भारत ने परमाणु हथियारों को राज्य-कला का साधारण उपकरण बताने पर पाकिस्तान को UN में किया करारा जवाब

भारत ने परमाणु हथियारों को राज्य-कला का साधारण उपकरण बताने पर पाकिस्तान को UN में किया करारा जवाब

भारत ने परमाणु हथियारों को राज्य-कला का साधारण उपकरण बताने पर पाकिस्तान को UN में किया करारा जवाब

✎ भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है जो 'पहले उपयोग न करने' की नीति का पालन करता है, परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकता और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: परमाणु अप्रसार संधि (NPT), व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT), संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), निरस्त्रीकरण पर प्रथम समिति, परमाणु हथियार, राज्य शिल्प के उपकरण, आतंकवाद, आत्मरक्षा का अधिकार
  • Essay: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में परमाणु हथियारों की भूमिका और चुनौतियाँ, आतंकवाद और राज्य प्रायोजित हिंसा के विरुद्ध आत्मरक्षा का अधिकार

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है जो ‘पहले उपयोग न करने’ की नीति का पालन करता है, परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकता और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति (निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित) की बैठक में पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाने के बाद अपने ‘जवाब के अधिकार’ (Right of Reply) का प्रयोग किया। इस दौरान भारत ने कहा कि परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ (routine instruments of statecraft) के रूप में नहीं माना जाना चाहिए और भारत परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत संघर्ष नहीं चाहता, बल्कि शांति चाहता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की ‘पहले उपयोग न करने’ (No First Use – NFU) की परमाणु नीति है, जिसका अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का उपयोग केवल तभी करेगा जब उस पर परमाणु हमला किया गया हो।
  • भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि इसे भेदभावपूर्ण माना जाता है। हालांकि, भारत परमाणु अप्रसार के सिद्धांतों का पालन करता है।
  • भारत ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) पर भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन एकतरफा रूप से परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाई हुई है।
  • भारत ने हमेशा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक, सत्यापन योग्य और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत की है।
  • भारत की परमाणु क्षमताएँ रक्षात्मक प्रकृति की हैं और किसी भी राज्य के विरुद्ध निर्देशित नहीं हैं, बल्कि देश के सुरक्षा वातावरण से प्रेरित हैं।
  • भारत आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करता है और आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों तथा उसे अंजाम देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता है।

परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण पर भारत का रुख क्या है?

  • भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और उसने अपनी परमाणु नीति में संयम एवं रक्षात्मकता का प्रदर्शन किया है।
  • भारत की परमाणु नीति ‘न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध’ (Minimum Credible Deterrence) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि भारत के पास इतनी परमाणु क्षमता होनी चाहिए कि वह किसी भी परमाणु हमले का प्रभावी ढंग से जवाब दे सके।
  • भारत ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकवादी हमले का उचित जवाब देगा।
  • भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से परमाणु हथियारों के उपयोग से जुड़े जोखिमों को कम करने और वैश्विक निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने का आह्वान किया है।
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर निरस्त्रीकरण वार्ताओं को मजबूत करने और परमाणु हथियारों के अप्रसार को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया है।
  • भारत का मानना है कि राज्यों द्वारा गैर-राज्य अभिकर्ताओं (non-state actors) के भेष में बल प्रयोग करने से राज्य की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती है और भारत का आत्मरक्षा का अधिकार बरकरार है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
परमाणु अप्रसार (Nuclear Non-Proliferation) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना महत्वपूर्ण है।
राज्य शिल्प के उपकरण के रूप में परमाणु हथियार परमाणु हथियारों को सामान्य नीति उपकरण के रूप में उपयोग करने से क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है।
गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा आतंकवाद आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले राज्यों की जिम्मेदारी और आत्मरक्षा के अधिकार पर भारत का रुख।
परमाणु ब्लैकमेल भारत का स्पष्ट रुख कि वह परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा, अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है।
आत्मरक्षा का अधिकार अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी उकसावे या हमले के जवाब में आत्मरक्षा के भारत के अधिकार पर जोर।

