22 Oct विदेश मंत्री जयशंकर आज अज़रबैजान दौरे पर, द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे
✎ CICA एशिया का बहुपक्षीय विश्वास-निर्माण मंच है, जिसका सातवाँ शिखर सम्मेलन बाकू (अज़रबैजान) में हुआ; भारत–अज़रबैजान संबंधों की समीक्षा विदेश मंत्री की द्विपक्षीय यात्रा से हो रही है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (द्विपक्षीय संबंध एवं क्षेत्रीय/बहुपक्षीय मंच) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — भारतीय विदेश नीति के सिद्धांत और संवैधानिक आधार
- Prelims: CICA (Conference on Interaction and Confidence Building Measures in Asia) — एशियाई विश्वास-निर्माण मंच, SCO (Shanghai Cooperation Organisation) — बिश्केक (किर्गिज़ गणराज्य) शिखर सम्मेलन, बाकू — अज़रबैजान की राजधानी, कैस्पियन सागर — अज़रबैजान की भौगोलिक सीमा का भाग, INSTC (International North-South Transport Corridor) — बहुपक्षीय परिवहन गलियारा, वसुधैव कुटुम्बकम — महा उपनिषद् से लिया गया विचार, अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संवर्धन (राज्य के नीति-निदेशक तत्व), अनुच्छेद 253 — अंतरराष्ट्रीय संधियों और निर्णयों के क्रियान्वयन हेतु विधि-निर्माण, राजदूत के प्रत्यय-पत्र (Letters of Credence) — राजनयिक प्रक्रिया
- Essay: बहुध्रुवीय विश्व में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय मंचों की भूमिका, संपर्क (Connectivity) और क्षेत्रीय सहयोग: अवसर, चुनौतियाँ और आतंकवाद-विरोधी साझा दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: CICA एशिया का बहुपक्षीय विश्वास-निर्माण मंच है, जिसका सातवाँ शिखर सम्मेलन बाकू (अज़रबैजान) में हुआ; भारत–अज़रबैजान संबंधों की समीक्षा विदेश मंत्री की द्विपक्षीय यात्रा से हो रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) 23 अक्टूबर को अज़रबैजान की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं, जहाँ वे अपने समकक्ष के साथ वार्ता कर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे। यह यात्रा हाल की कई गतिविधियों के बाद हो रही है। 16 अक्टूबर को भारत के नए राजदूत अभय कुमार ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना प्रत्यय-पत्र सौंपा। इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बाकू में CICA के सातवें शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित किया, जिसमें भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ दृष्टिकोण और सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता के आह्वान की बात रखी गई। 1 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जिसका संदर्भ राजदूत की बैठक में भी आया।
पृष्ठभूमि
- भारत और अज़रबैजान के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए। सोवियत संघ के विघटन के बाद स्वतंत्र हुए दक्षिण काकेशस के देशों के साथ भारत ने इसी दौर में अपने संबंधों का ढाँचा खड़ा किया।
- CICA की स्थापना 1992 में कज़ाखस्तान की पहल पर हुई। इसका उद्देश्य एशिया में विश्वास-निर्माण के उपायों के माध्यम से सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देना है।
- सातवें CICA शिखर सम्मेलन के लिए अज़रबैजान ने मेज़बानी की, और इस अवसर पर भारत की ओर से सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया गया।
- प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अलीयेव की 1 सितंबर की बैठक SCO शिखर सम्मेलन के इतर हुई, जो उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने का उदाहरण है।
- राजदूत का प्रत्यय-पत्र सौंपना उनके कार्यभार ग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया है। वियना सम्मेलन, 1961 के अंतर्गत राजदूत मिशन के प्रमुख होते हैं और राज्याध्यक्ष के समक्ष प्रत्यय-पत्र प्रस्तुत करते हैं।
भारत–अज़रबैजान संबंध क्या हैं?
