28 Oct कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने हेतु कैबिनेट ने नई योजना को मंजूरी दी
✎ कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना का मूल उद्देश्य घरेलू कंटेनर विनिर्माण बढ़ाकर आयात-निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत को घटाना तथा आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, विनिर्माण क्षेत्र, अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (व्यापार, निर्यात-संवर्धन और आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता)
- Prelims: कंटेनर (Container) और TEU (Twenty-foot Equivalent Unit): कंटेनर क्षमता की मानक इकाई, ISO 668: फ्रेट कंटेनरों के वर्गीकरण, आयाम और रेटिंग से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानक, उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन (PLI): घरेलू विनिर्माण बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन योजनाएँ, सागरमाला कार्यक्रम (Sagarmala): तटीय और बंदरगाह-आधारित अवसंरचना एवं लॉजिस्टिक्स विकास, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy): 2022 में घोषित, PM गति शक्ति (PM Gati Shakti): बहु-मॉडल अवसंरचना योजना के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान, अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (Inland Container Depot) और कंटेनर फ्रेट स्टेशन (Container Freight Station), लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (Logistics Performance Index): विश्व बैंक द्वारा जारी सूचकांक
- Essay: आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता और भारत का औद्योगिक भविष्य: विनिर्माण में आयात-निर्भरता का समाधान, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता
त्वरित पुनरावृत्ति: कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना का मूल उद्देश्य घरेलू कंटेनर विनिर्माण बढ़ाकर आयात-निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत को घटाना तथा आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना (Container Manufacturing Promotion Scheme) को मंजूरी दी है। कंटेनर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू माल परिवहन की मूल इकाई हैं, इसलिए उनका घरेलू विनिर्माण व्यापार की लागत, आपूर्ति शृंखला की स्थिरता और औद्योगिक आधार, तीनों से सीधे जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य देश में कंटेनर निर्माण की क्षमता बढ़ाना और इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाना माना जा सकता है। योजना के वित्तीय परिव्यय, प्रोत्साहन की संरचना, अवधि और पात्रता-शर्तों जैसे विस्तृत प्रावधानों की पुष्टि आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और मंत्रिमंडल के निर्णय के पाठ से करनी चाहिए। परीक्षा की दृष्टि से मुख्य बिंदु यह है कि यह निर्णय औद्योगिक नीति के उस व्यापक ढाँचे का हिस्सा है, जो उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन और आपूर्ति शृंखला की घरेलू क्षमता पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- कंटेनर आधुनिक समुद्री और सड़क-रेल परिवहन की आधारभूत इकाई हैं। मानकीकृत आयामों (जैसे 20 फुट और 40 फुट) के कारण एक ही कंटेनर को जहाज़, रेल और ट्रक, तीनों माध्यमों से ले जाया जा सकता है।
- वैश्विक स्तर पर कंटेनर विनिर्माण का बड़ा हिस्सा कुछ ही देशों में केंद्रित है। इससे आपूर्ति में अस्थिरता और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ता है, जो कोविड-19 के बाद की कंटेनर-संकट की स्थिति में स्पष्ट हुआ।
- भारत में बंदरगाह-आधारित व्यापार के विस्तार के साथ कंटेनर की माँग बढ़ी है। सागरमाला कार्यक्रम, भारतमाला और PM गति शक्ति जैसी पहलों से बंदरगाह, सड़क और रेल संपर्क सुधारने पर बल दिया गया है, परंतु कंटेनर जैसे उपकरणों के घरेलू विनिर्माण का पक्ष अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, डिजिटल एकीकरण बढ़ाना और बहु-मॉडल परिवहन को सुदृढ़ करना है। कंटेनर विनिर्माण इसी लक्ष्य का भौतिक आधार है।
- उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन (PLI) योजना 2020 में चयनित क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण और निर्यात बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना भी इसी प्रकार के लक्षित-क्षेत्र दृष्टिकोण से जुड़ी हुई मानी जा सकती है, किंतु इसकी विशिष्ट संरचना आधिकारिक दस्तावेज़ से ही पक्की होगी।
- भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अंतर्गत आयात-प्रतिस्थापन और घरेलू मूल्य-शृंखला के विकास पर बल देती रही है। कंटेनर जैसे मध्यवर्ती पूँजीगत उत्पाद का घरेलू उत्पादन इसी नीति-दिशा से मेल खाता है।
कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना क्या है?