महत्व

सामरिक महत्व

  • भारत का यह बयान परमाणु हथियारों के उपयोग और प्रसार के संबंध में उसकी सुसंगत और जिम्मेदार नीति को दर्शाता है।
  • यह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और परमाणु संघर्ष के जोखिम को कम करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर उसके स्पष्ट रुख को दर्शाता है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को परमाणु हथियारों के गैर-जिम्मेदाराना उपयोग के खतरों के प्रति सचेत करता है।
  • यह आतंकवाद के राज्य प्रायोजन के खिलाफ भारत के कड़े रुख को दोहराता है और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत राज्यों की जिम्मेदारी पर जोर देता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति (First Committee of the UN General Assembly) में निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा में भारत के सक्रिय योगदान को दर्शाता है।

सुरक्षा नीति

  • भारत की रक्षा क्षमताएं प्रकृति में रक्षात्मक हैं और किसी भी राज्य के खिलाफ निर्देशित नहीं हैं, बल्कि देश के सुरक्षा वातावरण से आकार लेती हैं।
  • भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी तीन स्पष्ट रेखाएं बताई हैं: किसी भी आतंकवादी हमले का उचित जवाब, परमाणु ब्लैकमेल के आगे न झुकना, और आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों और उसे अंजाम देने वालों के बीच कोई अंतर न करना।
  • यह भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) नीति और परमाणु हथियारों के संबंध में उसकी संयमित और जिम्मेदार मुद्रा के अनुरूप है।

चुनौतियाँ

1. परमाणु हथियारों का गैर-जिम्मेदाराना उपयोग

  • कुछ राज्यों द्वारा परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ के रूप में मानने की प्रवृत्ति से क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • यह परमाणु संघर्ष के जोखिम को बढ़ाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक संघर्षों के साथ परमाणु क्षमताएं मौजूद हैं।

2. आतंकवाद का राज्य प्रायोजन

  • गैर-राज्य अभिकर्ताओं के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देने से राज्यों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती है और यह अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
  • आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले राज्यों की जवाबदेही की कमी संकटों के दोहराव वाले पैटर्न को जन्म देती है।

3. क्षेत्रीय अस्थिरता

  • परमाणु क्षमता वाले पड़ोसी देशों के बीच तनाव से वृद्धि का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर जब ‘उप-पारंपरिक गतिविधियों’ (subconventional activity) को परमाणु छत्र के तहत अंजाम दिया जाता है।
  • संकटों का एक दोहराव वाला पैटर्न, जिसमें उकसावा, जिम्मेदारी से इनकार और फिर संयम की अपील शामिल है, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक चुनौती है।

4. परमाणु ब्लैकमेल का खतरा

  • परमाणु हथियारों का उपयोग राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के साधन के रूप में करना अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करता है और सुरक्षा वातावरण को अस्थिर करता है।
  • यह उन देशों के लिए एक गंभीर चुनौती है जो अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखना चाहते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
परमाणु हथियारों का सामान्यीकरण परमाणु हथियारों को राज्य की नीति के नियमित उपकरण के रूप में मानने से संघर्ष के बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
आतंकवाद का राज्य प्रायोजन गैर-राज्य अभिकर्ताओं के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले राज्यों की जवाबदेही की कमी अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
परमाणु ब्लैकमेल परमाणु हथियारों का उपयोग राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में करना अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करता है।
कश्मीर मुद्दा पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में जम्मू और कश्मीर का मुद्दा उठाना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है, क्योंकि यह भारत का अभिन्न अंग है।
आत्मरक्षा का अधिकार राज्यों द्वारा गैर-राज्य अभिकर्ताओं के बहाने बल प्रयोग करने से राज्य की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती, भारत का आत्मरक्षा का अधिकार अक्षुण्ण है।

आगे की राह

  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को लगातार दोहराना।
  • आतंकवाद के राज्य प्रायोजन के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने और आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने के लिए राजनयिक प्रयासों को तेज करना।
  • परमाणु हथियारों के गैर-जिम्मेदाराना उपयोग के खतरों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शिक्षित करना और परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ के रूप में मानने की प्रवृत्ति का विरोध करना।
  • क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए विश्वास-निर्माण उपायों (Confidence-Building Measures) और संवाद को बढ़ावा देना, विशेषकर परमाणु क्षमता वाले पड़ोसियों के साथ।
  • अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और किसी भी उकसावे या हमले का जवाब देने के लिए तैयार रहना, जबकि संयम और गैर-वृद्धि के सिद्धांतों का पालन करना।
  • जम्मू और कश्मीर पर भारत के रुख को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना, यह दोहराते हुए कि यह भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परमाणु हथियार · राज्य शिल्प के उपकरण · परमाणु अप्रसार · आत्मरक्षा का अधिकार · आतंकवाद · संयुक्त राष्ट्र महासभा · निरस्त्रीकरण · अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा · भारत की परमाणु नीति · सामरिक स्थिरता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}