- अज़रबैजान दक्षिण काकेशस (South Caucasus) क्षेत्र का देश है, जिसकी राजधानी बाकू है। यह कैस्पियन सागर के पश्चिमी तट पर स्थित है।
- भारत की विदेश नीति में ऐसी द्विपक्षीय यात्राएँ प्रायः संबंधों की समीक्षा, आर्थिक व सांस्कृतिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय के लिए होती हैं।
- CICA एशिया के देशों का बहुपक्षीय मंच है, जो विश्वास-निर्माण और सहयोगात्मक सुरक्षा पर केंद्रित है।
- ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (विश्व एक परिवार है) का विचार महा उपनिषद् से लिया गया है। भारत इसे अपनी विदेश नीति के नैतिक और सांस्कृतिक आधार के रूप में प्रस्तुत करता है।
- INSTC एक बहुपक्षीय परिवहन गलियारा है, जिसमें भारत, ईरान, रूस और अज़रबैजान सहित अन्य देश सहभागी हैं। इसका उद्देश्य भारत को यूरोप व रूस से जोड़ने वाले मार्ग का विकास करना है।
- अनुच्छेद 51 के अंतर्गत राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संवर्धन का प्रयास करता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह संवैधानिक दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करता है।
- अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संसद अंतरराष्ट्रीय संधियों और निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक विधि बना सकती है। संधि-संबंधी कार्यकारी शक्ति का प्रयोग संघ की कार्यपालिका करती है (अनुच्छेद 73 के अधीन)।
- राजदूत की नियुक्ति, प्रत्यय-पत्र और मंत्री-स्तरीय यात्राएँ राजनयिक प्रक्रिया के अंग हैं, जिनका समन्वय विदेश मंत्रालय (MEA) करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| यात्रा का स्वरूप | विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister) की 23 अक्टूबर को अज़रबैजान की आधिकारिक यात्रा, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा होगी |
| राजनयिक पृष्ठभूमि | 16 अक्टूबर को भारत के राजदूत अभय कुमार ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना प्रत्यय-पत्र (Credentials) सौंपा, जिससे संबंधों को नई गति देने की प्रतिबद्धता रेखांकित हुई |
| शीर्ष-स्तरीय संवाद की निरंतरता | 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अलीयेव की भेंट हुई थी, जो इस यात्रा की पृष्ठभूमि है |
| बहुपक्षीय मंच की भूमिका | बाकू में सातवें CICA शिखर सम्मेलन में भारत के राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा रखी और सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान किया |
| सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार | दोनों देशों के बीच सहस्राब्दियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को संबंधों की स्थायी नींव के रूप में रेखांकित किया गया |
| कूटनीतिक संकेत | दक्षिण काकेशस क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण देश के साथ उच्च-स्तरीय संपर्क भारत की पश्चिम एशिया और यूरेशिया नीति के विस्तार का संकेत है |
महत्व
आर्थिक एवं ऊर्जा सुरक्षा
- अज़रबैजान हाइड्रोकार्बन (कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस) का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है, इसलिए ऊर्जा विविधीकरण की दृष्टि से यह भारत के लिए प्रासंगिक है
- कैस्पियन क्षेत्र के संसाधनों तक पहुँच भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक संभावित आयाम हो सकती है
- व्यापार और निवेश सहयोग को विस्तार देने के लिए द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों की समीक्षा उपयोगी होगी
संपर्क और परिवहन (Connectivity)
- अज़रबैजान उत्तर-दक्षिण अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारा (International North-South Transport Corridor – INSTC) के मार्ग में आता है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है
- थल-समुद्री और कैस्पियन मार्गों से माल-परिवहन की क्षमता बढ़ाने में यह देश संभावित पारगमन भागीदार बन सकता है
कूटनीतिक एवं रणनीतिक महत्व