- यह केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित एक औद्योगिक संवर्धन योजना है, जिसका मूल उद्देश्य देश में फ्रेट कंटेनरों के विनिर्माण को प्रोत्साहित करना है।
- फ्रेट कंटेनर धातु से बने मानकीकृत बक्से होते हैं, जिनमें माल भरकर समुद्री जहाज़, रेल और सड़क मार्ग से परिवहन किया जाता है।
- कंटेनरों के आयाम और रेटिंग के लिए ISO 668 श्रृंखला-1 मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू होता है। घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता इन्हीं मानकों और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों से सुनिश्चित की जाती है।
- कंटेनर की क्षमता TEU में मापी जाती है। 20 फुट का कंटेनर 1 TEU और 40 फुट का कंटेनर 2 TEU माना जाता है।
- इससे आयात-निर्भरता घटने की संभावना है, जिससे आपूर्ति-शृंखला का जोखिम और कंटेनर की लागत या उपलब्धता से जुड़ी अनिश्चितता कम हो सकती है।
- कंटेनर विनिर्माण का विकास इस्पात, इंजीनियरिंग और धातु-प्रसंस्करण जैसे सहायक उद्योगों को भी जोड़ता है, जिससे रोज़गार और मूल्य-वर्धन के अवसर बनते हैं।
- यह योजना राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला और PM गति शक्ति जैसी अवसंरचना-पहलों के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स लागत घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा सकती है।
- विस्तृत पात्रता, प्रोत्साहन-राशि, परिव्यय और कार्यान्वयन-अवधि के लिए आधिकारिक मंत्रिमंडलीय निर्णय और संबंधित मंत्रालय की विज्ञप्ति को प्रमाण मानना चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| योजना का स्वरूप | कैबिनेट द्वारा अनुमोदित कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना (Container Manufacturing Promotion Scheme) का उद्देश्य देश में कंटेनर के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। स्रोत में इसके परिव्यय, प्रोत्साहन की दर और अवधि का विवरण नहीं है। |
| कंटेनर की भूमिका | कंटेनर माल परिवहन की मानकीकृत इकाई है। इसका मानक माप 20 फुट (TEU) और 40 फुट (FEU) है। समुद्री, रेल और सड़क परिवहन में एक ही कंटेनर का उपयोग होता है, इसलिए यह बहुविधा परिवहन (Multimodal Transport) की आधारभूत कड़ी है। |
| आयात-निर्भरता की समस्या | भारत में कंटेनर का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता रहा है। इससे पूंजीगत व्यय, विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह और आपूर्ति-शृंखला के जोखिम बढ़ते हैं। |
| औद्योगिक शृंखला से संबंध | कंटेनर का निर्माण इस्पात, मशीनरी, वेल्डिंग और सतह-उपचार (Surface Treatment) जैसे उद्योगों से जुड़ा है। इसलिए इसके विनिर्माण से इस्पात और इंजीनियरिंग क्षेत्र की पिछड़ी और आगे की कड़ियाँ मज़बूत हो सकती हैं। |
| व्यापार और बंदरगाह से जुड़ाव | कंटेनर की उपलब्धता और लागत सीधे बंदरगाह-आधारित व्यापार, निर्यात की समय-सीमा और रसद लागत को प्रभावित करती है। |
महत्व
आर्थिक
- घरेलू विनिर्माण से कंटेनर के आयात पर निर्भरता घट सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
- इस्पात, इंजीनियरिंग और सहायक उद्योगों में निवेश और रोज़गार के अवसर बन सकते हैं।
- निर्यातकों के लिए कंटेनर की समय पर और कम लागत पर उपलब्धता से व्यापार की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।
रसद और परिवहन
- कंटेनर की उपलब्धता सुधरने से बंदरगाहों पर भीड़ और खाली कंटेनर के प्रबंधन की समस्या कम हो सकती है।
- मानकीकृत कंटेनर से बहुविधा परिवहन में समन्वय बढ़ता है और माल ढुलाई की कुल लागत पर असर पड़ता है।
