखंड अनुपूरक बजट विधेयक, 2023’ राज्य के बजट से संबंधित था।
Mains: उत्तराखंड विधानसभा द्वारा हाल ही में पारित 10 विधेयकों के महत्व और उनके राज्य के विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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