- दक्षिण काकेशस और कैस्पियन क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को संतुलित और बहुध्रुवीय कूटनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है
- SCO और CICA जैसे बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय से भारत की सामूहिक सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी स्थिति को समर्थन मिलता है
सांस्कृतिक एवं जन-संपर्क कूटनीति
- साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध जन-से-जन संपर्क, शैक्षणिक आदान-प्रदान और पर्यटन के लिए आधार प्रदान करते हैं
- वसुधैव कुटुम्बकम् जैसी अवधारणाएँ भारत की सॉफ्ट पावर (Soft Power) की अभिव्यक्ति हैं
चुनौतियाँ
1. भौगोलिक दूरी और संपर्क की बाधाएँ
- भारत और अज़रबैजान के बीच कोई सीधी भू-सीमा नहीं है, इसलिए व्यापार के लिए तीसरे देशों के मार्गों पर निर्भरता रहती है
- INSTC के विभिन्न खंडों के निर्माण और परिचालन में समय और लागत की चुनौतियाँ बनी हुई हैं
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के पड़ोस और अन्य देशों के साथ संबंध; GS-3: आधारभूत संरचना और परिवहन
2. क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरण
- दक्षिण काकेशस में क्षेत्रीय शक्तियों के हित और गठबंधन परस्पर-संबंधित हैं, जिनमें संतुलन बनाए रखना कूटनीतिक चुनौती है
- भारत को अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को बनाए रखते हुए इन समीकरणों को संभालना होता है
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांत और क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका
3. ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता और विविधीकरण
- ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण भारत की प्राथमिकता है, परंतु नए स्रोतों से दीर्घकालिक अनुबंध और मूल्य-स्थिरता सुनिश्चित करना कठिन है
- जीवाश्म ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण भी साथ-साथ चलना चाहिए
यूपीएससी लिंक: GS-3: ऊर्जा सुरक्षा; ऊर्जा संसाधन और ऊर्जा संक्रमण
4. आतंकवाद-विरोधी सहयोग का व्यावहारिक क्रियान्वयन
- सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध बहुपक्षीय आह्वान को द्विपक्षीय सहयोग, खुफिया साझाकरण और कानूनी ढाँचे में बदलना आवश्यक है
- बहुपक्षीय घोषणाओं और वास्तविक नीतिगत परिणामों के बीच अंतर को पाटना एक चुनौती है
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद; GS-2: अंतरराष्ट्रीय संगठन और समझौते
5. व्यापार-संतुलन और आर्थिक सहयोग का विस्तार
- द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा अपेक्षाकृत सीमित है, जिससे आर्थिक संबंधों को राजनीतिक संबंधों के अनुरूप गहरा करना कठिन है
- निवेश, सूचना-प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं का पूर्ण दोहन अभी शेष है
यूपीएससी लिंक: GS-2: द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौते; GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भौगोलिक दूरी | भू-सीमा के अभाव में व्यापार और परिवहन के लिए तीसरे देशों के मार्गों पर निर्भरता |
| संपर्क परियोजनाएँ | INSTC जैसी परियोजनाओं में विलंब और लागत-वृद्धि का जोखिम |
| क्षेत्रीय संतुलन | दक्षिण काकेशस के बहुकोणीय हितों के बीच स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की कठिनाई |
| ऊर्जा सहयोग | विविधीकरण के बावजूद दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों और मूल्य-स्थिरता की अनिश्चितता |
| आतंकवाद-विरोधी सहयोग | बहुपक्षीय आह्वानों को ठोस द्विपक्षीय और संस्थागत कार्रवाई में बदलने की आवश्यकता |
| आर्थिक संबंध | व्यापार की सीमित मात्रा और राजनीतिक संबंधों की तुलना में आर्थिक जुड़ाव का अपेक्षाकृत कम स्तर |
आगे की राह
- यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग के लिए संयुक्त कार्य-समूह (Joint Working Group) गठित कर समयबद्ध कार्ययोजना तय की जाए