औद्योगिक नीति
- यह योजना आयात-प्रतिस्थापन (Import Substitution) की व्यापक नीति के अनुरूप एक क्षेत्र-विशेष हस्तक्षेप है।
- पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में घरेलू क्षमता का विकास भविष्य में निर्यात-आधारित विनिर्माण के लिए आधार बना सकता है।
सामरिक एवं आपूर्ति-शृंखला
- किसी एक देश पर आपूर्ति-निर्भरता घटने से वैश्विक आपूर्ति-शृंखला के व्यवधान के समय देश की लचीलापन क्षमता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. आयात-निर्भरता और आपूर्ति-शृंखला का जोखिम
- कंटेनर विनिर्माण के लिए आवश्यक इस्पात और कुछ घटक अब भी आयात पर निर्भर हो सकते हैं।
- यदि कच्चा माल महँगा रहा, तो घरेलू उत्पाद की लागत आयातित कंटेनर से अधिक रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति और आयात-प्रतिस्थापन
2. पैमाने की अर्थव्यवस्था (Economies of Scale)
- कंटेनर विनिर्माण में बड़े उत्पादन-पैमाने से ही इकाई लागत घटती है।
- छोटे और बिखरे हुए उत्पादक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं, इसलिए सुदृढ़ निवेश आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: औद्योगिक विकास और उद्योगों का स्थानीयकरण
3. गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानक
- कंटेनर को ISO मानकों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन करना होता है, जिसमें संरचनात्मक मज़बूती और जंग-रोधी क्षमता शामिल है।
- मानकों से समझौता होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनें घरेलू कंटेनर स्वीकार नहीं करेंगी।
यूपीएससी लिंक: GS-3: गुणवत्ता नियंत्रण, मानक-निर्धारण और निर्यात प्रतिस्पर्धा
4. पूंजी-गहन क्षेत्र में निजी निवेश
- कंटेनर विनिर्माण के लिए भारी पूंजी, विशेष मशीनरी और कुशल श्रम की आवश्यकता होती है।
- निवेशकों को लंबी अवधि के लिए स्थिर नीति और माँग का भरोसा चाहिए, अन्यथा निवेश सीमित रह सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: निवेश, औद्योगिक नीति और रोज़गार सृजन
5. सरकारी प्रोत्साहन की प्रभावशीलता
- प्रोत्साहन (Incentive) से सामान्यतः उत्पादन बढ़ता है, पर योजना का वास्तविक प्रभाव लक्ष्य-निर्धारण, निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
- सब्सिडी-आधारित योजनाओं में दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन और सार्वजनिक व्यय प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| कच्चे माल की लागत | इस्पात और घटकों की आयातित लागत घरेलू उत्पादन की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है। |
| मानक और गुणवत्ता | ISO और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुपालन में विफलता से निर्यात और स्वीकार्यता पर असर पड़ेगा। |
| पूंजी और कौशल | भारी निवेश और विशेष तकनीकी कौशल की कमी से परियोजनाएँ धीमी पड़ सकती हैं। |
| बाज़ार-माँग का अनिश्चय | निर्यात और घरेलू माँग का अनुमान कमज़ोर होने पर उत्पादन क्षमता का उपयोग कम रह सकता है। |
| प्रोत्साहन का दुरुपयोग | सब्सिडी-आधारित योजना में वास्तविक उत्पादन के बजाय केवल कागज़ी इकाइयाँ बनने का जोखिम रहता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना (Container Manufacturing Promotion Scheme)
आगे की राह
- योजना के परिव्यय, प्रोत्साहन के ढाँचे और अवधि का स्पष्ट प्रकाशन हो, ताकि निवेशकों को नीति-निश्चितता मिले।
- इस्पात और प्रमुख घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आपूर्ति-शृंखला की आयात-निर्भरता घटाई जाए।