अवधारणा प्रवाह

परमाणु हथियारों का ‘राज्य शिल्प के उपकरण’ के रूप में उपयोग  →  परमाणु ब्लैकमेल और उप-पारंपरिक गतिविधियाँ  →  आतंकवाद का राज्य प्रायोजन  →  क्षेत्रीय अस्थिरता और वृद्धि का जोखिम  →  भारत का आत्मरक्षा का अधिकार और दृढ़ प्रतिक्रिया  →  अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से संबंधित है।
2. भारत की परमाणु नीति ‘पहले उपयोग न करने’ (No First Use) के सिद्धांत पर आधारित है।
3. भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर किए हैं और उसका अनुसमर्थन किया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से संबंधित है। कथन 2 सही है। भारत की घोषित परमाणु नीति ‘पहले उपयोग न करने’ (No First Use) के सिद्धांत पर आधारित है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में इसकी समीक्षा की बात कही गई है। कथन 3 गलत है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि वह इसे भेदभावपूर्ण मानता है।

Q2. अभिकथन (A): भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
कारण (R): भारत का मानना है कि परमाणु हथियारों पर निर्भरता उप-पारंपरिक गतिविधियों के परिणामों को सीमित करने से वृद्धि का जोखिम बढ़ाती है।
सही विकल्प चुनें:

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ नहीं मानना चाहिए और ऐसी निर्भरता से वृद्धि का जोखिम बढ़ता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में परमाणु हथियारों को ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ के रूप में मानने के निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत की परमाणु नीति इस संदर्भ में किस प्रकार सामरिक स्थिरता में योगदान करती है? (15 अंक)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** ‘राज्य शिल्प के नियमित उपकरण’ के रूप में परमाणु हथियारों के उपयोग की अवधारणा को संक्षेप में परिभाषित करें और इसके खतरों को इंगित करें।
2. **निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **वृद्धि का जोखिम:** परमाणु हथियारों के ‘नियमित’ उपयोग से संघर्षों के परमाणु स्तर तक बढ़ने की संभावना।
* **अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का क्षरण:** परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और अन्य निरस्त्रीकरण प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव।
* **अस्थिरता और हथियारों की होड़:** क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सामरिक अस्थिरता और हथियारों की होड़ को बढ़ावा।
* **गैर-राज्य अभिकर्ताओं को प्रसार का जोखिम:** परमाणु सामग्री या प्रौद्योगिकी के आतंकवादियों के हाथ लगने की संभावना।
* **मानवीय और पर्यावरणीय परिणाम:** परमाणु युद्ध के विनाशकारी दीर्घकालिक प्रभाव।
3. **भारत की परमाणु नीति और सामरिक स्थिरता:**
* **’पहले उपयोग न करने’ (No First Use – NFU) का सिद्धांत:** स्पष्ट करें कि यह सिद्धांत कैसे अप्रत्याशित वृद्धि को रोकता है।
* **न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध (Minimum Credible Deterrence):** बताएं कि यह नीति केवल प्रतिरोध के लिए है, आक्रामक उद्देश्यों के लिए नहीं।
* **आत्मरक्षा का अधिकार:** भारत की नीति में आत्मरक्षा के अधिकार का महत्व, विशेष रूप से आतंकवाद के संदर्भ में।
* **गैर-परमाणु हथियार वाले राज्यों के खिलाफ उपयोग न करने की प्रतिबद्धता:** अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति भारत की जिम्मेदारी।
* **निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता:** वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए भारत का आह्वान।
4. **निष्कर्ष:** परमाणु हथियारों के गैर-जिम्मेदाराना उपयोग के खिलाफ भारत की स्थिति के महत्व पर जोर दें और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए इसके निहितार्थों को दोहराएं।

स्रोत: orissapost.com


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