- INSTC के अज़रबैजान से गुजरने वाले खंडों के लिए परियोजना-प्रगति की नियमित समीक्षा और वित्तीय-तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया जाए
- ऊर्जा सहयोग को नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा-दक्षता जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाए
- आतंकवाद-विरोधी सहयोग के लिए खुफिया-साझाकरण और कानूनी पारस्परिक सहायता तंत्र को सुदृढ़ किया जाए
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक छात्रवृत्तियों और पर्यटन को बढ़ावा देकर जन-से-जन संपर्क मजबूत किया जाए
- SCO और CICA जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के समन्वय को नियमित संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए
- व्यापार-घाटे और व्यापार-बाधाओं की पहचान कर व्यापार-सुविधा उपायों पर द्विपक्षीय तकनीकी वार्ता शुरू की जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
द्विपक्षीय संबंध (Bilateral Relations) · बहुपक्षीय मंच (Multilateral Forums) · विश्वास-निर्माण उपाय (Confidence Building Measures) · एशिया में अंतःक्रिया और विश्वास-निर्माण उपायों का सम्मेलन (CICA) · वसुधैव कुटुम्बकम् (Vasudhaiva Kutumbakam) · कैस्पियन क्षेत्र (Caspian Region) · अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) · राजनयिक साख-पत्र (Letters of Credence) · अनुच्छेद 51 (Article 51) · संघ सूची की प्रविष्टि 10 (Union List Entry 10) · अनुच्छेद 253 (Article 253) · राजनयिक संबंधों पर वियना सम्मेलन, 1961 (Vienna Convention on Diplomatic Relations, 1961)
अवधारणा प्रवाह
भारत के राजदूत का प्रत्यय-पत्र सौंपा जाना (16 अक्टूबर) और द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता की पुनरावृत्ति → SCO शिखर सम्मेलन (बिश्केक, 1 सितंबर) पर प्रधानमंत्री और अज़रबैजान राष्ट्रपति की भेंट से उच्च-स्तरीय संवाद की निरंतरता → CICA के सातवें शिखर सम्मेलन (बाकू, 15 अक्टूबर) में भारत की बहुपक्षीय भागीदारी और आतंकवाद-विरोधी आह्वान → विदेश मंत्री की 23 अक्टूबर की आधिकारिक यात्रा और अज़रबैजान के समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा → ऊर्जा, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में संभावित नए समझौतों और पहलों की पहचान → सहमति-बिंदुओं का कार्यान्वयन, संयुक्त आयोगों और कार्य-समूहों के माध्यम से दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो एशिया में अंतःक्रिया और विश्वास-निर्माण उपायों के सम्मेलन (CICA) से संबंधित हैं:
1. इस मंच की संकल्पना कज़ाखस्तान की पहल पर की गई थी।
2. भारत इस मंच का सदस्य है।
3. इसका गठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव द्वारा किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि CICA की संकल्पना कज़ाखस्तान की पहल पर की गई थी। कथन 2 भी सही है, भारत इसका सदस्य है। कथन 3 गलत है, क्योंकि यह मंच किसी सुरक्षा परिषद प्रस्ताव से नहीं बना, बल्कि सदस्य देशों के बीच राजनयिक पहल से विकसित हुआ। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. कथन (A): संसद को भारत द्वारा किए गए अंतर्राष्ट्रीय संधियों और करारों को लागू करने के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है।
कारण (R): संघ सूची की प्रविष्टि 10 के अंतर्गत विदेशी कार्य तथा ऐसे सभी विषय, जो संघ को किसी विदेशी देश से संबंध में लाते हैं, संघ के विषय हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है। — अनुच्छेद 253 संसद को अंतर्राष्ट्रीय संधियों और करारों के कार्यान्वयन हेतु विधि बनाने की शक्ति देता है, इसलिए (A) सही है। संघ सूची की प्रविष्टि 10 विदेशी कार्यों को संघ का विषय बनाती है, अतः (R) भी सही है। किंतु (R) केवल संघीय विधायी क्षमता की व्याख्या करता है, अनुच्छेद 253 की विशिष्ट शक्ति की व्याख्या नहीं करता, इसलिए विकल्प (b) सही है।
Q3. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (विश्व एक परिवार है) की अवधारणा किस प्राचीन भारतीय ग्रंथ से ली गई है?