- गुणवत्ता-परीक्षण की संस्थागत व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रमाणन को सुलभ बनाया जाए।
- लघु और मध्यम इकाइयों को तकनीक और वित्त तक पहुँच देकर पैमाने की अर्थव्यवस्था में शामिल किया जाए।
- बंदरगाह, रेल और सड़क परिवहन के साथ कंटेनर नीति का समन्वय करके बहुविधा परिवहन को सुदृढ़ किया जाए।
- खाली कंटेनर के प्रबंधन और उपयोग-दर पर नियमित आँकड़े जुटाकर योजना के प्रभाव की समीक्षा की जाए।
- प्रोत्साहन को उत्पादन और निर्यात के वास्तविक परिणामों से जोड़ा जाए, ताकि सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना (Container Manufacturing Promotion Scheme) · मंत्रिमंडल निर्णय और अनुच्छेद 77 (Article 77) · मेक इन इंडिया (Make in India) · उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive Scheme) · राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy) · पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) · लॉजिस्टिक्स लागत और आर्थिक संवृद्धि · आयात निर्भरता और आपूर्ति शृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience) · ISO मानक (ISO 668 श्रृंखला 1 फ्रेट कंटेनर) · सब्सिडी और WTO का सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपाय समझौता (SCM Agreement) · सार्वजनिक खरीद (निर्माता को वरीयता) आदेश, 2017 · आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुसूची 7, संघ सूची की प्रविष्टि 41: विदेशी व्यापार और सीमा-शुल्क पार आयात-निर्यात का संघीय विषय
अवधारणा प्रवाह
आयात-निर्भरता से कंटेनर की लागत और आपूर्ति-जोखिम बढ़ता है → सरकार कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना के माध्यम से घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने का निर्णय लेती है → कैबिनेट के अनुमोदन के बाद योजना की दिशानिर्देश और कार्यान्वयन-प्रक्रिया तय होती है → घरेलू विनिर्माण इकाइयों में निवेश और उत्पादन बढ़ता है → कंटेनर की उपलब्धता और लागत में सुधार से बंदरगाह-आधारित व्यापार और रसद दक्षता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है → इस्पात और इंजीनियरिंग क्षेत्र की पिछड़ी-आगे की कड़ियाँ सक्रिय होकर रोज़गार और औद्योगिक आधार का विस्तार करती हैं
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 77 भारत सरकार के कार्य-संचालन से संबंधित है और राष्ट्रपति सरकारी कार्य के आवंटन हेतु नियम बना सकते हैं।
2. मंत्रिमंडल समितियों (Cabinet Committees) का गठन लोकसभा अध्यक्ष की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
3. अनुच्छेद 74 के अंतर्गत प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को उनके कार्यों के संपादन में सहायता और परामर्श देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 77 भारत सरकार के कार्य-संचालन से संबंधित है और राष्ट्रपति कार्य-आवंटन के लिए नियम बनाते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि मंत्रिमंडल समितियों का गठन प्रधानमंत्री करते हैं, लोकसभा अध्यक्ष की सलाह पर राष्ट्रपति नहीं। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सहायता और परामर्श देती है। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. अभिकथन (A): ISO मानकों के अनुरूप एकरूप आकार वाले कंटेनरों से जहाज़, रेल और सड़क परिवहन के बीच माल का अंतरण (इंटरमॉडल परिवहन) सरल होता है।