- ऋग्वेद
- महा उपनिषद
- भगवद्गीता
- अर्थशास्त्र
उत्तर: महा उपनिषद — ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उल्लेख महा उपनिषद में मिलता है। भारत की विदेश नीति में यह विचार शांति, सहयोग और साझा चुनौतियों से निपटने के दर्शन के रूप में प्रयुक्त होता है। ऋग्वेद, भगवद्गीता और अर्थशास्त्र में यह सूत्र सीधे नहीं मिलता।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत और अज़रबैजान के संबंध यह दर्शाते हैं कि द्विपक्षीय राजनय और बहुपक्षीय मंचों का परस्पर संबंध किस प्रकार विकसित हो रहा है। इस कथन के संदर्भ में भारत की विदेश नीति के संवैधानिक आधार, कार्यकारी संरचना और बहुपक्षीय सहभागिता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या ऐसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए संसदीय अनुसमर्थन आवश्यक है, और इसके व्यावहारिक निहितार्थ क्या हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर-संरचना (अपेक्षित बिंदु):
1. भूमिका: समाचार-आधार: विदेश मंत्री की अज़रबैजान यात्रा (23 अक्टूबर), भारतीय राजदूत अभय कुमार द्वारा राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को राजनयिक साख-पत्र प्रस्तुत करना (16 अक्टूबर), केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा बाकू में CICA के सातवें शिखर सम्मेलन में भागीदारी (15 अक्टूबर) और प्रधानमंत्री तथा अलीयेव की बिश्केक (SCO शिखर सम्मेलन) में भेंट।
2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 51 (अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना, राज्य नीति का निदेशक तत्व); संघ सूची की प्रविष्टि 10 (विदेशी कार्य और विदेशी देशों से संबंध संघ का विषय); अनुच्छेद 53 और 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति, जिसमें संधि-निर्माण का व्यावहारिक क्षेत्र आता है; अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संधियों के कार्यान्वयन हेतु संसदीय विधि-निर्माण।
3. कार्यकारी और राजनयिक संरचना: विदेश मंत्रालय (MEA) की भूमिका; राजदूत की नियुक्ति और राजनयिक साख-पत्र की प्रस्तुति, राजनयिक संबंधों पर वियना सम्मेलन, 1961 (विशेषकर अनुच्छेद 13 के संदर्भ में कार्य आरंभ); मंत्री स्तरीय यात्राओं का अंतर्निहित महत्व।
4. बहुपक्षीय आयाम: CICA की स्थापना की पृष्ठभूमि (कज़ाखस्तान की पहल, 1992 की संकल्पना, 1999 में प्रथम शिखर सम्मेलन); विश्वास-निर्माण उपायों की अवधारणा; SCO जैसे मंचों पर द्विपक्षीय भेंटों की भूमिका; भारत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (महा उपनिषद) दृष्टिकोण और आतंकवाद-विरोधी आह्वान।
5. कैस्पियन क्षेत्र और परिवहन: INSTC के माध्यम से कनेक्टिविटी का आयाम, ऊर्जा और व्यापार सहयोग की संभावना, और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन।
6. प्रश्न का दूसरा भाग (संसदीय अनुसमर्थन): भारत में सामान्य संधियों के लिए संसदीय अनुसमर्थन की संवैधानिक बाध्यता नहीं है, कार्यपालिका संधि करती है; पर कर-भार, नागरिक अधिकार या राज्य-सूची से संबंधित प्रावधानों या विधि-परिवर्तन हेतु संसद की विधायी भूमिका अनिवार्य हो सकती है (अनुच्छेद 253)। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और संधि-कानून की व्यावहारिक स्थिति का उल्लेख करें।
7. समालोचनात्मक मूल्यांकन और निष्कर्ष: कार्यपालिका-प्रधान राजनय की दक्षता बनाम संसदीय जवाबदेही का संतुलन; द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मंचों के अंतर्संबंध पर संतुलित और तर्कसंगत निष्कर्ष।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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