कारण (R): ISO 668 श्रृंखला 1 के फ्रेट कंटेनरों की बाहरी माप-सीमाएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — मानकीकृत माप के कारण कंटेनर विभिन्न परिवहन माध्यमों पर बिना माल उतारे-चढ़ाए चल सकते हैं, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है। ISO 668 श्रृंखला 1 फ्रेट कंटेनरों के आयाम का अंतरराष्ट्रीय मानक है।
Q3. उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
A. यह योजना उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र, निश्चित पूंजी अनुदान देती है।
B. इसमें प्रोत्साहन आधार वर्ष की तुलना में बढ़ी हुई बिक्री (incremental sales) पर दिया जाता है।
C. यह केवल कृषि क्षेत्र के लिए लागू होती है।
D. इसे लागू करने के लिए राज्य विधानमंडल का अधिनियम अनिवार्य है।
- A
- B
- C
- D
उत्तर: B — PLI योजनाएँ आधार वर्ष की तुलना में बढ़ी हुई बिक्री या उत्पादन पर प्रोत्साहन देती हैं, इसलिए विकल्प B सही है। यह योजना विनिर्माण क्षेत्रों के लिए है, कृषि के लिए नहीं, और इसे केंद्र सरकार की कार्यकारी स्वीकृति से लागू किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कंटेनर जैसे मानकीकृत औद्योगिक उत्पादों का घरेलू विनिर्माण भारत की लॉजिस्टिक्स लागत और आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता के लिए निर्णायक है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि ऐसे प्रोत्साहन-आधारित हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अंतर्गत किन सीमाओं में रहकर ही प्रभावी हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: कंटेनर परिवहन की रीढ़ है और भारत की समुद्री व्यापार-निर्भरता के संदर्भ में उसकी उपलब्धता सीधे निर्यात-लागत को प्रभावित करती है। कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना को हाल के मंत्रिमंडल निर्णय के रूप में रखें, और अनुच्छेद 77 तथा कार्य-संचालन नियम, 1961 के अंतर्गत निर्णय-प्रक्रिया का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. तकनीकी आधार: ISO 668 श्रृंखला 1 फ्रेट कंटेनरों का मानकीकरण; मानकीकरण से इंटरमॉडल परिवहन, बर्थिंग और पोर्ट-टर्नअराउंड में सुधार; स्टील और अन्य इनपुट की लागत तथा तकनीकी क्षमता की भूमिका।
3. पक्ष में तर्क: आयात निर्भरता में कमी, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) और पीएम गति शक्ति (2021) के साथ तालमेल, रोजगार और MSME आपूर्ति-शृंखला में एकीकरण, आपूर्ति-शृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience) जो भू-राजनीतिक झटकों से सुरक्षा देता है।
4. विपक्ष/सीमाएँ: पूंजीगत अनुदान और प्रोत्साहन का असमान वितरण; पैमाने की अर्थव्यवस्था (economies of scale) के बिना लागत-प्रतिस्पर्धा कठिन; घरेलू निर्माण की गुणवत्ता और अनुसंधान एवं विकास (R&D) की कमी; प्रोत्साहन का प्रभाव केवल बड़े निवेशकों तक सीमित होने का खतरा।
5. अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियम: WTO का सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपाय समझौता (SCM Agreement) निर्यात-निर्भर सब्सिडी और विशिष्ट (actionable) सब्सिडी पर सीमाएँ लगाता है; घरेलू मूल्य-संवर्धन (domestic value addition) की शर्तें ‘घरेलू सामग्री’ (local content) से जुड़े विवादों को जन्म दे सकती हैं। सार्वजनिक खरीद (निर्माता को वरीयता) आदेश, 2017 का उल्लेख करें।
6. संतुलित निष्कर्ष: प्रोत्साहन को अकेले पर्याप्त न मानते हुए लॉजिस्टिक्स सुधार, बंदरगाह-आधारित अवसंरचना, कौशल विकास और मानक-निर्धारण के साथ जोड़कर देखना; प्रभाव-मूल्यांकन (impact assessment) और पारदर्शी लक्ष्य-निर्धारण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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